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उपनिषद की संख्या, रचनाकाल एवं उनके परिचय
उपनिषद् शब्द ‘उप’ एवं ‘नि’ उपसर्ग पूर्वक सद् (सदृलृ) धातु में ‘क्विप्’ प्रत्यय लगकर बनता है, जिसका अर्थ होता…

अथर्ववेद का अर्थ, स्वरूप, शाखाएं
वेदों को भारतीय साहित्य का आधार माना जाता है अर्थात् परवर्ती संस्कृत में विकसित प्राय: समस्त विषयों का श्रोत…

सामवेद का अर्थ, स्वरूप, शाखाएं
अथर्ववेद के अनेक स्थलों पर साम की विशिष्ट स्तुति ही नहीं की गई है, प्रत्युत परमात्मभूत ‘उच्छिष्ट’ (परब्रह्म)…

यजुर्वेद की शाखाएं, एवं भेद
यजुर्वेद की शाखाएं काण्यसंहिता-  शुक्ल यजुर्वेद की प्रधान शाखायें माध्यन्दिन तथा काण्व है। काण्व शाखा का प्र…

ऋग्वेद क्या है?
ऋग्वैद धार्मिक स्तोत्रों की एक अत्यंत विशाल राशि है, जिसमें नाना देवाताओं की भिन्न-भिन्न ऋषियों ने बड़े ही स…

गीता का महत्व
गीता तात्पर्य -श्रीमदभगवदगीता विश्व के सबसे बडे महाकाव्य महाभारत के “भीश्मपर्व” का एक अंश है। भगवदगीता भगवान…