सामाजिक नीति की अवधारणा एवं उद्देश्य

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स्वतंत्रता प्राप्ति के पष्चात् सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए नियोजित विकास का सहारा लेना आवश्यक समझा गया क्योंकि यह अनुभव किया गया कि गरीबी, बेकारी जैसी अनेक गंभीर सामाजिक समस्यायें उचित विकास न होने के कारण ही हमारे समाज में व्यापक रूप से विद्यमान है सामाजिक समस्याओं को और अधिक तेज करना तथा […]

परिवार नियोजन का अर्थ, महत्व एवं पद्धतियां

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भारत विश्व में पहला देश है जिसने परिवार नियोजन कार्यक्रम को सरकारी स्तर पर अपनाया है भारत सन् 1951 से जनसंख्या को सीमित करने के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बढ़ती हु जनसंख्या और सीमित साधनों में नियन्त्रण स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि जनसंख्या पर नियन्त्रण किया जाए। शाब्दिक […]

भारत में निम्न जन स्वास्थ्य स्तर के कारण, सुधार के लिए सुझाव

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सामान्यत: स्वास्थ्य से तात्पर्य बिमारियों से मुक्त होने से समझा जाता है, परंतु वैज्ञानिक दृष्टि से इसे स्वास्थ्य नहीं कहा जाता है। स्वास्थ्य होने का तात्पर्य शारीरिक, मानसिक, अध्यात्मिक एवं सामाजिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति से है। स्वास्थ्य किसी भी समाज की आर्थिक प्रगति के लिए अनिवार्य है। शाब्दिक दृष्टि से जन स्वास्थ्य का आशय […]

अधिगम (सीखने) का अर्थ एवं सिद्धान्त

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सीखने का अर्थ  सीखना अनुभव व प्रशिक्षण द्वारा व्यिक्त्त के व्यवहार में परिवर्तन है। अनुभव दो प्रकार का हो सकता है, प्रथम प्रकार का अनुभव बालक स्वयं ग्रहण करता है जबकि दूसरे प्रकार का अनुभव, अन्य लोगों के अनुभव से लाभ उठाने की श्रेणी में आता है। प्रशिक्षण के अन्तर्गत औपचारिक शिक्षा आती है। एक […]