उपभोक्ता फोरम का गठन, क्षेत्राधिकार, कार्यकाल एवं वेतन

By Bandey 4 comments
अनुक्रम

उपभोक्ता फोरम का गठन 

संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के अन्तर्गत
प्रत्येक जिले में एक उपभोक्ता फोरम का गठन करने का प्रावधान है। त्रिस्तरीय न्याय
व्यवस्था की यह प्रथम संस्था है। इस फोरम का अध्यक्ष वह व्यक्ति हो सकता है, जो
जिला जज हो या रह चुका हो। इसके अलावा इसमें दो सदस्य (एक महिला सहित) और
होंगे जो योग्य विश्वसनीय तथा प्रतिष्ठा प्राप्त होंगे और जिन्हें अर्थशास्त्र, कानून, वाणिज्य,
लेखाकर्म, उद्योग, सार्वजनिक मामलों या प्रशासन के क्षेत्र से संबंधित समस्याओं के
निराकरण का पर्याप्त अनुभव, ज्ञान तथा क्षमता होगी। ये नियुक्तियॉं राज्य सरकार द्वारा
चयन समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखकर की जाएगी।

उपभोक्ता फोरम का कार्यकाल एवं वेतन

जिला फोरम के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल या तो
पॉंच वर्ष का होगा अथवा 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो)। यदि कोई
सदस्य त्यागपत्र दे देता है तो उसके स्थान पर इसी प्रकार की योग्यता वाले दूसरे व्यक्ति
को नियुक्त किया जा सकता है। सदस्यों के वेतन या सम्मान राशि, भत्ते आदि राज्य
सरकार द्वारा निर्धारित किये जायेंगे। अन्य श्शर्तें भी राज्य सरकार निर्धारित करेंगी।

उपभोक्ता फोरम का क्षेत्राधिकार 

जिला फोरम पॉंच लाख रू. तक के दावों की सुनवाई कर
सकेगा। शिकायत वहॉं दर्ज कराई जायगी, जहॉ प्रतिवादी पक्ष वास्तव में रहता है या
व्यवसाय चलाता है अथवा लाभार्जन के लिए व्यक्तिश: कार्य करता है अथवा जहॉं वाद
उत्पन्न होता है। जिला फोरम को दीवानी न्यायावलय के सरे अधिकार रहेंगे।

शिकायत किसके द्वारा की जा सकती है?

बेचे गये या बेचे जाने वाले माल
अथवा की गई या की जाने वाली सेवा के संबंध में शिकायत जिला फोरम को के द्वारा की जा सकती है-

  1. माल अथवा सेवा का उपभोक्ता। 
  2. मान्यता प्राप्त उपभोक्ता संघ, जिसका वह उपभोक्ता सदस्य हो। 
  3. एक ही बात में अनेक उपभोक्ताओं का हित निहित हो, तो ऐसी दशा में एक या
    अधिक उपभोक्ता उन सबकी ओर से शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं। 
  4. केन्द्र या राज्य सरकार।

शिकायत प्राप्त होने पर जिला फोरम द्वारा कार्यवाही 

जेसे ही जिला फोरम
को किसी माल के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो वह शिकायत की एक प्रति
प्रतिवादी पक्ष को तीस दिन के भीतर या बढ़ाई गई (15 दिन से अधिक नहीं) अवधि में
भेजेगा। यदि प्रतिवादी पक्ष शिकायत की प्रति मिलने पर शिकायत में लगाये गये आरोपों
को मानने से इन्कार करता है अथवा निर्दिष्ट अवधि में जिला फोरम के समक्ष अपना पक्ष
नहीं रखता है या उसमें आनाकानी करता है, तो जिला फोरम निर्दिष्ट रीति से निराकरण
कर देगा। यदि शिकायत माल में किसी दोष या खराबी से संबंधित है और इसका
सत्यापन करने क े लिए उचित विश्लष्े ाण या परीक्षण जरूरी है, तो जिला फोरम ऐसे माल
का नमूना लेकर उस पर अपनी सील लगाकर पैक करके किसी सक्षम प्रयोगशाला में जॉंच
हेतु भेज देगा तथा जॉंच के संबंध में अपने निर्देश भी जारी कर देगा। प्रयोगशाला अपनी
छानबीन की रिपोर्ट 45 दिनों के भीतर जिला फोरम को दे देगी। जिला फोरम शिकायत
कर्ता या वादी पक्ष से प्रयोगशाला की जॉंच का श्शुल्क भी जमा कराने का निर्देश दे
सकता है। जॉंच की रिपोर्ट आ जाने पर जिला फोरम प्रतिवादी पक्ष को रिपोर्ट के संबंध
में लिखित में आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है। इसके बाद जिला फोरम वादी
तथा प्रतिवादी पक्ष को प्रकरण की यथार्थता के बारे में सुनवाई का उचित अवसर देगा।
जिला फोरम उपयुक्त आदेश जारी करेगा।


यदि शिकायत अन्य बात के बारे में हो या किसी सेवा के संबंध में हो तो, इसकी
एक प्रति वह प्रतिवादी पक्ष को अपना जवाब देने के लिए भेज देगा। प्रतिवादी अपना जवाब
तीस दिन के भीतर या बढ़ाई गई अवधि (15 दिन से अधिक नहीं) में देगा। यदि प्रतिवादी
पक्ष अपना जवाब निर्धारित अवधि में नहीं दते ा है या देने म ें आनाकानी करता ह ै तो जिला
फोरम इसका निराकरण करने की कार्यवाही शुरू कर देगा।

कार्यवाही के बाद आदेश जारी करना 

उपर्युक्त कार्यवाही के बाद जिला
फोरम यदि इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि शिकायत वाले माल में दोष है या सेवा
के संबंध में की गई शिकायत सही है, तो वह प्रतिवादी पक्ष को निम्न के संबंध में आदेश
जारी कर सकता है-

  1. प्रयोगशाला द्वारा बतलाई गई माल की खराबी दूर की जाए। 
  2. खराब माल के बदले उसी प्रकार का नया माल दे, जिसमें किसी प्रकार का
    दोष न हो। 
  3. शिकायतकर्ता को माल की कीमत या चुकाई गई राशि वापिस कर दें। 
  4. प्रतिवादी पक्ष की उपेक्षा के कारण उपभोक्ता को यदि कोई क्षति या चोट पहुॅंची
    हो, तो उसे इसके संबंध में क्षतिपूर्ति की राशि का भुगतान करे। 
  5. सेवा में कमी या दोष को दूर करे। 
  6. अनुचित व्यापारिक व्यवहार यसा अवरोधक व्यापारिक व्यवहार समाप्त कर दें
    या उनकी पुनरावृत्ति नहीं होने दें। 
  7. खतरनाक माल विक्रय हेतु। 
  8. बेचने के लिए पस््र तुत किया गया खतरनाक माल वापिस मॅंगवाले 
  9. पक्षकार को पयार्प् त रकम का भुगतान करे, जो उसे वहन करनी पडी़ हो।

अपील 

जिला फोरम द्वारा जारी किये गये आदेश के विरूद्ध प्रान्तीय आयोग
(राज्य आयोग) को ऐसे आदेश जारी करने की तिथि के तीस दिन के भीतर अपील की
जा सकती है। यह अपील तीस दिन के बाद भी स्वीकार की जा सकती है, यदि राज्य
आयोग को ऐसा प्रतीत हो कि निर्दिष्ट अवधि में अपील नहीं कर सकने का कोई पर्याप्त
कारण था।

4 Comments

Unknown

Feb 2, 2019, 4:05 pm Reply

श्रीमान जी मैं जहानाबाद जिले को निवासी हुं. मेरे परिवार lic मे बीमा 2004 मे पटना CAB branch से लिया था. 2008 मे मेरे बिमीत व्यक्ति को हत्या कर दिया गया जिसका सामान्य बीमा काम भुगतान किया गया लेकिन दुर्घटना बीमा का भुगतान नहीं किया है. क्लेम एक लाख रू का है .श्रीमानजी यह बताएं मैं इसका शिकायत प्परतीवादी के पटना जीलाउपभोक्ता फोरम मे करें या अपना जिला उपभोक्ता फोरम जहानाबाद मे करे.

Amit g dave Amit

Jan 1, 2019, 10:38 am Reply

RAJKOT NAGRIK BANK ME JAMIN MAKAN VAPAS DILANIKI MITING ME 35000 RS. KA FESLA THA.PAR BANK 6 MAHINE ME VISVASGHAT KAR YE BAT BHUL GAI. MERI MADAD KARE.

Unknown

Dec 12, 2018, 3:21 pm Reply

उपभोक्ता फोरम में कितने रुपए तक की राशि का दावा किया जा सकता है upbhokta forum mein kitne rupay tak ki Rashi ka Dawa Kiya Ja sakta hai

Bandey

Dec 12, 2018, 6:25 am Reply

20 लाख रुपये तक के मामलों की शिकायत डिस्ट्रिक्ट कंस्यूमर फोरम में की जाती है। 20 लाख रुपये से ज्यादा और एक करोड़ रुपये से कम के मामलों की शिकायत स्टेट कंस्यूमर फोरम में की जाती है। एक करोड़ रुपये से ज्यादा के मामलों के लिए नैशनल कंस्यूमर फोरम में शिकायत होती है।

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