अनुवाद का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र

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भारत में अनुवाद की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। कहते हैं अनुवाद उतना ही प्राचीन जितनी कि भाषा। आज ‘अनुवाद’ शब्द हमारे लिए कोई नया शब्द नहीं है। विभिन्न भाषायी मंच पर, साहित्यिक पत्रिकाओं में, अखबारों में तथा रोजमर्रा के जीवन में हमें अक्सर ‘अनुवाद’ शब्द का प्रयोग देखने-सुनने को मिलता […]

पत्रकारिता और अनुवाद

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पत्रकारिता में अनुवाद की समस्या से परिचय कराने की दृष्टि से प्रस्तुत लेख ‘पत्रकारिता और अनुवाद’ में समाचार माध्यमो के लिए लिखे जाने वाले समाचारो के अनुवाद की समस्या की चर्चा की गई है। इसके साथ ही पत्रकारिता की भाषा के अनुवाद, शैली, शीर्षक-उपशीर्षक, मुहावरे एवं लाक्षणिक पदबंधों, पारिभाषिक शब्दावली के अनुवाद की समस्या और […]

अनुवाद की महत्ता एवं आवश्यकता

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उत्तर-आधुनिक युग में अनुवाद की महत्ता व उपादेयता को विश्वभर में स्वीकारा जा चुका है। वैदिक युग के ‘पुन: कथन’ से लेकर आज के ‘ट्रांसलेशन’ तक आते-आते अनुवाद अपने स्वरूप और अर्थ में बदलाव लाने के साथ-साथ अपने बहुमुखी व बहुआयामी प्रयोजन को सिद्ध कर चुका है। प्राचीन काल में ‘स्वांत: सुखाय’ माना जाने वाला […]

अनुवाद एवं भाषाविज्ञान

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अनुवाद एक भाषिक कला है। सामान्य अर्थ में, एक भाषा में कही गई बात को दूसरी भाषा में कहना ‘अनुवाद’ है। यहाँ कथन या अभिव्यक्ति का माध्यम है ‘भाषा’। स्पष्ट है कि अनुवाद क्रिया पूर्णत: भाषा पर आधारित है। कदाचित इसीलिए भोलानाथ तिवारी जी ने अनुवाद को ‘भाषान्तर’ कहा है। एक भाषिक क्रिया होने के […]

अनुवाद की प्रक्रिया, स्वरूप एवं सीमाएँ

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अनुवाद के स्वरूप, अनुवाद-प्रक्रिया एवं अनुवाद की सीमाओं के बारे में की चर्चा की जा रही है। सबसे महत्त्वपूर्ण है- ‘अनुवाद की प्रक्रिया’। अनुवाद के व्यावहारिक पहलु को जानने के लिए अनुवाद-प्रक्रिया को समझना जरूरी है। इसलिए प्रस्तुत अध्याय में नाइडा, न्यूमार्क और बाथगेट- तीनों विद्वानों द्वारा प्रतिपादित अनुवाद-प्रक्रिया को सोदाहरण प्रस्तुत किया गया है। […]

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