जाति का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

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जाति का अर्थ अंग्रेजी भाषा का शब्द ‘caste’ स्पेनिश शब्द ‘casta’ से लिया गया है। ‘कास्टा’ शब्द का अर्थ है ‘नस्ल, प्रजाति अथवा आनुवंशिक तत्वों या गुणों का संग्रह’। पुर्तगालियों ने इस शब्द का प्रयोग भारत […]

जाति-व्यवस्था की विशेषताएं

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भारत में जाति-व्यवस्था का अध्ययन तीन परिप्रेक्ष्यों में किया गया है: भारतशास्त्रीय (Indological), समाज-मानवशास्त्रीय (socio-anthropological) तथा समाज-शास्त्रीय (sociological)। भारतशास्त्रीयों ने जाति का अध्ययन धर्म ग्रंथीय (scriptual) दृष्टिकोण से किया है, समाज मानवशास्त्रियों ने सांस्कृतिक दृष्टिकोण से […]

जाति-व्यवस्था के गुण एवं दोष

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समय-समय पर भारतीय जाति-व्यवस्था की विभिन्न लेखकों द्वारा आलोचना की गई है। समाज में जितनी बुराइयां हैं, उन सबके लिए जाति-व्यवस्था को दोषी ठहराया गया है। परन्तु एक मात्र यही तथ्य कि इतने आक्षेपों के बावजूद […]

जेरेमी बेन्थम का सिद्धांत

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जेरेमी बेन्थम का उपयोगितावाद का दर्शन गलत धारणाओं पर आधारित है। बेन्थम ने सुख औरआनन्द को समानाथ्र्ाी मान लिया है। यह अन्तर्विरोधों से ग्रस्त है। यह गुणात्मक पहलू की उपेक्षा करता है। उसका सुखवादीमापन यन्त्र वैज्ञानिक […]

ध्वनि उत्पत्ति की प्रकिया व चरण

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जब दो वस्तुओं के आपस में टकराने से वायु में कंपन हो और कर्ण-पटह तक पहुँचने से इसका अनुभव हो, तो उसे ध्वनि कहते हैं। प्रत्येक ध्वनि में कंपन होती है और प्रत्येक कंपन में ध्वनि […]

ध्वनि का अर्थ, परिभाषा और उसका वैज्ञानिक आधार

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ध्वनि का सामान्य अर्थ है- आवाज, गूँज, नाद, कोलाहल। मेघ गरजते हैं, तूफान चिंघाड़ता है, पशु रम्भते हैं, पक्षी चहचहाते हैं, प्रकृति के अन्य रूप शब्द करते हैं, भाषा विज्ञान इन्हें ध्वनि नहीं मानता। उसकी दृष्टि […]

ध्वनि परिवर्तन के कारण एवं दिशाएँ

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ऐतिहासिक ध्वनि विज्ञान के किसी भाषा की विभिन्न ध्वनियों के विकास का विभिन्न कालों में अध्ययन किया जाता है। उदाहरणार्थ हिंदी के संबंध में देखेंगे कि वह हिंदी में किन-किन स्रोतों (संस्कृत, प्राकृति, अपभ्रंश, फारसी, अरबी, […]

नेति क्रिया के प्रकार, क्रिया की विधि और उसके लाभ

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नेति षटकर्मों की तृतीय शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। नेति क्रिया को आधुनिक समय में कान, नाक व गले से सम्बद्ध किया है। नेति क्रिया के माध्यम से मुख्य रूप से उपरोक्त् तीन अंगों (नाक, कान, गले) […]

न्याय दर्शन क्या है?

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भारतीय दर्शन के प्राणस्वरूप न्यायशास्त्र का दूसरा नाम प्रमाणशास्त्र भी है। जिस प्रकार साहित्य आदि अन्य शास्त्रों के ज्ञान में व्याकरण की अपेक्षा है, उसी प्रकार अन्य दर्शनशास्त्र के ज्ञान में न्याय की अपेक्षा है। सम्भवत: […]

न्यायिक पुनरावलोकन का अर्थ और परिभाषा एवं विशेषताएँ

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न्यायिक पुनरावलोकन न्यायालय की वह शक्ति होती है जिसके आधार पर संविधान की व्याख्या की जाती है और विधानपालिका, कार्यपालिका या प्रशासन के उन कार्यों को रद्द किया जाता है जो सर्वोच्च कानून अर्थात् संविधान के […]