मात्रक क्या है?

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एक परिस्थिति की कल्पना कीजिए। मान लें कि आपकी आँखों पर पट्टी बंधी है और आपको मुद्राओं की एक गड्डी थमा दी जाती है। उन्हें गिनकर आपको ज्ञात होता है कि इनकी संख्या 46 है। क्या आप बता सकते हैं कि आपके हाथ में कितनी धनराशि है? सही राशि को ज्ञात करने के लिए आपको उन नोटों का मूल्य जानना आवश्यक है कि वे नोट 10 रु. मूल्य 50 रु. मूल्य या 100 रु. मूल्य के हैं।

इसी प्रकार यदि आपको बताया जाए कि दो पेड़ों के बीच की दूरी 100 है, तो आप इसका क्या अर्थ लगाएँगे? क्या दोनों वृक्ष 100 cm, 100 ft और 100 m की दूरी पर हैं? इन उदाहरणों से हमें संकेत मिलता है कि प्रत्येक मापन को इस प्रकार से वर्णित किया जाए कि उसका अर्थ स्पष्ट और निश्चित हो। इसके लिए हमें दो बातों को जानना आवश्यक है। पहला तो प्रयोग में लाया जाने वाला मात्रक, जैसे सेन्टीमीटर (cm), मीटर (m), या फीट (ft),और दूसरा कितनी बार उसका प्रयोग हुआ है।

किसी भौतिक राशि के मापन के परिणाम को हम उसके मान से व्यक्त करते हैं। राशि का मान, मापन के लिए जितनी बार मानक का प्रयोग हुआ है, वह संख्या तथा मापन के लिए परिभाषित राशि (मानक) के गुणनफल के बराबर होता है। इस परिभाषित या मानक राशि अर्थात् प्रयुक्त पैमाना, उदाहरण के लिए, उपरोक्त उदाहरण में मीटर या फीट को मात्राक कहते हैं।

भौतिक राशि का मान = संख्यात्मक राशि × मात्रक

मात्रक एक माप, युक्ति अथवा मापक्रम है जिसकी सहायता से हम किसी भौतिक राशि का मापन करते हैं। भौतिक राशि का मान दो भागों से मिलकर बनता है- संख्यात्मक राशि और मात्राक और यह दोनों में गुणनफल के बराबर होता है।

अत: किसी मापन के परिणाम को व्यक्त करने के लिए संख्यात्मक राशि और मात्राक दोनों को बताना आवश्यक है। अब हमें यह स्पष्ट है कि हमारी जीवन के प्रत्येक क्रियाकलापों में मापन आवश्यक है तथा हमें एक मात्रक या मानक की आवश्यकता होती है जिसके माध्यम से हम मापन कर सकें और उसके परिणाम को व्यक्त कर सकें।

मात्रक के अभिलक्षण

क्या हम किसी दूरी को किलोग्राम में माप सकते हैं? स्पष्ट है कि हम ऐसा नहीं कर सकते; दूरी को किलोग्राम में मापना बेतुका है। दूरियों के मापन में यह असंगत है। अत: उपयोगी होने के लिए मात्राक को मापी जाने वाली राशि के संगत होना चाहिए। इसके अलावा, मात्राक को सुविधाजनक भी होना चाहिए। क्या दो शहरों के बीच की दूरी को इन्चों में प्रकट करना सुविधाजनक है? क्या आप यह नहीं सोचते कि दो शहरों के बीच की दूरी को प्रकट करने के लिए किलोमीटर का प्रयोग करना अधिक उचित है? सुविधाजनक और संगत होने के अतिरिक्त एक मात्राक को सुपरिभाषित होना चाहिए अर्थात् अन्य सभी व्यक्ति इसे अच्छी तरह से समझ सकें। उदाहरण के लिए, मेरे घर और निकट की एक दुकान के बीच की दूरी को 200 कदमों से व्यक्त किया जा सकता है। इसका स्पष्ट अर्थ जानने के लिए हमें कदम को भी परिभाषित करना होगा कि यह किसी बड़े व्यक्ति का कदम है या एक छोटे बालक का। क्या यह धीरे चलते हुए या तेजी से भागते समय का कदम है? इस कदम की लंबाई क्या है? अत: उपयोगी होने के लिए मात्राक को होना चाहिए-
  1. संगत
  2. सुविधाजनक
  3. सुपरिभाषित
आज के विश्व में परिशुद्ध मापन आवश्यक है। मापन के लिए हमारे पास अनेक युक्तियां हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि परमाणु घड़ी इतनी परिशुद्ध है कि डेढ़ करोड़ (15 मिलियन) वर्ष में मात्रा 1 सेकण्ड का अंतर आता है। क्या आपने कभी इस पर विचार किया कि हमारे पूर्वज किस प्रकार से मापन किया करते थे? इसके लिए कौन सी युक्तियां काम में लाई जाती थीं और किन मात्रकों का प्रयोग किया जाता था? किस रोचक तरीके से मापन किए जाते थे तथा मापन पद्धति का तब से अब तक क्या विकास हुआ? आइए, अब इसके बारे में जानें। क्यों नहीं हम मापन के अर्थ व आवश्यकता तथा मात्रक और उनके अभिलक्षणों के विषय में हमारी समझ का आकलन करें।

मानक मात्रक की आवश्यकता

ऊपर दिए गए क्रियाकलापों से यह निष्कर्ष निकलता है कि मानव शरीर के अंगों पर आधारित मात्राक स्वेच्छ और अशुद्ध हैं। इनसे प्राप्त परिणाम मापने वाले व्यक्ति पर निर्भर करते हैं क्योंकि मात्राक का नाप भिन्न-भिन्न व्यक्तियों के लिए भिन्न-भिन्न होता है। एक फीट या एक क्यूबिट का माप मापने वाले व्यक्ति पर आधारित होगा। इसके परिणामस्वरूप भिन्न-भिन्न देशों और दैनिक व्यवहार में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो गर्इं। मापन में एकरूपता लाने के लिए सही मापन की आवश्यकता का अनुभव किया गया। इसके लिए एक मानक मापन को विकसित किया गया जो सभी लोगों के लिए स्वीकार्य हो।

लम्बाई को सही मापने की समस्या का सर्वप्रथम समाधान मिस्र के लोगों ने 3000 ई.पूर्व में किया था। यह एक मानक क्यूबिट को परिभाषित करके किया गया। यह मिस्र के फैरो शासक की मध्यमा के सिरे से कोहनी तक की दूरी को माना गया। मानक क्यूबिट के बराबर लम्बाई की मापन लकड़ियाँ/डन्डियाँ बनाई गर्इं। इसके फलस्वरूप सारे मिस्र देश में लम्बाई का एक मानक स्थापित हो गया। इसी प्रकार अन्य शासकों ने भी अलग-अलग मानक बनाने का प्रयत्न किया। उदाहरण के लिए, ब्रिटिश शासक हेनरी-प्रथम (1130-1137) ने यह राज्यादेश प्रसारित किया कि उसकी नाक के ऊपरी सिरे से लेकर पूरे फैलाए हुए हाथ के सिरे की दूरी को एक गज (यार्ड) माना जाए। रानी एलिजाबेथ-प्रथम ने यह घोषणा की कि एक मील को आठ फर्लांग के बराबर माना जाए। बैलों की एक जोड़ी जितनी दूरी तक बिना थके हुए एक खेत को जोत सके उस दूरी को एक फर्लांग कहते हैं। यह दूरी 220 गज के बराबर पाई गई। इस प्रकार के मानक उपयोगी थे परन्तु बहुत अल्पकालिक थे क्योंकि एक शासक के सत्ता से हटते या मृत्यु को प्राप्त होते ही पुरानी पद्धति को त्याग कर नई पद्धति को अपना लिया जाता। इसके भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न शासकों के होने के कारण सभी अपने अलग-अलग मात्राक पद्धतियों को मानते थे। फलस्वरूप, 18वीं शताब्दी तक द्रव्यमान, लम्बाई, क्षेत्राफल और आयतन के बड़ी संख्या में मात्राक व्यापक प्रयोग में आए।

SI मात्रक

सन् 1960 में मापतोल की ग्यारहवीं जनरल कान्फ्रेंस (CGPM) में मापतोल की अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति को स्वीकार किया गया जिसे SI मात्राक कहा गया। SI फ्रेन्च शब्द (Le Systeme International de Unite's) का छोटा रूप है। आप जानते हैं कि लम्बाई, भार, द्रव्यमान, समय, घनत्व आदि का संबंध मापन से है। कोई भी राशि जो मापी जा सके उसे भौतिक राशि कहते हैं। SI पद्धति के मात्राक सात आधारभूत मात्रकों पर आधारित हैं। ये वे भौतिक राशियां हैं जिनके आधार पर अन्य भौतिक राशियों का मापन किया जा सकता है। सारणी में इन सभी आधारभूत SI मात्राकों के नाम व चिन्ह दिए गए हैं। आधारभूत SI मात्राक की परिभाषाएँ और मानक परिशिष्ट-I में दिए गए हैं।

मूल भौतिक राशियों के नाम और प्रतीक तथा उनके SI मात्राक

मूल भौतिक
राशि
भौतिक राशि 
का प्रतीक
SI मात्रक
का नाम
SI मात्रक
का प्रतीक
लम्बाईमीटरm
द्रव्यमानmकिलोग्रामkg
समयसेकण्डs
विद्युत धाराIऐम्पियरA
ऊष्मागतिक तापTकेल्विनK
पदार्थ की मात्रा मोलmol
ज्योति तीव्रताकेन्डेलाcd

नोट : ताप के अन्य मापक डिग्री सेल्सियस (°C) और फारेनहाइट (F) में हैं।

कदाचित आपको सारणी में दिए गए मात्राकों, द्रव्यमान तथा पदार्थ की मात्रा और ज्योति तीव्रता में भी भ्रम हो सकता है। किसी वस्तु में जितना पदार्थ होता है उसे द्रव्यमान कहते हैं। किसी वस्तु में उपस्थित द्रव्य की मात्रा को द्रव्यमान कहते हैं जबकि मोल किसी पदार्थ की वह मात्रा होती है जो ग्राम में व्यक्त उसके मोलर द्रव्यमान के बराबर होती है। उदाहरण के लिए -

1 मोल HCl = 36.46 g
2 मोल HCl = 36.46 × 2 = 72.92 g

किसी बिन्दु स्रोत द्वारा प्रति सेकण्ड किसी विशेष दिशा में उत्सर्जित प्रकाश की मात्रा को हम ज्योति की तीव्रता कहते हैं।

व्युत्पन्न मात्रक

मूल SI मात्राक जैसे लम्बाई, द्रव्यमान, समय आदि एक दूसरे पर निर्भर नहीं करते हैं। मात्राकों की अन्य भौतिक राशियां, जैसे क्षेत्राफल, घनत्व, गति आदि को मूल SI मात्राकों से व्युत्पन्न किया जाता है। अत: इन्हें व्युत्पन्न मात्राक कहते हैं। इस प्रकार व्युत्पन्न मात्राक को प्राप्त करने के लिए हमें भौतिक राशि तथा मूल भौतिक राशियों के आपसी संबंध को जानना जरूरी है। फिर मूल भौतिक राशियों के मात्राकों को प्रतिस्थापित कर वांछित व्युत्पन्न मात्राक को ज्ञात किया जाता है। कुछ उदाहरणों द्वारा जानने की कोशिश करते हैं कि किस प्रकार मूल मात्राकों के पदों में भौतिक राशियों के मात्राकों को व्युत्पन्न किया जाता है।

उदाहरण 1 : किसी पृष्ठ के क्षेत्रफल का SI मात्रक व्युत्पन्न करना।
क्षेत्राफल के मात्राक को व्युत्पन्न करने के लिए उसके क्षेत्राफल और मूल भौतिक राशियों के आपसी संबंध को जानना जरूरी है। जैसा कि आप जानते हैं, किसी पृष्ठ के क्षेत्राफल को उसकी लम्बाई व चौड़ाई के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जाता है। अत: प्रथम चरण के रूप में हम क्षेत्राफल को निम्न प्रकार से लिखते हैं-

क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई

क्योंकि चौड़ाई भी एक प्रकार की लम्बाई ही है, इसलिए हम लिख सकते हैं

क्षेत्रफल = लम्बाई × लम्बाई

अत: क्षेत्राफल के व्युत्पन्न मात्राक को ज्ञात करने के लिए हम मूल भौतिक राशियों के मात्रकों को निम्नानुसार प्रतिस्थापित करते हैं –

क्षेत्रफल का मात्रक = मीटर × मीटर = (मीटर)2 = m2

इस प्रकार क्षेत्राफल का SI मात्राक m2 और इसे वर्ग मीटर बोला जाता है। इसी प्रकार आप जांच सकते हैं कि आयतन का SI मात्राक m3 या घन मीटर है।

उदाहरण 2 : बल का व्युत्पन्न मात्रक ज्ञात करना
आप जानते हैं कि बल को निम्न प्रकार से परिभाषित करते हैं –

बल = द्रव्यमान × त्वरण = द्रव्यमान × (वेग में परिवर्तन/समय)

क्योंकि गति में परिवर्तन= लम्बाई/समय

अत: बल = द्रव्यमान × (लम्बाई/समय) × (1/समय) = द्रव्यमान × (लम्बाई/समय2)

बल के SI मात्राक को व्यंजक के दक्षिण पक्ष में आने वाली मूल भौतिक राशियों के SI मात्राकों को प्रतिस्थापित करके ज्ञात किया जा सकता है।

अत: ⇒ बल का SI मात्रक = kgm/s2 = kg ms–2

मूल भौतिक राशियों के अतिरिक्त सामान्य उपयोग में आने वाली कुछ भौतिक राशियों, उनका मूल भौतिक राशियों से संबंध और उनके SI मात्रक सारणी में दिए गए हैं।

सामान्य उपयोग में आने वाली कुछ भौतिक राशियों के
व्युत्पन्न मात्रकों के कुछ उदाहरण

व्युत्पन्न राशि विमा मात्रक का नाममात्रक का प्रतीक
क्षेत्रफललम्बाई × लम्बाईवर्ग मीटरm2
आयतन लम्बाई × लम्बाई × लम्बाई घन मीटरm3
चाल, वेगलम्बाई/समयमीटर प्रति सेकण्डms–1
त्वरण(लम्बाई/समय)/समयमीटर प्रति वर्ग सेकण्डms–2
तरग-संख्या1/लम्बाई व्युत्क्रम मीटरm–1
घनत्वद्रव्यमान/(लम्बाई)3किलोग्राम प्रति घन मीटर kgms–3
कार्य(द्रव्यमान × लम्बाई2)/(समय)2 किलोग्राम वर्ग मीटर
प्रति वर्ग सेकण्ड
kgm2/s2

अनेक भौतिक मात्राक जैसे, दाब, बल आदि अक्सर प्रयोग में लाई जाती हैं लेकिन इनके SI मात्राक काफी जटिल हैं। इस कारण उन्हें बार-बार प्रयोग में जाना असुविधाजनक होता है। ऐसी भौतिक राशियों के व्युत्पन्न SI मात्राकों की कुछ विशिष्ट नाम दिए गए हैं। सारणी में ऐसे कुछ भौतिक मात्रकों की सूची दी गई है।

 व्युत्पन्न SI मात्राकों के विशिष्ट नाम उनके प्रतीकों के साथ 

भौतिक राशिव्युत्पन्न SI मात्रक मात्रक को दिया गया
विशिष्ट नाम
विशिष्ट नाम
को दिया गया प्रतीक
आवृत्तिs–1हटर््जHz
बल m.kg.s–2न्यूटनN
दाब या प्रतिबलm–1.kg.s–2पास्कल Pa
ऊर्जा या कार्यkg.m2.s–2जूलJ
शक्तिkg.m2.s–3 वाट W

SI पूर्वलग्न

जब हम भौतिक राशियों का मापन करते हैं तो अक्सर भौतिक राशि के मूल मात्राक की तुलना में मापी जाने वाली राशि बहुत बड़ी होती है। इन उदाहरणों को देखें -

पृथ्वी का द्रव्यमान = 5,970,000,000,000,000,000,000,000 kg
सूर्य की त्रिज्या = 6,96,000,000 m
मुम्बई व दिल्ली के मध्य की सन्निकट दूरी = 1,400,000 m

एक अन्य सम्भावना यह है कि भौतिक राशि के मात्राक की तुलना में भौतिक राशि बहुत छोटी होती है। इन उदाहरणों को देखें -

हाइड्रोजन के एक परमाणु की त्रिज्या = 0.000,000,000,05 m
एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (me) = 0.000,000,000,000,000,000,000,911 kg

इन उदाहरणों द्वारा यह ज्ञात होता है कि जब मापी जाने वाली भौतिक राशि छोटी या बहुत बड़ी होती है तो उस संख्या को व्यक्त करना बहुत कठिन होता है। ऐसी संख्याओं को वैज्ञानिक अंकन पद्धति द्वारा सरलीकृत किया जा सकता है। इस अंकन पद्धति में संख्या को 10 की घात के रूप में लिखा जाता है। इस अंकन पद्धति में उपरोक्त उदाहरणों को इन प्रकार से लिख सकते हैं-

पृथ्वी का द्रव्यमान = 5.97 × 1024 kg
सूर्य की त्रिज्या = 6.96 × 108 m
दिल्ली व मुम्बई के बीच की सन्निकट दूरी= 1.4 × 106 m
हाइड्रोजन के एक परमाणु की त्रिज्या = 5 × 10-11 m
एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (me) = 9.11 × 10-31 kg

वैज्ञानिक अंकन पद्धति द्वारा संख्याओं को अपेक्षाकृत सरल रूप में व्यक्त किया जा सकता है परन्तु फिर भी यह सुविधाजनक नहीं है क्योंकि इनमें घातों का प्रयोग होता है। संख्याओं को और सरल करने के लिए मात्राकों की पद्धति SI ने कुछ पूर्वलग्नों के प्रयोग को अनुशंसित किया। इन पूर्वलग्नों का SI मात्राकों के साथ इस प्रकार प्रयोग किया जाता है कि मापी जानी वाली भौतिक राशि को सुविधाजनक संख्या के रूप में व्यक्त किया जा सके। SI पूर्वलग्नों को किसी मात्राक के 10–24 से लेकर 10़24 तक के व्यापक परिसर को समाविष्ट करने के लिए परिभाषित किया गया है और इन्हें सारणी में दिया गया है।

मात्रकों के अपवत्र्यों और अपवर्तकों के SI पूर्वलग्न

अपवत्र्यपूर्वलग्नप्रतीकअपवर्तकपूर्वलग्नप्रतीक
1024योटा Y10–1डेसीd
1021जेटा10–2सेन्टी c
1018एक्जा10–3 मिलीm
1015पेटा P10–6माइक्रो μ
1012टेरा10–9नैनोn
109गिगा 10–12पिको p
106मेगा M10–15 फेमटोf
103 किलो k  10–18एटोa
102 हेक्टोh10–21 जैप्टोz
101डेकाda 10–24योक्टो y

आप SI पूर्वलग्नों का उपयोग कैसे करेंगे

SI पूर्वलग्नों का प्रयोग करने के लिए हमें मूल नियम को ध्यान में रखना चाहिए। यह नियम यह है कि पूर्वलग्न को हमें इस प्रकार चुनना है कि भौतिक राशि का परिणामी मान 0.1 और 1000 के मध्य हो। इसकी व्याख्या निम्न उदाहरण द्वारा करते हैं-

सूर्य की त्रिज्या = 6.96 × 108 m = 696 × 106 m = 696 Mm (696 मेगा मीटर)
विकल्पत: = 6.96 × 108 m = 0.696 × 109 m = 0.696 Gm (0.696 गिगा मीटर)

SI मात्रकों को निरूपित करने के नियम

समानता के लिए विश्व के सभी वैज्ञानिक विभिन्न राशियों को मापने के लिए एक सर्वमान्य अन्तर्राष्ट्रीय मानक मात्राक पद्धति के उपयोग पर सहमत हुए हैं। इसी का परिणाम SI मात्राक है। इसमें यह महत्त्वपूर्ण है कि शब्दावली और व्याकरण तर्कपूर्ण और परिभाषित हो तथा एक ही अर्थ वाला हो। इस मात्राक पद्धति का प्रत्येक व्यक्ति समान अर्थ में उपयोग करे। उस दिशा में यह इस उद्देश्य को प्राप्त करे जिसके लिए संख्यात्मक भाषाई नियम बनाए गए हैं। इसके कुछ सामान्य नियम नीचे दिए गए हैं-
  1. भौतिक राशि की मात्रा लिखते समय उसकी संख्या और उसके मात्राक को एक खाली स्थान द्वारा अलग करते हैं। उदाहरणार्थ- 100 mg सही है जबकि 100mg गलत। 
  2. संख्या और °C के बीच में तथा एक कोण के डिग्री, मिनट, सेकण्ड के बीच में भी कोई खाली स्थान नहीं होना चाहिए।
  3. मात्रक के चिन्ह/प्रतीक को बहुवचन में लिखते समय बदलना नहीं है, जैसे 10 mg लिखना सही है जबकि 10 mgs लिखना गलत।
  4. वाक्य की समाप्ति के अतिरिक्त मात्रक के प्रतीकों के बाद पूर्ण विराम का प्रयोग नहीं होता है, जैसे 10 mg यौगिक लिखना गलत है।
  5. SI पद्धति में मात्रक लिखते समय प्रतीकों के मध्य कुछ रिक्त स्थान छोड़ना चाहिए, जैसे m s मीटर सेकण्ड को जबकि उे सेकण्ड को प्रदर्शित करता है। इस प्रकार यदि मात्राकों को बिना रिक्त स्थान छोड़े लिखा जाए तो प्रथम अक्षर को पूर्वलग्न के रूप में लिया जा सकता है। 
  6. एक से कम संख्या के लिए दशमलव बिन्दु से बायीं तरफ शून्य लिखा जाता है, जैसे- 0.928 लिखना सही है जबकि .928 गलत। 
  7. यदि मात्राक किसी व्यक्ति के नाम पर है तो उनके प्रतीक को अंग्रेजी के बड़े अक्षरों से व्यक्त किया जाएगा। पूरा नाम लिखने पर मात्राक को बहुवचन में नहीं लिखना चाहिए, जैसे- 30.5 जूल या 30.5 J लिखना सही है परन्तु 30.5 जूल्स अथवा 30.5 j लिखना गलत है। 
  8. मात्राक नाम के साथ घातों का उपयोग करने पर मात्राक नाम के बाद अपरिवर्तक (malifier) स्क्वेयर्ड या क्यूब्ड लिखा जाता है, जैसे- सेकण्ड स्क्वेयर्ड, ग्राम क्यूब्ड आदि। लेकिन क्षेत्रफल एवं आयतन के संदर्भ में घात पहले लिखा जाता है, जैसे वर्ग किलोमीटर या घन सेन्टीमीटर आदि। 
  9. मात्राक के प्रतीकों को ऋणात्मक घात के साथ प्रदर्शित करने पर सॉलिडस (/) चिन्ह का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि उपयोग किया जाता है तो एक से अधिक सॉलिडस का प्रयोग नहीं करते हैं, जैसे गैस की इकाई के स्थिरांक (JK–1 mol–1) को J/K mol की तरह प्रदर्शित किया जा सकता है J/K/mol की तरह नहीं। 
  10. यह उपरोक्त वर्णित नियमों में पहले से ही लागू है कि SI पूर्वलग्न का प्रयोग करने पर इन नियमों को मानना पड़ेगा।

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