लागत-लाभ विश्लेषण विधि का महत्व

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सिंचा तथा परिवहन परियोजनाओं में निवेश के मूल्यांकन के लिये लागत-लाभ विश्लेषण तकनीक का विकास अमरीका में किया गया। अल्पविकसित देशों में परियोजनायें अक्सर तदर्थ (Adhoc) आधार पर चुनी जानी है तथा लागतों और लाभों के रूप में उनके मूल्यांकन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है। क्योंकि सभी परियोजनायें विकास के उद्देश्य से सम्बद्ध होती है, इसलिये उनका उद्देश्य सामाजिक कल्याण को अधिकतम करना है। लागत-लाभ विश्लेषण के निम्नलिखित गुण पाये जाते हैं
  1. यह विश्लेषण कृषि उत्पादन बढ़ाने हेतु सिंचा और अन्य साधनों के बीच, जैसे उद्देश्यों को पूरा करने के लिये, वैकल्पिक उपायों की सीमान्त प्रभावशीलता में भेदों को कम करने में सहायता करना है;
  2. यह एक उद्देश्य को पूरा करने की लागतों को त्याग किये गये लाभों के साथ दूसरे लाभों के रूप में मूल्यांकन करने में सहायता करता है।
  3. इसका राजनैतिक लाभ भी है कि किसी एक विशेष समूह के लिये अपने स्वार्थो हेतु परियोजना योजनाओं को विकृत करना कठिन होगा, यदि विशिष्ट परियोजनाओं का आयोजन करने से पूर्व मापदण्ड निश्चित करते समय इसकी समाज के अन्य समूहों (Groups) के साथ स्वीकृति प्राप्त कर ली गयी थी।
  4. लागत - लाभ विश्लेषण के प्रयोग का एक अन्य लाभ यह हैकि यह विकेन्द्रीकृत निर्णय करने का अवसर देता है। यदि सार्वजनिक क्षेत्रा छोटा भी हो तो भी को एकल प्राधिकरण अनेक विशिष्ट परियोजनाओं के बारे में निर्णय लेने के लिये तकनीकी सूचना के विशाल समूह के संचालन की आशा नहीं रख सकता है। प्रत्येक परियोजना की लागतों और लाभों की गणना करने के लिये, हर एक के लिये अलग प्राधिकरण की आवश्यकता होती है। इसलिये विकेन्द्रीकृत निर्णय करने की जरूरत है।
  5. लागत लाभ विश्लेषण परियोजनाओं की वांछनीयता का मूल्यांकन करने का एक व्यवहारिक ढंग है जहाँ भविष्य में तथा निकटतम भविष्य में अप्रत्यक्ष प्रभावों की ओर देखने के अर्थ में दीर्घ दृष्टिकोण लेना, और जहाँ क प्रकार के पाश्र्व प्रभावों को बहुत व्यक्तियों, उद्योगों, क्षेत्रों आदि के लिये स्वीकार्य करने के अर्थ में एक व्यापक दृष्टिकोण लेना महत्वपूर्ण होता है।
अत: विकासशील देशों में परियोजना मूल्यांकन के लिये लागत - लाभ विश्लेषण एक बहुत लाभदायक औजार है।

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