ग्रामीण विकास का उद्देश्य

अनुक्रम
वास्तव में ग्रामीण विकास का उद्देश्य बहुत ही व्यापक है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनसमुदाय के भौतिक एवं सामाजिक कल्याण में संवर्धन करना है। ग्रामीण विकास के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु भूवैन्यासिक नियोजन के द्वारा ग्रामीण निवास्य प्रत्यावर्तन प्रक्रिया आवश्यक है। समन्वित ग्रामीण विकास क्षेत्र के भौतिक एवं मानवीय संसाधनों की सक्रियता हेतु लाभकारी नियोजन का एक सम्यक प्रयास है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में लाभार्थियों की कार्यकुशलता एवं क्षमता के उचित प्राविधिकी के माध्यम से सदुपयोग हेतु पर्याप्त रोजगार अवसरों का सृजन किया जाना है।

‘ESCAP’ के अनुसार ग्रामीण विकास के उद्देश्य है-
  1. सम्पूर्ण ग्रामीण श्रम को आर्थिक क्रिया-कलाप की मुख्य धारा से जोड़ना।
  2. ग्रामीण लोगों की रचनात्मक ऊर्जा को वास्तविक रूप देना।
  3. ग्रामीण जनसंख्या का नगरों की ओर पलायन को रोकना।
  4. विकास प्रक्रिया में महिलाओं एवं युवकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  5. विकास एवं पर्यावरण के बीच समन्वयन द्वारा जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
  6. मानव शक्ति का सम्पूर्ण विकास करना।
इस प्रकार समग्र रूप में ग्रामीण विकास में निम्न उद्देश्यों की प्राप्ति को सम्मिलित किया जाता है-
  1. ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि।
  2. अधिकतम सामाजिक-आर्थिक समानता लाना।
  3. सामाजिक-आर्थिक विकास में स्थानीय समानता लाना।
  4. ग्रामीण विकास को पारिस्थितिकी हेतु ग्राºय बनाना।
  5. विकास प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर आनुवंशिक संश्लेशण क्रियान्वित करना।
  6. कृषि को विकसित करना।
  7. भूमि सुधार में वृद्धि करना।
  8. ग्रामीण औद्योगीकरण को बढ़ावा देना।
  9. ग्रामीण अवस्थापना सुविधाओं को सुदृढ़ व विकसित करना।
  10. ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का विकास करना।
  11. बुनियादी सुविधाओं का विकास करना।
  12. ग्रामीण दबाव में कमी लाना।
  13. जनसंख्या वृद्धि को प्रभावी ढंग से नियन्त्रित करना।
  14. मानव संसाधनों को उत्तम व विकसित बनाना।
  15. मद्यपान व अन्य बुराइयों पर प्रभावी ढंग से रोक लगाना।
  16. भूमि धारिता उपयुक्त इकाइयों का गठन एवं सहकारिता पर आधारित कृषि को विकसित करना।
  17. शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन करना।
  18. स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध कराना।
  19. कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना।
  20. रोजगार के अवसरों का सृजन करना।
  21. जातिवाद व सम्प्रदायवाद को समाप्त करने का प्रयास करना।
  22. ग्रामीण जनता को जागरूक कर उनके शोशण पर रोक लगाना।
  23. ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसायिक क्रियाकलापों में वृद्धि करना।
  24. नेतृत्व की समग्रता, नर्इ पद्धतियों का प्रारम्भ, प्रेरक नेतृत्व आदि।
  25. ग्रामीण अर्थतन्त्र को तीव्र से तीव्रतर करना।
  26. ग्रामीणों का जीवन स्तर ऊँचा उठाना।

आर्थिक रूपान्तरण :-

आर्थिक रूपान्तरण आर्थिक विकास से ही सम्बन्धित है। आर्थिक रूपान्तरण से तात्पर्य अर्थव्यवस्था के विविध घटकों या क्षेत्रों जैसे- कृषि, उद्योग, परिवहन, संचार ऊर्जा इत्यादि में संरचनात्मक परिवर्तन से है। आर्थिक रूपान्तरण आर्थिक विकास के घटकों में सकारात्मक परिवर्तन एवं उसमें अभिवृद्धि से सम्बन्धित है। इसमें अर्थव्यवस्था के मात्रात्मक तथा गुणात्मक परिवर्तन को सम्मिलित किया जाता है।

आर्थिक आर्थिक रूपान्तरण के संकेतक :-
  1. परिवहन
  2. संचार
  3. विद्युत/ऊर्जा
  4. कृषि विकास
  5. सिंचार्इ
  6. पशुपालन
  7. बैंकिंग एवं वित्त
  8. सहकारिता
  9. ग्रामीण उद्योग
  10. आय

सामाजिक रूपान्तरण :-

वास्तव में सामाजिक रूपान्तरण सामाजिक विकास से ही सम्बन्धित है। सामाजिक रूपान्तरण के अन्तर्गत सामाजिक विकास के विभिन्न संकेतकों या घटकों जैसे :- शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, स्वच्छता, आवास, पेयजल, रहन सहन तथा सामाजिक वातावरण में संरचनात्मक परिवर्तन को सम्मिलित करते है। सामाजिक रूपान्तरण सामाजिक अवस्थापनात्मक तत्वों में सकारात्मक अभिवृद्धि से सम्बन्धित है। इसमें सामाजिक घटकों के मात्रात्मक व गुणात्मक अभिवृद्धि को सम्मिलित किया जाता है।

सामाजिक रूपान्तरण के संकेतक :-
  1. शिक्षा
  2. स्वास्थ्य
  3. जनकल्याण
  4. मनोरंजन
  5. आवास
  6. पेयजल
  7. जनसंख्या

सामाजिक रूपान्तरण व सामाजिक परिवर्तन :-

सामाजिक विकास या सामाजिक रूपान्तरण बड़ी व्यापक धारणा है। यह सामाजिक परिवर्तन से जुड़ी होने के बावजूद उससे अलग है। परिवर्तन मूल्य-निरपेक्ष धारणा है, जबकि विकास मूल्य परक धारणा है। अर्थात विकास का अर्थ है, अपेक्षित परिवर्तन की प्रक्रिया। हर सामाजिक परिवर्तन से सामाजिक रूपान्तरण नहीं होता। अपेक्षित दिशा में नियोजित सामाजिक परिवर्तन ही सामाजिक विकास या रूपान्तरण कहा जा सकता है।

वास्तव में सामाजिक परिवर्तन सामाजिक ढांचे तथा सामाजिक सम्बन्धों में आये बदलाव से सम्बन्धित है, जबकि सामाजिक रूपान्तरण सामाजिक जीवन की गुणवत्ता तथा सामाजिक सेवाओं व सुविधाओं में मात्रात्मक व गुणात्मक सुधार से सम्बन्धित है। सामाजिक परिवर्तनों के मुख्य घटकों में खोज, आविश्कार तथा प्रसार को सम्मिलित किया जाता है। जबकि सामाजिक रूपान्तरण में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, रहन-सहन इत्यादि घटकों में मात्रात्मक एवं गुणात्मक सुधार को सम्मिलित किया जाता है।

सामाजिक-आर्थिक विकास, रूपान्तरण, नियोजन एवं परिवर्तन आर्थिक नियोजन परिवर्तन के मध्य सम्बन्ध :-  विकास, रूपान्तरण, परिवर्तन एवं नियोजन अन्त: सम्बन्धित अवधारणायें हैं। व्यापक अर्थों में विकास मूलत: सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की उस प्रक्रिया से समझा जाता है, जो नियोजित है तथा समाज द्वारा इच्छित हो। विकास एक मूल्य परक (Value. Loaded) अवधारणा है। सामाजिक आर्थिक रूपान्तरण भी एक मूल्य परक अवधारणा है तथा यह विकास में समाहित है। सामाजिक-आर्थिक रूपान्तरण ही विकास की प्रक्रिया का निर्धारण करता है। विकास में सामाजिक संरचनाओं एवं सामाजिक सम्बन्धों में आये परिवर्तनों का नाम ही सामाजिक परिवर्तन है। इस प्रकार आर्थिक संरचनाओं तथा घटकों में आये परिवर्तनों को आर्थिक परिवर्तन कहते है। यह सकारात्मक व नकारात्मक दोनो प्रकार का हो सकता है। सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन एक मूल्य रहित (Value free) या निष्पक्ष अवधारणा है। सामाजिक-आर्थिक रूपान्तरण एवं विकास का एक महत्वपूर्ण कारक नियोजन है, जिसका साधारणतया अर्थ होता है- किसी प्रारूप के भागों को नियोजित करना अथवा किसी कार्य को करने के लिए योजनाएं बनाना।

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