ग्लोबल वार्मिग के प्रभाव

अनुक्रम
मुनुष्य के द्वारा पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो जाती है इसे ही भूतापन (Global Warming) कहते हैं। वातावरण में ग्रीन-हाऊस गैसें लगातार बढ़ रही हैं जिससे कि भूतापन की समस्या उत्पन्न हो गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रति दशक विश्व के ताप में 0.20c की वृद्धि होती जा रही है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है, कि शताब्दी के अंत तक पृथ्वी के औसत तापमान में 1.5 से 4.50c तक की वृद्धि हो सकती है। विश्व के तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है जैसे विश्व मौसम संगठन ने खोज कर निकाला कि सन् 1990, 1995, 1997 व 1998 सर्वाधिक गर्म वर्ष रहे। 

ग्लोबल वार्मिग के प्रभाव 

ग्लोबल वार्मिंग का पृथ्वी पर प्रभाव देखे गये हैं:-
  1. मनुष्य के ऊपर प्रभाव:- पृथ्वी पर तापमान बढ़ने से मध्य एवं उच्च अक्षांशों में रहने वाली जनसंख्या के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। अनेक लोगों की अकाल मृत्यु होगी व भविष्य में समुद्री तूफानों की संख्या में वृद्धि, बाढ़, अकाल, भुखमरी आदि से अधिक जनहानि की आशंका रहती है। 
  2. जन्तुओं पर प्रभाव:- जब वातावरण का ताप अधिक हो जाता है तो वे प्राणी जो अधिक ताप सहन नहीं कर पाते वे मर जाते हैं। ताप मान अधिक होने से समुद्री जल स्तर में वृद्धि तरवर्ती आंगों के सधन वनों व द्रीपों पर निवास करने वाले प्राणियों का जीवन खतरे में पड़ जायेगा। अनावृष्टि के कारण प्राकृतिक चरागाहों के नष्ट होने से चरागाहों पर निर्भर जीवों की हानि होगी। 
  3. कृषि क्षेत्र पर प्रभाव:- वातावरण का ताप बढ़ने से ध्रवों पर बर्फ पिघल जायेगी और समुद्री जल-स्तर में वृद्धि होने तथा समुद्री तूफानों की आवृत्ति बढ़ने से समुद्र तटीय भागों की उपजाऊ भूमि में अनेक जहरीले लवण घुल जायेगे और भूमि बंजर हो जायेगी। 
  4. समुद्रीय जल स्तर में वृद्धि:- वायु प्रदूषण से वायुमंडल के ताप में लगातार वृद्धि होती जा रही है जिससे ध्रुवों पर बर्फ पिघल जायेगी और समुद्री जलस्तर में 1.5 मीटर तक की वृद्धि हो सकती है। 
  5. एलनिनो प्रभाव:- सम्पूर्ण विश्व में जब तापमान बढ़ जाता है तो वायुदाव कम हो जाता है जिससे एलनिनो प्रभाव बढ़ जाता है। ये एक जलवायु चक्र होता है जिसमें वर्ष के निश्चित समय पर पूर्वी प्रशांत महासागर पीरू के पास व गलापागोस द्वीप के चारों और तापमान की वृद्धि होने से समुद्री जल में उफान आ जाता है यदि यह उफान हल्का होता है तो इसके प्रभाव सीमित होता है। यदि उफान तेज होता है तो विस्तृत क्षेत्रों 25 में जलवायु को प्रभावित करता है जैसे कि हिंद महासागर के जल के गर्म होने पर सोमालिया व दक्षिणी इथोपिया में इसके परिणामस्वरूप बाढ़ आ गई थी सन् 1997 -98 में होने वाले एलनिनो से विश्व में लगभग 24000 लोगों की मौत हुई व 340 लाख अमरीकी डॉलर की क्षति हुई। 
  6. हिमनदों पर प्रभाव:- विश्व के तापमान में वृद्धि होने से बर्फ के पिघलने की दर बढ़ती जा रही है। और उनके आकार, लंबाई व चौड़ाई में कमी आती जा रही है विश्वव्यापी ताप मान बढ़ने से हिमालय के हिमनद हिम झीलों में बदलते जा रहे हैं। सन् 2025 तक हिमालय के सभी हिमनद नष्ट हो जायेगे जिससे विकराल बाढ़ की स्थिति बन जायेगी अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान न्यू सांइसिस्ट के अनुसार मार्च 2002 में लंदन के वैज्ञानिको ने सुदूर संवेदन उपग्रह से प्राप्त आंकड़ो के आधार पर बताया है कि अंटार्फटिका के पूर्वी प्रायद्वीपीय भाग से जुड़ा लार्सन बी हिमनद टूट गया है। विश्व तापमान बढ़ने से 1250 वर्ग मील क्षेत्रफल तथा 650 फुट मोटाई वाली बर्फ की इस चÍान के टूटने को विश्व के लिए खतरा बताया जा रहा है। 
  7. अन्य प्रभाव:- विश्व के तापमान में वृद्धि से जलवायु में परिवर्तन और इस परिवर्तन से तूफान अतिवृष्टि आदि आकस्मिक घटनाएं बढ़ती जाती हैं जिनका प्रभाव मनुष्य के आवास, परिवहन, ऊर्जा स्त्रोत तथा स्वास्थ्य पर पड़ता है।

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