उपनिषदों की संख्या और उनके नाम

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उपनिषदों की बड़ी महिमा है, ज्ञान की चरम सीमा ही उपनिषद् के नाम से प्रसिद्ध हुई है। वैदिक वाड़्मय का शीर्ष स्थान उपनिषद् है- इस कथन मात्र से ही उपनिषदों की लोकोत्तर महत्ता स्पष्ट हो जाती है। प्राचीनकाल में औपनिषद ज्ञान का बड़ा महत्त्व था। ऊँचे से ऊँचे अधिकारी ही इस विद्या में पारत होते […]

उपनिषद की संख्या, रचनाकाल, और उनका परिचय

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उपनिषद् शब्द ‘उप’ एवं ‘नि’ उपसर्ग पूर्वक सद् (सदृलृ) धातु में ‘क्विप्’ प्रत्यय लगकर बनता है, जिसका अर्थ होता है ‘समीप में बैठना’ अर्थात् गुरु के समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त करना। धातुपाठ में सद् (सद्लृ) धातु के तीन अर्थ निर्दिष्ट हैं – विशरण, (विनाश होना), गति (प्रगति), अवसादन (शिथिल होना)। इस प्रकार जो विद्या समस्त […]