व्यावसायिक स्वास्थ्य क्या है?

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मानव मानवीय सभ्यता के प्रारम्भ से ही व्यापारिक स्वास्थ्य अड़चनों या अन्य प्रकार की समस्याओं का शिकार रहा है। यहां तक कि वास्तव में कोई भी नौकरी या व्यापार मुसीबतों से मुक्त नही है। हर वर्ष पूरी दुनिया में 1,80,000 कर्मचारी कार्य के दौरान दुर्घटना या बीमारी के शिकार होकर मृत्यु को प्राप्त होते हैं। 110 लाख लोग गम्भीर घातक चोटों के शिकार होते हैं। कुछ पिछले सालों में स्वास्थ्य जोखिम कारखानों में बहुत ही तीव्रगति से बढ़ा है यह प्रतिदिन नये-नये उद्योगों के उभरने का परिणाम है। व्यावसायिक स्वास्थ्य बचाव में मुख्य भूमिका निभाता है जैसे स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का उपचार और कर्मचारी के कार्य को समझना। 

व्यावसायिक बीमारियों के उपचार 

  1. कर्मचारी के स्वास्थ्य की देखरेख - यह स्वास्थ्य को बनाये रखने के प्रति कदम उठाना और उनको अच्छा कार्य का वातावरण प्रदान करना जो जोखिम भरा न हो। औद्योगिक स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने की स्थितियों और कार्मिकों की भूमिका के प्रति कुछ समय से परिवर्तन आया है। यह परिवर्तन कार्मिकों की बहुमुखी पहुच तथा जोखिम से बचाव सम्बन्धी उपायों के निर्धारण के कारण है। विशेज्ञयों जैसे सुरक्षा अधिकारी, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अधिकारी तथा कार्य विशेषज्ञयों को औद्योगिक स्वास्थ्य चिकित्सक के साथ कार्य करने के लिये आमन्त्रित किया जाने लगा है। 
  2. ज्यादा से ज्यादा विकासशील देश व्यावसायिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रहे है। वे रक्षा सम्बन्धी सेवाओं को विकसित करने तथा स्वस्थ मानव संसाधन का उचित उपयोग करने के प्रति कटिबद्ध है। व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवा के लिए I.L.O. ने सभी सरकारों को कानून बनाने तथा व्यावसायिक स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए सुझाव दिया है। I.L.O. औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के समायोजन तथा सुझाव एवं कार्य वातावरण जो राष्ट्रीय नियमों को परिभाषित करता है तथा उपक्रमों में इसे कार्यान्वित करने के लिये प्रयासरत है। भारत सरकार, रायल कमीशनन 1931 सुझावों के बाद व्यावसायिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक सचेत हुई। 
किसी उद्योग में व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवा को निम्न बिन्दुओं की ओर लक्षित होना चाहिए - 
  1. स्वास्थ्य जोखिम के प्रति कर्मचारियों का बचाव, जो उनके कार्य के बाहर या अन्दर की परिस्थितियों जिनमें कार्य किया जाता है।
  2. कर्मचारियों के शारीरिक एवं मानसिक स्थिति की तरह ध्यान देना। व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवा की भूमिका आवश्यक रूप से प्रतिबन्धक होनी चाहिए।
    1. व्यावसायिक जोखिमों को पहचानना और उनके नियंत्रण के लिए मापनों का सुझाव देना। 
    2. व्यावसायिक या अन्य प्रकार की बीमारियों की खोज करना और प्रारम्भिक उपचार देना। 
    3. उचित कार्य में जनता की नियुक्ति के बारे में सलाह प्रस्तुत करना। 
    4. उन कार्यो के समय की उन परिस्थितियों की देखरेख से सम्बन्धित अनिवार्य सलाह प्रदान करना, जो स्वास्थ्य को नष्ट कर सकते हैं। 
    5. स्वास्थ्य शिक्षा को सम्मिलित करना। 

व्यावसायिक बीमारियों से बचाव 

कार्य के समय व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवा कार्य समूह के आकार सम्मिलित जोखिम संयंत्र की स्थिति और अन्य कई कारकों के अनुसार बदलती रहनी चाहिए। कर्ता को फैक्ट्री की आवश्यकताओं और उसके निर्धारित जोखिमों की काट छाट करके प्रतिबंधोत्मक व्यावसायिक सेवा स्थापित करनी चाहिये। व्यावसायिक स्वास्थ्य एक बहुत बड़ा क्षेत्र तथा विभिन्न शाखाओं के विशेष ज्ञान जैसे चिकित्सा, अभियंत्रण, रसायन, विश विज्ञान मानव विज्ञान, मनोविज्ञान, सांख्यिकी तथा इन सबसे परे आपसी अनुशासनात्मक संगठित कार्य समाहित है। 

देश में एक बड़ी संख्या में नियोक्ता अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान नही करता। बहुत ही कम प्रतिशत नियोक्ताओं के पास उनके अपने व्यापार विशेषज्ञ होते है जो कि स्वस्थ्य कार्य वातावरण को कार्य स्थल सुनिश्चित करता है। लघु तथा मध्यम क्रम के उद्योगों की दशा सोचनीय है। यहां पर सड़क बनाने वाले, पत्थर काटने वाले निर्माण कार्य में संलग्न निजी यातायात, कृषि जैसे असंगठित श्रम में कर्मचारियों के स्वास्थ्य की देखरेख करने वाला कोई नही है। यहां पर यह ज्ञान होना चाहिये कि व्यावसायिक स्वास्थ्य प्रबंधन का उत्तरदायित्व है न कि राज्य श्रमिक बीमा संस्थान का यूनियन का उनके सदस्यों के स्वास्थ्य के प्रति भी मतभेदात्मक उपासीन रवैया है। प्रबन्धन तथा उनकी यूनियनों को न केवल अपने कर्मचारियों को स्वस्थ रखना चाहिये बल्कि उन्हें व्यावसायिक अड़चनों तथा बीमारियों तथा छूआछूत के रोग इन्फेक्शन, मनोरोग से भी मुक्त रखना चाहिये क्योंकि इससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। 

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