साक्षात्कार क्या है? साक्षात्कार की तैयारी कैसे करें?

By Bandey 5 comments
सामान्यत: दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी विशेष उद्देश्य से
आमने-सामने की गयी बातचीत केा साक्षात्कार कहा जाता है। साक्षात्कार एक
प्रकार की मौखिक प्रश्नावली है जिसमें हम किसी भी व्यक्ति के विचारों और
प्रतिक्रियाओं केा लिखने के बजाय उसके सम्मुख रहकर बातचीत करके प्राप्त
करते हैं।

साक्षात्कार एक आत्मनिष्ठ विधि है इसके माध्यम से प्राप्त सूचनाओं की
सार्थकता एवं वैधता साक्षात्कारकर्ता पर निर्भर करती है। सूचना संकलन की इस
विधि के प्रयोग में साक्षात्कारकर्ता के लिए दक्षता अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि
साक्षात्कार से प्राप्त आंकड़े सरलता से पक्षपातपूर्ण बन सकते हैं। साक्षात्कार में
साक्षात्कारकर्ता वार्तालाप के साथ-साथ शाब्दिक के अर्थपूर्ण तथा अशाब्दिक
प्रतिक्रयाओं (इशारा करना तथा मुखमुद्रा) का भी प्रयोग करता है। साक्षात्कार को
विद्वानों ने परिभाषित किया है- गुड् एव हैट के अनुसार – ‘‘ किसी उद्देश्य से किया गया गम्भीर वातार्लाप ही साक्षात्कार है।’’ डेजिन ने साक्षात्कार को इस पक्रार परिभाषित किया है – ‘‘साक्षात्कार आमने-सामने किया गया एक संवादोचित आदान-प्रदान है जहां एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से कुछ सूचनाएं प्राप्त करता है।’’ उपरोक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि सभी प्रकार के साक्षात्कारों में  तीन विशेषताएं पायी जाती हैं।

  1. दो व्यक्तियों के मध्य सम्बन्ध।
  2. एक दूसरे से सम्पर्क स्थापित करने का साधन।
  3. साक्षात्कार से सम्बन्धित दोनों व्यक्तियों में से एक व्यक्ति को साक्षात्कार
    के उद्देश्य के विषय में संज्ञान।

साक्षात्कार के तीन प्रमुख अवयव होते हैं –

  1. साक्षात्कारकर्त्ता
  2. साक्षात्कार हेतु प्रश्न
  3. साक्षात्कार देने वाला
    दो व्यक्तियों के बीच यदि बातचीत निरूद्देष्य है तो उसे साक्षात्कार
    नहीं कहा जा सकता।

साक्षात्कार के प्रकार

शोध वैज्ञानिकों ने साक्षात्कार के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया है।
साक्षात्कार को मूलत: कार्य या उद्देश्य के आधार पर तथा रचना के आधार पर
विभिन्न भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
कार्य या उद्देश्य के आधार पर साक्षात्कार के मुख्य प्रकार
बताए गये हैं –

चयनात्मक साक्षात्कार – 

जब साक्षात्कार का प्रयोग किसी भी जीविका में नवीन नियुक्ति हेतु चयन
के लिए किया जाता है तो इस प्रकार के साक्षात्कार को चयनात्मक साक्षात्कार
कहा जाता है। इस प्रकार के साक्षात्कार में साक्षात्कार प्रदाता से उस जीविका में
उपयुक्तता से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं। साक्षात्कारकर्ता कुछ ऐसे प्रश्न पूछता
है जिसके आधार पर साक्षात्कार प्रदाता की अभिवृत्ति, अभिक्षमता, योग्यताओं,
आचरण आदि के बारे में आसानी से जाना जा सकता है। इस तरह के साक्षात्कार
का मूल उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि साक्षात्कार प्रदाता कहां तक अपनी
अभिवृत्ति, अभिक्षमता, योग्यताओं के आधार पर अमुक नौकरी के लिये योग्य
होगा।

शोध साक्षात्कार – 

इस प्रकार के साक्षात्कार में किसी विषय पर विभिन्न व्यक्तियों के
विचारों केा जानने का प्रयास किया जाता है। इस प्रकार साक्षात्कार लेने वाले
व्यक्ति की रूचि उन तथ्यों में होती है जो कि साक्षात्कार लेने वाले व्यक्ति की
रूचि उन तथ्यों में होती है जो कि साक्षात्कार देने वाले के विचारों में सम्मिलित
है। इसके लिए कुछ ही प्रतिनिधि व्यक्तियों को छांटकर केवल उन्हीं का
साक्षात्कार किया जाता है। इन प्रतिनिधि व्यक्तियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार
पर पूर्ण जनसंख्या के विचारों के बारे में अनुमान लगाया जाता है। इसलिए इसे
न्यादर्श साक्षात्कार भी कहा जाता है। इस प्रकार के साक्षात्कार का मुख्य उद्देश्य
शोध समस्याओं के प्रस्तावित समाधान के बारे में एक विस्तृत ब्यौरा तैयार करना
होता है। इस तरह का शोध अधिकतर उन वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है जो
किसी विशेष समस्या का उत्तर तुरन्त पा लेना चाहते है।

निदानात्मक साक्षात्कार – 

इस प्रकार के साक्षात्कार के माध्यम से साक्षात्कारकर्ता बालक या किसी
व्यक्ति की समस्या के विषय में आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करता
है। किसी विद्यालय में शिक्षक द्वारा छात्रों के किसी विशेष समस्या के विषय में
सूचनाएं एकत्र करने के लिये प्रयुक्त साक्षात्कार इस प्रकार के साक्षात्कार का
उदाहरण है।

उपचारात्मक साक्षात्कार – 

निदानात्मक साक्षात्कार के बाद जब किसी छात्र की समस्या तथा उसके
विषय में सूचनाएं एकत्र कर ली जाती हैं तो उपचारात्मक साक्षात्कार में व्यक्ति
से इस प्रकार का वार्तालाप किया जाता है कि उसको अपनी चिन्ताओं तथा
समस्याओं से मुक्त किया जा सके तथा समायोजन सही तरीके से हो सके।

तथ्य संकलन साक्षात्कार – 

इस साक्षात्कार में व्यक्ति या व्यक्तियों के समुदाय से मिलकर तथ्य
संकलित किए जाते हैं। षिक्षक इसी साक्षात्कार द्वारा छात्रों के सम्बन्ध में तथ्य
एकत्रित करते हैं। इसके तीन प्रमुख उद्देश्य हैं-

  1. अन्य विधियों द्वारा संग्रहीत किये गये तथ्यों में अपूर्णताओं, न्यूनताओं या
    कमियों को पूर्ति करना। कुछ तथ्य अन्य विधियों द्वारा प्राप्त नहीं हो पाते
    हैं। साक्षात्कार में उन सूचनाओं को एकत्रित करने का प्रयत्न किया जाता
    है जो मनोवैज्ञानिक जांचों द्वारा प्राप्त नहीं हो पाती है।
  2. पहले से संकलित की गयी सूचनाओं की पुष्टि करने के लिए तथ्य
    संकलन साक्षात्कार किया जाता है।
  3. तथ्य संकलन साक्षात्कार का तीसरा उद्देश्य शारीरिक रूप से अवलोकन
    करना है। बहुत से छात्रों में अनेक शारीरिक दोश पाये जाते हैं जिनका
    ज्ञान मनोवैज्ञानिक जांचों से नहीं हो सकता है। इसके साथ ही साक्षात्कार
    देने वाले व्यक्ति का बातचीत करने तथा आचरण करने के ढंग का ज्ञान
    होता है।

रचना के आधार पर साक्षात्कार दो प्रकार का होता है –

  1. संरचित साक्षात्कार-
    संरचित साक्षात्कार में साक्षात्कारकर्ता साक्षात्कार प्रदाता से पूर्व निर्धारित
    प्रश्नों को एक निश्चित क्रम में पूछता है तथा विषयी द्वारा दिए गये उत्तरों को
    एक मानवीकृत फार्म में रिकार्ड किया जाता है। इस तरह से इस साक्षात्कार में
    साक्षात्कार देने वाले सभी व्यक्तियों से एक ही तरह के प्रश्न एक निश्चित क्रम
    में पूछकर साक्षात्कारकर्ता एक खास निश्कर्ष पर पहुँचने की कोशिश करते हैं।
  2. असंरचित साक्षात्कार –
    असंरचित साक्षात्कार में साक्षात्कारकर्ता, साक्षात्कार देने वाले व्यक्तियों से
    जेा प्रश्न पूछता है, पूर्व निर्धारित नहीं होता हेै और न तो वह किसी निश्चित क्रम
    में ही पूछे जाते हैं। इसमे साक्षात्कार प्रदाता केा अपनी प्रतिक्रिया को व्यक्त करने
    के लिए स्वतन्त्र छोड़ दिया जाता है। साक्षात्कार में जितना लचीलापन होना है,
    उसके ऑकड़ो केा विश्लेशित करना उतना ही कठिन कार्य है।

अच्छे साक्षात्कारकर्ता के गुण

साक्षात्कार एक आत्मनिष्ठ विधि है जिसके कारण इसके परिणाम पक्षपातपूर्ण
हो जाते हैं। साक्षात्कार में सफलता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि
साक्षात्कारकर्ता में अच्छे गुण हों। एक अच्छे साक्षात्कारकर्त्ता में निम्नलिखित गुण
पाये जाने चाहिए।

  1. साक्षात्कारकर्त्ता को अपनी बात सीधी एवं स्पष्ट शब्दों में करनी चाहिए।
    साक्षात्कार देने वाले पर यह प्रभाव डाले कि वह उसमें अधिक रूचि
    रखता है।
  2.  साक्षात्कारकर्त्ता केा छात्र की अच्छी या बुरी बातों पर आश्चर्य प्रकट नहीं
    करना चाहिए। छात्र की सभी त्रुटियों, कमियों केा “ाान्तिपूर्ण सुनना
    चाहिए।
  3. तनावपूर्ण स्थिति को समाप्त करने के लिए साक्षात्कारकर्त्ता केा हंसमुख
    होना चाहिए।
  4. साक्षात्कारकर्त्ता केा वार्तालाप पर एकमात्र अधिकारी नहीं करना चाहिए।
    वार्तालाप के समय अगर साक्षात्कार देने वाला बोल रहा है तो यह प्रयास
    करना चाहिए कि उसे बीच में न रोका जाए या अपनी बात न कही जाए।
  5.  साक्षात्कारकर्त्ता को धैर्यवान होना चाहिए। साक्षात्कार प्रदाता केा ऐसा
    लगना चाहिए कि साक्षात्कारकर्त्ता उसकी बातों में रूचि ले रहा है और
    सद्भावना पूर्ण व्यवहार कर रहा है।
  6. साक्षात्कार प्रदाता कि भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
    साक्षात्कारकर्त्ता यदि ऐसा करेगा तो साक्षात्कार प्रदाता अपने संदेहों को
    निर्विकार रूप से व्यक्त कर सकेगा।
  7. साक्षात्कारकर्त्ता को यह प्रयास करना चाहिए कि साक्षात्कार प्रदाता का
    उस पर विष्वास बना रहे। साक्षात्कार प्रदाता से बिना पूछे साक्षात्कार के
    विषय में किसी और से बात नहीं करनी चाहिए।

साक्षात्कार के लाभ एवं परिसीमायें

  1. साक्षात्कार विधि केा प्रयोग में लाना सरल है।
  2. छात्रों की अन्तदर्ृश्टि केा विकसित करने में सहायक होती है।
  3. सम्प्ूार्ण व्यक्ति को समझने में यह विधि उत्तम है। व्यक्ति केी अभिवृत्ति,
    संवेग विचार आदि सभी का अध्ययन होता है।
  4. साक्षात्कार देने वाले केा अपनी समस्याएं प्रकट करने का साक्षात्कार
    अच्छा अवसर प्रदान करता है।
  5. निशेधात्मक भावनाओं केा स्वीकार करने तथा उनकेा स्पष्ट करने का
    अवसर साक्षात्कार में प्राप्त होता है।
  6. विभिन्न दषाओं और परिस्थितियों में साक्षात्कार का प्रयोग करने के लिए
    उसे लचकदार बनाया जा सकता है। 
  7. साक्षात्कार की प्रकृति लचीली होती है। किसी महत्वपूर्ण बात को ध्यान
    में रखकर आगे बढ़ा जा सकता है। इस प्रकार व्यक्तित्व के किसी
    विशिष्ट पक्ष के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  8. इस विधि के दौरान ऐसे प्रश्नों केा स्पष्ट किया जा सकता है जो व्यक्ति
    के समझ में न आ रहे हों।
  9. इसी प्रकार ऐसे उत्तरों के विषय में स्पष्टीकरण प्राप्त किया जा सकता
    है जो साक्षात्कारकर्ता के समझ में न आ रहा हो।
  10.  इसके द्वारा व्यक्तियेां से ऐसी सूचनाएं प्राप्त की जा सकती है जो लिखित
    रूप से प्राप्त करना सम्भव न हो। 
  11. बातचीत के दौरान साक्षात्कारकर्ता व्यक्ति की अनिच्छा, असहयोग,
    इत्यादि मनोभावों का भी अवलोकन कर सकता है, जिनके आधार पर
    उत्तरों की वैधता जान सकता है।

साक्षात्कार की परिसीमाएं –

साक्षात्कार की कुछ कमियां भी पायी जाती है, जो  है-

  1. यह एक आत्मनिष्ठ विधि है जिससे परिणामों में संगतता होने की
    सम्भावना में कमी आती है।
  2. आवश्यक प्रशिक्षण के अभाव में साक्षात्कारकर्ता केा सही तरीके से
    व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए तथ्य एकत्रित करने में कठिनाइ का अनुभव
    करता है।
  3. साक्षात्कार प्रदाता अपने उत्तरों केा देते समय साक्षात्कारकर्ता की जाति,
    पद, लिंग, आदि का ध्यान रखता है, इस कारण उसके उत्तर स्वाभाविक
    न रहकर कृत्रिम एवं साक्षात्कारकर्ता को प्रसन्न करने वाले बन जाते हैं।
  4. जब अनेक व्यक्तियों से सूचनाएं एकत्रित करनी हो या एक ही व्यक्ति के
    व्यक्तित्व के अनेक पक्षों का मूल्यांकन करना हो तो इस प्रविधि को
    अपनाने में बहुत अधिक समय खर्च हेाता है।
  5. विभिन्न माध्यम व अन्तक्रियाऐं भी साक्षात्कारकर्ता को प्रभावित करती हैं।
    सभी व्यक्तियों पर अपने समाज के मान्यताओं, धारणाओं एवं विष्वासों का
    प्रभाव रहता है और यदि साक्षात्कारकर्ता तथा साक्षात्कार-प्रदाता की
    सामाजिक पृष्ठभूमि में अन्तर हो तो इसके परिणामों की वैधता में कमी
    आती है।
  6. साक्षात्कारकर्ता द्वारा वार्तालाप को लिपिबद्ध करने के कारण व्यक्ति उत्तर
    देते समय अपने कथनों के द्वारा प्रत्यक्ष समर्थन प्रकट नहीं करता। वह
    गोल-गोल उत्तरों के माध्यम से स्वयं केा एक सुरक्षित स्थिति में रखने की
    कोशिश करता है।

साक्षात्कार की वैधता तथा विश्वसनीयता

किसी भी साक्षात्कार की सफलता के लिए आवश्यक है कि वह वैध तथा
विष्वसनीय हो। किसी साक्षात्कार की वैधता तब बढ़ जाती है जब साक्षात्कार एक
अच्छे एवं पूर्व निर्धारित संरचना में निर्मित किया गया हो ताकि यह सुनिश्चित
किया जा सके कि वास्तव में सार्थक सूचनाओं का संकलन किया गया हो। इसे
हम विषय वस्तु वैधता कहते हैं। सम्बन्धित क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नों के चयन
में सहायता लेने से भी वैधता बढ़ती है।

किसी साक्षात्कार की विश्वसनीयता का मूल्यांकन किसी अन्य समय के
साक्षात्कार में प्रश्नों के थोड़े से भिन्न प्रारूप में पूंछकर किया जा सकता है। किसी
अन्य समय में साक्षात्कार तो पुन: आयोजित करने पर भी प्रतिक्रियाओं में संगतता
का मापन किया जा सकता है। यदि एक से अधिक साक्षात्कारकर्ताओं का प्रयोग
हुआ है तो विभिन्न साक्षात्कारकर्ताओं के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं के मध्य
विष्वसनीयता स्थापित करना आवश्यक है।

साक्षात्कार की तैयारी कैसे करें?

व्यक्तिगत साक्षात्कार की पूरी प्रक्रिया को तीन अलग-अलग चरणों में बॉंट सकते है:-

  1. साक्षात्कार के लिए तैयारी
  2. साक्षात्कार के दिन, और
  3. साक्षात्कार के समय

साक्षात्कार के लिए तैयारी-

ऐसी अवस्था में आपको कार्य करने का परामर्श दिया जाता हैं :

  1. वर्तमान मामलों एवं घटनाक्रमों, वर्तमान महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय समस्याओं एवं सामान्य रोचक विषयों के सम्बन्ध में पूरा ज्ञान प्राप्त करें यह आप समाचार पत्रों के नियमित पाठन, रेडियो सुनने तथा टेलीविजन पर चर्चा को देख कर सकते है। 
  2. संगठन से संबंधित सूचनाएं जैसे मुख्य कार्य, पृष्ठभूमि, विस्तार एवं अधिग्रहण योजनाएं आदि एकत्रित करें। ये सभी सूचनाएं संगठन की वार्षिक रिपोर्ट अथवा उसकी वैबसाइट से प्राप्त की जा सकती हैं। 
  3.  जिस पद के लिये आवेदन किया है। उसके कार्यों का विवरण एवं उस के सम्बन्ध मे ज्ञान प्राप्त करें। 
  4.  अपनी विशेषज्ञता क्षेत्र के ज्ञान को ताजा करना चाहिए अपने अध्ययन किए गए विषयों की पुनरावृत्ति करें।
  5. अपनी योग्यताओं एवं कमियों की सूची तैयार कर लें। 
  6. यदि संभव हो तो साक्षात्कार स्थल को जाकर देख लें। पहले से उस स्थल को देखने से साक्षात्कार के दिन समय की पाबन्दी को सुनिश्चित करने है तथा घबराहट को कम करने में मदद मिलती है। 
  7.  अपने सभी प्रलेख एवं प्रमाण-पत्रों को साक्षात्कार के लिये प्राप्त हुए आमन्त्रण पत्र सहित एक फोल्डर में सहेज कर रख लें।

साक्षात्कार के दिन

  1. पहली रात कोअच्छी नींद ले तथा प्रात: काल में उठ जाएं। 
  2. अपनी नित्य क्रियाओं को करें। 
  3. यह सुनिश्चित करें कि आप स्वच्छ एवं साफ दिखाई दें भलीभांति प्रैस किये कपड़े तथा पॉलिस किये हुए जूते पहनें। 
  4. आवश्यक कागजों तथा दस्तावेजों के फोल्डर को लेकर साक्षात्कार स्थल पर समय पर पहुॅंच जाएं। 
  5.  साक्षात्कार के स्थान पर पहुंचकर हाथ मुंह धोएं, बालों में कंघी करें और अपने व्यक्तित्व को निहारें। 
  6. साक्षात्कार स्थल पर अपनी बारी का इन्तजार करें। 
  7. इन्तजार की अवधि में आप पढ़ने के लिए कंपनी के साहित्य/विवरणिका की मांग सकते हैं।

साक्षात्कार के समय

साक्षात्कार के कमरे के भीतर बातों को ध्यान में रखें –

  1. कमरे में प्रवेश करना सर्वाधिक महत्व रखता हैं ।खटखटाएं, अभिवादन करे तथा दरवाजा धीरे से बंद कर दें, आत्मविश्वास से आगे बढ़ें, जब तक आप से कहा न जाये, बैठें नहीं। यदि साक्षात्कारकर्ता अपना हाथ आगे बढ़ाता है तो उससे आत्मविश्वास से हाथ मिलाएं। याद रखें, पहला प्रभाव बड़ा महत्वपूर्ण होता है। जब आप प्रवेश करते है तो आपकी चाल, आत्मविश्वास तथा बाह्य आचरण पर निगाह रखी जाती है।
  2. प्रत्याशी के हाव-भाव को भी ध्यान पूर्वक देखा जाता है। ठीक ढंग से बैंठे तथा थोड़ा झुकें क्योंकि यह आपकी रूचि एवं ध्यान को दर्शाता है। पैन, कागज, चश्मा तथा मेज पर रखी वस्तुओ जैसे कि पेपरवकट को व्यर्थ में न छेडें। अधीरता, ऐंठन, खुजलाना आदि आत्मविश्वास एवं एकाग्रता की कमी को दर्शाता है।
  3. उत्तर देते समय नीचे दी गई बातों पर ध्यान दें।
    1. सुनो, सोचो और फिर बोलो।
    2. उत्तर देने मे जल्दी न करें, थोड़ा समय लें।
    3. यदि आपने प्रश्न को नहीं सुना अथवा उसे समझ नहीं पाये हैं तो दोहराने के लिये कहें अन्दाजा लगाकर गलत उत्तर नहीं दें। 
    4. यदि आपको उत्तर नहीं आता है तो स्पष्ट रूप से बता दें कि आपको आता नहीं है। 
    5. यदि आपने कोई गलती की है तो उसे स्वीकार कर लें।
    6. आपका उत्तर संक्षिप्त एवं स्पष्ट होना चाहिए साक्षात्कार में अधिक बोलने वाले व्यक्ति को कोई पसंद नहीं करता है। 
    7. झूठ न बोलें आपके जवाब में ईमानदारी होनी चाहिए। 
    8. गुस्सा न करे और नही धैर्य खोएं, भले ही प्रश्नो ंसे आपके सन्मान को चोट पहुंच रही है। याद रहे, ऐसे प्रश्न आपके धैर्य एवं भावनाओं की जांच के लिये पूछे जा सकते है। 
    9. बीच में टोकें नही तथा ऑंख से ऑंख मिलाए रखें। 
    10. ‘मेरा मतलब है कि’ ‘ठीक है’ okay जैसे शब्दों से बचें। 
    11. प्रश्नों का उत्तर देते समय उत्साह, हिम्मत एवं ऊर्जाका प्रदर्शन करें इससे आभास होता है कि आपकी पद में वास्तविक रूचि है। 
    12. प्रश्न तभी पूछें यदि आपसे ऐसा करने के लिये कहा गया है। 
    13. पूरे साक्षात्कार के दौरान शिष्टता को बनाए रखें। धन्यवाद ‘माफ कीजिए’, जी ठीक है जैसे शब्दों का उचित अवसरों पर प्रयोग आपकी शिष्टता को दर्शाता है। 
    14. सामान्य रहें किसी की नकल न करें। 
    15. साक्षात्कार की समाप्ति पर साक्षात्कारकर्ता  का मुस्कराहट के साथ धन्यवाद करें। 
    16. आप किस प्रकार मेज से अपना सामान उठाते हैं, कैसे उठते हैं तथा कमरे से बाहर आते हैं इन सब बातों पर निगाह रखी जाती है इन चेष्टाओं में आत्म-विश्वास झलकना चाहिए। 
    17. आपकी चाल विश्वास से पूर्ण होनी चाहिए। साक्षात्कारकर्ता को सामने रखकर दरवाजा खोल  तथा कक्ष छोड़ने पर दरवाजा बदं करे। 
    18. परिसर छोड़ने से पहले स्वागतकर्ता अथवा सचिव को नमस्ते करना न भूले।
  4. साक्षात्कारकर्ता के कुछ विशेष पश्न
    1. आप अपने आपको प्रस्तुतीकरण इस पद के योग्य क्यों समझते है?
    2. कृपया कुछ अपने सम्बन्ध में और अपने परिवार की पृष्ठभूमि के सम्बन्ध मे बताएं
    3. आप में क्या गुण है और क्या कमियां है?
    4. आप इस कपंनी में क्यो नौकरी करना चाहते है?
    5. आपने यही क्षेत्र क्यों चुना?
    6. आपके जीवन का लक्ष्य क्या है
    7. आपके शाकै क्या है तथा अपना खाली समय किस पक्रार से व्यतीत करते है।
    8. आपकी वेतन संबन्धी क्या अपेक्षाएं है।
  5. एक साक्षात्कार प्रत्याशी में क्या देखना चाहते है।
    1. व्यक्तित्व  
    2. विषय/बौद्धिक ज्ञान  
    3. शिक्षा एव अनुभव
    4. व्यक्तिगत योग्यताएं जैसे कि इमानदारी, निष्ठा, सहनशीलता, धैर्य नमत्रा, तत्परता, आदि
  6. साक्षात्कार में अस्वीकृति के कुछ सामान्य कारण
    1. विनम्रता/शिष्टाचार की कमी
    2. गम्भीरता की कमी 
    3. अव्यवस्थित एवं अस्पष्ट उत्तर 
    4. समय की पाबन्दी नहीं 
    5. ज्ञान की कमी 
    6. ऊचीं आवाज 
    7. विश्वास की कमी/अधिकता
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5 Comments

Monika Gupta

May 5, 2018, 8:03 am Reply

Nice easy to understand… thankuu so much

Monika Gupta

May 5, 2018, 8:04 am Reply

Nice easy to understand… thankuu so much

Unknown

Jul 7, 2018, 5:47 pm Reply

Bhut hi achha… to good

Unknown

May 5, 2019, 2:25 pm Reply

Tq so much

tips

Jul 7, 2019, 6:02 am Reply

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