उत्तर वैदिक काल का सामाजिक जीवन एवं धार्मिक जीवन

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उत्तर वैदिक काल का सामाजिक जीवन उत्तर वैदिक काल में साहित्य से तात्कालीन सामाजिक दशा पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । उत्तर वैदिक काल में ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में समाज का चार सही-विभाजन शुरू हुआ । गोत्र और आश्रम की नई संकल्पनाएं पनपीं । पितृसत्तात्मक परिवार चलते रहे । लेकिन महिलाओं की स्थिति में […]