ईसाई विवाह के नियम और विशेषताएं

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जिस प्रकार हिन्दू अनेक जातियों में तथा मुसलमान शिया और सुन्नियों में विभाजित हैं, उसी प्रकार ईसाइयों में भी स्तरीकरण मिलता है। वे दो समूहों में विभाजित हैं केथोलिक और प्रोटेस्टेन्ट। केथोलिक लेटिन केथोलिक तथा सीरियन […]

आधुनिकता का अर्थ एवं परिभाषा

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आधुनिकता एक वैश्विक अवधारणा एवं वैचारिक आयाम है। आधुनिकता का आरम्भ चौदहवीं शताब्दी में यूरोप से हुआ तथा अट्ठारहवीं शताब्दी तक यह भारत में भी पहुँच चुकी थी। ‘आधुनिकता’ शब्द नवीनता का बोध कराता है जो […]

उत्तर आधुनिकता का अर्थ एवं परिभाषा

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उत्तर आधुनिकता अंग्रेजी के ‘Post Modernism’ शब्द का हिन्दी पर्याय है। जिसका प्रयोग द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद आधुनिकता के अंत की घोषणा के पश्चात् किया गया। पोस्ट शब्द का अर्थ होता है ‘बाद में’। उत्तर आधुनिकता […]

उद्यमिता विकास की परिभाषा, आवश्यकता एवं महत्व

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उद्यमिता विकास व्यवसाय में आवश्यक संसाधनों को जुटाता है और व्यवसाय में निहित अनेक प्रकार की जोखिमों को झेलने एवं अनिश्चितताओं का सामना करना प्रमुख कार्य होता है।  उद्यमिता नए-नए उपक्रम की स्थापना, नियंत्रण एवं निर्देशन […]

उपमा अलंकार का अर्थ, परिभाषा और उदाहरण

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उपमा अलंकार सर्वप्रमुख अर्थालंकार है और अर्थालंकारों का प्रतिनिधि भी है। डॉ0 रामानन्द शर्मा के शब्दों में: ‘‘शब्दालंकारों में श्लेष और अर्थालंकारों में उपमा- ये दो ऐसे अलंकार है जो स्वयं अलंकार होकर अन्य अलंकारों को […]

एक कर प्रणाली एवं बहुकर प्रणाली गुण एवं दोष

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एक कर प्रणाली के अन्तर्गत राज्य द्वारा केवल एक कर लगाया जाता है जो या तो कृषि उत्पादन पर हो सकता है, आय पर हो सकता है अथवा अन्य किसी वस्तु पर हो सकता है। एक […]

कपालभाति के प्रकार, क्रियाविधि और उसके लाभ

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कपालभाति षटकर्मों की अन्तिम क्रिया है। कपाल का अर्थ है मस्तिष्क, व भॉंति का अर्थ होता है चमकाना, अर्थात प्रकासित करना। कपालभॉति की क्रिया में मतिष्क का का शोधन होता है। वस्तुत: कपालभाति शोधन की ही […]

गौरवपूर्ण क्रांति (1688) के कारण, घटना और परिणाम

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गौरवपूर्ण क्रांति के उदार विचारों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी और फ्रांसीसी क्रांति को प्रभावित किया और आगे चल कर समस्त विश्व में लोकतान्त्रिक व्यवस्था की स्थापना हेतु आन्दोलनों की पृष्ठभूमि तैयार की। गौरवपूर्ण […]

ग्राम सभा के कार्य, महत्व एवं भूमिका

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सभा एक ऐसी अवधारणा है जो सामान्य जन की आवश्यकताओं एवं इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करती है और जाति, धर्म, लिंग, वर्ग, राजनीतिक प्रतिबद्धता पर विचार किए बिना ग्रामीण समुदाय को सन्दर्भित करती है। यह आमजन की […]

जजमानी व्यवस्था क्या है?

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जजमानी व्यवस्था का वर्णन अन्तर-पारिवारिक अन्तर जातीय सम्बन्ध के रूप में किया गया है जिसमें संरक्षकों (patrons) तथा सेवाकर्ताओं के बीच के सम्बन्ध स्वामी तथा अधीन (superordinate-subordinate) के होते हैं। संरक्षक स्वच्छ जातियों के परिवार होते […]