शैशवावस्था में शारीरिक विकास

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सामान्यता: मनोवैज्ञानिकों ने शैशवावस्था का अर्थ उस अवस्था से लगाया जो औसतन जन्म से 5-6 वर्ष तक चलती है। एडलर के अनुसार “शैशवावस्था द्वारा जीवन का पूरा क्रम नििश्न्चत होता है। शैशवावस्था में विशेषकर जन्म से 3 वर्ष तक की आयु होने के दौरान शारीरिक विकास की गति अत्यंत तीव्र रहती है। शैशवावस्था में होने […]

जन्म पूर्व शारीरिक विकास

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ज्यों ही अण्ड शुक्राणु से मिलकर निशेचित होता है, त्यों ही मानव जीवन का प्रारम्भ हो जाता है। निशेचित अण्ड सर्वप्रथम दो कोषों में विभाजित होता है, जिसमे से प्रत्येक कोष पुन: दो-दो में विभाजित हो जाते हैं। कोष विभाजन की यह प्रक्रिया अत्यंत तीव्र गति से चलने लगती है। इनमें ये कुछ कोष प्रजनन […]

लागत-लाभ विश्लेषण विधि का महत्व

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सिंचा तथा परिवहन परियोजनाओं में निवेश के मूल्यांकन के लिये लागत-लाभ विश्लेषण तकनीक का विकास अमरीका में किया गया। अल्पविकसित देशों में परियोजनायें अक्सर तदर्थ (Adhoc) आधार पर चुनी जानी है तथा लागतों और लाभों के रूप में उनके मूल्यांकन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है। क्योंकि सभी परियोजनायें विकास के उद्देश्य से सम्बद्ध […]

सामाजिक लागत-लाभ विश्लेषण का अर्थ

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सामाजिक दृष्टिकोण से परियोजनाओं (Projects) के मूल्यांकन के लिये लागत-लाभ विश्लेषण सबसे उपयुक्त तथा सर्वमान्य तरीका है। यह विश्लेषण परियोजना मूल्यांकन के लिये सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं उपयोगी कसौटी भी है। यह योजना प्राधिकरण के लिये इस बात में सहायक है कि वह परियोजनाओं के लाभों और लागतों के वर्तमान मूल्यों के बीच के अन्तर को […]

अनुशासन का अर्थ, परिभाषा एवं सिद्धांत

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अनुशासन शब्द अंग्रेजी के ‘डिसीप्लीन’ शब्द का पर्याय है कि जो कि ‘डिसाइपल’ शब्द से बना है। जिसका अर्थ है- ‘शिष्य’’ शिष्य से आाज्ञानुसरण की अपेक्षा की जाती है। हिन्दी ने संस्कृत की ‘शास्’ धातु से यह शब्द बना है। इसका अभिप्राय है नियमों का पालन, आज्ञानुसरण नियंत्रण। शाब्दिक अर्थ की दृष्टि से अनुशासन की […]