दूरस्थ शिक्षा का ऐतिहासिक विकास

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दूरस्थ शिक्षा का उद्भव  पत्राचार के रूप में दूरस्थ शिक्षा का इतिहास 1840 से मानी जाती है। आधुनिक नवीन प्रणाली का प्रारम्भिक रूप ‘‘ओल्ड टैसटामन’’ के अनुदेशनात्मक लेखों से मिलता है, इसके अतिरिक्त आम धारणा के […]

स्व-अधिगम सामग्री क्या है?

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स्व-अधिगम साग्रमी दूरस्थ शिक्षा की मूलाधार है। इसे स्व-अनुदेशनात्मक, स्व-अध्ययन सामग्री एवं स्व-शिक्षण सामग्री के रूप में पुकारा जाता है। सभी नामों के मूल में एक ही तथ्य है अपने आप पढ़ने-सीखने वाली सामग्री अर्थात् ऐसी […]

प्रश्नावली का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

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प्रश्नावली अध्ययन विषय से सम्बन्धित प्रश्नों का एक संरचित समूह है जिसमें सूचनायें संकलित करने के लिए वैकल्पिक प्रश्नों में कोश्ठक तथा लिखित उत्तरों के लिए खाली स्थान उपलब्ध रहता है। इस माध्यम के द्वारा विस्तृत […]

शोध प्रारूप का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं महत्व

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प्रस्तावित सामाजिक शोध की विस्तृत कार्य योजना अथवा शोधकार्य प्रारम्भ करने के पूर्वसम्पूर्ण शोध प्रक्रियाओं की एक स्पष्ट संरचना ‘शोध प्रारूप’ या ‘शोध अभिकल्प’ के रूप में जानी जाती है। शोध प्रारूप के सम्बन्ध में यह […]

सामाजिक शोध का अर्थ, उद्देश्य एवं चरण

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सामाजिक शोध के अर्थ को समझने के पूर्व हमें शोध के अर्थ को समझना आवश्यक है। मनुष्य स्वभावत: एक जिज्ञाशील प्राणी है। अपनी जिज्ञाशील प्रकृति के कारण वह समाज वह प्रकृति में घटित विभिन्न घटनाओं के […]

आदर्शवाद का अर्थ, परिभाषा, तत्व एवं सिद्धान्त

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आदर्शवाद अंग्रेजी के आइडियलिज्म का शाब्दिक अर्थ है। यह दर्शन की एक शाखा के लिये प्रयुक्त होता है। इस दर्शन में उच्च आदर्शों की बात की जाती है। इस दर्शन से सम्बंधित दार्शनिक विचार की चिरन्तन […]

अस्तित्ववाद क्या है?

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अस्तित्ववाद बीसवी शताब्दी का नया दर्शन है। जहाँ विज्ञान और भौतिकवादी प्रवाह ने मनुष्य के अस्तित्व को ही मूल्यविहीन किया वही लोकतंत्रात्मक व समाजवादी राजनैतिक विचारधाराओं ने व्यक्ति के अस्तित्व से उपर समाज के अस्तित्व पर […]

विशिष्ट बालक का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

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विशिष्ट बालक को जानने से पूर्व यह जानना आवश्यक है कि सामान्य बालक किसे कहते है। विद्यालय में हर समाज, हर वर्ग तथा भिन्न-भिन्न परिवारों से बालक आते है ये सभी विभिन्न होते हुये भी सामान्य […]

परिवार नियोजन का अर्थ, महत्व एवं पद्धतियां

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भारत विश्व में पहला देश है जिसने परिवार नियोजन कार्यक्रम को सरकारी स्तर पर अपनाया है भारत सन् 1951 से जनसंख्या को सीमित करने के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बढ़ती हु जनसंख्या […]