कंप्यूटर का परिचय इतिहास एवं विशेषताएं

अनुक्रम

इसमें के बारे में अध्ययन करेंगे।


कंप्यूटर (Computer) का अर्थ

कंप्यूटर (Computer) का अर्थ कंप्यूटर (Computer) शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी शब्द कंप्यूट (Compute) से हुई है, जिसका अर्थ गणना करना है। यही वजह है कि हिन्दी में इस उपकरण को गणक या संगणक भी कहा जाता है। अपने विकास की शुरूआत में कंप्यूटर (Computer) का इस्तेमाल मुख्यत: जटिल गणनाओं में ही किया जाता रहा, लेकिन कालान्तर में ज्यों-ज्यों मानवीय आवश्यकताएं बढ़ती गईं, कंप्यूटर (Computer) का स्वरूप भी बहुआयामी (Multitasking) होता चला गया। आज हम कंप्यूटर (Computer) पर गाने सुन सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं, इसके जरिये Internet पर दुनियाभर की खबरें एक चुटकी में हासिल कर सकते हैं।

कंप्यूटर का विकास

ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार चीनी वैज्ञानिकों ने करीब तीन हजार साल पूर्व पहला ऐसा उपकरण बनाया, जो गणनाओं को मानव के लिए सुगम और सरल बनाने में सफल रहा। यह उपकरण था अबेकस (Abacus), अबेकस में लकड़ी या लोहे के फ्रेम में कुछ लोहे की छड़ें होती हैं, जिनमें लकड़ी की बनी गोलियां लगाई जाती थीं। इन गोलियों को इसे इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति उपर-नीचे करके आसानी से गणनाएं कर सकता था। आज भी नन्हे स्कूली बच्चों को गणनाओं का प्रारंभिक पाठ पढ़ाने में अबेकस (Abacus) की मदद ली जाती है। हालांकि, इसकी मदद से सिर्फ छोटी गणनाएं ही कर पाना संभव है। फिर भी यही वह उपकरण था, जो मौजूदा कंप्यूटर (Computer) के आविष्कार की बुनियाद बना। अबेकस(Abacus) को पहला कंप्यूटर (Computer) का दर्जा दिया जाता है।  अबेकस (Abacus) के बाद गणनाओं के लिए एक नया उपकरण ईजाद हुआ सन 1617 में। 

स्कॉटलैंड के गणितज्ञ नेपियर ने एक गणितीय उपकरण बनाया, जो दिखने में अबेकस (Abacus) की तरह ही था। अंतर सिर्फ यह था कि इसमें गोलियों के बजाय छड़ें ही फ्रेम में लगी होती थीं। खासियत यह थी कि इन छड़ों पर अंक लिखे होते थे, जिनकी मदद से गणनाएं की जा सकती थीं। इसके कुछ ही समय बाद 1642 में एक और नये उपकरण का आविष्कार अपने दौर के महान फ्रांसीसी गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने किया। इस उपकरण का नाम पास्कल के नाम पर ही पास्कलाइन (Pascaline) रखा गया। यह अबेकस और नेपियर बोन से अधिक तेजी से गणना करने में सक्षम था। 

कंप्यूटर की पीढ़ियां

Sir Charles Babbage ने जो Analytical engine पेश किया था, वह Calculations में खासा सहायक साबित हुआ, लेकिन चूंकि समय के साथ परिवर्तन आवश्यक है, निरन्तर गणनाओं का दायरा और सूचनाओं को सुरक्षित रखने की जरूरत महसूस की जाने लगी। Sir Charles Babbage के Analytical engine से आधुनिक कंप्यूटर (Computer) के विकास का सफर शुरू हुआ। 

1. कंप्यूटर की पहली पीढ़ी -

सन 1946 में दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर (Computer) अस्तित्व में आया। दो वैज्ञानिकों जेपी एकर्ट और जेडब्ल्यू मॉशी इस कंप्यूटर (Computer) के आविष्कर्ता थे। दोनों ने अपने इस कंप्यूटर (Computer) को नाम दिया ENIAC (Electronic Numerical Integrated and Calculator) लेकिन यह कंप्यूटर (Computer) बहुत अधिक भारी था। उस वक्त इस कंप्यूटर (Computer) का वनज करीब 30 टन था। दोनों वैज्ञानिकों ने इस कंप्यूटर (Computer) में आंकड़ों के संग्रहण के लिए वैक्यूम ट्यूबों का इस्तेमाल किया, लेकिन कमी यह थी कि वैक्यूम ट्यूब की कार्यक्षमता बहुत अधिक नहीं थी। इसके अलावा इस कंप्यूटर (Computer) को ठंडा रखने के लिए काफी बड़े कूलिंग सिस्टम (Cooling System) की भी जरूरत पड़ती थी। पहली पीढ़ी के कंप्यूटर (Computer) के कालखंड को 1946 से 1959 तक बांटकर देखा जा सकता है।

वैक्यूम ट्यूब
वैक्यूम ट्यूब

2. कंप्यूटर की दूसरी पीढी -

समय के साथ आते गए बदलावों के फलस्वरूप दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (Computer) अस्तित्व में आए। इस पीढी़ के कंप्यूटर (Computer) का कालखंड 1959 से 1964 रहा। इस पीढ़ी के कंप्यूटर (Computer) की खासियत यह थी कि इसमें आंकड़ों के संग्रहण के लिए भारीभरकम वैक्यमू ट्यूबों के स्थान पर ट्रांजिस्टर (Transistors) का उपयोग किया गया। ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब के मुकाबले आकार में भी काफी छोटे थे, लिहाजा कंप्यूटर (Computer) का स्वरूप और वजन पूर्ववर्ती पीढ़ी के सापेक्ष काफी कम हो गया। दूसरी ओर, ट्रांजिस्टर की गणनात्मक कार्यक्षमता और आंकड़ों को सुरक्षित रखने की क्षमता भी एनिआक के मुकाबले काफी बेहतर थी।

3. कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी -

सन 1964 में तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (Computer) की खोज हुई। इस पीढ़ी के कंप्यूटर (Computer) की विशेषता यह थी कि इसमें इंटीगे्रटेड सर्किट (Integrated Circuit: IC) का इस्तेमाल कंप्यूटर (Computer) के प्रमुख इलक्ेट्रॉनिक घटक के रूप में किया गया था। आईसी की खोज और कंप्यूटर (Computer) में इसका इस्तेमाल आगे चलकर माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (Micro Electronics) का जरिया बना। वैज्ञानिक टीएस बिल्की की खोज आईसी की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद छोटा आकार, लेकिन संग्रहण की अकूत क्षमता थी। इसके अलावा इसमें पहले के मुकाबले कई गुना अधिक और कहीं ज्यादा तेजी से गणनाएं करने की क्षमता भी थी। तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (Computer) का कालखंड (Time Period) 1965 से 1971 रहा।

4. कंप्यूटर की चौथी पीढ़ी -

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर (Computer) वह हैं, जिनका इस्तेमाल हम आज करते हैं। इस पीढ़ी के कंप्यूटर (Computer) की खासियत इनमें इस्तेमाल किया जाने वाला माइक्रो प्रोसेसर (Micro Processor) है। 1971 में अमेरिका के वैज्ञानिक टडे हॉफ (Tedd Hoff) को माइक्रो प्रोसेसर की ईजाद का श्रेय जाता है। टेड तब कंप्यूटर (Computer) निर्माता कंपनी इनटेल में काम करते थे और उन्होंने अपने माइक्रोप्रोसेसर को इनटेल-4004 नाम दिया। माइक्रोप्रोसेसर दरअसल एक सिंगल चिप है, जिसमें आंकड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके इस्तेमाल से कंप्यूटर (Computer) का न सिर्फ आकार छोटा हुआ, बल्कि इनकी कार्यक्षमता भी बढी़ । इस पीढ़ी का कालखंड 1971 से 1980 रहा।

6. कंप्यूटर की पांचवीं पीढ़ी -

1980 से आज के दौर तक इस्तेमाल किए जाने वाले कंप्यूटर (Computer) को पांचवीं पीढ़ी में शामिल किया जाता रहा है। कुछ विद्वान आज के कंप्यूटर (Computer) को भी चौथी पीढ़ी का ही कंप्यूटर (Computer) मानते हैं तो कुछ ने इन्हें पांचवीं पीढ़ी में रखा है। कंप्यूटर (Computer) को चौथी पीढ़ी का ही मानने की बड़ी वजह यह है कि मौजूदा कंप्यूटर (Computer) का मूलाधार माइक्रोप्रोसेसर ही है, लेकिन इन्हें पांचवीं पीढ़ी में रखने वाले यह मानते हैं कि माइक्रोप्रोसेसर की क्षमताओं और आकार में भी लगातार बदलाव आते रहे हैं।

इसके अलावा प्रोसेसर अब सिर्फ कंप्यूटर (Computer) तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मोबाइल स्मार्टफोन के जरिये ये मनुष्य के हाथों में समाहित हो जाने वाला उपकरण बन चुका है। कंप्यूटर (Computer) की भावी पीढ़ी की बात करें तो वैज्ञानिक इस तरह के कंप्यूटर (Computer) बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं जो कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) से लेस हो। इस दिशा में निरन्तर शोध किए जा रहे हैं। रोबोट को कुछ हद तक इस श्रेणी में रखा जा सकता है, लेकिन वह भी उतने ही काम करता है, जितने का उसे निर्देश दिया जाता है।

वैज्ञानिकों की सोच यह है कि ऐसे कंप्यूटर (Computer) बनाए जाएं जो आवश्यकता के अनुरूप स्वत: निर्णय ले सके और आंकड़ों-सूचनाओं का इस्तेमाल कर खुद ही अपेक्षित परिणाम दे सके। हालांकि, यह बिन्दु इस लिहाज से विवाद का विषय भी बनता रहा है कि यदि कंप्यूटर (Computer) स्वत: बुद्धि-विवेक से काम करने लगेगा तो मनुष्य उस पर नियंत्रण कैसे रख सकेगा। और यदि अनहोनीवश कृत्रिम बुद्धि-विवेकयुक्त कंप्यूटर (Computer) नकारात्मक दिशा में चलने लगा तो यह विनाशकारी साबित हो सकता है।

कंप्यूटर के प्रकार

कंप्यूटर (Computer) का मुख्य कार्य उन आंकड़ों को सुरक्षित रखना है, जो इसे इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति (User) कंप्यूटर (Computer) को उपलब्ध कराता है। कंप्यूटर (Computer) उपयोगकर्ता के निर्देशों के आधार पर इन आंकड़ों का उपयोग कर परिणाम देता है। कार्यक्षमता के आधार पर कंप्यूटर (Computer) को इन श्रेणियों में बांटा गया है: Super computers, mainframe computers, mini computers, and microcomputers. इन सभी श्रेणियों पर नजर डालें तो सुपर कंप्यूटर (Computer) सर्वोच्च श्रेणी का माना जाता है, जबकि माइक्रो कंप्यूटर (Computer) सबसे छोटी। आइए अब हर श्रेणी को कुछ विस्तार से समझते हैं।

1. सुपर कंप्यूटर (Super computers) - 

सुपर कंप्यूटर (Computer), कंप्यूटर (Computer) की लंबी श्रृंखला में सबसे तेज गति से काम करने वाले कंप्यूटर (Computer) हैं। कल्पनातीत डाटा को यह न्यनू तम समय में सूचनाओं में बदलने में सक्षम हैं। इनका इस्तेमाल सामान्यत: बेहद बड़ी गणनाओं में ही किया जाता है। कंप्यूटर (Computer) का प्रयोग मौसम की भविष्यवाणी, मिसाइलों के डिजाइन जैसे जटिल कार्यों में किया जाता है। सुपर कंप्यूटर (Computer)ो मे कई माइक्रो प्रोसेसर (Micro Processors) लगे होते हैं। यह एक प्रकार की बेहद छोटी मशीन है जो कम्प्यूटिंग यानी गणना के कार्य को बेहद कम समय में कर पाने में सक्षम है। भारत में विकसित सुपर कंप्यूटर (Computer) का नाम परम है। निम्नवत चित्र से समझा जा सकता है कि सुपर कंप्यूटर (Computer) दरअसल, कई सारे प्रोसेसर का एक सामूहिक स्वरूप है। यहां यह सवाल उठना लाजिमी है कि प्रोसेसर किस तरह गणना में मदद करते हैं।

सुपर कंप्यूटर
सुपर कंप्यूटर

सुपर कंप्यूटर
सुपर कंप्यूटर

दरअसल, किसी जटिल गणना को कम समय में पूरा करने के लिये बहुत से प्रोसेसर एक साथ काम करते हैं। इस प्रक्रिया को समान्तर प्रोसेसिंग (Parallal Processing) कहा जाता है। इसके तहत कंप्यूटर (Computer) को मिलने वाले डाटा अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग प्रोसेसर को बांट दिए जाते हैं। हर प्रोसेसर अपने हिस्से की गणना करने के बाद कंप्यूटर (Computer) को सूचना उपलब्ध कराता है और कंप्यूटर (Computer) सभी प्रोसेसर से मिलने वाली सूचनाओं को एकत्र कर लेने के बाद सटीक अंतिम परिणाम उपलब्ध करा देता है।

2. मेनफ्रेम कंप्यूटर (mainframe computers) -

मेनफ्रेम कंप्यूटर (Computer) कार्यक्षमता के लिहाज से सुपर कंप्यूटर (Computer) से कुछ कमतर, लेकिन फिर भी काफी अधिक क्षमतावान होते हैं। इसकी कार्यक्षमता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मेनफ्रेम कंप्यूटर (Computer) पर एक ही समय में 250 से अधिक लोग एकसाथ काम कर सकते हैं। इन कंप्यूटर (Computer) का इस्तेमाल बल्क डाटा (Bulk Data) की प्रोसेसिंग में किया जाता है। यानी ऐसी जगहों पर ये कंप्यूटर (Computer) प्रयुक्त होते हैं, जहां एक ही समय में भारी मात्रा में और निरन्तर गणनाओं की जरूरत होती है। मुख्यत: इस तरह के कंप्यूटर (Computer) बड़ी कंपनियों में उपभोक्ताओं की जानकारी सुरक्षित रखने मे जनगणना और इसी तरह के अन्य ऐसे कार्यों में इस्तेमाल किए जाते हैं, जहां भारी डाटा आता है।

3. मिनी कंप्यूटर (mini computers) -

मिनी कंप्यूटर (Computer), मेनफ्रेम कंप्यूटर (Computer) से छोटे लेकिन माइक्रो कंप्यूटर (Computer) से बड़े होते हैं। माइक्रो कंप्यूटर (Computer) को पर्सनल कंप्यूटर (Computer) (Personal कंप्यूटर (Computer)s, PC) भी कहा जाता है। पर्सनल कंप्यूटर (Computer) कंप्यूटर (Computer) की श्रृंखला में आकार के लिहाज से सबसे छोटे होते हैं। पर्सनल कंप्यूटर (Computer) का विकास सबसे पहले 1981 में हुआ था। आगे हम इसे विस्तार से समझेंगे। माइक्रो या पर्सनल कंप्यूटर (Computer) के अन्य प्रकारों को इस तरह समझ सकते हैं।

डेस्कटॉप
डेस्कटॉप
  1. डेस्कटॉप: वह कंप्यूटर (Computer) जिसे मेज पर रखकर काम किया जा सके
  2. लैपटॉप: ऐसा कंप्यूटर (Computer), जिसे उपयोगकर्ता गोद में रखकर काम कर)
  3. पामटॉप: वह कंप्यूटर (Computer) जो उपयोगकर्ता की हथेली में समा सके, इस श्रेणी में स्मार्टफोन (Smartphones), म्यूजिक प्लेयर, वीडियो प्लेयर, टैबलेट रखे जा सकते हैं-

कंप्यूटर के घटक

कंप्यूटर (Computer) चाहे सुपर हो या माइक्रो यानी पर्सनल, हर कोई पांच प्रमुख भागों से मिलकर तैयार होता है, इन भागों को हम कंप्यूटर (Computer) के कंप्यूटर के घटक भी कह सकते हैं। ये पांचों हैं: इनपुट (Input), आउटपुट (Output), प्रोसेसर (Processor), मेमोरी (Memory) और प्रोग्राम (Program), कंप्यूटर (Computer) की संरचना में इन पांचों का विशेष महत्व है। 

1. प्रोसेसर (Processor) -

प्रोसेसर कंप्यूटर (Computer) का वह हिस्सा होगा, जहां प्रोसेसिंग (Processing) यानी पूरी प्रक्रिया चलती होगी। इस लिहाज से प्रोसेसर को कंप्यूटर (Computer) का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग माना जा सकता है, या इसे यूं भी कहा जा सकता है कि प्रोसेसर ही दरअसल असल कंप्यूटर (Computer) है, बाकि के सभी भाग तो प्रोसेसर की ओर से किए जा रहे कार्यों को सफलतापर्वक पूर्ण करने में सहायक हैं। 

2. मेमोरी (Memory) -

अबेकस से लेकर कंप्यूटर (Computer) तक के विकास की सैकड़ों सालों की यात्रा का परिणाम है मेमोरी। कंप्यूटर (Computer) पर उपयोगकर्ता जो भी जानकारी, सूचना, आंकड़ा, परिणाम बाद के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रखना चाहता है, वह मेमोरी में ही जाकर संग्रहीत (Stored) होता है।

कंप्यूटर (Computer) की मेमोरी कई छोटे टुकड़ों (Blocks) में बंटी होती है। इन ब्लॉक को सामान्यत: बाइट (Byte) कहा जाता है। कंप्यूटर (Computer) मेमोरी में हर ब्लॉक की अपनी एक खास लोकेशन (Location) होती है, जो मनुष्य की पहचान के लिए दिए जाने वाले नामों की तरह इन पर दर्ज नंबरों से तय मानी जाती है। इन नबंरों को बाइट या ब्लॉक का पता (Addresss) माना जा सकता है।

हर बाइट अपने से भी छोटी इकाई बिट (Bit) से बनती है। बिट को कंप्यूटर (Computer) मेमोरी का सबसे छोटा हिस्सा माना जा सकता है और हर आठ बिट की श्रृंखला (Chain) मिलकर एक बाइट का निर्माण करती है। बिट किस तरह काम करती है, इसे हम ‘हां’ या ‘ना’ के उदाहरण से समझते हैं। हमें कुछ काम करना है तो हमारे उसे करने या नहीं करने की दो ही स्थितियां हो सकती हैं, हां या ना। या इसे किसी स्विच के ऑन या ऑफ होने से भी समझ सकते हैं। यानी किसी बाइट में मौजूद बिटों की श्रृंखला में कुछ बिट हां या ऑन हैं तो कुछ ना या ऑफ। इस आधार पर ऑन बिट को 0 और ऑफ को 1 माना जाता है। 

कंप्यूटर (Computer) पर हम जो भी काम करते हैं या सूचनाएं संग्रहीत रखते हैं, वह सब 0 और 1 के रूप में ही दर्ज होता है, इन्हें बाइनरी संख्या कहा जाता है। किसी भी कंप्यूटर (Computer) की संग्रहण क्षमता यानी उसकी मेमोरी को बाइट में ही मापा जाता है। 

जिस कंप्यूटर (Computer) की बाइट जितनी अधिक होगी, वह आंकड़ों के संग्रहण, गणनाओं और सूचनाओं तथा परिणाम के निष्पादन में उतना ही सक्षम होगा। बाइट से लेकर गीगा बाइट और इससे भी कहीं आगे एक्साबाइट तक मेमोरी की क्षमता की यह श्रृंखला जाती है। इस लिहाज से जितनी अधिक बाइट वाला कंप्यूटर (Computer) होगा, उसकी मेमोरी उतनी ही अधिक होगी।
  1. 8 बिट = 1 बाइट
  2. 1024 बाइट = 1 किलोबाइट
  3. 1024 किलोबाइट = 1 मेगाबाइट
  4. 1024 मेगाबाइट = 1 गीगाबाइट

3. इनटर्नल मेमोरी (Internal Memory) -

कंप्यूटर (Computer) की मेमोरी दो तरह की होती है, Internal memory और External memory। भीतरी यानी Internal memory को कंप्यूटर (Computer) की मुख्य मेमोरी (Main Memory) माना जाता है। कंप्यूटर (Computer) की Internal यानी main memory को भी दो भागों में बांटा जा सकता है। पहला है रैम (RAM) और दूसरा रॉम (ROM) ये दोनों मेमोरी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट में ही मौजूद होती हैं, लेकिन दोनों के काम करने का तरीका अलग होता है जो कंप्यूटर (Computer) को आंकड़ों को संग्रहीत करके रखने में मददगार बनता है।

1. रैम (RAM): पहले बात करते हैं रैम की। रैम का पूरा नाम है रैंडम एक्सेस मेमोरी (Random Access Memory) यानी मेमोरी का वह हिस्सा या वह प्रकार, जिसे उपयोगकर्ता अपनी इच्छा के अनुसार इस्तेमाल कर सकता है। इस मेमोरी में कोई भी जानकारी, आंकड़ा या सूचना कम समय के लिए ही संग्रहीत हो सकती है। कोई नया या दूसरा डाटा आने की स्थिति में पिछला डाटा सुरक्षित नहीं रह पाता है।

रैम (RAM)
रैम (RAM)

2. रॉम (ROM): रॉम यानी रीड ओनली मेमोरी (Read Only Memory), जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि इसमें संग्रहीत आंकड़ों को उपयोगकर्ता पढ़ यानी इस्तेमाल तो कर सकता है, लेकिन इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। रॉम कंप्यूटर (Computer) निर्माता कंपनी की ओर से उपलब्धऐसा डाटा है, जिनकी उपयोगकर्ता को निरन्तर आवश्यकता होती है। इसमें संग्रहीत डाटा कभी मिटता या खत्म नहीं होता है।

रॉम (ROM)
 रॉम (ROM)

3. कैश मेमोरी (Cache Memory): कैश भी रैंडम एक्सेस मेमोरी के समान है, लेकिन इन दोनों में मुख्य अंतर यह है कि रैम जहां कंप्यूटर (Computer) सिस्टम में स्टोर रहती है, कैश मेमोरी गतिशील होती है और इसे सर्वर में स्टोर किया जाता है। दोनों का उपयोग और कार्यशैली समान ही होते हैं, लेकिन कंप्यूटर (Computer) इस मेमोरी का उपयोग अधिकतर हाल में देखे गए वेब पेजों को याद रखने में करता है।

4. बाहरी मेमोरी (External Memory) -

कंप्यूटर (Computer) की भीतरी या मुख्य मेमोरी की अपनी कुछ सीमाएं होती हैं। हर कंप्यूटर (Computer) को अलग मेमोरी क्षमता से डिजाइन किया जाता है। लेकिन अकसर यह होता है कि डाटा या आंकड़े इतने अधिक हो जाते हैं कि उन्हें कंप्यूटर (Computer) में ही संग्रहीत रख पाना संभव नहीं हो पाता। या कई बार जरूरत यह होती है कि कंप्यूटर (Computer) में दर्ज परिणामों का इस्तेमाल कहीं और करना होता है। ऐसे में बाहरी मेमोरी (External Memory) मददगार साबित होती है। शायद यही वजह है कि इस मेमोरी को सहायक मेमोरी (Auxilliary Memory) भी कहा जाता है। हम सभी लोग इस तरह की मेमोरी का अकसर दैनन्दिन जीवन में उपयोग करते हैं। फ्लॉपी, पेनड्राइव, सीडी, डीवीडी, हार्ड डिस्क आदि कंप्यूटर (Computer) की सहायक मेमोरी ही हैं। इनमें सैकड़ों-हजारों गीगाबाइट तक आंकड़े, सूचनाएं, गणनाएं, परिणाम आदि संग्रहीत कर रखे जा सकते हैं।

5. इनपुट (Input) -

यह तो हम स्पष्ट रूप से जानते हैं कि कंप्यूटर (Computer) कोई भी कार्य उपयोगकर्ता की ओर से दिए जाने वाले निर्देशों के पालन के अनुक्रम में करता है। ऐसे में इनपुट कंप्यूटर (Computer) की वह इकाई है, जिसकी मदद से उपयोगकर्ता सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट यानी सीपीयू तक अभीष्ट निर्देश पहुंचा पाता है। उपयोगकर्ता की ओर से कंप्यूटर (Computer) को निर्देश देने की इस प्रक्रिया को ही इनपुट कहा जाता है। कंप्यूटर (Computer) को इनपुट देने के लिए उपयोगकर्ता कुछ उपकरणों (Devices) का इस्तेमाल करता है, जिन्हें इनपुट डिवाइस भी कहा जाता है। मसलन, हम जब कंप्यूटर (Computer) पर टाइपिंग करते हैं तो हम उसके लिए की-बोर्ड (Key Board) पर टाइप करते हैं। इस तरह की-बोर्ड कंप्यूटर (Computer) के लिए एक इनपुट डिवाइस है, क्योंकि यह उपयोगकर्ता की ओर से टाइप किए जाने वाले अक्षर-अंक की जानकारी कंप्यूटर (Computer) के सीपीयू को पहुंचाता है। की-बोर्ड के अलावा माउस, जॉयस्टिक, लाइट पेन, माइक, स्कैनर आदि भी इनपुट डिवाइस हैं।

माउस
माउस

की-बोर्ड (Key Board)
की-बोर्ड

6. आउटपुट (Output) -

उपयोगकर्ता जो भी इनपुट कंप्यूटर (Computer) को देता है वह सीपीयू में जाकर प्रोसेस किया जाता है। जो परिणाम कंप्यूटर (Computer) उपयोगकर्ता तक पहुंचाता है, उसे आउटपुट कहा जाता है। आउटपुट पाने में कुछ मशीनें या उपकरण कंप्यूटर (Computer) के सहायक होते हैं। इन मशीनों या उपकरणों पर उपयोगकर्ता अपनी ओर से दिए गए निर्देशों के परिणाम कंप्यूटर (Computer) के स्तर पर की जाने वाली डाटा प्रोसेसिंग के बाद हासिल कर पाता है। इनमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण और सर्वाधिक इस्तेमाल की जाने वाली डिवाइस है मॉनीटर (Monitor) मॉनीटर पर ही हम हर परिणाम देख-सुन सकते हैं। इसके अलावा प्रिंटर, स्पीकर आदि भी आउटपुट डिवाइस हैं। 

प्रिंटर
प्रिंटर

स्पीकर
स्पीकर 


7. प्रोग्राम (Program) -

दैनिक जीवन में हम जो भी काम करते हैं, उनके लिए निश्चित और पूर्वनियत प्रक्रियाओं के एक समूह से गुजरते हैं। मसलन हमें नहाना है तो यह निश्चित है कि हम सबसे पहले बाथरूम तक पहुंचेंगे, नल खोलेंगे, बाल्टी लगाकर पानी भरेंगे और फिर नहाना शुरू करेंगे। ठीक इसी तरह कंप्यूटर (Computer) भी उपयोगकर्ता के लिए जो भी काम करता है, वह दरअसल आदेशों का एक ऐसे समूह के जरिये तय हो पाता है, जो पहले से कंप्यूटर (Computer) के सीपीयू में दर्ज हैं।

कंप्यूटर (Computer) पर हर कार्य के लिए अलग आदेश समूह व्यवस्थित रहता है। उदाहरण के लिए हम जब भी कंप्यूटर (Computer) पर कुछ काम करते हैं तो देखने में तो वह माउस के एक क्लिक पर चुटकी में हो जाता है, लेकिन दरअसल, प्रोसेसर तक माउस की वह एक क्लिक अभीश्ट काम से जुड़े आदेशों का समूह पहुंचाती है। ये आदेश चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर (Computer) की भीतरी मेमोरी में दर्ज रहते हैं और प्रोसेसिंग यूनिट उस पर बेहद तेजी से काम (Execution) करती है, जिससे सेकंड से भी कम समय के भीतर जरूरी परिणाम हमारे सामने आउटपुट डिवाइस यानी मॉनीटर या प्रिंटर पर उपलब्ध हो जाता है। किसी अभीष्ट कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने के लिए जरूरी आदेशों के समूह को कंप्यूटर (Computer) के लिए प्रोग्राम कहा जाता है।

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