भविष्य निधि क्या है?

अनुक्रम
भविष्य निधि कर्मचारी के लिए एक प्रकार से सामाजिक सुरक्षा योजना है जिसके द्वारा सेवा-निवृत्ति के पश्चात उनके जीवन-निर्वाह की व्यवस्था की जाती है। भविष्य निधि योजना में प्रत्येक कर्मचारी का अलग-अलग खाता खुला हुआ होता है जिसमें नियोक्ता एवं कर्मचारी दोनों अंशदान करते हैं। कर्मचारी के वेतन में से एक निश्चित राशि प्रति माह काटकर नियोक्ता द्वारा इस खाते में जमा करायी जाती है, जिसे कर्मचारी का अंशदान कहते हैं। इसी प्रकार नियोक्ता भी अपने पास से कुछ राशि इस निधि के लिए देता है जो नियोक्ता का अंशदान कहलाता है। कर्मचारी के सेवा-निवृत्त हो जाने या नौकरी छोड़ने पर इस निधि में एकत्रित राशि ब्याज सहित कर्मचारी को दे दी जाती है। सेवाकाल में कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर इस निधि की राशि उसके वैधानिक उत्तराधिकारी को दे दी जाती है। भविष्य निधि खाते (Provident Fund Accounts) तीन प्रकार के होते हैं-
  1. वैधानिक भविष्य निधि (Statutory Provident Fund i.e. SPF) :- भविष्य निधि अधिनियम, 1925 (The Provident Fund Act, 1925) के अन्तर्गत रखी गयी भविष्य निधि को वैधानिक भविष्य निधि कहा जाता है। सरकारी व अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं तथा कार्यालय, मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं, विश्वविद्यालयों एवं स्थानीय सत्ताओं द्वारा इसी अधिनियम के अन्तर्गत भविष्य निधि खाते रखे जाते हैं।
  2. प्रमाणित भविष्य निधि (Recognised Provident Fund i.e. RPF) :- ऐसी भविष्य निधि को जिसे आयकर आयुक्त द्वारा प्रमाणित कर दिया गया है प्रमाणित भविष्य निधि कहा जाता है। कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 (The Employees Provident Fund Act, 1952) के अन्तर्गत रखी गयी भविष्य निधि को भी प्रमाणित भविष्य निधि कहा जाता है। ऐसी भविष्य निधियां व्यापारिक संस्थाओं एवं कम्पनियों द्वारा रखी जाती है।
  3. अप्रमाणित भविष्य निधि (Unrecognised Provident Fund i.e. URPF) :- संस्थाओं में कर्मचारियों के लिए रखी गयी ऐसी भविष्य निधि जो आयकर आयुक्त द्वारा प्रमाणित नहीं की गयी हो, अप्रमाणित भविष्य निधि कहलाती है।

भविष्य निधि के सम्बन्ध में आयकर अधिनियम के प्रावधान

वार्षिक वृद्धि के सम्बन्ध में- 

प्रत्येक वर्ष भविष्य निधि में कर्मचारी के अंशदान, नियोक्ता के अंशदान तथा एकत्रित शेष पर जमा होने वाले ब्याज के कारण वृद्धि होती है। वार्षिक वृद्धि की राशि में से कर योग्य राशि निम्न प्रकार ज्ञात की जाती है-
  1. कर्मचारी के अंशदान के कारण वृद्धि- कर्मचारी का अंशदान उसके वेतन में से काटा जाता है। कर्मचारी के लिए ऐसी कटौती घटाने के पूर्व का वेतन कर योग्य होता है। यदि कर्मचारी द्वारा भविष्य निधि में दिया गया अंशदान घटाकर शेष वेतन की राशि दी गयी है तो प्राप्त वेतन में कर्मचारी का अंशदान जोड़कर वेतन की सकल आय मानी जायेगी।
  2. नियोक्ता के अंशदान के कारण वृद्धि- वैधानिक भविष्य निधि तथा अप्रमाणित भविष्य निधि में नियोक्ता का अंशदान जमा होने पर पूर्णतया कर मुक्त होता है। प्रमाणित भविष्य निधि में नियोक्ता का अंशदान कर्मचारी के वेतन के 12% तक ही कर मुक्त होता है तथा इससे अधिक राशि वेतन शीर्षक में कर योग्य होती है।
  3. एकत्रित शेष पर जमा होने वाालाा ब्याज- वैधानिक तथा अप्रमाणित भविष्य निधि में गत वर्ष में जमा होने वाला ब्याज पूर्णतया कर मुक्त होता है। परन्तु प्रमाणित भविष्य निधि में 9-5% वार्षिक दर तक जमा होने वाले ब्याज की राशि कर मुक्त होती है, शेष राशि कर योग्य होती है।

सेवा-निवृत्ति पर भविष्य निधि से प्राप्त होने वाली एक मुश्त राशि-

सेवा निवृत्ति पर कर्मचारी को प्राप्त होने वाली एक मुश्त राशि को कर-योग्य आय में सम्मिलित करने के सम्बन्ध में नियम इस प्रकार हैं-
  1. वैधानिक भविष्य निधि- वैधानिक भविष्य निधि से प्राप्त सम्पूर्ण राशि प्रत्येक स्थिति में कर मुक्त होती है।
  2. अप्रमाणित भविष्य निधि- अप्रमाणित भविष्य निधि से प्राप्त एक-मुश्त राशि में से नियोक्ता के अंशदान एवं इस पर ब्याज की राशि कर्मचारी के वेतन शीर्षक में कर-योग्य होती है। कर्मचारी के अंशदान की प्राप्त राशि पूर्णतया कर-मुक्त होती है तथा कर्मचारी के अंशदान पर ब्याज की प्राप्त राशि ‘अन्य साधनों में आय’ शीर्षक में कर-योग्य होती है न कि वेतन शीर्षक में । 
  3. प्रमाणित भविष्य निधि- प्रमाणित भविष्य निधि से प्राप्त एक मुश्त राशि निम्नलिखित शर्तों की पूर्ति करने पर पूर्णतया कर-मुक्त होती है: (क) कर्मचारी ने अपने नियोक्ता के यहाँ पर लगातर पाँच या अधिक वर्षों तक सेवा की हो या (ख) यदि उसने लगातार पाँच वर्ष तक कार्य नहीं किया हो, परन्तु उसकी अस्वस्थता के कारण अथवा उसके नियोक्ता के व्यापार के बन्द हो जाने के कारण अथवा अन्य किसी ऐसे कारण से उसकी सेवायें समाप्त कर दी गई हों जो कर्मचारी के नियन्त्रण में नहीं हों, या (ग) कर्मचारी ने अपनी नौकरी समाप्त होने के बाद किसी दूसरे नियोक्ता के यहाँ नौकरी कर ली हो और उसे प्रमाणित भविष्य निधि खाते का शेष उस दूसरे नियोक्ता द्वारा रखे गये प्रमाणित निधि खाते में हस्तांतरित कर दिया गया हो।

स्पष्टीकरण-

  1. यदि प्रमाणित भविष्य निधि के एकत्रित शेष का कुछ भाग ही दूसरे नियोक्ता के यहाँ हस्तांतरित किया जाता है और शेष राशि कर्मचारी प्राप्त कर लेता है तो ऐसी हस्तांतरित राशि ही कर-मुक्त होगी। प्राप्त की गई राशि तभी कर-मुक्त होगी जबकि वह उपर्युक्त (क) अथवा (ख) के अन्तर्गत कर-मुक्त हो। (धारा 10 (12)) 
  2. 5 वर्ष की अवधि की गणना में एक या एक से अधिक नियोक्ताओं के यहाँ कर्मचारी की सेवा की अवधि को सम्मिलित किया जायेगा, यदि कर्मचारी के एक नियोक्ता को छोड़कर दूसरे नियोक्ता के यहाँ सेवा करने पर उसका प्रमाणित भविष्य निधि खाता भी नये नियोक्ता के यहाँ हस्तांतरित हो जाये।
  3. 5 वर्ष की अवधि की गणना में एक या एक से अधिक नियोक्ताओं के यहाँ कर्मचारी की सेवा की अवधि को सम्मिलित किया जायेगा, यदि कर्मचारी के एक नियोक्ता को छोड़कर दूसरे नियोक्ता के यहाँ सेवा करने पर उसका प्रमाणित भविष्य निधि खाता भी नये नियोक्ता के यहा हस्तांतरित हो जाये। 
यदि कर्मचारी को उपर्युक्त नियमों के अनुसार प्रमाणित भविष्य निधि से प्राप्त राशि कर मुक्त नहीं होती है तो कर्मचारी के स्वयं के अंशदान की प्राप्त राशि कर मुक्त होगी तथा इस अंशदान पर प्राप्त ब्याज की राशि अन्य साधनों से आय शीर्षक में कर योग्य होगी। नियोक्ता का अंशदान एवं इस पर ब्याज की प्राप्त राशि कर्मचारी के वेतन शीर्षक में कर योग्य होगी।

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