नगर-निकाय के कार्य एवं शक्तियां

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किसी भी संगठन या संस्था के आस्तित्व का कोई औचित्य नहीं है जब तक कि उसे उसके गठन व स्वरूप के अनुरूप कार्यों व शक्तियां प्रदान नहीं की जाती। बिना कार्यों व जिम्मेदारियों के बिना वह संगठन केवल एक ढाँचा मात्र है। 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के अन्र्तगत नगर निकायों को शहरी क्षेत्रों में स्वशासन स्थापित करने हेतु विभिन्न कार्य व जिम्मेदारियां दी गई हैं। नगर निकायों से यह अपेक्षा की गई है कि वे नगर के लोगों की सहभागिता को लेते हुए अपने कार्यों का संचालन करे। नगर निकायों को पंचायतों की भाँति ही आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने का अधिकार है। नगर निकायों की सार्थकता तभी है जब वे नगर के लोगों की आशाओं व अपेक्षओं के अनुरूप कार्य करे। भारत में वर्तमान में शहरों का तीव्र गति से विकास हो रहा है। शहरों की बढ़ती हुई आबादी राज्य सरकारों व स्थानीय निकायों के लिए एक चुनौती बनती जा रही है। बढ़ती हुई आबादी के अनुरूप मूलभूत सुविधाओं के अभाव में शहर समस्याओं का केन्द्र बनते जा रहे है। ऐंसी स्थिति में नगरीय निकायों को अपने कार्यों व जिम्मेदारियों का सावधानीपूर्वक निवर्हन करना चाहिए।

संविधान के उपबन्धों के आधीन रहते हुए किसी राज्य का विधान-मण्डल, विधि द्वारा नगर-निकायों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकेगा जो उन्हें स्वायत शासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक हों। ऐसी विधि में नगर निकायों को ऐसी शर्तों के आधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं निम्नलिखित के सम्बन्ध में शक्तियां और उत्तरदायित्व न्यागत करने के लिए उपलब्ध किये जा सकेगें, अर्थात -
  1. आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना। 
  2. ऐसे कृत्यों का पालन करना और ऐसी स्कीमों (योजनाओंं) को जो उन्हें सौंपी जांए,(जिनके अन्तर्गत वे स्कीमें (योजनाओं) भी हैं जो बारहवीं अनुसूची विषयों के सम्बन्ध में हैं,) कार्यान्वित करना। 
  3. ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान करना जो उन्हें अपने को प्रदत उत्तरदायित्वों को (जिनके अन्तर्गत वे उत्तरदायित्व भी हैं जो बारहवीं अनुसूची में विषयों के सम्बन्ध में हैं) कार्यान्वित करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों। 

नगर-निकायों से संबंधित विषय 

नगर निकायों के कृत्यों से सम्बन्धित विषयों का उल्लेख संविधान की 12वीं अनुसूची में किया गया है जो  है-
  1. नगर के नियोजन सहित शहरी नियोजन। 
  2. भू-उपयोग का विनियम और भवन-निर्माण 
  3. आर्थिक व सामाजिक उन्नतयन को ध्येय से नियोजन। 
  4. सड़क एवं पुल।
  5. घरेलू उपयोग व औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए जलापूर्ति।
  6. जन स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल-प्रबन्धन एवं कूड़ा-कचरा निस्तारण। 
  7. अग्निशमन सेवाएं। 
  8. परिस्थितिकीय एवं पर्यावरण संरक्षण के ध्येय से शहरी वनीकरण। 
  9. शाररिक व मानसिक विकलांगों सहित समाज के कमजोर वर्गों का हित संरक्षण। 
  10. मलिन बस्ती सुधार एवं उन्नयन। 
  11. शहरी गरीबी निवारण। 
  12. नागरिक जन-सुविधाओं जैसे पार्क, उद्यान, और क्रीडा मैदानों की व्यवस्था करना। 
  13. सांस्कृतिक, शैक्षणिक व सौंदर्यपूर्ण विकास। 
  14. शव-गृह, कब्रिस्तान और विद्युत शव-दाह-गृह। 
  15. पशुओं के लिए पीने के पानी के तालाब और पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम। 
  16. जन्म-मृत्यु के आंकडों सहित महत्वपूर्ण सांख्यि की सूचना। 
  17. गलियों, पार्किंग स्थल और स्टापों के पथ-प्रकाश(लाईट) की सुविधाओं की व्यवस्था और जल-प्रबन्धन। 
  18. पशु वधशालाओं और चर्मशोधनालाओं का विनियमन (regulation) 

नगर-निकायों के कार्य एवं शक्तियॉं 

  1. सार्वजनिक सड़कों और स्थानों पर पीने का पानी। 
  2. सार्वजनिक सड़कों और स्थानों पर रोशनी। 
  3. नगरपालिका की सीमा का सर्वेक्षण करना और सीमा चिन्ह लगाना। 
  4. सार्वजनिक सड़कों, स्थानों और नालियों की सफाई करना, हानिकारक वनस्पति को हटाना।
  5. संतापकारी, खतरनाक या आपत्तिजनक, व्यापार, आजीविका या प्रथा का विनियमन करना। 
  6. आवारा व खतरनाक पशुओं को परिरूद्व कराना, हटाना या नष्ट करना। 
  7. लोक सुरक्षा, स्वास्थ्य या सुविधा के आधार पर सड़कों या सार्वजनिक स्थानों में अवांछनीय और अवरोध प्रक्षेप हटाना। 
  8. खतरनाक भवनों या स्थानों को सुरक्षित बनाना या हटाना। 
  9. मृतकों के निस्तारण के लिये स्थान अर्जित, अनुरक्षित, परिवर्तित और विनियमित करना । 
  10. सार्वजनिक सड़कों, पुलियों, बाजारों व वधशालाओं, शोचालयों, संड़ासों, मुत्रालयों, नालियों, जलोत्सारण, निर्माणकायांर् े तथा सीवर व्यवस्था सम्बन्धी निर्माण कार्यों का निर्माण, परिवर्तन और अनुरक्षण करना। 
  11. घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए जलापूर्ति उपलब्ध करना। 
  12. सड़क के किनारे तथा सार्वजनिक स्थानों में वृक्ष लगाना और उनका अनुरक्षण करना। 
  13. ऐसे स्थानों में, जहां वर्तमान जल सम्भरण के अप्रर्याप्त या अस्वास्थ्यप्रद होने से वहां के निवासियों के स्वास्थ्य को संकट हो, शुद्व और स्वास्थ्यप्रद जल के पर्याप्त सम्भरण की व्यवस्था करना, मनुष्यों के उपयोग के लिए प्रयुक्त होने वाले जल को प्रदूषित होने से बचाना और प्रदूषित जल के ऐसे उपयोग को रोकना। 
  14. जल सम्भरण हेतु सार्वजनिक कंअु ों को ठीक हालत में रखना उनके जल को प्रदूषित होने से बचाना तथा उसे मनुष्यों के उपयोग योग्य बनाये रखना।, 
  15. जन्म और मरण का रजिस्ट्रीकरण। 
  16. सार्वजनिक टीका लगाने की प्रणाली की स्थापना तथा उसका अनुरक्षण।
  17. सार्वजनिक चिकित्सालयों और औषधालयों की स्थापना तथा उनका अनुरक्षण या उनकी सहायता करना और सार्वजनिक चिकित्सा सम्बन्धी सहायता की व्यवस्था करना। 
  18. प्रसूति केन्द्रों, शिशु कल्याण, और जन्म नियंत्रण क्लीनिकों की स्थापना, अनुरक्षण और सहायता करना और जनसंख्या नियन्त्रण, परिवार कल्याण और छोटे परिवार के मानकों को प्रोत्साहित करना। 
  19. पशुचिकित्सालयों का अनुरक्षण करना या अनुरक्षण हेतु उन्हें सहायता देना। 
  20. प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना और उनका अनुरक्षण करना। 
  21. आग बुझाने में सहायता देना और आग लगने पर जीवन तथा सम्पत्ति की रक्षा करना। 
  22. नगरपालिका में निहित या उसके प्रबंधन में सौंपी गई सम्पत्ति की सुरक्षा करना, उसका अनुरक्षण तथा विकास करना। 
  23. शासकीय पत्रों पर तत्काल ध्यान देना और ऐसी विवरणियां, विवरण और रिपोर्ट तैयार करना जिन्हें राज्य सरकार नगर पालिका से प्रस्तुत करने की अपेक्षा करे।, 
  24. विधि द्वारा उस पर अधिरोपित किसी बाध्यता की पूर्ति करना। 
  25. चर्म-शोधनशालाओं को निनियमित करना। 
  26. पार्किंग स्थल, बस स्टाप और जन सुविधाओं का निर्माण और अनुरक्षण करना। 
  27. नगरीय वानिकी और परिस्थितिकी पहलुओं की अभिवृद्वि और पर्यावरण का संरक्षण करना। 
  28. समाज के दुर्बल वर्गों के जिनके अन्तर्गत विकलांग और मानसिक रूप से मन्द व्यक्ति हैं हितों का संरक्षण करना। 
  29. सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सौन्दर्यपरक पहलुओं की अभिवृद्वि करना। 
  30. कांजी हाउस (अवारा पषुओं को पकड़ कर जहाँ रखा जाता है) का निर्माण और अनुरक्षण करना और पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण करना। 
  31. मलिन बस्ती सुधार और उन्नयन। 
  32. नगरीय निर्धनता कम करना व नगरीय सुख-सुविधाओं, जैसे पार्क, उद्यान और खेल के मैदानों की व्यवस्था करना। 

स्वैच्छिक कार्य 

उपरोक्त बाध्यकारी कर्तव्यों के अतिरिक्त संविधान में कुछ ऐसे कर्तव्यों का भी उल्लेख है जो बाध्यकारी न होकर स्व-विवेकानुसार की श्रेणी में निम्नवत हैं-
  1. उन क्षेत्रों में, जिनमें चाहे पहले निर्माण किया गया हो या नहीं, नवीन सार्वजनिक सड़कों का विन्यास और इस प्रयोजन के लिए भूमि अर्जित करना।
  2. मास्टर-प्लान तैयार करना और उसे निस्पादित करना। 
  3. पुस्तकालय, संग्रहालय, वाचनालय, रेडियो संग्राहों केन्द्रों, कुष्ठाश्रम, अनाथालय, शिशु सदन और महिला उद्वार गृह पागलखाना हाल, कार्यालय, धर्मशाला, विश्राम-गृह, दुग्धशाला, स्नानगार, स्नानघाट, धोबियों के धुलाई-स्थल, पीने के पानी का स्त्रोत (ड्रिंकिंग फाउन्टेन), तालाब, कुआं, तथा अन्य लोकोपयोगी निर्माण कार्यों का निर्माण, उनकी स्थापना तथा उनका अनुरक्षण में अंषदान देना। 
  4. प्राथमिक स्कूलों की स्थापना और उनके अनुरक्षण से भिन्न उपायों द्वारा शैक्षिक उद्देश्यों का प्रसार करना। 
  5. जनगणना करना और ऐसी सूचना के लिये इनाम देना, जिससे जन्म-मरण के आंकड़ों का सही रजिस्ट्रीकरण सुनिश्चित हो सके। 
  6. ऐसी सूचना के लिये इनाम देना जिससे इस अधिनियम के आधीन आरोपित कर के अपवर्चन का या नगर निकाय में निहित या उसके प्रबन्ध या नियन्त्रण में सांपै ी गई सम्पत्ति को हानि पहुंचाने या उस पर अतिक्रमण करने का पता लगे। 
  7. स्थानीय विपत्ति पड़ने पर, सहायता कार्यों की स्थापना और उनका अनुरक्षण करके या अन्य प्रकार से सहायता करना।
  8. धारा-298 के शीर्षक छ: के उपशीर्षक (क) के आधीन उल्लिखित किसी व्यापार या निर्माण के कार्यान्वयन के लिये उपयुक्त स्थान प्राप्त करना या प्राप्त करने में सहायता देना। 
  9. सीवेज के निस्तारण के लिये फार्म या कारखाना स्थापित करना और उसका अनुरक्षण करना। 
  10. कूड़ा करकट की कम्पोस्ट खाद तैयार करने के लिए प्रबन्ध करना। 
  11. पर्यटक यातायात की अभिवृद्वि करना।
  12. मेले और प्रदर्शिनियां लगाना। 
  13. गृह और नगर नियोजन योजनाएं तैयार करना और उनका निष्पादन।
  14. व्यापार और उद्योग की अभिवृद्वि के लिये उपाय करना। 
  15. अपने कर्मचारियों के लिये श्रम कल्याण केन्द्र स्थापित करना और ऐसे कर्मचारियों के किसी ऐसोशियेशन संघ या क्लब की सामान्य उन्नति के लिए अनुदान अथवा ऋण देकर उसके कार्याकलापों में सहायता देना।
  16. नगर पालिका संघों को संगठित करना और उन्हें अंशदान देना। 
  17. धारा-7 में या इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों में निर्दिष्ट उपायों से भिन्न ऐसे उपाय करना, जिनसे लोक सुरक्षा, स्वास्थ्य या सुविधा में अभिवृद्वि होने की सम्भावना हो।
  18. भिक्षा-वृति पर नियंत्रण के लिये उपाय करना। 
  19. कोई ऐसा कार्य करना जिसके सम्बन्ध में व्यय राज्य सरकार द्वारा या नगरपालिका द्वारा विहित प्राधिकारी की स्वीकृति से, नगर पालिका निधि पर समुचित प्रभार घोषित किया जाए।

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