उपचारात्मक पोषण क्या है?

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उपचारात्मक पोषण आहार का बीमारी से बहुत महत्वपूर्ण संबंध होता है। रोग, रोग की गम्भीरता, रोगी के पोषण स्तर के अनुसार आहार को सुधारा जा सकता है। अत: एक साधारण, स्वस्थ्य व्यक्ति द्वारा लिये जाने वाले आहार में कुछ विशेष बदलाव लाकर उसे रोग की आवश्यकतानुसार सुधारा जा सकता है। आहार में बदलाव या सुधार […]

कुपोषण के लक्षण, कारण एवं कुपोषण से बचने के उपाय

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कुपोषण पोषण वह स्थिति है जिसमें भोज्य पदार्थ के गुण और परिणाम में अपर्याप्त होती है। आवश्यकता से अधिक उपयोग द्वारा हानिकारक प्रभाव शरीर में उत्पन्न होने लगता है तथा बाहृा रूप से भी उसका कुप्रभाव प्रदर्शित हो जाता है। जब व्यक्ति का शारीरिक मानसिक विकास असामान्य हो तथा वह अस्वस्थ महसूस करे या न […]

आहार एवं पोषण का अर्थ एवं परिभाषा

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जीवधारियों को जैविक कार्यो के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा भोज्य पदार्थो के जैव-रासायनिक आक्सीकरण से प्राप्त होता है। सम्पूर्ण प्रक्रिया को जिसके अन्तर्गत जीवधारियों द्वारा बाह्य वातावरण से भोजन ग्रहण करके उसे कोशिका में ऊर्जा उत्पादन करने या जीवद्रव्य में स्वांगीकृत करके मरम्मत या वृद्धि में प्रयुक्त करता है; पोषण कहते है। […]

मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936

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प्रारंभ में यह अधिनियम कारखानों और रेलवे-प्रशासन में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों के साथ लागू था, जिनकी मजदूरी 200 रुपये प्रतिमाह से अधिक नही थी। बाद में इसे कर्इ अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा नियोजनों में लागू किया गया। इनमें मुख्य हैं – (1) ट्राम पथ सेवा या मोटर परिवहन-सेवा, (2) संघ की सेना या […]

कार्य विश्लेषण क्या है ?

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मानवीय संसाधनों की अधिप्राप्ति, मानव संसांधन प्रबन्धन का प्रथम संचालनात्मक कार्य है, जिसे विभिन्न उप-कार्यों, जैसे-मानव संसाधन नियोजन, भर्ती तथा चयन में उप-विभाजित किया जा सकता है। प्रबन्धतन्त्र को एक कार्य के लिए अपेक्षित व्यक्ति के प्रकार तथा भविष्य में सेवायोजित किये जाने वाले व्यक्तियों की संख्या का निर्धारण करना आवश्यक होता है। दूसरे शब्दों […]