ई-अधिगम का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकार, उद्देश्य

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इलेक्ट्रोनिक अधिगम (Electronic Learning) को ई-अधिगम (E-Learning) भी कहते हैं। इसे कम्प्यूटर प्रोत्साहित अधिगम भी कहते हैं। ई.-अधिगम को कई अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है। इस प्रत्यय का सम्बन्ध् वृहद् अधिगम तकनीकी (Advanced Learning Technology) से अधिक है। ई-अधिगम में तकनीकी तथा अधिगम विधियो को सम्मिलित किया जाता है। इसमें कम्प्यूटर नेटवर्क तथा बहुमाध्यम तकनीकी का उपयोग किया जाता है।

उच्च शिक्षा संस्थान में सन् 2006 से हजारों छात्रों ने ऑन-लाइन अधिगम में भाग लिया। इसका आरम्भ ब्रिटेन में हुआ। ई-अधिगम को ऑन-लाइन अधिगम भी कहते हैं। आज अनेक उच्च शिक्षा संस्थाओं में ऑन-लाइन अधिगम की व्यवस्था की गई है। ऑन-लाइन अधिगम की सुविधा व्यक्तिगत छात्रों को भी दी जाने लगी है। शोध् अध्ययनों से यह पाया गया कि सामान्यत: सभी छात्र ई.-अधिगम प्रणाली से संतुष्ट हैं। परम्परागत अधिगम प्रणाली की अपेक्षा ई-अधिगम अधिक प्रभावशाली है।

व्यक्तिगत संस्थाओं में इस अधिगम प्रणाली का अधिकतम उपयोग किया जाने लगा है, क्योंकि यह प्रणाली अपेक्षाकृत मितव्ययी है। ऑन-लाइन अधिगम में प्रशिक्षित व्यक्तियों की नियुक्ति कर ली जाती है। कम्प्यूटर ऑन-लाइन तथा इन्टरनेट सेवाओं के लिए भी प्रशिक्षित व्यक्तियों की सहायता ली जाती है। आज ऑन-लाइन शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार अधिक तीव्रता से हो रहा है। यहाँ तक कि शोध् अध्ययनों हेतु भी ऑन-लाइन निर्देशन की सुविधाओं की व्यवस्था की जाने लगी है। शोध् अध्ययन की सुविधा विकसित शोध् संस्थानों तथा मुक्त विश्वविद्यालयों द्वारा दी जाने लगी है।

संचार माध्यमों को ई-अधिगम के लिए समुदायों से भी संबन्धित किया जा रहा है। समुदाय अधिगम का मूल अधिगम प्रतिमान प्रदान करता है। इसके अन्तर्गत कुछ आवश्यक क्रियाओं के सम्पादन की आवश्यकता होती है जिनकी व्यवस्था कक्षा में की जाती है। कक्षा शिक्षण के स्तर को तकनीकी के उपयोग से प्रोन्नत किया जा सकता है। आज की परिस्थितियों में अधिगम के लिए कक्षाओं में अनेक क्रियाओं तथा संसाधनों की आवश्यकता होती है।

ई-अधिगम का अर्थ

ई-अधिगम शिक्षा का एक नवीन प्रत्यय है। इसके अन्तर्गत इन्टरनेट तकनीकी का उपयोग पाठ्यवस्तु के प्रस्तुतीकरण एवं संचार में किया जाता है। इस तकनीकी की सहायता से अधिगम के लिए समुचित वातावरण को शिक्षकों तथा छात्रों हेतु उत्पन्न किया जाता है। यह जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया को प्रौन्नत करती है। समाज तथा समुदाय को अधिगम सुविध प्रदान करती है।

  1. यह शिक्षा का एक नवीन प्रत्यय है जो परम्परागत अधिगम से भिन्न प्रकार का है। यह अधिगम की नवीन व्यवस्था करता है।
  2. इसकी की प्रमुख विशेषता यह है कि पाठ्यवस्तु का प्रस्तुतीकरण एवं संचार कम्प्यूटर इन्टरनेट प्रणाली से किया जाता है। हम कह सकते हैं कि ई.-अधिगम क्या है और क्या नहीं है?
  3. इसमे में इन्टरनेट के उपयोग से अधिगम के वातावरण का विस्तार किया जाता है। इंटरनेट की सहायता से शिक्षकों तथा छात्रों को अधिगम वातावरण का विस्तार किया जाता है। यह वातावरण छात्र-केन्द्रित होता है जबकि परम्परागत शिक्षा में अधिगम वातावरण शिक्षक-केन्द्रित होता है।
  4. शिक्षा का नवीन प्रत्यय, यह जीवनपर्यन्त शिक्षा हेतु वातावरण का सृजन करती है। समाज को वास्तविक अधिगम के अवसर प्रदान करती है।

यह एक व्यापक प्रत्यय है। कम्प्यूटर व इंटरनेट द्वारा इस प्रकार के अधिगम का सम्पादन किया जाता है। इस अधिगम का संचार नेटवर्क के माध्यम से सभी को सभी स्थानों के लिए किया जाता है। ई-अधिगम प्रणाली, शिक्षा की वैकल्पिक प्रणाली नहीं है अपितु एक नवीन शिक्षा की प्रणाली है जो सभी को शिक्षा के या अधिगम के अवसर प्रदान करती है। उच्च शिक्षा की एक मित्तव्ययी प्रणाली है। ई-अधिगम अधिक व्यापक एवं महत्त्वपूर्ण शिक्षा प्रणाली है। इसके द्वारा पाठ्यवस्तु का स्वामित्व विकसित किया जाता है। इसकी प्रभावशीलता परम्परागत शिक्षा के समान ही होती है। इसका का अनुदेशनात्मक प्रारूप अपने में पूर्ण होता है, क्योंकि इसमें वर्षों से शिक्षण सिद्धांतों का उपयोग किया गया है। इसका उपयोग दूरवर्ती शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, सतत् शिक्षा तथा व्यावसायिक शिक्षा में विश्व के अनेक देशों में किया जाने लगा है।

कुछ अन्य शब्द ई-अधिगम से संबन्धित हैं। इन्हें ई-अधिगम में सम्मिलित करते हैं।

  1. ऑन-लाइन अधिगम
  2. ऑन-लाइन शिक्षा
  3. दूरवर्ती शिक्षा
  4. तकनीकी आधरित प्रशिक्षण
  5. वेब आधरित प्रशिक्षण
  6. दूरवर्ती अधिगम तथा
  7. कम्प्यूटर आधरित प्रशिक्षण

ई-अधिगम अधिक व्यापक प्रत्यय है। इस प्रकार के अधिगम की व्यवस्था कम्प्यूटर के सन्दर्भ में की जाती है। ई-अधिगम को तकनीकी शब्दावली के अन्तर्गत सम्मिलित किया जाता है।

ई-अधिगम की परिभाषा

इसकी अनेक परिभाषाएँ उपलब्ध हैं, उनमें से कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाओं का यहाँ उल्लेख किया गया है- प्रभावशाली शिक्षण तथा अधिगम प्रक्रियाओं को सम्मिलित करने से ई-अधिगम का सम्पादन किया जाता है। जिससे स्थानीय समुदाय तथा भूमण्डलीय समुदाय को अधिगम का अवसर मिलता है।

टाम केली तथा सिसको के अनुसार-ई-अधिगम द्वारा अभिसूचना सम्प्रेषण की सहायता से शिक्षा तथा प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण की क्रियाएँ, छात्र के अधिगम एवं प्रशिक्षण प्रक्रियाओं का उल्लेख नहीं किया जाता है। छात्र की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान तथा कौशल उत्तम ढंग से प्रदान किया जाता है।

ब्राण्डोन हॉल के अनुसार-जब अनुदेशन का संचार आंशिक या पूर्ण रूप में विद्युत यंत्रों के माध्यमों की सहायता से तथा वेबसाइट व इंटरनेट अथवा बहुमाध्यमों सीडी रोम, डी.वी.डी. से किया जाता है, तब उसे ई-अधिगम कहते हैं। ब्राण्डोन हॉल का तर्वफ है कि तकनीकी ई-अधिगम को प्रोन्नत करती है। ई-अधिगम की वेबसाइट तथा इंटरनेट से पहचान की गई। दृश्य वातावरण को वेबसाइट से सशक्त किया जाता है। वेबसाइट ई-अधिगम के लिए वातावरण का सृजन करती है।

लख्रनन सरक्वट्स के अनुसार- ई-अधिगम के उपयोग एवं प्रक्रिया का व्यापक क्षेत्र है जैसे वेब-आधरित अधिगम, कम्प्यूटर-आधरित अधिगम तथा वास्तविक कक्षा शिक्षण को सम्मिलित किया जाता है। इन माध्यमों से पाठ्य-वस्तु का संचार किया जाए तथा इंटरनेट का उपयोग किया जाए। दृश्य एवं श्रव्य टेप, सेटेलाइट प्रसारण में दूरदर्शन, सीडी रोम का उपयोग किया जाता है।

रोसनवर्ग के अनुसार-ई-अधिगम में इंटरनेट प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इंटरनेट तकनीकी से पाठ्य-वस्तु का संचार किया जाता है, जिससे ज्ञान में व्रद्धि की जाती है और छात्रों की निष्पत्तियों में वृ(ि होती है।

रोसन वर्ग ने ई-अधिगम के लिए तीन मूल मानदण्डों को दिया है-

  1. इसमे में नेटवर्क होता है। सूचनाओं में सहभागिता होती है और अभिसूचनाओं का भण्डारण होता है।
  2. इसमे संचार हेतु इंटरनेट की प्रमाणिक तकनीकियों का उपयोग किया जाता है।
  3. ई-अधिगम का लक्ष्य प्रसारण करना है अधिगम के समाधन परम्परागत प्रणाली से अधिक सार्थक तथा प्रभावशाली होते हैं। यह शुद्ध अभिसूचना को अपेक्षित व्यक्ति को सही समय पर तथा सही स्थान पर समुचित माध्यमों के उपयोग से प्रदान की जाती ई-अधिगम शिक्षा के क्षेत्र में नवीन प्रत्यय है और शिक्षा का एक नया आयाम भी है।

ई-अधिगम की विशेषताएँ

भारत में कई विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन एजुकेशन की सुविधा है। इंदिरा गाँधी ओपन यूनिवर्सिटी सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी आदि इसमें अग्रणी हैं। इसकी विशेषताओं को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है-

  1. ऑनलाइन एजुकेशन के माध्यम से आप देश-विदेश के किसी भी विश्वविद्यालय से घर बैठे ही कोई कोर्स कर सकते हैं। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस भी ऑनलाइन ही होता है। अब तो परीक्षाएँ भी ऑनलाइन होने लगी हैं।
  2. ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम में कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे-ई-मेल, वीडियो कॉन्प्रेंफसग, ब्लॉग्स, बुलेटिन बोड्र्स, डिस्कशन बोड्र्स आदि।
  3. सेवारत होते हुए भी ऑनलाइन कोर्स करके आप अपनी स्किल बढ़ा सकते हैं, जिससे जॉब के बाजार में खुद को उप-टू-डेट रखना आसान हो जाता है। इसमें आप जब चाहें, स्टडी मैटेरियल को पढ़ सकते हैं। अध्ययन सामग्री इंटरनेट पर हमेशा उपलब्ध रहती है।
  4. आर्थिक रूप से कमजोर व दूर-दराज के छात्रों के लिए यह प्रणाली अधिक उपयोगी है। इसके माध्यम से पढ़ाई करना काफी उपयोगी रहता है।
  5. आजकल आभासी-प्रयोगशला के माध्यम से आप घर बैठे प्रैक्टिकल वर्क भी कर सकते हैं। वर्चुअल लैब का क्रेज काफी बढ़ा है।
  6. ऑनलाइन एजुकेशन में ग्रापिफक्स, एनिमेशन और मल्टीमीडिया के उपयोग से कोर्स कटेंट को कापफी रोचक और असरदार बनाया जा सकता है।
  7. सर्टिपिकेट से लेकर ऊँची डिग्री तक के विभिन्न ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध हैं।

ई-अधिगम के प्रकार

ई-अधिगम में अनेक प्रकार की प्रविधियो को प्रयुक्त किया जाता है इसमें बहुमाध्यमों का उपयोग किया जाता है। ई-अधिगम के प्रमुख प्रकार हैं-

  1. ऑन-लाइन अधिगम ।
  2. मिश्रित अधिगम ।
  3. सिन्क्रॉनस् अधिगम ।
  4. असिन्क्रॉनस् अधिगम ।
  5. स्वाध्याय
  6. वेब-आधरित अधिगम ।
  7. कम्प्यूटर आधरित अधिगम ।
  8. श्रव्य-दृश्य टेप द्वारा अधिगम ।

ई-अधिगम के उद्देश्य

ई-अधिगम से कम्प्यूटर का उपयोग शिक्षा में किया जाता है। इसमें मिश्रित माध्यमों को प्रयुक्त किया जाता है। कम्प्यूटर आधरित क्रियाओं के समन्वित रूप में कक्षा शिक्षण में प्रयुक्त किया जाता है। ई-अधिगम के पाठों के सामान्य प्रारूपों से छात्रों को निर्देशित किया जाता है और अभिसूचनाओं तथा वैज्ञानिक कार्यों का माध्यमों की सहायता से संचार किया जाता है।

पाठ्यवस्तु का ई-अधिगम की सहायता से सम्प्रेषण किया जाता है। अभिसूचना-आधरित पाठ्यवस्तु से किसी भी कौशल का विकास नहीं किया जाता है। निष्पत्ति-आधरित पाठ्य-वस्तु के पाठों से प्रक्रिया कौशलों का विकास किया जाता है। इससे कम्प्यूटर अधिगम को बढ़ावा दिया जाता है।

ई-अधिगम से उद्देश्यों की प्राप्ति की जाती है-

  1. ई-अधिगम से पाठ्यवस्तु का संचार तथा सम्प्रेषण करना।
  2. ई-अधिगम से स्थानीय समुदाय तथा भूमण्डलीय समुदाय को शिक्षा की सुविधा प्रदान करना।
  3. ई-अधिगम से मुक्त रूप से सीखने का अवसर प्रदान करना।
  4. ई-अधिगम से शिक्षा का सभी को समान अवसर प्रदान करना।
  5. ई-अधिगम से मिश्रित माध्यमों को प्रोत्साहित करना।
  6. मुक्त विश्वविद्यालयों में ई-अधिगम से शिक्षा प्रक्रिया की व्यवस्था करना।
  7. ऑन-लाइन शिक्षा का ई-अधिगम से प्रोत्साहन तथा प्रोन्नत करना।
  8. ऑन-लाइन शिक्षा से शोध् अध्ययनों की तीव्रता से वृ(ि करना।
  9. ई-अधिगम से उच्च शिक्षा को मित्तव्ययी बनाना।
  10. इसके उपयोग से वृहद् अधिगम तकनीकी का विकास करना।

ई-अधिगम के माध्यम

ई-अधिगम का उपयोग सम्पूर्ण विश्व में वेब या सीडी रोम की सहायता से किया जाता है। यह दूरवर्ती अधिगम के समान है। इसमें माध्यमों का उपयोग किया जाता है। इसके अन्तर्गत माध्यमों की सहायता से संचार तथा सम्पे्रषण किया जाता है। इसमें निम्नांकित माध्यमों का उपयोग किया जाता है-

  1. मुद्रित माध्यम-इसमें ई-पाठ्य-वस्तु, पाठ्य-पुस्तकों तथा ई-जिन्स का उपयोग किया जाता है।
  2. दृश्य माध्यम-इसमें दृश्य-टेप, केबिल, दृश्य प्रवाह, सैटेलाइट प्रसारण, दूरदर्शन आदि माध्यमों का उपयोग करते हैं।
  3. सम्प्रेषण माध्यम-इस प्रकार के माध्यम को दो वर्गों में विभाजित किया- (1) असिन्क्रॉनस् माध्यम-इसके अन्तर्गत ई-मेल, सुनना, वाद-विवाद आदि को सम्मिलित किया जाता है। (ब) सिन्क्रॉनस् माध्यम-इसके अन्तर्गत इन्टरनेट, दृश्य सम्मेलन तथा टेलिकॉन्प्रेंफसिंग का उपयोग किया जाता है। इन माध्यमों का विवरण अन्य अध्यायों में दिया गया है।

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