प्रतिस्पर्धा का अर्थ, परिभाषा

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प्रतिस्पर्धा का अर्थ, परिभाषा बोगार्डस, 0 एस0 : प्रतिस्पर्धा किसी वस्तु को प्रापत करने की प्रतियोगिता को कहते हैं जो कि इतनी मात्रा मे कहीं नहीं पा जाती जिससे मांग की पूर्ति हो सके। फिचर, जे0 […]

सामाजिक निदान का अर्थ

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निदान के सम्बन्ध में सभी निदानात्मक सम्प्रदाय के विचारकों ने अपने-अपने मत प्रस्तुत किये हैं। परन्तु उन सभी मतों और विचारों का मूल अर्थ लगभग समान है। यहाँ पर हम कुछ विद्वानों की परिभाषाओं एवं विचारों […]

अवलोकन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएं

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अवलोकन शब्द अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘Observation’ का पर्यायवाची है। जिसका अर्थ ‘देखना, प्रेक्षण, निरीक्षण, अर्थात् कार्य-कारण एवं पारस्पारिक सम्बन्धों को जानने के लिये स्वाभाविक रूप से घटित होने वाली घटनाओं का सूक्ष्म निरीक्षण है। प्रो0 […]

श्री बगलामुखी स्तोत्रं

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विनियोग –  ॐ अस्य श्री बगलामुखी-स्तोत्रस्य भगवान नारद ऋषिः, बगलामुखी देवता, मम सन्निहितानामा दुष्टानां विरोधिनाम वंग मुख- पद-जिव्हा बुद्धिना स्तंभनार्थे श्री बगलामुखी प्रसाद सिध्यर्थे पत्थे विनियोगः कर – न्यास – ॐ ह्लीं अंगुष्ठाभ्यं नमः. ॐ बगलामुखी […]

सामाजिक क्रिया का अर्थ, परिभाषा एवं प्रारूप

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सामाजिक क्रिया समाज कार्य की सहायक प्रणाली है। प्रारम्भ से ही समाज कार्य का आधार मानवता रही है। सामाजिक क्रिया का जिसे प्रारम्भ में समाज सुधार का नाम दिया गया है, समाज कार्य के अभ्यास में […]

समाज का शिक्षा पर प्रभाव

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शिक्षा पर समाज के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता है, क्योंकि समाज शिक्षा की व्यवस्था करता है। इस प्रभाव को जा सकता है- समाज के स्वरूप का प्रभाव –  समाज के स्वरूप का शिक्षा की […]

सामुदायिक संगठन का अर्थ, उद्देश्य एवं सिद्धांत

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सामुदायिक संगठन साधारण बोलचाल में सामुदायिक संगठन का अभिप्राय: किसी समुदाय की आवश्यकताअें तथा साधनों के बीच समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने से है। सामुदायिक संगठन एक प्रक्रिया है। इस रूप में सामुदायिक संगठन […]

सामाजिक विकास की अवधारणा एवं विशेषताएँ

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सामाजिक संरचना के उन विभिन्न पहलुओं और सामाजिक कारकों का अध्ययन है जो समाज के त्रीव विकास में बाधा उत्पन्न करते है। इसका उद्देश्य किसी समुदाय के समक्ष उस आर्दश प्रारूप को भी प्रस्तुत करना है […]

किशोरावस्था में शारीरिक विकास

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किशोरावस्था विकास की अत्यंत महत्वपूर्ण सीढ़ी है। किशोरावस्था का महत्व कई दृष्टियों से दिखाई देता है प्रथम यह युवावस्था की ड्योढी है जिसके ऊपर जीवन का समस्त भविष्य पाया जाता है। द्वितीय यह विकास की चरमावस्था […]

बाल्यावस्था में शारीरिक विकास

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छ: वर्ष की आयु से लेकर बारह वर्ष की आयु तक की अवधि बाल्यावस्था कहलाती है। बाल्यावस्था के प्रथम तीन वर्षो के दौरान अर्थात 6 से 9 वर्ष की आयु तक शारीरिक विकास तीव्र गति से […]