अच्छी स्मृति की विशेषताएं और स्मृति के प्रकारों का उल्लेख

स्मृति एक मानसिक प्रक्रिया है। जिसमें व्यक्ति धारण की गयी विषय वस्तु का पुन: स्मरण करने चेतना में लाकर उसका उपयोग करता है। व्यक्ति जो कुछ भी नित्य अनुभव करता है वह मस्तिष्क में किसी-न-किसी रूप में संचित होता रहता है। जो अनुभव मन के अचेतन स्तर पर रहते हैं या चेतनायुक्त नहीं होते उन्हें ‘संचय’ कहते हैं और जो चेतन स्तर पर आ जाते हैं उन्हें स्मृति कहते हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये संचित अनुभव ही हमारी विभिन्न परिस्थितियों में सहायता करते हैं। जीवन के व्यावहारिक कार्यों में स्मृति से ही सहायता मिलती है। 

यदि व्यक्ति अपने पूर्व अनुभवों और विचारों को याद न रख सकता तो आज वह इतनी उन्नति नहीं कर सकता था। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि विकास और शिक्षा, पूर्व ज्ञान और अनुभवों की संचय प्रवृत्ति पर निर्भर हैं, उसके लिए अच्छी स्मृति की आवश्यकता होती है। अतः स्मृति के स्वरूप पर विस्तार से विचार करना आवश्यक है। 

स्मृति की परिभाषा 

विभिन्न मनोवैज्ञानिकों द्वारा दी गई स्मृति की परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं- 

1. स्टाउट - स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है, उस सीमा तक जहाँ तक कि इसमें अतीत काल के अनुभवों को यथासम्भव उसी रूप और क्रम में याद किया जाता है, जैसा कि उनका पहले अनुभव किया गया था। 

2. वुडवर्थ -स्मृति सीखी हुई वस्तु का सीधा उपयोग है। 

3. मैक्डूगल -स्मृति से तात्पर्य है-अतीत की घटनाओं के अनुभवों की कल्पना करना और इस तथ्य को पहचान लेना कि ये अतीतकालीन अनुभव है। 

4. विलियम जेम्स -स्मृति चेतना से अलग हो जाने के बाद मन की अतीत दशा का ज्ञान है अथवा यह एक घटना या तथ्य का ज्ञान है, जिसके बारे में हमने कुछ समय तक नहीं सोचा है, पर साथ ही हमें यह सोचना है कि हम उसका पहले विचाार या अनुभव कर चुके हैं। 

5. नन - हमारे अनुभवों को संचित करके रहने वाली शक्ति जब चेतना से युक्त होती है, तब हम उसे ‘स्मृति’ कहते हैं। 

6. रायबर्न -अपने अनुभवों को संचित रखने और उनको प्राप्त करने के कुछ समय बाद चेतना के क्षेत्र में लाने की जो शक्ति हममें होती है, उसी को स्मृति कहते हैं। उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि स्मृति एक ऐसी मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा संचित या गत अनुभवों की आवश्यकता पड़ने पर पुनः चेतना में लाया जाता है। 

अच्छी स्मृति की विशेषताएँ 

अच्छी स्मृति के प्रमुख लक्षण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं- 
  1. अच्छी स्मृति का प्रथम लक्षण है जल्दी याद होना। जो बालक किसी बात को एक बार पढ़ लेने या सुन लेने से याद कर लेता है तो उसकी स्मृति अच्छी कही जाती है। 
  2. यदि कोई बालक सीखी या याद की हुई बातों को अधिक दिनों तक स्मरण रख सकता है तो उसकी स्मृति अधिक स्थायी होती है। यह अच्छी स्मृति का लक्षण है। 
  3. अच्छी स्मृति का एक अन्य लक्षण है-पुनः स्मरण। सीखी हुई विषय-सामग्री जितनी जल्दी याद आ जाती है उतनी ही अधिक उसकी उपयोगिता होती है। परीक्षा की दृष्टि से शीघ्र पुनः स्मरण बालक के लिए अत्यावश्यक है। 
  4. अच्छी स्मृति के लिए शीघ्र पुनः स्मरण की नहीं बल्कि किसी विषय को शीघ्र एवं स्पष्ट रूप से पहचानना भी आवश्यक है। बालक ने विषय से सम्बन्धित बहुत-सी बातों को पढ़ा, सीखा और याद किया है, परीक्षा के समय वह उन बातों को पुनः स्मरण करता है किन्तु बिना शीघ्र एवं स्पष्ट रूप से पहचाने हुए वह वांछित प्रश्न का उत्तर देने में समर्थ नहीं हो सकता। 
  5. अच्छी स्मृति का एक आवश्यक लक्षण यह भी है कि बालक व्यर्थ बातों को भूल जाए और उपयोगी बातें ही याद रखे। अनावश्यक बातें याद रहने से उपयोगी बातों के पुनः स्मरण, धारण एवं पहचान में बाधा पड़ती है। 

स्मृति के प्रकार 

मनोवैज्ञानिकों ने स्मृति के निम्नलिखित प्रकार बताये हैं- 
  1. तात्कालिक स्मृति - किसी विषय या तथ्य को याद करके तुरन्त सुना देना तात्कालिक स्मृति है, किन्तु इस प्रकार की स्मृति में विस्मरण की अधिक सम्भावना रहती है। 
  2. स्थायी स्मृति - इसमें सीखी हुई बातें बहुत समय तक याद रहती हैं। यह बालाकों में अधिक पाई जाती है। 
  3. सक्रिय स्मृति - पूर्व अनुभवों को इच्छापूर्वक प्रयास करके पुनः स्मरण करना सक्रिय स्मृति कहलाती है, जैसे परीक्षा-भवन में पूर्व अनुभवों को प्रयासपूर्वक स्मरण करके उत्तर लिखना। 
  4. निष्क्रिय स्मृति - जब हम पूर्व अनुभवों को अनायास बिना प्रयास के पुनः स्मरण कर लेते हैं तो उसे निष्क्रिय स्मृति कहते हैं। उदारहणार्थ-श्यामपट्ट का नाम लेते ही उसके कालेपन की याद आ जाना। 
  5. व्यक्तिगत स्मृति - अतीत काल के स्वयं के अनुभवों का पुनः स्मरण व्यक्तिगत स्मृति है, जैसे किसी घटना को देखकर अपनी बाल्यावस्था के किसी अनुभव की याद आ जाना। 
  6. अव्यक्तिक स्मृति - इस प्रकार की स्मृति में स्वयं के अनुभवों के अतिरिक्त अन्य किसी मित्र, पुस्तक, समाचार-पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से प्राप्त अनुभवों को याद कर लिया जाता है। 
  7. यांत्रिक स्मृति - किसी विषय को भली-भाँति बिना समझे रट लेना और आवश्यकता पढ़ने पर सफलतापूर्वक पुनः स्मरण कर लेना ही यांत्रिक स्मृति है। आजकल अधिकांश विद्यार्थी परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए इसी प्रकार की स्मृति का सहारा लेते हैं। इस प्रकार की स्मृति अंकगणित के लिए पहाड़ों को याद करने में सहायक होती है। 
  8. तार्किक स्मृति - विषय-सामग्री को भली-भाँति सोच-विचार कर सीखना और स्मरण कर लेना तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे सुना देना तार्किक  स्मृति है। इसे बौद्धिक स्मृति भी कहते हैं। इस प्रकार की स्मृति ही बालक की शिक्षा में अधिक उपयोगी होती है।
  9. आदतजन्य स्मृति -जब व्यक्ति किसी बात को बार-बार दोहराता या याद करता है तो यह उसकी आदत में परिणत हो जाता है। इस आदत के कारण उसे स्मरण करने का प्रयास नहीं करना पड़ता है। 
  10. इन्द्रिय-अनुभव स्मृति -इस प्रकार की स्मृति में जब हम किसी वस्तु, तथ्य या विचार को ज्ञानेन्द्रियों के अनुभव के फलस्वरूप पुनः स्मरण करते या पहचानते हैं जैसे आँख बन्द करके किसी वस्तु को छूकर, चखकर या सूँघकर बता सकना या सुनकर किसी तथ्य की याद आ जाना। 
  11. शारीरिक स्मृति - जब हम किसी कार्य को बार-बार करते हैं तब हमारे सम्बन्धित अंगों को कार्य करने की आदत पड़ जाती है और फिर उस कार्य में किसी प्रकार की भूल नहीं होती, जैसे टाइप करते हुए उंगलियों का स्वयं स्वतंत्रतापूर्वक ठीक-ठीक शब्दों पर पड़ना। 
  12. वास्तविक स्मृति - शिक्षाविद्ों ने इस स्मृति को सबसे श्रेष्ठ कहा है। इस प्रकार की स्मृति में विषय-वस्तु को क्रमबद्ध रूप से याद किया जाता है, इसमें याद की हुई सामग्री का क्रमबद्ध ज्ञान स्थायी बना रहता है। वास्तविक स्मृति द्वारा तथ्यों को शीघ्र पुनःस्मरण किया जा सकता है।
संदर्भ -
  1. मनोविज्ञान-मानव व्यवहार का अध्ययन-ब्रजकुमार मिश्र, पी.एच.आई. लर्निंग, नई दिल्ली।
  2. शिक्षा मनोविज्ञान-एस.वेफ. मंगल, पी.एच.आई. लर्निंग प्रा. लि., नई दिल्ली।
  3. मनोविज्ञान-डाॅ. सरयू प्रसाद, आगरा बुक स्टोर, आगरा।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं। मैंने अपनी पुस्तकों के साथ बहुत समय बिताता हूँ। इससे https://www.scotbuzz.org और ब्लॉग की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post