एनजीओ (NGO) और सूचना का अधिकार

अनुक्रम
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 जम्मू और कश्मीर राज्य के अतिरिक्त पूरे भारत में लागू होता है। सभी लोक प्राधिकरण, चाहे वे केन्द्र सरकार के अधिकार-क्षेत्र में हों अथवा किसी राज्य सरकार के, इस अधिनियम के तहत आते हैं। यह अधिनियम प्रत्येक भारतीय नागरिक को किसी भी लोक प्राधिकरण से निर्दिश्ट तरीके से सूचना मांगने का हक देता है। जम्मू और कश्मीर राज्य के संदर्भ में राज्य सरकार ने जम्मू और कश्मीर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2004 बनाया है।

परिधि और विस्तार 

प्रारंभ की तिथि 

सूचना का अधिकार 12.10.2005 से लागू हुआ था। उद्देश्य : प्रत्येक लोक प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ाने के लिए, लोक प्राधिकरणों के नियंत्रण में सूचना तक नागरिकों की पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए, सूचना के अधिकार की एक व्यवहारिक व्यवस्था स्थापित करना इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य है।

सूचना 

धारा 2 (f) के अनुसार ‘सूचना’ का अभिप्राय किसी इलैक्ट्रनिक रूप में धारित अभिलेख, दस्तावेज, ज्ञापन, ई-मेल सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश लाग बुक, संविदा, रिपोर्ट, कागजपत्र, नमूने, माडल, आंकड़ो संबंधी सामग्री और किसी प्राइवेट निकाय से संबंधित ऐसी सूचना सहित, जिस तक तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी लोक प्राधिकारी की पहुँच हो सकती है, किसी रूप में कोई सामग्री, से है।

अभिलेख 

धारा 2 (i) में, ‘अभिलेख’ की परिभाषा में  शामिल किया गया है-
  1. कोई दस्तावेज, पाण्डुलिपि और फाइल; 
  2.  किसी दस्तावेज की कोई माइक्रोफिल्म, माइक्रोफिषे और प्रतिकृति प्रति;
  3.  ऐसी माइक्रोफिल्म में सन्निदिश्ट प्रतिबिम्ब या प्रतिबिम्बों का पुनरूत्पादन (चाहे वर्धित रूप में हो या न हो); और 
  4. किसी कम्प्यूटर द्वारा या किसी अन्य युक्ति द्वारा उत्पादित कोई सामग्री। 

सूचना के अधिकार का अर्थ 

धारा 2 (j) में ‘सूचना के अधिकार’ को इस प्रकार परिभाशित किया गया है: **(j) ‘‘सूचना का अधिकार’’ से इस अधिनियम के अधीन पहुँच योग्य सूचना का, जो किसी लोक प्राधिकारी द्वारा या उसके नियंत्रणाधीन धारित है, अधिकार अभिपेत्र है, और जिसमें निम्नलिखित का अधिकार सम्मिलित है-
  1. कृति, दस्तावेजों, अभिलेखों का निरीक्षण; 
  2. दस्तावेजों या अभिलेखों के टिप्पण, उद्धरण या प्रमाणित प्रतिलिपि लेना; 
  3.  सामग्री के प्रमाणित नमूने लेना; 
  4. डिस्केट, फ्लापी, टेप, वीडियों के रूप में या किसी अन्य इलेक्ट्रानिक रीति में या पंट्र आउट के माध्यम से सूचना को, जहाँ ऐसी सूचना किसी कम्प्यूटर या किसी अन्य यूक्ति में भण्डारित है, अभिप्राप्त करना। 

सूचना के अधिकार के लिए पात्र व्यक्ति 

अधिनियम की धारा 3, अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार प्रदान करती है। अत: कोई भी नागरिक इस कानून के अधीन पहँच योग्य सूचना का खुलासा करने के लिए एक लोक प्राधिकरण को आवेदन कर सकता है। अधिनियम के तहत अभिप्राप्य सूचना:एक लोक प्राधिकरण द्वारा धारित या नियंत्रणाधीन प्रत्येक सूचना एक नागरिक के लिए अभिप्राप्य होगी, जब तक वह सूचना खुलासा करने से विमुक्त न हो। खुलासा करने से विमुक्त सूचना: निम्नलिखित खुलासा करने से विमुक्त है1:
  1. राष्ट्रीय सुरक्षा, आदि को प्रभावित करने वाली सूचना, 
  2. न्यायालय के आदेश द्वारा वर्जित सूचना,
  3. विधान सभा का विशेषाधिकार-प्राप्त सूचना, 
  4. व्यापारिक भेद , बौद्धिक संपत्ति अधिकार, आदि 
  5. वैष्वासिक संबंध के तहत प्राप्त सूचना, 
  6. विदेशी सरकार से प्राप्त गोपनीय सूचना, 
  7. किसी व्यक्ति के जीवन या सुरक्षा को संकट में डालने वाली सूचना, 
  8. किसी अन्वेशण या अभियोजन कार्यवाही को प्रभावित करने वाली सूचना, 
  9. मंत्रीमंडल के दस्तावेज 
  10. किसी व्यक्ति की गोपनीयता में हस्तक्षेप करने वाली सूचना, 
  11. कॉपीराइट का अतिक्रमण, और 
  12. विनिर्दिश्ट आसूचना और सुरक्षा संगठनों से संबंधित सूचना। 
सूचना जो खुलासा करने से विमुक्त नहीं है : पूर्ववर्ती अनुच्छेद में वर्णित, खुलासे से विमुक्ति निम्न स्थितियों में लागू नहीं होगी:
  1. ऐसी सूचना जो संसद या किसी राज्य विधान सभा को मना नहीं की जा सकती। 
  2. जहाँ सूचना का खुलासा करने से किसी सुरक्षित हित को होने वाले नुकसान से लोकहित अधिक महत्वपूर्ण हो। 
  3. किसी घटना, बात या विषय, जो सूचना के आवेदन की तिथि से 20 वर्ष पहले घटित हुई हो, से संबद्ध सूचना, धारा 8(1)(a),(c) या (i) [अर्थात् पूर्ववर्ती अनुच्छेद के पद (1)(3) और (9)] के तहत आने वाली सूचना को छोड़कर। 
  4. दूसरी अनुसूची में विनिर्दिश्ट या किसी राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित आसूचना और सुरक्षा संगठनों के संबंध में भ्रश्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से संबंधित सूचना1। मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से संबंधित सूचना केन्द्र/राज्य सूचना आयोग (जैसी भी स्थिति हो) के अनुमोदन के बाद ही, आवेदन ही, आवेदन प्राप्ति की तिथि से 45 दिनों के भीतर, प्रदान की जाएगी। 

आंशिक रूप से विमुक्त सूचना 

यदि मांगी गई सूचना का कोई भाग खुलासे से विमुक्त हो, तो अभिलेख का केवल वह भाग उपलब्ध कराया जाएगा जिसमें खुलासे से विमुक्त सूचना न हो तथा जिसे विमुक्त सूचना वाले भाग से विवेकपूर्वक अलग किया जा सके।

सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया 

सूचना प्राप्त करने को इच्छुक व्यक्ति, लिखित रूप से या इलेक्ट्रानिक माध्यम के जरिये अंग्रेजी या हिन्दी या जिस क्षेत्र में आवेदन किया जाना हो वहाँ की राजकीय भाषा में, संबंधित लोक प्राधिकरण के लोक सूचना अधिकारी या सहायक लोक सूचना अधिकारी को आवेदन करेगा। आवेदन में आवेदक द्वारा मांगी गई सूचना के तथ्य विनिर्दिश्ट होने चाहिये तथा आवश्यक फीस संलग्न होनी चाहिये।

आवेदन प्रपत्र 

सूचना के लिए आवेदन, निर्धारित प्रपत्र (जहाँ निर्धारित किया गया हो) में किया जाना चाहिये।

आवेदन शुल्क

सूचना के लिए आवेदन के साथ, अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली लोक प्राधिकरणों के संबंध में केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा, निर्धारित शुल्क संलग्न किया जाएगा।

केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली लोक प्राधिकरणों के संबंध में, सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ 10 रू0 का शुल्क देय होगा। शुल्क नकद (पावती के विरूद्ध) या लोक प्राधिकरण के लेखा अधिकारी के नाम पर demand draft/bankers cheque/Indian Postal Order के रूप में देय होगा। परन्तु, ऐसे आवेदक जो गरीबी की रेखा से नीचे वाले व्यक्ति हैं, उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा।

आवेदन का निपटारा 

सूचना के लिए आवेदन प्राप्त होने पर, लोक सूचना अधिकारी या तो निर्धारित शुल्क के भुगतान पर सूचना प्रदान करेगा अथवा आवेदन निरस्त कर देगा। यदि आवेदन किसी पर व्यक्ति से संबंधित सूचना के लिए हो तो लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदन पर निर्णय लेने से पहले पर व्यक्ति द्वारा किये गए अभ्यावेद को ध्यान में रखा जाएगा।

आवेदन के निपटारे की समय-सीमा 

आवेदन का निपटारा जितनी जल्दी संभव हो किया जाएगा, और इसके लिए अधिकतम समय-सीमा इस प्रकार है:आवेदन प्राप्त होने की तिथि से समय-सीमा-
  1. साधारण परिस्थिति में 30 दिन। 
  2. यदि सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या उसकी स्वतंत्रता से संबंद्ध हो 48 घण्टे। 
  3. यदि आवेदन सहायक लोक सूचना अधिकारी करे किया गया हो सामान्य समय। 
  4. यदि आवेदन किसी पर व्यक्ति से संबंद्ध सूचना के लिए हो 5 दिन। 
  5. यदि आवेदन विनिर्दिश्ट आसूचना और सुरक्षा संगठनों के संबंध में मानवाधिकारों के उल्लघंन के आरोपों के विषय में सूचना के लिए हो 45 दिन।
 नोट: यदि लोक सूचना अधिकारी उपरोक्त विनिर्दिश्ट समय के भीतर आवेदन पर निर्णय देने से चूक जाता है, तो आवेदन को निरस्त माना जाएगा।

आवेदन पर अनुमति की सूचना 

यदि एक लोक सूचना अधिकारी सूचना प्रदान करने का निर्णय लेता है, तो वह आवेदक को एक सूचना भेजेगा जिसमें लिखि हों-
  1. सूचना प्रदान करने की लागत के प्रति देय शुल्क का विवरण, गणना सहित, तथा शुल्क जमा करने के लिए निवेदन; 
  2. यह तथ्य कि आवेदक, मांगे गए शुल्क या सूचना उपलब्ध कराने के तरीके के विषय में अधिकारी के निर्णय पर पुनरावलोकन की मांग कर सकता है, अपीलीय प्राधिकरण, समय-सीमा, प्रक्रिया और अन्य प्रपत्रों के विवरण सहित। 
नोट: पूर्ववर्ती अनुच्छेद में दी गई समय-सीमा की गणना के लिए, सूचना भेजने तथा शुल्क जमा करने की तिथियों के बीच की अवधि को नहीं गिना जाएगा। सूचना प्रदान करने के लिए शुल्क अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली लोक प्राधिकरणों के संबंध में केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित शुल्क का भुगतान करने पर सूचना प्रदान की जाएगी। केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली लोक प्राधिकरणों के संबंध में, आवेदक को निम्न प्रकार से शुल्क का भुगतान करना होगा :

• प्रत्येक रचित या नकल किये गए पृष्ठ के लिए :-A4/A3 माप के कागज में 2 रू0
 प्रति पृष्ठ 
• -बड़े माप के कागज में                        वास्तविक व्यय या लागत मूल्य
• नमूने या माडल के लिए                        वास्तविक लागत या मूल्य
• अभिलेखों के निरीक्षण के लिए व
• पहले घण्टे के लिए                        शून्य
• प्रत्येक अगले घण्टे (या उसके भाग के लिए)                        5 रू0
• डिसकेट या फ्लापी में प्रदान की गई सूचना के लिए 50 रू0 प्रति डिस्केट/फ्लापी
• मुद्रित रूप में प्रदान की गई सूचना के लिए प्रकाशन की नियत दर पर
• प्रकाशित सामग्री में से उद्धरण के लिए 2 रू0 प्रति पृष्ठ फोटोकापी का

नोट:
  1. जो आवेदक गरीबी की रेखा से नीचे वाले व्यक्ति है, उन्हे को शुल्क नहीं देना होगा। 
  2. यदि लोक प्राधिकरण विनिर्दिश्ट समय-सीमा के भीतर सूचना प्रदान करने से चूक जाती है तो कोई शुल्क देय नहीं होगा, इस परिस्थिति में सूचना नि:शुल्क प्रदान की जाएगी। 
  3. आवेदन का निरस्तिकरण/अस्वीकरण 
सूचना के लिए आवेदन निम्न कारणों पर निरस्त किया जा सकता है -
  1. सूचना धारा8 में विनिर्दिश्ट खुलासे से विमुक्तियों में आती हो (पूर्व अनुच्छेद ‘खुलासे से विमुक्त सूचना’ देखें) 
  2. सूचना, यदि खुलासा की गई तो, सरकार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के कापीराइट का अतिक्रमण होगा।इसके अलावा, यदि लोक सूचना अधिकारी किसी आवेदन पर विनिर्दिश्अ समय-सीमा में निण्रय देने से चूक जाता है, तो आवेदन अस्वीकृत माना जाएगा। 
यदि कोई लोक सूचना अधिकारी आवेदन अस्वीकृत करता है तो आवेदक को निम्न से सूचित करेगा। 
  1. अस्वीकरण के कारण; 
  2. अवधि जिसके भीतर ऐसे अस्वीकरण के विरूद्ध अपील की जा सकती है; और
  3. अपिल प्राधिकरण का विवरण। 

पर व्यक्ति से संबद्ध सूचना 

धारा 2 (n) के अनुसार ‘पर व्यक्ति’ से सूचना के लिए अनुरोध करने वाले नागरिक से भिन्न कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत कोई लोक प्राधिकारी भी है। अत: जब कोई व्यक्ति ऐसी सूचना के लिए आवेदन करता है जो स्वयं उससे संबद्ध नहीं है, तो वह पर व्यक्ति से संबद्ध सूचना के लिए आवेदन कर रहा है। 

पर व्यक्ति के आधार 

यह अधिनियम ‘पर व्यक्ति’ को, संबद्ध या उसके द्वारा दी गई सूचना तथा जो उसके द्वारा गोपनीय मानी गई हो, का किसी व्यक्ति के आवेदन पर खुलासा करने से पहले, सुनवाई का अधिकार प्रदान करता है। यदि कोई लोक सूचना अधिकारी किसी ऐसी सूचना के लिए आवेदन प्राप्त करता है, जो किसी पर व्यक्ति से संबद्ध हो या उसके द्वारा दी गई हो और जो उसके द्वारा गोपनीय मानी गई हो, तो वह, आवेदन प्राप्ति से 5 दिनों के भीतर, उस पर व्यक्ति को एक लिखित नोटिस जारी करेगा जिसमें उस आवेदन के बारे में तथा उक्त सूचना या अभिलेख या उसके किसी भाग के खुलासा करने की अधिकारी की मंशा के बारे में सूचित किया गया हो।1 पर व्यक्ति को यह अधिकार होगा िकवह, नोटिस प्राप्त करने की तिथि से 10 दिनों के भीतर, एक लिखित या मौखिक प्रस्तुतीकरण दे सके कि क्या उस सूचना का खुलासा किया जाए या नहीं2। और वह अधिकारी इस संदर्भ में कोई निर्णय लेते समय उस प्रस्तुतीकरण को ध्यान में रखेगा।

अधिनियम के तहत प्राधिकारी 

समुचित सरकार 

केन्द्र सरकार या केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा स्थापित नियंत्रित या वित-पोषित लोक प्राधिकरणों के संबंध में केन्द्र सरकार समुचित सरकार होगीं तथा, किसी राज्य सरकार द्वारा स्थापित, नियंत्रित या वित-पोषित लोक प्राधिकरणों के संबंध में, राजय सरकार समुचित सरकार होगी।

लोक प्राधिकरण 

सभी सरकारी विभाग, विधिक निकाय, सरकारी उपक्रम, स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (अधिकांश रूप से सरकारी स्वामित्व या नियंत्रण वाले), ‘लोक प्राधिकरण’ की परिधि में आते है।

लोक सूचना अधिकारी 

प्रत्येक लोक प्राधिकरण, अपने प्रत्येके प्रशासकीय इकाईयों या कार्यालयों के लिए जितने आवश्यक हों, लोक सूचना अधिकारी और सहायक लोक सूचना अधिकारी मनोनीत करेगी।

केन्द्रीय और राज्य सूचना आयोग

केन्द्र सरकार एक केन्द्रीय सूचना आयोग का गठन करेगी जिसका मुख्यालय दिल्ली में होगा। इसी प्रकार, प्रत्येक राज्य सरकार संबद्ध राज्य में एक राज्य सूचना आयोग का गठन करेगी।

शिकायत 

शिकायत कब की जा सकती है ?कुछ परिस्थितियों में, जहाँ अपील की व्यवसथा उपलब्ध नहीं हो, पीड़ित व्यक्ति केन्द्रीय/राज्य सूचना आयोग को शिकायत कर सकता है। एक व्यक्ति निम्न परिस्थितियों में शिकायत कर सकता है:

(a) यदि निम्न कारकणों से कोई व्यक्ति, केन्द्रीय/राज्य लोक सूचना अधिकारी को सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन करने में असमर्थ हो-
  1. यदि ऐसे किसी अधिकारी की नियुक्ति ही नहीं की गई हो, या 
  2. यदि सहायक लोक सूचना अधिकारी ने उसके सूचना के लिए आवेदन या अपील को, संबद्ध प्राधिकारी को भेजने के उद्देश्य से, स्वीकार करने से मना कर दिया हो। 
(b) यदि किसी व्यक्ति को मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने से मना कर दिया गया हो।

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