मृदुता का अर्थ एवं प्रकार

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मृदुता का अर्थ है-शिष्ट एवं विनम्र व्यवहार, मधुर व्यवहार। मृदुता वैयक्तिक मूल्य होते हुए भी सामाजिक जीवन की सफलता का सूत्र है। इसके द्वारा व्यक्ति के जीवन में सरसता रहती है। मृदु स्वभाव वाला व्यक्ति अपनी वाणी की, व्यवहार की मृदुता से सर्वत्र समायोजन बना लेता है। अर्थात् वह वातावरण को अपने अनुकूल बना लेता है। यह भी देखा जाता है कि जो कार्य कठोर अनुशासन से नहीं होता है, वह मृदुता से हो जाता है। व्यक्ति की वाणी, उसका व्यवहार मृदु हो तो व्यक्ति सर्वत्र अपनापन पाता है, सर्वत्र दूसरों को अपना बना लेता है। नैतिक चेतना का सूत्र है-मृदु व्यवहार। इसके विपरीत जिन व्यक्तियों का व्यवहार कर्कश होता है, वे व्यक्तियों को ही नहीं वरन् पशुओं तक को नहीं छोड़ते है। उनके साथ क्रूर व्यवहार करते है। मृदुता व्यक्ति के व्यवहार को परिष्कृत करती है, उसे मांजती है। मृदु व्यक्ति सबका प्रिय होता है क्योंकि वह किसी को दु:ख नहीं पहुंचाता है। मृदुता से अनाग्रह की चेतना भी विकसित होती है।

मृदुता के प्रकार

मृदुता के दो प्रकार है-प्रतीयमान मृदुता और यथार्थ मृदुता।

प्रतीयमान मृदुता-

इस प्रकार की मृदुता का पालन करने वाला व्यक्ति केवल बाह्य दृष्टि से ही विनम्र होता है, मृदु होता है पर वास्तव में वह ऐसा नहीं होता है। भीतर में उसके अनेक अवगुण विद्यमान रहते है। ऐसा व्यक्ति दूसरों को ठगता है, धोखा देता है। व्यवहार में ऐसे ही व्यक्ति अधिकतर पाये जाते है जो दिखावा करते है। इससे वह अपनी प्रतिष्ठा को बनाए रखने में कई बार सफल हो जाते है और अपनी स्वार्थपूर्ति भी कर लेते है। व्यक्ति ऐसे व्यवहार को तुरन्त नहीं पहचान पाता है। ऐसा व्यक्ति बोलने का ही होता है। देखने में बड़ा व्यवहार कुशल लगता है। दूसरों का बड़ा हितेषी भी बनता है। वास्तविकता कुछ और ही होती है। दूसरों को प्रभावित करना एक कला होती है। यह व्यवसाय का भी एक अंग है। व्यापारी बड़े ही मृदु व्यवहार से अपना सड़ा-गला माल भी बेच देते है। कम कीमत की वस्तु को अधिक कीमत में बेच देते है। यह उनकी आजीविका का हिस्सा है पर वास्तव में सत्य तो उन्हें भी पता ही होता है। इसी प्रकार चोर-लुटेरे कई बार सामने वाले को बड़ा प्रभावित करते है। बाद में उन्हें ही लूट लेते है। यह मृदुता वास्तव में व्यक्ति के अहित का कारण बनती है।

यथार्थ मृदुता-

यथार्थ मृदुता वह है जिसका स्रोत भीतर में बहता है। वह केवल व्यवहार की नहीं होती, वह बनावटी नहीं होती है वरन् वास्तविक होती है। यह मृदुता व्यक्ति के साथ मधुर संबंधों का निर्माण करती है। दूसरे के कटु व्यवहार को धो डालती है। यह सर्वत्र मधुरता ही मधुरता फैलाती है। ऐसे व्यवहार की सुवास दूर-दूर तक होती है। उसके संबंधों का विस्तार होता है। मृदुता में आकर्षण का गुण पाया जाता है। अर्थात् ऐसे व्यवहार के प्रति व्यक्ति आकर्षित होते है। यह व्यवहार सर्वत्र प्रसéता का माहौल पैदा करता है। अत: यथार्थ मृदुता में बहुत बड़ी शक्ति है।

मृदुता का परिणाम

वैयक्तिक जीवन में मृदुता व्यक्ति को प्रसéचित्त रखती है। प्रसनचित्त व्यक्ति का दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। ऐसा व्यक्ति शीघ्र ही उत्तेजित नहीं हो पाता है क्योंकि उसका अपने पर नियंत्रण होता है। उसमें विनय होता है। विनयशील व्यक्ति के स्वभाव में लचीलापन पाया जाता है। अत: व्यक्ति वैयक्तिक जीवन में इस मूल्य के द्वारा अनेक मूल्यों का विकास कर सकता है। मृदु व्यक्ति सामाजिक जीवन को भी बड़े अच्छे ढंग से जीता है। समाज में अनेक स्वभाव के व्यक्ति रहते है। कोई कठोर होता है, कोई अप्रामाणिक होता है, कोई कमजोर होता है तो कोई शक्तिसम्पन। इन सबके रहते हुए अनेक सामाजिक समस्याएँ भी पैदा होती है। ऐसे समय में सभी व्यक्ति उन समस्याओं का समाधान भी नहीं कर पाते है। मृदु व्यक्ति अपने व्यवहार से उन समस्याओं का समाधान खोज लेता है। उसके पास वाणी विवेक होता है। मधुर वाणी से, मधुर व्यवहार से सामाजिक संबंधों को भी मधुर बनाने में सफल होता है।

मृदुता केवल परिवार, समाज को ही प्रभावित नहीं करती है वरन् प्राणी जगत् को प्रभावित करती है। पशु भी प्रेम की भावना समझता है। मृदु व्यवहार को समझता है। यहां तक कि वनस्पति जगत् में भी यह संवेदना है कि वह इस भाषा को समझते है। कहने का तात्पर्य है कि प्राणधारी सभी प्राणी मृदु व्यवहार से प्रभावित होते है जिसका अनुभव सदैव सुखद ही होता है। अत: इस सन्दर्भ में कहा जा सकता है कि व्यक्ति का मृदु व्यवहार चेतन जगत् को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है इसलिए इसका महत्त्व बहुत अधिक है।

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