विश्व के प्रमुख आतंकवादी संगठन

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विश्व के विभिन्न भागों में सक्रिय प्रमुख आतंकवादी संगठन हैं -

विश्व के प्रमुख आतंकवादी संगठन 

आतंकवादी संगठन सूची, विश्व के प्रमुख आतंकवादी संगठन, विश्व के विभिन्न भागों में सक्रिय प्रमुख आतंकवादी संगठन हैं -
  1. अलकायदा
  2. इस्लामिक स्टेट इन सीरिया एंड इराक (ISIS)
  3. एल. टी. टी. ई. (लिट्टे)
  4. लश्कर-ए-तोयबा
  5. जैश-ए-मोहम्मद
  6. हरकत-उल-मुजाहिद्दीन
  7. हिजबुल मुजाहिद्दीन
  8. हिजबुल्लाह
  9. तहरीके जेहाद 
  10. अल-बदर मुजाहिदीन
  11. हरकतुल मुजाहिदीन 
  12. हरकते-जेहादे-इस्लामी 
  13. जमातुल मुजाहिदीन
  14. हिजबुल मोमिन 
  15. अल फतह फोर्स
  16. अल अमर मुजाहिदीन
  17. अल जिहाद
  18. मुस्लिम जानवाज फोर्स
  19. कश्मीर जेहाद फोर्स
  20. अलबदर

अलकायदा

ओसामा बिन लादेन के दिमाग की उपज यह संगठन अस्सी के दशक में स्थापित किया गया। जिसका उद्देश्य ‘गैर-इस्लामी’ सरकारों को खत्म करके अखिल इस्लामी विश्व की स्थापना करना है। 11 सितम्बर, 2001 को न्यूयॉर्क में हुए हमले में इसकी प्रमुख भूमिका मानी जा रही है।

इस्लामिक स्टेट इन सीरिया एंड इराक (ISIS)

यह आतंकी संगठन सीरिया, इराक, यूरोप, तुर्की और बांग्लादेश जैसे कई देशों में अपनी दहशत का लोहा मनवा चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ISIS को दुनिया का सबसे बड़ा खतरा माना जाता है। वर्तमान में ISIS काफी सक्रिय और धनी आतंकी संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया में इस्लामीकरण को बढ़ावा देना और इस्लामीक कानून को लागू करना है।

एल. टी. टी. ई. (लिट्टे)

1972 में वी. प्रभाकरण ने उत्तरी एवं पूर्वी श्रीलंका को स्वतन्त्र तमिल राष्ट्र घोषित करने के उद्देश्य से लिट्टे ननामक संगठन का गठन किया, जिसने मानव बमों का इस्तेमाल अपने विरोधियों के विरुद्ध करके विश्व में तहलका मचा दिया। इस संगठन ने 1983 के बाद तो श्रीलंका सरकार के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष ही छेड़ दिया जो आज तक जारी है। इसके प्रशिक्षित लड़ाकुओं की संख्या लगभग आठ से दस हजार है तथा इसका नेटवर्क पूरे विश्व में आत्मघाती हमलों के लिए जाने जाते हैं। 

श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी तटीय क्षेत्रों पर इनका नियन्त्रण है।

लश्कर-ए-तोयबा

कश्मीर में सक्रिय सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन है। पाकिस्तान आधारित इस संगठन के आतंकवादियों को पाक अधिकृत कश्मीर में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके समर्थक सेना के शिविरों, सुरक्षा बलों तथा अन्य भीड़-भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाकर आत्मघाती विस्फोट करते हैं। इस संगठन ने घाटी में सुरक्षा बलों के अतिरिक्त आतंक फैलाने के लिए मुसलमानों को भी अपना शिकार बनाया है।

‘फिदाईन’ इसका आत्मघाती दस्ता है। यह संगठन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. के इशारे पर भारत में हिंसक वारदात करता है तथा आवश्यकतानुसार भारतीय सुरक्षा-बलों जैसी वर्दी पहनकर भी अपनी कार्यवाही को अंजाम देता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिण्टन की भारत यात्रा के समय सिक्खों की सामूहिक हत्या इन्हीं आतंकवादियों ने की थी। 

भारतीय संसद पर हमले का दोषी भी इसी संगठन को माना जा रहा है।

जैश-ए-मोहम्मद

इस संगठन की स्थापना मौलाना मसूद अजहर ने की है। यह वही अजहर है जिसे आतंकवादियों ने भारतीय एयरलाइन्स मे जहाज का अपहरण करके छुड़ाया था। विमान को यात्रियों सहित काठमांडू (नेपाल) से कंधार (अफगानिस्तान) ले गये। जिसकी वजह से भारतीय सरकार को तीन खूंखार आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा, जिनमें एक यह भी था। इसके पूर्व यह हरकत उल-अंसार का महासचिव था। पाक अधिकृत कश्मीर में इसके आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। 

13 दिसम्बर, 2001 को भारतीय संसद पर किये गये हमले में भी इसका हाथ था।

हरकत-उल-मुजाहिद्दीन

पहले यह हरकत-उल अंसार के नाम से जाना जाता था। बाद में अमेरिका की आपत्ति के कारण 1997 में इस संगठन पर प्रतिबन्ध लगा दिया। अमेरिका ने इसका सम्बन्ध ओसामा बिन लादेन से होने की पुष्टि की थी। लिहाजा इसने अपना नाम बदल लिया। पाकिस्तान में पनपने वाला यह संगठन कश्मीर में सक्रिय है। दिसम्बर 1999 में भारतीय विमान के अपहरण तथा मौलाना मसूद अजहर के मुक्त कराने में इस संगठन का हाथ था।

हिजबुल मुजाहिद्दीन

यह संगठन कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियाÍ संचालित करता है। इसकी स्थापना 1989 में हुई थी। प्रारम्भ में इसका नाम अल बदर था। भारतीय खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक कश्मीर की समूची आतंकवादी घटनाओं में से 10 से 20 प्रतिशत घटनाए इस संगठन के इशारे पर होती है।

हिजबुल्लाह

यह उग्र शिया गुट लेबनान में सक्रिय है। इजरायल का विरोधी होने के कारण यह फिलीस्तीन के आतंकवादी संगठनों का समर्थन करता है। इसे ईरान व सीरिया से आर्थिक सहायता मिलती है।

तहरीके जेहाद 

वर्ष 1977 के मार्च महीने में इसका पर्दापण हुआ। अल-बर्क तथा अंसार- उल-हक जैसे संगठनों से मिलकर यह बना था। प्रो. अब्दुल गनी बफ् के नेतृत्व वाली मुस्लिम कान्र्‍ेन्स का यह सशस्त्र विंग कहलाता है। फारुक कुरैशी इसका मुखिया है। इस संगठन में कश्मीरी नागरिकों के साथ-साथ पाकिस्तानी तथा अफगानी भी शामिल हैं। जबकि इसमें पाकिस्तानी सेना के सेवानिवृत सैनिक भी है, जिन्होंने करगिल युद्ध में हिस्सा लिया था। 

इसका मकसद कश्मीर को पाकिस्तान के साथ मिलाना है।

अल-बदर मुजाहिदीन

करीब एक हजार सदस्यों के साथ अल-बदर कश्मीर घाटी का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है। वर्ष 1998 में यह परिदृश्य में आया था। हालांकि उससे पहले यह हिज्बुल मुजाहिदीन का ही एक हिस्सा था। 

अभी इसकी कमान बख्त जमीन के हाथों में है।

हरकतुल मुजाहिदीन 

इसका पुराना नाम हरकतुल अंसार है। इसने नाम इसलिए बदला क्योंकि 1995 में विदेशी पर्यटकों के अपहरण के उपरान्त अमेरिका ने हरकतुल अंसार पर प्रतिबन्ध लागू कर दिया था। वैसे 1993 में भी हरकतुल अंसार का जन्म हुआ था जो कुछ समय के उपरान्त खो गया था। हरकते- जिहादे इस्लामी तथा हरकतुल मुजाहिदीन के सदस्यों ने मिलकर ही इस संगठन को खड़ा किया है। 

वर्तमान में फारुक कश्मीरी नामक आतंकवादी नेता इसका मुखिया है। इसे समयूल -हक तथा फजलूर रहमान के नेतृत्व वाली जमायते-उलेमा-ए-इस्लाम नामक संगठन से मदद मिलती है। इस संगठन के सदस्यों ने अफगानिस्तान के युद्ध में हिस्सा लिया है जबकि इसका सीधा सम्बन्ध ओसामा बिन लादेन के संगठन से भी है। 

सनद रहे कि भारतीय विमान के बंधको के बदले छोड़ा गया आतंकवादी मौलाना समूद अजहर भी पहले इसी संगठन का सदस्य था।

हरकते-जेहादे-इस्लामी 

1996 में हरकतुल अंसार से नाता तोड़ के कुछ सदस्यों ने इसका गठन किया। अफगानिस्तान के युद्ध में भी इसके सदस्यों ने हिस्सा लिया था। कश्मीर में इसका नेतृत्व अली अकबर द्वारा किया जा रहा है। जबकि इसका सुप्रीम कमाण्डर करी सैफुल्लाह है जो इस समय अफगानिस्तान में है। 

इस संगठन को भी जमायतुल-उलेमा-ए- इस्लाम द्वारा आर्थिक मदद दी जाती है जिसका यह सशस्त्र विंग कहलाता है।

जमातुल मुजाहिदीन

1990 में शेख अब्दुल ने इसका गठन किया जो एक छोटा और पाक समर्थक दल माना जाता है। अधिकतर सदस्य कश्मीर के नागरिक हैं। कुछ सदस्य पाकिस्तान तथा पाक अधिकृत कश्मीर के भी हैं। पाकिस्तान में इसका मुखिया मौलाना गुलाम रसूल उर्फ जनरल अब्दुल्लाह है। जनरल अब्दुल्ला फरवरी 2000 में श्रीनगर की जेल से फरार हो गया था। 

यह भारत-पाक के बीच शांति प्रयासों का कफ्र विरोधी है। 

हिजबुल मोमिन 

1991 में इरान के आतंकवादी शूजा अंबास ने इसका गठन किया था। यह शिया आतंकवादी संगठन है। इसे शिया समुदाय का समर्थन प्राप्त है। सिर्फ बड़गाम क्षेत्र में ही इसकी सक्रियता है। 

पाकिस्तान स्थित शिया संगठन इसे मदद देते हैं। 

अल फतह फोर्स

1994 में जेहाद फोर्स तथा अल जिहाद को मिलाकर इसका गठन हुआ था। इस पाक समर्थक आतंकवादी संगठन का नेतृत्व एजाजूर रहमान द्वारा किया जा रहा है, जो कश्मीर पीपुल्स लीग का एक हिस्सा है। 

अल अमर मुजाहिदीन

1989 में गठित बहुत ही छोटा आतंकवादी संगठन है। हुर्रियत कांर्‍ेन्स के पूर्व अध्यक्ष मीरवायज उमर फारुक ने नेतृत्व वाली अवामी एक्शन कमेटी का यह आतंकवादी विंग है। इसका नेता लतीफ उल हक है। श्रीनगर में सइका प्रभाव था, लेकिन 1992 में इसके नेता तथा संस्थापक मुश्ताक अहमद जरगर की गिरफ्तारी के साथ ही इसका प्रभाव कम होना शुरु हो गया था।

तहरीक-उल-मुजाहिदीन

1990 में सामने आये इस संगठन का वास्ता अहले हदीत से है। इसका ग्रुप चीफ मौलाना गजाली है। इसमें कश्मीरी तथा पाकिस्तानी शामिल हैं। छोटा संगठन लेकिन तेज बहुत है और आजादी के संघर्ष में कई बार नाम कमा चुका है। 

अल जिहाद

1995 में गठित इस संगठन का मुखिया मुहम्मद नजीर है। 

मुस्लिम जानवाज फोर्स

1990 में सामने आया और सिर्फ कश्मीरियों को भी भर्ती किया। कभी बहुत देर तक खबरों में रहा था। पीपुल्स डेमोक्रेटिक फंट का यह आतंकवादी गुट है, जिसका नेता शब्बीर शाह है।

कश्मीर जेहाद फोर्स

श्रीनगर का समीर खान इसका मुखिया है। इसका मुख्यालय मुजफराबाद में हैं। 

अलबदर 

यह गुट जमायते इस्लामी ने गठित कराया था। इसमें बहुत से अरब शामिल हैं। गत जुलाई 2000 में हिजबुल मुहाहिदीन ने युद्ध विराम की घोषणा की तो इस गुट ने इसका विरोध किया और श्रीनगर तथा कुपवाड़ा में भारतीय सेना के दो कैम्पों पर हमला किया। 

उपयुक्त आतंकवादी संगठनों में से कुछ तो बहुत ही सक्रिय है, जो दिन-प्रतिदिन हिंसक आतंकवादी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। 

संदर्भ -
  1. https://m.dailyhunt.in/news/nepal/hindi/newsid-n169411008

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