अर्थव्यवस्था का अर्थ, विशेषताएं एवं प्रकार

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अर्थव्यवस्था मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि करने के लिये एक मानव निर्मित संगठन है। ए.जे. ब्राउन के अनुसार, ‘‘अर्थव्यवस्था एक ऐसी पद्धति है जिसके द्वारा लोग जीविका प्राप्त करते हैं।’’ जिस विधि से मनुष्य जीविका प्राप्त करने का प्रयास करता है वह समय तथा स्थान के सम्बन्ध में भिन्न होती है। प्राचीनकाल में, ‘जीविका प्राप्त करना’ […]

अर्थव्यवस्था की मूलभूत समस्याएं

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अर्थव्यवस्था एक मानव निर्मित संगठन है जिसके माध्यम से लोग समाज की बेहतरी और विकास के लिये परस्पर सहयोग करते है। सभी आर्थिक गतिविधियों का लक्ष्य मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि से होता है। अर्थव्यवस्था में एक उत्पादन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें उत्पादक को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं का […]

राजकोषीय नीति का अर्थ, उद्देश्य, महत्व एवं उपकरण

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राजकोषीय नीति के अभिप्राय, साधारणतया, सरकार की आय, व्यय तथा ऋण से सम्बन्धित नीतियों से लगाया जाता है। प्रो0 आर्थर स्मिथीज ने राजकोषीय नीति को परिभाषित करते हुए लिखा है कि- ‘‘राजकोषीय नीति वह नीति है जिसमें सरकार अपने व्यय तथा आगम के कार्यक्रम को राष्ट्रीय आय, उत्पादन तथा रोजगार पर वांछित प्रभाव डालने और […]

औद्योगिक नीति का अर्थ, महत्व एवं औद्योगिक नीति का विकास

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आर्थिक नीति के अनेक पक्ष होते है जो देश में औद्योगिक निवेश और उत्पादन को प्रभावित करते है। सर्वप्रथम औद्योगिक लाइसेसिंग नीति हैं जो औद्योगिक उपक्रमों की स्थापना और उनके विकास को विनियमित करती है। द्वितीय आर्थिक शक्तियों एवं एकाधिकार के संकेन्द्रण पर नियंत्रण की नीति। तृतीय प्रौद्योगिकी, 80 पूँजीगत पदार्थों, उपकरणों एवं कच्चे माल […]

आर्थिक सुधार की आवश्यकता एवं क्षेत्र

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सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार करने की पहले की नीतियों ने सार्वजनिक क्षेत्र को अकुषल बना दिया था तथा इस क्षेत्र में बहुत अधिक हानि हो रही थी। लाइसेंस और नियंत्रण प्रणाली ने निजी क्षेत्र द्वारा निवेश पर रोक लगा दिया तथा इसके कारण विदेषी निवेषक भी हतोत्साहित हो रहे थे। अत: विकास के पहले चार […]