मृदा का वर्गीकरण

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मृदा का वर्गीकरण मिट्टी जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, मिट्टी में भी भूमि की सबसे ऊपरी सतह (20 से 25 सेमी0) विशेष महत्व की है क्योंकि यही मानव जीवन, पेड़-पौधें तथा दूसरे शब्दों में प्राणी जगत के अस्तित्व का मूल आधार है।

मृदा का वर्गीकरण

बलुई दोमट मिट्टी

बलुई दोमट मिट्टी जिसमें बालू, सिल्ट एवं चीका की आपेक्षित मात्रा का प्रतिशत क्रमश: 65, 25 एवं 10 प्रतिशत है। इसमें नेत्रजन की मात्रा 40 से 45 प्रतिशत तक मिलती है। 2. दोमट मिट्टी:-दोमट मृदा प्रमुख रूप से बालू एवं सिल्ट का सम्श्रिण है जिसमे बालू की मात्रा 45 प्रतिशत, सिल्ट 40 प्रतिशत एवं चीक 23 प्रतिशत पाया जाता है। मध्यम उर्वरता की यह मृदा कृषि उद्यम के लिए आदर्श होती है। छोटे बालू कणों की उपस्थिति के कारण यह भुरभुरी होती है, जिसमें हल चलाना सुगम एवं जल वायु का संचालन अत्यन्त सुगम होता है।

मटियार दोमट मिटटी

यह सूक्ष्मदर्शी  कणों का समूहन है, जिसकी ऊपरी सतह का रंग हल्का भूरा, पीला एवं हल्का काला होता है। इसमें दोमट मिट्टी की तुलना में चीका की मात्रा अधिक पायी जाने के कारण नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है। इसमें बालू की मात्रा 28 प्रतिशत, सिल्ट की मात्रा 37 प्रतिशत एवं चीका की मात्रा 35 प्रतिशत होती है। नाइट्रोजन की अधिकतर 50-60 प्रतिशत होने के कारण प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक होता है। यह अति गहरी एवं आन्तरिक अवरोधयुक्त भारी मृदा है। जिसका अम्ल अनुपात उदासीन से साधारण क्षारीय होता है, तथा इसका जल निकास खराब होता है। इसमें धान की खेती के साथ मत्स्यपालन एवं सिंघाड़ा की खेती लाभप्रद होती है।

कछारी मिट्टी

इसमें जीवांश एवं मटियार कणों की विशेष कमी होती है। फलत: इसमें लचीलापन एवं तन्मयता बिल्कुल नहीं होती है। गंगा के बाढ़ द्वारा प्रतिवर्ष नवीन मृदा की परत जमा होती है, जिससे इसकी उर्वरता का ह्रास नहीं होता है।

ऊसर (लवणीय) मिट्टी

भारत के उत्तरी मैदान में कहीं-कहीं ऊसर भूमि देखी जाती है यह ऐसी भूमि है जो कृषि के लिए उपयुक्त नहीं होती। भूमि के ऊपर सफेद रंग का क्षारीय पदार्थ बिछा हुआ मिलता है। इस क्षारीय पदार्थ की अधिकता के कारण भूमि बेकार हो जाती है। ऐसी भूमि को उत्तर प्रदेश में ‘रेहू’ यो ‘ऊसर’ पंजाब में ‘राखर’ या ‘थर’ और महाराष्ट्र में ‘चोपान’ या कैल कहते हैं। इस मिट्टी के उत्पत्ति के प्रमुख कारणों में जल एकत्रित होना, वर्षा की न्यूनता, उच्च जल-तल, मन्द ढाल एवं शुष्कता है। कुण्डा तहसील में यह मिट्टी उन भागों में पायी जाती है जहां वर्षाकालीन जल जमाव रहता है।

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Unknown

Feb 2, 2019, 2:31 pm Reply

Good

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