अर्थशास्त्र की परिभाषा एवं शाखाएं

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अर्थशास्त्र एक अत्यंत विशाल विषय है। इसलिये अर्थशास्त्र की कोई निश्चित परिभाषा अथवा अर्थ देना आसान नहीं है क्योंकि इसकी सीमा तथा क्षेत्र, जो इसमें सम्मिलित हैं, अत्यंत विशाल हैं। जिस समय से यह सामाजिक विज्ञान के अध्ययन की एक पृथक शाखा के रूप में उभर कर आया है, विभिन्न विद्वानों तथा लेखकों ने इसका […]

कौटिल्य अर्थशास्त्र क्या है?

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आचार्य कौटिल्य द्वारा विरचित अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ राजनीति और अर्थशास्त्र का ऐसा महत्वपूर्ण ग्रन्थ है जिसमें ईसा से तीन शताब्दी पूर्व के एतद्विषयक भारतीय चिन्तन की पराकाष्ठा के दर्शन होते हैं। हमारे प्राचीन चिन्तन के बारे में पाश्चात्त्य विद्वानों का सामान्यत: यही मानना था कि भारत ने विचार क्षेत्रा में तो प्रगति की है, लेकिन […]

समष्टि अर्थशास्त्र क्या है?

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सन् 1929-30 की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की स्थिति और प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों के पूर्ण रोजगार के सिद्धान्त की असफलता के कारण प्रो जे एम. कीन्स ने ‘सामान्य सिद्धान्त’ की रचना की थी। प्रो. कीन्स के अनुसार– “राष्ट्रीय तथा विश्वव्यापी आर्थिक समस्याओं का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत किया जाना चाहिए।” इस प्रकार समष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था का […]

व्यष्टि अर्थशास्त्र क्या है?

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अर्थशास्त्र को अध्ययन के दृष्टिकोण से कई भागों में विभक्त किया गया। आधुनिक अर्थशास्त्र का अध्ययन एवं विशलेषण दो शाखाओं के रूप में किया जाता है- प्रथम, व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा द्वितीय समष्टि अर्थशास्त्र । व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत वैयक्तिक इकाइयों जैसे- व्यक्तियों,परिवारों फर्माें उद्योगों एवं अनेक वस्तुओं व सेवाओं की कीमतों इत्यादि का अध्ययन व […]

आर्थिक प्रणाली क्या है?

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आर्थिक प्रणाली किसी भी देश में आर्थिक क्रियाओं के संगठन पर प्रकाश डालती है। उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के हाथों में, सरकार के पास या फिर दोनों के हाथों में होता है। अब स्वामित्व अधिकतर निजी 62 व्यक्तियों के हाथों में हो तो ऐसी आर्थिक व्यवस्था को पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था कहते है। […]

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