एनजीओ (NGO) : भारत सरकार की विभिन्न योजनाएं

By Bandey 11 comments
अनुक्रम
इस में हम भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की उन योजनाओं की जानकारी
प्राप्त करेगें जो कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गैर सरकारी संगठनों को अनुदान
राशि प्रदान करते हैं और जिनका मकसद् विभिन्न योजनाओं का लाभ आम जन तक
पहॅुचाना होता है जिसमें मध्यस्थ की भूमिका में गैर सरकारी संगठन रहते हैं। यहॉ हमने
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की अनेक योजनाओं की चर्चा की है परन्तु अत्यन्त
विस्तृत चर्चा सम्भव न हो सकी है। इस पर विस्तृत चर्चा हेतु आपको इन योजनाओं को
विस्तार में पढ़ना होगा परन्तु यहॉ आप इन योजनाओं एवं इनके कार्यकलापों से अवश्य
अवगत हो सकेगें।

कृषि मंत्रालय की योजनायें 

कपास समबंधी तकनीकी मिशन के मिनी-मिशन-दो के अन्तर्गत सघन कपास विकास
कार्यक्रम के उद्देश्य : (क) तकनोलॉजी के हस्तांतरण, (ख) बढ़िया बीजों की आपूर्ति
(ग) IPM , एगतिविधियों में उन्नति की पर्याप्त मात्रा में और समय पर आपूर्ति उपलब्ध
कराने के माध्यम से प्रति यूनिट क्षेत्र पैदावार बढ़ाना। कृषि और सहकारिता विभाग देश
में तेलहनों, दालों, मक्का और खजूर-तेल का उतपादन बढ़ाने के लिये ज्डव्च्-ड के
तहत केन्द्रीय प्रायोजित योजना का कार्यान्वयन कर रहा है:
;

  1.  तेलहन उत्पादन कार्यक्रम (OPP)
    ;
  2.  राष्ट्रीय दाल विकास परियोजना (NPDP)
    ;
  3.  तीव्र गति युक्त (Accelerated) मक्का विकास कार्यक्रम (AMDP)
    ;
  4.  खजूर तेल विकास कार्यक्रम (OPDP) 

दसवीं पंचवष्र्ाीय योजना में इन्हें एक केन्द्रीय प्रायोजित सघन योजना (ISOPOM) में मिला
दिया गया है।

बायोफर्टिलाइजर्स के विकास एवं उपयोग सम्बंधी राष्ट्रीय परियोजना के उद्देश्य :
बायोफर्टिलाइजर्स का उत्पादन एवं वितरण
;

  1. विभिन्न प्रकार के बायो-फर्टिलाइजर्स के मानकों का विकास तथा इसकी गुणवता
    को बेहतर बनाना
    ;
  2. बायोफर्टिलाइजर्स के कारखानों की स्थापना के लिए अनुदान देना
    ;
  3.  प्रशिक्षण एवं प्रचार 

कृषि संबंधी विस्तार सेवाओं को मजबूत बनाने के उप घटक:स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम
से कृषि विस्तार-

  1. किसान संगठनों के माध्यम से कृषि-विस्तार 
  2. स्वदेशी तकनीकी जानकारी को मजबूत बनाना 
  3. कृषि विस्तार की निगरानी और मूल्यांकन को मजबूत बनाना 

लघु-कृशक कृषि-व्यापार संघ के उद्देश्य : अलग-अलग तरह के कृषि-व्यापार को
समर्थन देकर ग्रामीण इलाकों में आय और रोजगार बढ़ाने के लिये नये से विचारों को
प्रोत्साहन देना। 

झूम खेती क्षेत्र के लिए वाटरषैट विकास परियोजना के अन्तर्गत ऋराज्य प्लान योजना के
लिए अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता के उद्देश्य:- 
  1. वाटर शैड बनाकर भूमि और जल का संरक्षण करके झूम खेती क्षेत्र के पहाड़ी
    ढ़लानों को बचाना और भूमि के क्षरण को रोकना।
  2. झूम खेती करने वालों (झूमिया परिवार ) को विकसित उत्पादक भूमि और खेती
    के सुधरे हुए उपायों को उपलब्ध कराना।
  3. घरेलू एवं भूमि आधारित गतिविधियों के माध्यम से झूम खेती करने वाले लोंगों के
    सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार करना।
  4. भूमि की क्षमता का पर्याप्त उपयोग तथा बेहतर टेकनोलॉजी उपलब्ध कराकर झूम
    खेती के दुश्प्रभावों को कम करना। 

भारत में कीटनाशक प्रबन्धन प्रयास को सुदृढ़ बनाने उन्हें आधुनिक बनाने सम्बंधी
योजना के उद्देश्य: रासायनिक कीट नाशकों के विवेकहीन और मनमाने उपयोग को
कम करने की दृश्टि से, भारत सरकार ने एकीकृत कीटनाशक प्रबन्धन प्रणाली अपनाई
है जिसमें यांत्रिकी और जैविक तरीके अपनाये गये हैं और रासायनिक कीटनाशकों का
आवश्यकतानुसार उपयोग करने पर ध्यान दिया गया है जिससे देश में पौधा संरक्षण का
उद्देश्य पूरा हो सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए देश में पर्याप्त संख्या में बायो
कंट्रोल प्रयोगशालायें स्थापित की जानी आवश्यक है। भारत सरकार ने इन
प्रयोगशालाओं को स्थापित करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों का सहयोग लेने का
निर्णय किया है और इस प्रयोजनार्थ उन्हें उपकरणों की खरीद के लिये सहायता-
अनुदान देने का भी निर्णय किया है।
उत्पादन और फसल के बाद प्रबन्धन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास:
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से उन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जायेगी जो
बागवानी उत्पादों का उच्चस्तरीय वाणिज्यिक उत्पादन करेंगे। इसमें हाई डैन्सिटि
प्लान्टेशन, हाईटैक कल्टीवेशन, वर्षा आधारित उत्पादन, फलों, सब्जियों आदि के बेहतर
बीज के लिये नस्ररी प्रबंधन, संकर बीजों का उत्पादन, आर्गेनिक फार्मिंग, बागवानी में
प्लास्टिक का उपयोग, बायोतकनीक शामिल है। इसके अलावा विभिन्न सम्बंधित क्षेत्रों में
बेहतर वैज्ञानिक प्रगति वाली परियोजनायें भी वित्तीय सहायता की पात्र होंगी। इसके
साथ-साथ वे परियोजनायें भी बोर्ड की पूंजीगत निर्देश राज सहायता की पात्र होंगी जो
उत्पादन के ढ़ाचे, फसलों की देखभाल करने, उनके परिश्करण एवं विपणन के विकास
तथा बागवानी से सम्बन्धित उद्योगों के विकास में लगी हुई हों। 

शीत भंडारों/बागवानी उत्पादों के लिये भंडारों के निर्माण/विस्तार/आधुनिकीकरण के
लिये पूंजीगत निवेष राजसहायता:
शीत भंडारों में नियंत्रित वातावरण और संशोधित
वातावरण भंडार भी शामिल हैं जो प्याज आदि के लिये मदर-स्टोरेज के रूप में काम
करते हैं। 
बागवानी को बढ़ावा देने के लिये तकनोलॉजी का विकास और इसका अन्तरण : इस
योजना में निम्नलिखित कार्यो के लिये सहायता दी जाती है: 
  1. नई तकनोलॉजी (संकल्पना ) को लागू करना। 
  2. प्रगतिशील कृशकों के दौरे
  3. बढ़ावा देने वाली और विस्तार सम्बंधी गतिविधियां
  4. भातर/विदेश से विशेषज्ञों की संवायें 
  5. तकनोलॉजी की जानकारी 
  6. सेमीनारों/प्रदर्शनियों में भाग लेना 
  7. उद्यान पंडित प्रतियोगिताएं 
  8. प्रचार और फिल्में 
  9. विदेशों में अध्ययन दौरे 
  10. तकनोलॉजी का प्रभावी अन्तरण के लिये वैज्ञानिकों को मानदेय 

बागवानी फसलों के लिये सूचना-सेवा : इस समय सभी 33 बाजार सूचना केन्द्र अपने
अपने बाजारों में बागवानी उत्पाद पहंचु ने और उनकी कीमतों के बारे में सूचना इक्कठठ् ा
कर रहे हैं और ये केन्द्र बोर्ड के गुड़गांव मुख्यालय को यह सूचना भेज रहे है। ई-मेल
और फैक्स से आने वाली सूचनायें भी एकत्रित की जाती हैं और इसका विष्लेशण किया
जाता है। इस समय सभी वाणिज्यिक और मौसमी फलों एवं सब्जियों को इस प्रक्रिया में
शामिल किया जाता है। इन सूचनाओं के आधार पर बोर्ड आगे आने वाले वर्ष के लिये
फसल उत्पादन की भविश्यवाणी करता है। 

बागवानी प्रोत्साहन सेवा : अध्ययन/सर्वेक्षण 
  1. बागवानी के विकास के लिये तकनीकी व आर्थिक सम्भाव्यता अध्ययन।
  2. बाजारों का अध्ययन। 
  3. परियोजना बनाना, उसको कार्यान्वित करना और उसका मूल्यांकन करना, आदि। 
  4. राष्ट्रीय बोर्ड द्वारा अध्ययन। 

सहायता का स्वरूप :इन अध्ययनों के लिये राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड लागत की 100:
सहायता करता है।
परम्परागत उद्योगों के पुनरूद्धार के लिये धनराशि सम्बंधी योजना के उद्देश्य : वर्ष
2005-06 से शुरूआत करके 5 वर्ष की अवधि में देश के विभिन्न भागों में परमपरागत
उद्योगों को सामूहिक विकसित करना। 

  1. परमपरागत उद्योगों को अधिकाधिक प्रतिस्पर्धा जनक बनाना ताकि उनके उत्पाद
    बाजार में लाभप्रद मूलय में अधिक बिक सकें तथा इनमें काम करने वाले
    कारीगरों और उद्यमियों को निरन्तर रोजगार प्राप्त हो सके। 
  2. स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी से उद्योग समूह की स्थानीय प्रशासन प्रणाली
    को मजबूत बनाना ताकि वे स्वयं ही विकास की पहल कर सकें। 
  3. नवीन और परमपरागत कार्यकुशलता, बेहतर तकनोलॉजी, बेहतरीन प्रक्रिया,
    बाजार की सूचना और सरकारी, गैर-सरकारी साझेदारी के नये तरीके विकसित
    करना ताकि इनका लाभ प्राप्त किया जा सकें। 

इस योजना से कारीगरों, कामगारों, मषीन बनाने वालों, कच्चा माल उपलब्ध कराने
वालों, उद्यमियों, परम्परागत उद्योगों में लगे हुये संस्थागत और निजी व्यापार विकास
सेवा उपलब्ध कराने वालों और चमड़ा तथा मिट्टी के बर्तन बनाने के उद्योग सहित
खादी, जूट और ग्राम उद्योगों के चुने हुये समूह में काम करने वालों आदि को लाभ
प्राप्त होगा। इस योजना में उन समूहों का चयन किया जाएगा जहां 500 लाभाथ्र्ाी
परिवार रहते हैं और जिनके सदस्य कारीगर छोटे-छोटे उद्यमी, कच्चे माल की सप्लाई
करने वाले व्यापारी सेवा उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति आदि हों। 

नोडल ऐजेंसी: इस योजना के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग और जूट बोर्ड को
नोडल एजेन्सी के रूप में नामित किया जायेगा। फिर ये एजेन्सियां कार्यान्वयन एजेंसियों
( IA ) का चयन करेंगी। नोडल एजेंसी चुनी गई कार्यान्वयन एजेंसियों को धनराशि
वितरण के लिये और योजना की निगरानी के लिए जिम्मेदारी दें। 
कार्यान्वित ऐजेंसियां : वे गैर-सरकारी संगठन केन्द्र और राज्य सरकार की संस्थायें
तथा अर्ध-सरकारी संस्थायें 
ग्राम उद्योग समूह को बढ़ावा देने के कार्यक्रम ग्रामीण उद्योग सेवा केन्द्र उद्देश्य :
इसका उद्देश्य समूह में खादी और ग्रामोद्योग गतिविधियों में पिछड़े-अगड़े सम्पर्क
उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण समूहों को सुदृढ़ बनाने के लिये कच्चे माल सम्बन्धी
सहायता देना, कार्य कुशलता का स्तर बढ़ावा, प्रशिक्षण, क्वालिटी कंट्रोल, जाँच सुविधायें
आदि उपलब्ध कराना है। 
प्रधान मंत्री रोजगार योजना : आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के शिक्षित युवाओं को
स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिये 2 अक्तूबर 1993 को यह योजना शुरू की गई थी।
इस योजना का उद्देश्य उद्योग, सेवा और व्यापार क्षेत्र में स्वरोजगार उद्यम स्थापित
करने के लिये पात्र युवकों को सहायता प्रदान करना है। यह योजना शहरी और ग्रामीण
क्षेत्र दोनों के लिये है। 
इस योजना के अन्तर्गत पात्र युवकों की आयु, शैक्षिक योग्यता, पारिवारिक आय तथा
उनके निवास स्थान आदि को ध्यान में रखते हुये सहायता दी जाती है। उद्योग क्षेत्र में
5 लाख रू तक की कोई परियोजना चलाने के लिये कोलेटरल की आवश्यकता होगी।
धनराशि की वापसी सामान्य ब्याजदर के आधार पर 3 से 7 वर्ष की अवधि में दी
जायेगी। महिलाओं सहित कमजोर वगांर् े को पा्र थमिकता दी जायेगी। इस योजना में (SC/ST ) के लाभार्थियों की संख्या 22.5: तथा अन्य पिछड़ा वर्ग की संख्या 27: से
कम नहीं होनी चाहिये। प्रत्येक ऋण प्राप्त उद्यमी को समुचित प्रशिक्षण दिया जायेगा।
ग्राम पंचायतों जैसी संस्थाओं को सम्बंधित क्षेत्र में स्थित उम्मीदवारों को चुनने और
उनकी सिफारिश करने का अधिकार होगा ताकि सही व्यक्ति को ऋण प्राप्त हो सके
और ऋण वसूली भी समुचित रूप् से हो सके। बैंक ों के साथ-साथ जिला उद्योग केन्द्र
और उद्योग निदेशालय इस योजना के कार्यान्वयन के लिये मुख्य रूप से जिम्मेदार
होंगे। 
ग्रामीण रोजगार सृजन कार्य : मई 1994 में प्रस्तुत की गई उच्चाधिकार प्राप्त समिति की
सिफारिषों के आधार पर खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के 1 अप्रैल 1995 से ( KVI )
क्षेत्र में 20 लाख रोजगार उत्पन्न कराने के लिये इस योजना की शुरूआत की थी। 
उद्देश्य : 
  1. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना, 
  2. ग्रामीण बेरोजगार युवकों में उद्यमीय क्षमता और दृश्टिकोण विकसित करना, 
  3. ग्रामीण औद्योगीकरण का लक्ष्य प्राप्त करना, 
  4. ग्रामीण उद्योगों के लिये अधिकाधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिये वित्तीय
    संस्थाओं की भागीदारी को सुलभ बनाना। 

उपभोक्ता सभा : यह योजना 2002 में प्रारम्भ की गई थी। इसके अनुसार सरकार से
मान्यता प्राप्त बोर्डो/विश्वविद्यालयों से सम्बद्ध प्रत्येक मिडिल/हाई/हायर सेकेन्ड्री
स्कूल/कालेज में एक उपभोक्ता क्लब स्थापित किया जायेगा। इस योजना को 1.4.
2004 से विकेन्द्रीकृत करके राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों को सांपै दिया गया
है। इस योजना के अधीन प्रत्येक उपभोक्ता क्लब का 10,000रू का अनुदान दिया जा
सकता है। सभी इच्छुक गैर-सरकारी संगठन ( छळव्ेध्टण्ब्ण्व्े ) अपने-अपने
राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता कल्याण विभाग में
तैनात नोडल अधिकारी को आवेदन दे सकेंगे। 

उपभोक्ता संरक्षण और उपभोक्ता कल्याण में अनुसंधान संस्थाओं/विश्वविद्यालयों/
कालेजों के सहयोग को बढ़ावा देने की योजना
उद्देश्य : –
  1. उपभोक्ता कल्याण के क्षेत्र में अनुसंधान एवं मूल्यांकन अध्ययन प्रायोजित करना। 
  2. उपभोक्ताओं की व्यवहारिक समस्याओं का पता लगाना।
  3. उपभोक्ताओ के सामने आने वाली व्यवहारिक समस्याओं का हल उपलब्ध
    कराना। 
  4. उपभोक्ताओं के संरक्षण एवंकल्याण हेतु नीति/कार्यक्रम/योजना बनाने के लिये
    अपेक्षित जानकारी उपलब्ध कराना।
  5. अनुसंधान और मूल्यांकन अध्ययनों के परिणामों तथा अन्य संबंधित साहित्य के
    प्रकाशन के लिये सहायता उपलब्ध कराना।
  6. उपभोक्ताओं से सम्बंधित मामलों पर सेमीनारों/कार्यशालाओं/सम्मेलनों को
    प्रायोजित करना तथा इनके लिये सहायता मंजूर करना। 

ग्रामीण अनाज बैंक योजना उद्देश्य : इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा
अथवा कमी वाले मौसम के दौरान होने वाली भूखमरी से सुरक्षा प्रदान करना है। 

मुख्य विशेषतायें : 
  1. अनाज बैंक ों को जैसा कि बाढ़ बहुल, गर्म और सर्द रेगिस्तानी, आदिवासी एवं
    दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित किया जाना है। ग्रामों में अनाज की कमी वाले
    क्षेत्रों में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले सभी इच्छुक परिवारों को इसमें
    शामिल किया जायेगा।
  2. ग्राम पंचायतें/ग्राम सभा अथवा राज्य सरकारों द्वारा अनुमोदित गैर-सरकारी
    संगठन इन बैंक ों का संचालन करने के पात्र होंगे। ऐसी प्रत्येक कार्यकारी समिति
    में एक महिला सदस्य अवश्य रहेगी। 

घटक:एक अनाज बैंक को तैयार करने की अनुमानित लागत 60,000 रूपये है।
छात्रावासों और कल्याणकारी संस्थाओं को अनाज भेजने की योजना:
छात्रावासों/कल्याण संस्थाओं अर्थात् ऐसे गैर-सरकारी संगठन/धर्मार्थ संस्थाओं, जो
बेघर लोगों की सहायता करती है की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये राज्यों
आदि को “ गरीबी रेखा के नीचे” के अन्तर्गत आवंटित कोटे से 5: और अधिक अनाज
दिया जाता है। यह योजना 2002-03 में शुरू की गई थी। 

भवन निर्माण और उपकरणों के लिये सांस्कृत व स्वैच्छिक संस्थानों को दी जाने वाली
वित्तीय सहायता की योजना के उद्देश्य :
भवन निर्माण और उपकरणों को खरीदने के
लिये अनुदान उन सांस्कृतिक संस्थाओं को देना जो कि डांस, ड्रामा, थियेटर, संगीत,
ललित कला जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। 
बौद्ध और तिब्बती संस्कृति एवं कला के संरक्षण के लिये वित्तीय सहायता योजना के
उद्देश्य :
इस योजना का उद्देश्य बौद्ध/तिब्बती संस्कृति और परम्पराओं को बढ़ावा
देने और इसके वैज्ञानिक विकास में लगे हुये मोनास्ट्रीज सहित स्वैच्छिक बौद्ध/तिब्बती
संगठनों को तथा सम्बंधित क्षेत्रों में अनुसंधान कार्यक्रमों के लिये वित्तीय सहायता प्रदान
करना है। 
हिमालय की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और विकास की योजना के उद्देश्य : इस
योजना का उद्देश्य हिमालय की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देना इसका संरक्षण
करना और इसको सुरक्षित करना हैं, जिसके लिये संस्थाओं एवं स्वैच्छिक संगठनों को
वित्तीय सहायता उपलबध कराई जायेगी। इस योजना में निमनलिखित कार्य शामिल
हैं:- 
  1. सांस्कृतिक धरोहर के सभी पहलुओं का अध्ययन एवं अनुसंधान। 
  2. लोक नृत्य, संगीत, नृत्य एवं साहित्य सहित सांस्कृतिक कला के दस्तावेज तैयार
    करना और कलात्मक वस्तुओं का संग्रहण करना। 
  3. कला और संस्कृति के कार्यक्रम के माध्यम से प्रसार।
  4. लोक कला और परमपरागत कलाओं में प्रशिक्षण। 
  5. संग्रहालयों एवं पुस्तकालयों की स्थापना में सहायता देना। 

आदिवासी/लोककला और संस्कृति के प्रचार/प्रसार और बढ़ावा देने के लिए वित्तीय
सहायता योजना के उद्देश्य : इस योजना के उद्देश्य इस प्रकार हैं:- 

  1. आदिवासियों को अपनी-अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों, जैसे कि उत्सवों का
    आयोजन आदि को चलाने का अवसर प्रदान करना और उनकी कला और शिल्प का
    संग्रह एवं संरक्षण करना ताकि यह निस्तर चलता रहे। 
  2. ऐसी कलात्मक और शिल्पकारी के दस्तावेज तैयार करना, अनुसंधान एवं
    सर्वेक्षण को बढ़ावा देना, विशेष रूप से उनकी फोटोग्राफिक रेकार्ड तैयार करना जिससे
    कि तीव्र विकास के परिणामस्वरूप लुप्त होती हुई ग्रामीण भारत की विरासत को
    संजोया जा सके। 
  3. सम्बंधित राज्य सरकारों की शैक्षिक प्राधिकारियों को उन परियोजनाओं का
    पता लगाने में सहायता देना जो आदिवासी और ग्रामीण लागों की सांस्कृतिक परम्पराओं
    को प्रोत्साहित करने में सहायक हों। 
  4. आदिवासी/ग्रामीण संस्कृति के महत्व की जानकारी प्रदान करना खासकर
    शहरी इलाके के लोगों में, ताकि उन्हें भी आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं की
    जानकारी हो सके और वे इसके महत्व को भी समझ सकें 
  5. अन्य सभी साधनों से आदिवासी कला और शिल्प तथा आदिवासी संस्कृति
    के अन्य पहलुओं के संरक्षण और विकास को बढ़ावा देना।
  6. क्षेत्रीय और स्थानीय संग्रहालों के प्रोत्साहन हेतु और इन्हें सुदृढ़ बनाने के लिये 

वित्तीय सहायता योजना के उद्देश्य : इस योजना का उद्देश्य क्षेत्रीय, राज्य और
स्थानीय स्तर पर व्यवसायिक रूप में संग्रहालयों की स्थापना और उनके आधुनिकीकरण
को बढ़ावा देना है। इस योजना के अन्तर्गत सोसाइट/पंजीकरण
संचार एवं सूचना प्रौघोगिकी मंत्रालय की योजनाओं के अन्तर्गत पात्र संस्थाओं एवं
उनसे सम्बन्धित प्रमुख शर्ते आती है। 

  1. उपभोक्ता मामलों , खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की योजनाएं
    उपभोक्ता मामलो का विभाग इसके अन्तर्गत उपभोक्ता कल्याण निधि , आर्थिक
    सहयोग की योजनाए व प्रोजेक्ट, उपभोक्ता सभा, संरक्षण , कल्याण मे अनुसंधान
    संस्थाओं / विश्वविद्यालयों कलेजो के सहयोग को बढावा देने की येाजना 
  2. संस्कृत मंत्रालय की योजनाए 
  3. पर्यावरण और वन मंत्रालय की योजनाएं 
  4. खाद्य परिश्करण उद्योग मंत्रालय की योजनाए मदर एन0 जी0 ओ0 योजना
  5. सर्विस एन0जी0 ओ0 योजना 
  6. स्ट्ररीलाइजिंग बेड्स योजना 
  7. स्वास्थय और परिवार कल्याण मंत्रालय की योजना
  8. इसके अन्तर्गत कुश्ठ रोग सर्वेक्षण, शिक्षा और उपचार , राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण
    कार्यक्रम 
  9. राष्ट्रीय कैसर निंयत्रण कार्यक्रम 
  10. पोलियो पीड़ित बच्चों की Currective Surgery और पुर्नवास के लिये 
  11. वित्तीय सहायता की योजना 
  12. राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के कार्यक्रम 
  13. आयुश विभाग की योजनाएं 
  14. राष्ट्रीय चिकित्सा पौधा बोर्ड 
  15. गृह मंत्रालय की योजनाएं 
  16.  प्रयोजक अनुसंधान के लिये राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के दिशानिर्देष 
  17. साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए राष्ट्रीय फाउन्डेशन की योजना 
  18. आवास एवं शहरी निर्धनता उन्मूलन की योजनाएं 
  19. शहरी बेघर लोगों के लिए रैन बसेरा योजना

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की योजनाएं 

प्राथमिक शिक्षा और साक्षरता विभाग 

  1. शिक्षा गारंटी योजना और वैकल्पिक तथा परिवर्तित शिक्षा 
  2. औपचारिक शिक्षा सहित प्रारम्भिक स्तर पर शिक्षा के लिए प्रयोगात्मक तथा
    नवीन कार्यक्रम हेतु सहायता की योजना 
  3. प्राथमिक शिक्षा हेतु दोपहर के भोजन की योजना
  4. वयस्क शिक्षा -राष्ट्रीय साक्षरता मिशन 
  5. निरक्षरता उन्मूलन की परियोजनाओं के लिएं अनुदान 
  6. संसाधन केन्द्रों को अनुदान 
  7. जन शिक्षण संस्थान-जिला भंडार 
  8. महिला समाख्या के अधीन स्वैच्छिक संस्थाओं को वित्तीय सहायता योजना 
  9. यूनेस्को के साथ भारतीय राष्ट्रीय सहयोग आयोग द्वारा वित्तीय सहायता की 
  10. योजना भाषाओं का विकास 
  11. दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा सहित स्वैच्छिक संगठनों को हिन्दी के 
  12. प्रोत्साहन तथा पुस्तकों के प्रकाशन और खरीद के लिए वित्तीय सहायता 

माध्यमिक शिक्षा विभाग 

  1. माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों की छात्राओं के लिए बोर्डिंग और 
  2. छात्रावास सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने की योजना 

उच्चतर शिक्षा विभाग

  1.  स्कूलों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी योजना
  2. स्कूलों में स्तरीय सुधार योजना 
  3. स्कूलों में विज्ञान शिक्षा का सुधार 
  4. स्कूली बच्चों को पर्यावरण सम्बन्धी शिक्षा 
  5. स्कूलों में योग प्रोत्साहन योजना 
  6. अपंग बच्चों के लिए एकीकृत शिक्षा 
  7. शिक्षा द्वारा मानव मूल्यों को सुदृढ़ बनाने के लिए वित्तीय सहायता

श्रम मंत्रालय की योजनाएं 

बाल मजदूरों और महिला मजदूरों के लाभ के लिए कार्यवाही कार्यक्रम/परियोजनाएं
चलाने के लिए स्वैच्छिक और गैर-सरकारी संगठनों को वित्तीय सहायता के लिए
सहायता अनुदान योजना।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालयों की योजनाएं 

अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवारों के लिए नि: शुल्क कोचिंग व सम्बद्ध योजनाओं की
व्यवस्थाएं की जाती हैं।

नवीन और नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय की योजनाएं 

  1. सौर ऊर्जा कार्यक्रम 
  2. सोलर फोटोवेलटेक कार्यक्रम 
  3. बायोमास विकास कार्यक्रम 
  4. बायोमास गैसीफायर कार्यक्रम 
  5. ग्राम ऊर्जा सुरक्षा संबंधी परीक्षण परियोजनाएं 
  6. राष्ट्रीय बायोगैस और खाद प्रबंध कार्यक्रम

समुद्रपारीय भारतीय मामलों के मंत्रालयों की योजनाएं 

इसके अन्र्तगत देश से बाहर रहने वाले भारतीय पतियों द्वारा त्याग दी गई महिलाओं के
कल्याण की योजना होती है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजनायें 

भूमि विकास :-

  1. बंजर भूमि विकास योजनायें 
  2. एकीकृत बंजर भूमि विकास परियोजना 
  3. गैर वन क्षेत्रों में बंजर भूमि विकास के लिए प्रौद्योगिकी की विकास एवं प्रशिक्षण
    योजना 
  4. गैर -वन बंजर भूमि के विकास की निवेष प्रोत्साहन योजना
  5. सूखाग्रस्त क्षेत्र कार्यक्रम और रेगिस्तान विकास कार्यक्रम 
  6. सूखाग्रस्त क्षेत्र कार्यक्रम 
  7. रेगिस्तान विकास कार्यक्रम 

ग्रामीण विकास विभाग:-

  1. स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्व-रोजगार योजना 
  2. विशेष परियोजनाएं 

पेय जल आपूर्ति विभाग:-

  1. केन्द्रीय ग्रामीण सफाई कार्यक्रम

जन कार्यवाही एवं प्रौद्योगिकी विकास परिषद:-

  1. लाभाथ्र्ाी संगठन योजना 
  2. ग्रामीण विकास में स्वैच्छिक कार्यवाही का प्रोत्साहन योजना 
  3. ग्रामीण प्रौद्योगिकी विकास योजना 
  4. नोडल एन0 जी0 ओ0 योजना 
  5. ग्रामीण क्षेत्रों में युवा व्यावसायिक तैयार करने के लिए वित्तीय सहायता योजना
    (युवा ज्योति) 
  6. ग्रामीण विकास आन्दोलन 
  7. ग्राम ज्ञान केन्द्र योजना 
  8. ग्राम श्री मेला /खरीदार विक्रेता बैठकें 
  9. CAPART द्वारा सहायता के लिए प्रस्तावित कार्यशालाओं
    /गोश्ठियों/सम्मेलनों के लिए दिशा निर्देश

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की योजनायें 

जन कार्यवाही और ग्रामीण प्रौद्योगिकी विकास परिषद:-

  1. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उद्यमी विकास परियोजना 
  2. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से माध्यम से क्षमता विकास प्रशिक्षण
  3. प्राकृतिक संसाधन आंकडा प्रबंधन प्रणाली 
  4. भूकंप विज्ञान कार्यक्रम 
  5. राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कार्यक्रम 
  6. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग 
  7. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद 
  8. बायोटैक्नोलॉजी विभाग सामाजिक उत्थान के लिए बायोटैक आधरित कार्यक्रम 

विज्ञाान एवं सोसाइटी विभाग:- 

  1. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा ग्रामीण क्षेत्र का विकास 
  2.  गरीब जनसंख्या के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल 
  3. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महिलाओं के लिए 
  4. विशिष्ट घटक योजना 
  5. जनजाति उप योजना 
  6. युवा वैज्ञानिक और व्यवसायिकों के लिए योजना

जहाजरानी , सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की योजनायें 

सड़क परिवहन और राजमार्ग विभाग :-

  1. सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के अन्तर्गत वित्तीय सहायता के अशंदान के लिए मार्ग
    दर्शन 
  2. वाहन चालन और अनुसंधान के लिए प्रशिक्षण केन्द्र बनाने के लिए प्रस्ताव पर
    मार्ग दर्शन 
  3. भारी वाहन चालकों के लिए दो दिन का प्रशिक्षण- वित्तीय सहायता के लिए
    मार्ग दर्शन 
  4. सड़क सुरक्षा कायर्क ्रमों के अन्तर्गत राजमागांर् े पर होने वाली दघ्ु ार्ट नाओं के
    शिकार लोगों की सहायता हेतु क्रेन्स और एम्बूलेंस के लिए सहायता योजना

लघु उद्योग मंत्रालय की योजनायें 

  1. महिलाओं के लिए व्यापार संबन्धित सहायता और विकास योजना
  2. माइक्रो फाइनांस कार्यक्रम की योजना 
  3. अन्तर्राश्ट्रीय सहयोग योजना

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की योजनायें 

  1. गैर सरकारी संगठन / स्वैच्छिक संगठनों की सहायता करने के दिशानिर्देश 
  2. सामाजिक सुरक्षा की सामान्य योजना 
  3. वृद्धों के लिये योजना 
  4. वृद्ध व्यक्तियों के लिये स्वीकृत योजना 
  5. ओल्ड एज होम्स / बहु सेवा केन्द्रों के निर्माण के लिए पंचायती राज संस्थाओं
    /स्वैच्छिक संगठनों / स्व-सहायता समूहों की सहायता योजना 
  6.  नशे के आदी व्यक्तियों का उपचार और उनका पुनर्वास 
  7. अपंग व्यक्तियों के लिए कल्याण योजनायें 
  8. उपकरणों की खरीद /फिटिंग के लिए अपंग व्यक्तियों के लिए सहायता योजना 
  9. अपंग व्यक्तियों के लिए स्वैच्छिक कार्यवाही को प्रोत्साहन देने की योजना 
  10. अनुसूचित जातियों के लड़के,लड़कियों के विकास हेतु योजना जिसके अन्तर्गत
    छात्रावास,कोचिंग एवं अनुसंधान और प्रशिक्षण की योजना 
  11. पिछड़े वर्गों के कल्याण की योजनायें

जनजाति मामलों के मंत्रालयों की योजनायें 

  1. जनजातियों के भले के लिए काम करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान देने
    की योजना 
  2. कम पढायी वाले क्षेत्रों में शिक्षा समूह योजना 
  3. व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र

जल संसाधन मंत्रालयों की योजनायें 

इस मंत्रालय द्वारा जल संसाधनों के लिए अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों हेतु अनुदान
दिया जाता है।

महिला और बाल विकास मंत्रालय की योजनायें 

  1. एन0 जी0 ओ0 के लिए राष्ट्रीय महिला कोष ऋण योजनायें
  2. स्व- सहायता समूह(SHGs) योजना 
  3. स्वाधार-कठिन परिस्थितियों से ग्रस्त महिलाओं के लिए योजना 
  4. रोजगार व आय सृजन यूनिट(NORAD)की स्थापना
  5. स्वावलम्बन (NORAD)योजना 
  6. महिलाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम के लिए सहायता(STEP)
  7. स्वंयसिद्ध (IWEP)
  8. महिलाओं एवं लड़कियों के लिए अल्प आवास गृह(Short Stay Home) 
  9. कार्यकारी माताओं के लिए राजीव गॉधी राष्ट्रीय शिशु सदन(के्रच) योजना 
  10. अनाथ बच्चों के लिए एकीकृत योजना 
  11. अनुसंधान, प्रकाशन एवं निगरानी के लिए सहायता अनुदान

युवा मामलों एवं खेल मंत्रालयों की योजनायें 

  1. युवा क्लबों के लिए सहायता 
  2. युवा कार्य और प्रशिक्षण के प्रोत्साहन के लिए वित्तीय सहायता 
  3. राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन 
  4. ग्रामीण खेल कार्यक्रम 
  5. राज्य खेल अकादमी योजना 

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक की योजनायें 

  1. ग्रामीण क्षेत्र में नवीनता लाने वाला कोष 
  2. मारजिन मनी के लिए आसान किस्तों पर उधार की योजना 
  3. ग्रामीण घर निर्माण कार्यों के लिए रिफाइनांस 
  4. महिला विकास 
  5. क्षेत्र कार्यक्रम द्वारा महिला विकास 
  6. ग्रामीण उद्यमता विकास कार्यक्रम
  7.  पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रोत्साहन सहायता योजना

11 Comments

Subhash Chandra Patel

Mar 3, 2019, 8:10 pm Reply

Ji Sir koi janab to dijiye

Subhash Chandra Patel

Mar 3, 2019, 8:09 pm Reply

Ji Sir koi janab to dijiye

Subhash Chandra Patel

Mar 3, 2019, 8:06 pm Reply

Ji ha mera ngo hai manav sewa avam samajik sansthan

Subhash Chandra Patel

Mar 3, 2019, 8:05 pm Reply

Ji ha mera ngo hai manav sewa avam samajik sansthan

Unknown

Feb 2, 2019, 8:47 am Reply

एन जी ओ द्वारा कृषि से संबंधित किस तरह का काम किया जा सकता है ।

K D Maurya

Nov 11, 2018, 9:43 am Reply

अच्छी जानकारी दी है आप ने जिसके लिए आप को बहुत- बहुत धन्यवाद https://www.kisanngo.org/

pradeep

Sep 9, 2018, 6:15 am Reply

Ngo ke dvara mahilao ko rojgar dene ke liye government ka kya system h jiske madhyam se ham aur hamara foundation gaon ki mahilao ko rojgar de sake.

Subhash Chandra Patel

Sep 9, 2018, 6:03 am Reply

Sir ham kya kare jaba do pliz mi hellp

Bandey

Sep 9, 2018, 7:29 am Reply

aap ka NGO hai kya koi

Subhash Chandra Patel

Sep 9, 2018, 1:02 pm Reply

Sir ham 5 sal se mahilao bachchiyo ko nihsulk silai kamputar butipalar ka pracichan nihsulk de mahilao me swarojagar banane ka kam kar rahe hai hame sarkar se koi bhi anudan nahi mila ham kya kare aaj bhi ham 450 bachchiyo ko pracichan dene ka kam kar rahe hai meri beb.www.manavsewasociety.org hai

Nitesh Chandora

Jan 1, 2019, 2:33 pm Reply

Kaha se ho

Leave a Reply