अभिसूचना साक्षरता का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएँ

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बेवडैन ने (2001) में अभिसूचना साक्षरता की सर्वप्रथम अर्थापन तथा व्याख्या की थी। इसे अभिसूचना सक्षमता तथा अभिसूचना कौशल भी कहते हैं। सेमीनार तथा सम्मेलनों में अन्य शब्दों का भी उपयोग किया गया है। परन्तु बेवडैन ने अभिसूचना-साक्षरता की व्याख्या विस्तार में की जिसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान की गयी तथा यूनेस्को ने भी स्वीकार किया। अभिसूचना-साक्षरता से व्यक्ति को अभिसूचना की आवश्यकता को पहिचानना, उसे ढूँढना तथा उसका मूल्यांकन करना और आवश्यक अभिसूचना की उपयोगिता एवं प्रभावशीलता को समझना है। इस प्रत्यय की चर्चा पुस्तकालयाध्यक्ष करते हैं।

इस अभिसूचना का सम्बन्ध सन्दर्भग्रन्थ, अनुदेशन, पुस्तकालय के कौशलों का प्रशिक्षण से होता है। प्रशिक्षित व्यक्ति को अभिसूचना के स्रोतों का उपयोग आना चाहिए। उन्हें अभिसूचना साक्षरता कहते हैं।

आभिसूचना-साक्षरता में समुचित व्यवहारों को अपनाते हैं, जो किसी प्रकार के माध्यम से अभिसूचना प्राप्त करते हैं, जो बौद्धिक तथा आचार संहिता की दृष्टि से समाज के लिए उपयोगी होती है।

अभिसूचना साक्षरता की विशेषताएँ

  1. पूर्ण अभिसूचना के सम्बन्ध में बौद्धिक निर्णय लेना और शुद्धता जानना।
  2. अभिसूचना स्रोतों की वैधता जानना।
  3. अभिसूचना प्राप्त करने के सफल आव्यूहों को विकसित करना।
  4. अभिसूचना में कम्प्यूटर का उपयोग करना।
  5. अभिसूचना का मूल्यांकन करना।
  6. अभिसूचना का व्यावहारिक उपयोग करना।
  7. नवीन अभिसूचना को उपलब्ध ज्ञान से समन्वय करना।
  8. अभिसूचना में समस्या-समाधान तथा आलोचनात्मक चिन्तन का उपयोग करना।
  9. अभिसूचना साक्षरता का उपयोग, शिक्षण, अनुदेशन, प्रशिक्षण तथा शोध कार्यों में किया जाता है।

अभिसूचना साक्षरता के विशिष्ट पक्ष

  1. साक्षरता का उपकरण-तात्कालिक अभिसूचनाओं को बोधगम्य करने के लिए व्यावहारिक उपकरणों का उपयोग करना।
  2. साक्षरता का पते-अभिसूचना के प्रारूप, विधियाँ, क्षेत्र को समझने की योग्यता होना एवं अभिसूचना के लिए नेटवर्क से सम्पर्क रखना।
  3. साक्षरता का सामाजिक स्वरूप-यह जानना कि समाज की परिस्थिति में इस सूचना का विकास केसे हुआ।
  4. शोध-साक्षरता-अभिसूचना तकनीकी की सहायता सार्थक साहित्य का संकलन करना तथा उपकरण का चयन करना।
  5. प्रकाशन-साक्षरता-शोध अध्ययन के प्रकाशन प्रारूप को समझना और उसके लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग करना जैसे वेब-साइट।
  6. साक्षरता हेतु तकनीकी का विकास करना-साक्षरता के नवीन प्रवर्तनों को समझना और उन्हें अपनाना तथा अभिसूचना तकनीकी में उपयोग करना।
  7. आलोचनात्मक साक्षरता-अभिसूचनाओं का मूल्यांकन करना, मानवीय और सामाजिक अच्छाइयों एवं बुराइयों के सन्दर्भ में आलोचना करना, उसकी प्रभावशीलता के लिए समय, धन एवं शक्ति के रूप में आकलन करना। नवीन प्रवर्तन मित्तव्ययी तथा उपयोगी होना चाहिए। इसका उपयोग जीवनपर्यन्त अधिगम में किया जाता है।
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