सम्प्रदाय का अर्थ

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सम्प्रदाय का अंग्रेजी भाषा में पर्यायवाची शब्द ‘Religion’ होता है। कार्ल मार्क्स ने कहा है कि “Religion is the opium of the people” यानी धर्म या सम्प्रदाय जनता की अफीम है। कोई भी वस्तु अपने आप में बुरी नहीं होती है। बल्कि उसका उपयोग करने वालों पर यह निर्भर करता है। सम्प्रदाय का अर्थ सम्प्रदाय […]

ग्राम सभा के कार्य, महत्व एवं भूमिका

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ग्राम सभा एक ऐसी अवधारणा है जो सामान्य जन की आवश्यकताओं एवं इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करती है और जाति, धर्म, लिंग, वर्ग, राजनीतिक प्रतिबद्धता पर विचार किए बिना ग्रामीण समुदाय को सन्दर्भित करती है। यह आमजन की सर्वोच्चता को स्थापित करती है। ग्राम सभा स्थानीय स्तर पर गांव के प्रत्येक मतदाता को निर्णय-निर्माण, योजना निर्माण, […]

उपनिषदों की संख्या और उनके नाम

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उपनिषदों की बड़ी महिमा है, ज्ञान की चरम सीमा ही उपनिषद् के नाम से प्रसिद्ध हुई है। वैदिक वाड़्मय का शीर्ष स्थान उपनिषद् है- इस कथन मात्र से ही उपनिषदों की लोकोत्तर महत्ता स्पष्ट हो जाती है। प्राचीनकाल में औपनिषद ज्ञान का बड़ा महत्त्व था। ऊँचे से ऊँचे अधिकारी ही इस विद्या में पारत होते […]

वेद शब्द का अर्थ, स्वरूप, चतुर्धा विभाजन एवं भाग

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‘वेद’ शब्द का अर्थ- वैदिक ग्रन्थों में ‘वेद’ शब्द दो प्रकार के पाये जाते है- अन्तोदात्त एवं आद्युदात्त। इनमें प्रथम प्रकार का शब्द ‘दर्भमुष्टि’ के अर्थ में एवं द्वितीय प्रकार का शब्द ‘ज्ञान’ के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। ऋग्वेद-संहिता में ‘असुन्’ प्रत्ययान्त वेद: (वेदस्) शब्द अनेक बार आया है। भाष्यकारों के द्वारा इस शब्द […]

नगर निगम का अर्थ व परिभाषा

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शासन अथवा सरकार हमें चार स्तरों पर देखने को मिलती है जिसमें सर्वोच्च स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय सरकार मध्यम स्तर पर राष्ट्रीय एवं प्रांतीय सरकार तथा स्थानीय स्तर स्थानीय सरकार तथा देखने को मिलती है। लेकिन स्थानीय स्वशासन लोकंतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा के रूप में जानी जाती है। इसके द्वारा ही स्थानीय समस्याओं का उचित निवारण […]