सामाजिक क्रिया का अर्थ, परिभाषा एवं प्रारूप

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सामाजिक क्रिया समाज कार्य की सहायक प्रणाली है। प्रारम्भ से ही समाज कार्य का आधार मानवता रही है। सामाजिक क्रिया का जिसे प्रारम्भ में समाज सुधार का नाम दिया गया है, समाज कार्य के अभ्यास में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है।1922 में मेरी रिचमंड ने सामाजिक क्रिया का उल्लेख समाज कार्य की चार प्रमुख प्रणालियों […]

श्री बगलामुखी स्तोत्रं

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विनियोग –  ॐ अस्य श्री बगलामुखी-स्तोत्रस्य भगवान नारद ऋषिः, बगलामुखी देवता, मम सन्निहितानामा दुष्टानां विरोधिनाम वंग मुख- पद-जिव्हा बुद्धिना स्तंभनार्थे श्री बगलामुखी प्रसाद सिध्यर्थे पत्थे विनियोगः कर – न्यास – ॐ ह्लीं अंगुष्ठाभ्यं नमः. ॐ बगलामुखी तर्जनीभ्यां नमः. ॐ सर्व दुष्टानां मध्यमाभ्यां वषट्. ॐ वाचां मुखं पदं स्तम्भय अनामिकाभ्यां हूं ॐ जिव्हां कीलय कनिष्ठिकाभ्यां वौषट. […]

सामुदायिक संगठन का अर्थ, उद्देश्य एवं सिद्धांत

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सामुदायिक संगठन साधारण बोलचाल में सामुदायिक संगठन का अभिप्राय: किसी समुदाय की आवश्यकताअें तथा साधनों के बीच समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने से है। सामुदायिक संगठन एक प्रक्रिया है। इस रूप में सामुदायिक संगठन का तात्पर्य किस समुदाय या समूह में लोगों द्वारा आपस में मिलकर कल्याण कार्यो की योजना बनाना तथा इसके […]

सामाजिक विकास की अवधारणा एवं विशेषताएँ

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सामाजिक संरचना के उन विभिन्न पहलुओं और सामाजिक कारकों का अध्ययन है जो समाज के त्रीव विकास में बाधा उत्पन्न करते है। इसका उद्देश्य किसी समुदाय के समक्ष उस आर्दश प्रारूप को भी प्रस्तुत करना है जो उस समुदाय के लोगों को विकास की ओर अग्रसर कर सके। जब से विभिन्न देशों में, विशेषत: तृतीय […]

समुदाय का अर्थ एवं परिभाषा

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हम सभी किसी एक गाँव अथवा नगर में निवास करते हैं। प्रत्येक गाँव एवं नगर की निश्चित सीमाएँ होती हैं। इसीलिए गाँव एवं नगर समुदाय के दो प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं। व्यक्ति का अपने गाँव अथवा नगर में सामान्य जीवन व्यतीत होता है तथा वह अपनी पहचान अपने गाँव या नगर के नाम से […]