जजमानी व्यवस्था क्या है?

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जजमानी व्यवस्था का वर्णन अन्तर-पारिवारिक अन्तर जातीय सम्बन्ध के रूप में किया गया है जिसमें संरक्षकों (patrons) तथा सेवाकर्ताओं के बीच के सम्बन्ध स्वामी तथा अधीन (superordinate-subordinate) के होते हैं। संरक्षक स्वच्छ […]

जाति-व्यवस्था की विशेषताएं

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भारत में जाति-व्यवस्था का अध्ययन तीन परिप्रेक्ष्यों में किया गया है: भारतशास्त्रीय (Indological), समाज-मानवशास्त्रीय (socio-anthropological) तथा समाज-शास्त्रीय (sociological)। भारतशास्त्रीयों ने जाति का अध्ययन धर्म ग्रंथीय (scriptual) दृष्टिकोण से किया है, समाज मानवशास्त्रियों […]

नातेदारी की परिभाषा एवं श्रेणियां

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प्रत्येक समाज में पुरुष अपने जीवन में किसी न किसी समय एक पति, एक पिता (अगर वह अविवाहित रहने का निश्चय न कर चुका हों) एक पुत्र व एक भाई की भूमिका […]

संयुक्त परिवार के पतन के कारण एवं उसके परिणाम

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परम्परागत (संयुक्त) परिवार व्यवस्था के विखण्डन के लिए कौन-कौन से कारक उत्तरदायी हैं? परिवार में परिवर्तन किसी प्रभावों के एक समुच्चय (set of influences) से, नहीं आया है, और न यह सम्भव […]

संयुक्त परिवार की विशेषताएँ

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संयुक्त परिवार शब्द में ‘संयुक्तता’ की धारणा की विभिन्न विद्वानों ने विविध रूप से विवेचना की है। कुछ विद्वानों (जैसे इरावती कर्वे) ने संयुक्तता के लिए सह-निवास (co-residentiality) को आवश्यक माना है […]