आभासी प्रयोगशाला का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ एवं प्रक्रिया

By Bandey No comments

आभासी प्रयोगशाला प्रणाली से तात्पर्य ऐसी कक्षाओं से है जिनमें आधुनिक कम्प्यूटर तथा सम्प्रेषण तकनीकी व अन्य संसाधनों जैसे-इंटरनेट, ऑन लाइन चैटिंग, वल्र्ड वाइड वेब (www), सी.डी. रोम तथा डी.वी.डी., मोबाइल आदि का प्रयोग करके शैक्षिक परिस्थितियों का आयोजन किया जाता है।

यह एक ऐसा वेब आधारित माध्यम या शिक्षण-अधिगम वातावरण है जो विद्यालय या शिक्षक के पास जाए बिना ही छात्र को वहाँ चल रही शिक्षण-प्रशिक्षण सम्बन्धी गतिविधियों में भागीदारी निभाने में सक्षम बनाता है। छात्र को यह आभास होता है कि वह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का हिस्सा है क्योंकि वास्तविक कक्षा की भाँति वह व्याख्यान सुनता है, प्रश्न पूछता है, पृष्ठपोषण प्राप्त करता है तथा प्रयोगशाला सम्बन्धी कार्यों में हिस्सा लेता है।

आभासी प्रयोगशाला की विशेषताएँ

आभासी प्रयोगशाला के अर्थ एवं परिभाषा के आधार पर इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं-

  1. आभासी प्रयोगशाला इलेक्ट्रॉनिक युग की आधुनिक शिक्षण, अधिगम व्यवस्था का उदाहरण है।
  2. आभासी प्रयोगशाला में छात्रों को समय, स्थान और सीखने की गति की पूर्ण स्वतन्त्रता होती है। वह जब चाहे, जहाँ चाहे, जैसे चाहे अपनी सुविधा के अनुसार सीख सकता है।
  3. आभासी प्रयोगशाला में शिक्षक तथा छात्र आमने-सामने शिक्षण अधिगम न करके आधुनिक कम्प्यूटर तथा मल्टीमीडिया आदि का प्रयोग करते हैं।
  4. आभासी प्रयोगशाला में किसी भी विषय तथा प्रकरण के शिक्षण-अधिगम के लिए अधिक वुफशल एवं अनुभवी अध्यापकों की आवश्यकता होती है।
  5. आभासी प्रयोगशाला में छात्रों की प्रशासनिक तथा मूल्यांकन सम्बन्धी विविध समस्याओं के समाधान ऑन-लाइन किये जाते हैं।
  6. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली परम्परागत शिक्षा प्रणाली तथा अनुदेशन व्यवस्था से अधिक प्रभावशाली होती सिद्ध हो रही है।
  7. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली एक वेब आधारित शिक्षण-अधिगम वातावरण है, जो गन्तव्य स्थान पर जाये बिना ही समस्त गतिविधियों से जोड़ने में सक्षम है।
  8. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली के अन्तर्गत इंटरनेट, इंट्रानेट तथा एक्सट्रानेट प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
  9. आभासी प्रयोगशाला वास्तविक कक्षा की भाँति आमने-सामने के शिक्षण-अधिगम से विपरीत है। इसमें-छात्र शिक्षक के मध्य अन्त:क्रिया इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के द्वारा होती है।
  10. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली दूरवर्ती शिक्षा प्रणाली की भाँति होती है जिसमें कोई छात्र किसी व्यवसाय या अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हुए भी अध्ययन कर सकता है।

आभासी प्रयोगशाला की प्रक्रिया

आभासी प्रयोगशाला विभिन्न शिक्षण-अधिगम सामग्री को जो कि विद्यालयों के पाठ्यक्रम के अनुरूप ही तैयार की जाती हैं, छात्रों के घरों या अन्य निर्धारित स्थानों तक पहुँचाने का प्रयास करती है। इस व्यवस्था की प्रक्रिया को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट रूप में समझा जा सकता है-

  1. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली की प्रथम कार्य-शैली में एक विषय-विशेषज्ञ पाठ्यक्रम के अनुसार किसी एक प्रकरण पर अनुदेशन सामग्री तैयार करता है, जिसका प्रसारण वह सेटेलाइट आधारित टेलीकॉन्प्रेंफसिंग या इंटरनेट के माध्यम से करता है जैसे-एन.सी.ई.आर.टी. के शैक्षिक तकनीकी विभाग में ‘एडूसैट’ कार्यक्रम द्वारा हो रहा है।
  2. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली की द्वितीय कार्य-शैली में विषय-विशेषज्ञों द्वारा तैयार पाठ्यक्रम आधारित सामग्री को विद्यालय की वेबसाइट पर डाल दिया जाता है। इस वेबसाइट का पता उस विद्यालय के सभी छात्रों को मालूम होता है और वह अपनी सुविधानुसार इस वेबसाइट से पाठ्यक्रम सामग्री को डाउनलोड कर लेते हैं।
  3. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली की तृतीय प्रकार की कार्य-शैली के अन्तर्गत पाठ्यक्रम के विषय-विशेषज्ञ द्वारा तैयार की गई अनुदेशन सामग्री को किसी सी.डी. तथा डी.वी.डी. में डाउनलोड करके छात्रों को वितरित कर दिया जाता है जिससे छात्र इस ब्क् या क्टक् को अपने कम्प्यूटर पर ऑपन करके अनुदेशन सामग्री को प्राप्त कर लेते हैं। इस प्रकार की अनुदेशन सामग्री के साथ अध्यापक सहायक-सामग्री (Support Material) तथा सम्भावित समस्यात्मक प्रश्नों के उत्तर भी देता है जिससे छात्रों को स्व:अधिगम करने में सहायता प्राप्त हो सके।
  4. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली की अन्य विधि में अभिसूचना-सम्प्रेषण की वृहद् तकनीकियों का उपयोग किया जाता है जैसे-ऑन-लाइन चैटिंग, इंटरनेट, ई-मेल, मोबाइल पफोन आदि। इस प्रकार पाठ्यक्रम विषय-विशेषज्ञ तैयार अनुदेशन सामग्री को छात्रों तक सम्प्रेषण की वृहद तकनीकियों के माध्यम से पहुँचाता है। अध्यापक द्वारा इस प्रकार के सम्पर्क और अन्त:क्रिया का उपयोग शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में छात्रों की सक्रिय भागीदारी बनाने हेतु किया जाता है। अध्यापक छात्रों से प्रश्न पूछकर उनके ज्ञान एवं बोध की जाँच करता है तथा उनका समय-समय पर मूल्यांकन भी करता है।
  5. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली की इस विधि के अन्तर्गत छात्रों के ज्ञान का मूल्यांकन करने के बाद पुनर्बलन प्रदान किया जाता है तथा छात्रों को विभिन्न प्रकार के अधिगम अभ्यास प्रोजेक्ट कार्य, पुनरावृत्ति कराने तथा गृहकार्य देने आदि आवश्यक गतिविधियों का भी वेबसाइट, ई-मेल तथा ई-फाइलों के द्वारा ही किया जाता है। छात्रों द्वारा किये गये कार्यों की जाँच करके उन्हीं को ई-मेल के द्वारा लौटा दिया जाता है, जिससे छात्रों को समस-समय पर प्रतिपुष्टि मिलती है।
  6. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली की अन्तिम प्रकार की कार्यशैली होती है जिसमें विद्यालयी गतिविधियों की अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सम्पादित किया जाता है। इस सोपान का मुख्य उद्देश्य छात्रों को अनुदेशनात्मक कार्यक्रमों से अवगत कराना, छात्रों की शैक्षिक प्रगति की जाँच करना, मूल्यांकन करना, अभ्यास करना, प्रतिपुष्टि, निदान तथा उपचारात्मक उपायों के बारे में बताना, छात्रों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर श्रेणी देना तथा उन्हें सर्टीपिफकेट एवं डिग्रियाँ प्रदान करना होता है। आभासी प्रयोगशाला प्रणाली में यह सभी क्रियाएँ ऑन-लाइन ही की जाती हैं।
READ MORE  जनतंत्र का अर्थ, परिभाषा एवं उद्देश्य

आभासी प्रयोगशाला के लाभ

आज के कम्प्यूटर युग में जहाँ दूरवर्ती शिक्षा अपने नये आयाम स्थापित कर रही है वहीं इसको सुचारु रूप से चलाने वाली तकनीकियाँ भी शिक्षा प्रणाली में अपना स्थान बना रही हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण आभासी कक्षा-शिक्षक तथा छात्र दोनों के लिए उपयोगी हो रही है।

  1. यह छात्रों की सुविधानुसार किसी भी समय एवं स्थान पर शिक्षण-अधिगम करने में उपयोगी होती है।
  2. यह दूरवर्ती शिक्षा की एक सहायक प्रविधि है, क्योंकि इसमें छात्र किसी व्यवसाय में रहकर भी अध्ययन कर सकता है।
  3. इसमें नवीन तकनीकियों एवं माध्यमों का प्रयोग होने के कारण यह छात्रों एवं शिक्षकों के लिए रुचिकर एवं प्रेरणादायक माध्यम बनी हुई है।
  4. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली द्वारा विश्व के किसी भी विषय के प्रभावशाली शिक्षक की कुशलता, अनुभव एवं ज्ञान का लाभ प्रत्येक छात्र उठा सकता है जो सभी के लिए आर्थिक दृष्टि से भी लाभदायक है।
  5. आभासी प्रयोगशाला प्रणाली में सामान्यत सभी क्रियाएँ ऑन-लाइन की जाती है जैसे-रजिस्ट्रेशन, फीस, शिक्षण-अधिगम मूल्यांकन, उपलब्धियों की जानकारी, परीक्षाफल प्रदान करना आदि।

आभासी प्रयोगशाला के संचालन करने के लिए सर्वोत्तम मानवीय संसाधनों का प्रयोग वास्तविक कक्षा की तुलना में अच्छी प्रकार से किया जाता है। पारम्परिक कक्षा व्यवस्था के कई पक्ष जो समस्यात्मक हैं जैसे-समय-तालिका बनाना, अनुशासन बनाये रखना, विद्याथियों की उपस्थिति, पर्याप्त शिक्षकों की आपूर्ति, शिक्षकों का मन-मुटाव, समय की पाबन्दी आदि से आभासी प्रयोगशाला में बचा जा सकता है।

आभासी प्रयोगशाला की सीमाएँ

आधुनिक युग की माँग व सुविधाओं को देखते हुए आभासी कक्षा में यदि बहुत-से गुण हैं तो शिक्षण-प्रशिक्षण के वास्तविक उद्देश्यों को देखते हुए कई सीमाएँ भी हैं। संक्षेप में इन कक्षाओं की कमियों को निम्न बिन्दुओं के द्वारा स्पष्ट किया गया है-

  1. शिक्षा प्रणाली का मुख्य उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है, जिसके अनुसार मानसिक, शारीरिक, नैतिक, चारित्रिक, सामाजिक तथा संवेगात्मक गुणों का विकास करना शिक्षा का उत्तरदायित्व होता है परन्तु आभासी प्रयोगशाला प्रणाली में इन गुणों का विकास कर पाना सम्भव नहीं है।
  2. परम्परागत शिक्षा प्रणाली के तीन प्रमुख उद्देश्य माने जाते हैं-ज्ञानात्मक, भावात्मक तथा क्रियात्मक उद्देश्य। इन तीनों में आभासी प्रयोगशाला ज्ञानात्मक तथा क्रियात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति किसी सीमा तक कर भी लें परन्तु भावात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति कर पाना सम्भव नहीं हैं और शिक्षण में जब तक भाव पक्ष का विकास नहीं होगा, वह शिक्षण प्रक्रिया अधूरी ही मानी जायेगी।
  3. परम्परागत शिक्षा प्रणाली के संचालन में शिक्षण-अधिगम का अर्थ छात्र-शिक्षक के आमने-सामने की अन्त:क्रिया को माना जाता है, जिसमें शिक्षक के व्यक्तित्व, ज्ञान और अनुभव का छात्र के चरित्र पर सीधा प्रभाव पड़ता है जो छात्र के जीवन के लिए संचित धन का कार्य करता है। परन्तु आभासी प्रयोगशाला द्वारा यह सम्भव नहीं हो पाता है।
  4. नि:सन्देह यह शिक्षा प्रणाली लचीली जिसमें समय, स्थान, गति तथा सम्प्रेषण प्रवाह का कोई स्थान नहीं है परन्तु यह लचीलापन छात्रों को गलत रास्ते पर ले जा सकता है। विशेष रूप से माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं के छात्रों के लिए निश्चित अनुशासन व शिक्षकों का सान्निध्य अति आवश्यक होता है।
  5. यह बात भी सत्य है कि छात्र बचपन से लेकर युवावस्था तक अनुकरण द्वारा अधिक सीखता है, घर में अपने बड़ों को देखकर, विद्यालय में शिक्षक व अन्य साथियों को देखकर आदि। इस प्रकार आभासी प्रयोगशाला में अनुकरण के लिए किसी प्रकार का अवसर प्रदान नहीं किया जाता है।
  6. यह माना जाता है कि इलेक्ट्रॉनिकी उपकरणों के माध्यम से प्रत्यक्ष कक्षा शिक्षण जैसा अनुभव और कक्षा अन्त:क्रिया के अवसर सुलभ कराये जायेंगे परन्तु यह कदापि सम्भव नहीं है। आभासी परिस्थिति में शिक्षण जीवन्त अनुभव, अन्त:क्रिया, मानवीय सामाजिक सम्बन्धों की अनुभूति कदापि सम्भव नहीं है।
  7. पारम्परिक शिक्षा प्रणाली में जो बालक तथा युवा उपकरणों का अधिक उपयोग कर रहे हैं उनमें कई प्रकार के शारीरिक दोष व बीमारियाँ देखने में आ रही हैं। शोध अध्ययनों के निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग जैसे-मोबाईल, कम्प्यूटर, वाई-फाई सिस्टम आदि का अधिक प्रयोग करने से वैंफसर जैसे घातक रोग हो जाते हैं। तब सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था को आभासी प्रयोगशाला में बढ़ावा देना कहाँ तक न्यायोचित है।
  8. भारत जैसे अधिक जनसंख्या, कम संसाधनों वाले देश में, जहाँ गाँवों व दूरदराज के क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है वहाँ इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था कर पाना पूर्णतया असम्भव है।
READ MORE  वित्त कार्य क्या है?

आभासी प्रणाली की उपरोक्त सीमाओं के विवेचन से स्पष्ट है कि आभासी प्रयोगशाला प्रणाली में अनेक गुण होते हुए भी कई खामियाँ भी हैं, जिनके कारण इनको लागू कर पाना सम्भव नहीं है। परन्तु समय की माँग, दूरियाँ, शिक्षकों का अभाव, आदि की समस्याओं के कारण वैश्विक आवश्यकताओं की पूर्ति करने हेतु शिक्षा के क्षेत्र में यह एक नवीन आयाम है जिसके माध्यम से बहु-आयामी पाठ्यक्रम का संचालन सम्भव है और एक नवीन विकल्प के रूप में अपनायी जा सकती है।

| Home |

Leave a Reply