आर्थिक विकास का अर्थ

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आर्थिक संवृद्धि राष्ट्रीय आय में निरन्तररूप से होने वाली वृद्धि है। यह आर्थिक विकास से भिन्न है। जनसंख्या में अन्तरों का ध्यान में रखते हुए यह प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के रूप में दिखाई पड़ती है (प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या) यद्यपि राष्ट्रीय आय की वृद्धि में प्रतिवर्ष उतार-चढ़ाव अथवा […]

शुम्पीटर का विकास प्रारूप

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शुम्पीटर ऑस्टे्रलिया के मोराविया प्रान्त (जो आजकल जैकोस्लोवेकिया में है )उम पैदा हुये थे उन्होने रूस ऑस्टे्रलिया, जर्मनी, कोलाम्बिया व अमेरिका के हावर्ड विश्वविद्यालयों में पढ़ाया उनके विकास के सिद्वान्तों को हम तीन पुस्तको से लेते है। :- The Theory of economic development – 1912 Business cycles (2 Volumes, 1939) Capitalism, socialism and democracy बेन्जामिन […]

आर्थिक विकास का प्रतिष्ठित विकास प्रारूप

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एडम स्मिथ का विकास प्रारुप प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों द्धारा अर्थव्यवस्था का अत्यन्त सरल रूप में क्रमबद्ध ढंग से विवेचन किया गया है। उनका प्रमुख ध्येय आर्थिक नीति निर्धारएा के लिए ऐसे मार्ग का निर्धारण करना जिनसे राश्ट्रों की सम्पत्ति को बढाया जा सके। प्रतिष्ठित सम्प्रदाय के अर्थशास्त्री एडम स्मिथ डेविड रिकार्डो द्वारा प्रस्तुत आर्थिक विकास से […]

आर्थिक विकास के निर्धारक घटक एवं अवस्थाएं

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विश्व के समस्त देशों में आर्थिक वृद्धि हुई है परन्तु उनकी वृद्धि दरें एक दूसरे से भिन्न रहती हैं। वृद्धि दरों में असमानताएं उनकी विभिन्न आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, तकनीकी एवं अन्य स्थितियों के कारण पाई जाती है। यहीं स्थितियां आर्थिक वृद्धि के कारक हैं। परन्तु इन कारकों का निश्चित रूप से उल्लेख करना भी […]

अल्पविकसित अर्थव्यवस्था की परिभाषा एवं विशेषताएं

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मोटे तौर पर विश्व के देशों को दो भागों में बांटा जाता है – विकसित तथा अल्पविकसित अथवा धनी तथा निर्धन राष्ट्र। निर्धन देशों को कई नामों से पुकारा जाता है जैस निर्धन, पिछड़े, अल्पविकसित, अविकसित और विकासशील देश। वैसे तो यह सभी शब्द पर्यायवाची है परन्तु इनके प्रयोग में मतभेद रहा है। उदाहरण के […]

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