पारिश्रमिक का अर्थ

By Bandey No comments
अनुक्रम
कर्मचारियों द्वारा संगठन को दी गर्इ सेवाओं के बदले में मिलने वाले अनेकों
वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रतिफलों से है। इसमें मजदूरी, वेतन भत्ते और अन्य लाभांश
सम्मिलित है जिसे एक नियोक्ता अपने कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के बदले प्रदान
करता है। भागों पारिश्रमिक को दो भागों में वगीकृत किया जा सकता है :

  • (क) आधारभूत/प्राथमिक पारिश्रमिक।
  • (ख) अनुपूरक पारिश्रमिक।

आधारभूत अथवा प्राथमिक पारिश्रमिक एक कर्मचारी को प्रतिमाह दी जाने वाली
एक निश्चित राशि होती है। इसके अन्तर्गत एक कर्मचारी को उसके द्वारा किये गये कार्य
के प्रतिफल स्वरूप मजदूरी, वेतन और भत्ते इत्यादि प्रदान करना आता है।

अनुपूरक पारिश्रमिक से अभिप्राय उस पारिश्रमिक से है जो कर्मचारियों को आरै
अधिक कार्यकुशलता से कार्य करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है। इसे
अभिपे्ररक पारिश्रमिक के नाम से भी जाना जाता है। अभिपे्ररक वित्तीय भी हो सकते हैं
और गरै -वित्तीय भी। वित्तीय अभिपे्ररकों के अन्तर्गत बोनस, विक्रय पर कमीशन अथवा
लाभ में हिस्सा जैसी योजनाएॅं आती हैं। दूसरी ओर गैर-वित्तीय अभिपे्ररकों के अन्तर्गत
पर्यवेक्षक के साथ मधुर सम्बन्ध, चुनौतीपूर्ण कार्य सोैपना, मान्यता देना इत्यादि सम्मिलित
हैं। इस प्रकार के अभिपे्ररक कर्मचारिया ें को कार्य के प्रति रूचि उत्पन्न करने में सहायक
होते है। तथा उन्हें और अधिक कार्य करने के लिए अभिपे्ररित करते हैं। ये उन्हें
कार्य-संतुष्टि भी प्रदान करते हैं।

Leave a Reply