मानव संसाधन नियोजन की परिभाषा, आवश्यकता, उद्देश्य एवं प्रक्रिया

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मानव संसाधन नियोजन की परिभाषा

  1. गोरडन मेकवेथ के शब्दों में ‘‘जनशक्ति नियोजन के दो चरण है (क) जनशक्ति सम्बन्धी आवश्यकताओं का अनुमान लगाना और (ख) जनशक्ति की पूर्ति हेतु आयोजन करना।’’
  2. जिसलर इ.बी. (Geisler E.B.) -‘‘मानव शक्ति नियोजन से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जिसमें पूर्वानुमान, विकास, नियन्त्रण व क्रियान्वयन सम्मिलित है, जिसके द्वारा संस्था को इस बात का पूरा विश्वास हो जाता है कि उसके पास सही संख्या में, सही किस्म के व्यक्ति, सही समय पर एवं स्थान पर उपलब्ध है तथा वे उन कार्यों में संलग्न है जो आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक उपयोगी है।’’
  3. एरिक डब्ल्यू वेटर (Eric W. Vetter) - के शब्दों में ‘‘मानव शक्ति नियोजन वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा प्रबन्धक यह निर्णय करता है कि संस्था की अपनी वर्तमान मानवशक्ति स्थिति से वांछित मानव शक्ति स्थिति की ओर कैसे जाना चाहिए।’’
  4. कोल मैन ब्रूस पी. (Coleman Bruce P.) के अनुसार ‘‘मानव शक्ति नियोजन मानवीय संसाधन से सम्बन्धित आवश्यकताओं को निर्धारित करने की प्रक्रिया है तथा संगठन की एकीकृत योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए उन आवश्यकताओं की पूर्ति का एक साधन है।’’
  5. एडविन बी. फिलिप्पो (Edwin B. Flippo) ‘‘मानव शक्ति नियाजे न का उद्देश्य योग्य व्यक्तियों की निरन्तर पूर्ति द्वारा किसी संगठन के स्थायित्व एवं प्रगति में योगदान करना है।’’
  6. डेल योडर (Dale Yoder) के अनुसार, ‘‘मानव शक्ति नियाजे न सम्बन्धी सामान्यत: यह धारणा रखती है कि संगठन की वर्तमान एवं भावी मानवीय आवश्यकताओं की व्याख्या उसके गुणस्तर एवं संस्था के सन्दर्भ में की जायेगी। जहॉं तक सम्भव होगा आवश्यकता का पूर्वानुमान किया जायेगा ताकि आवश्यकतानुसार मानव शक्ति उपलब्ध हो सके।’’

मानव संसाधन नियोजन की आवश्यकता 

मानवीय संसाधनों का सदुपयोग ही प्रबन्ध की कुशलता का मापदण्ड होता है। अत: एक श्रेष्ठ व अच्छा प्रबन्धक कार्य करने की दशाओं व वातावरण की मधुर व आकर्षक बनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सदा सफल होता है। यह आवश्यक नहीं है कि संगठन में अधिक कर्मचारी अधिक उत्पादन कर ही लें। कर्मचारियों की संख्या भले ही कम हो किन्तु यदि वे प्रशिक्षित, योग्य व कुशल हैं तो निश्चय ही उत्पादन अधिक होगा। मानव शक्ति की नियोजन दृष्टि से पदों का सृजन कार्य आवंटन, नियुक्ति, कार्य अवलोकन, कार्यभार का अनुमान, पद समापन आदि कार्य आवश्यक है। अत: उपयुक्त कार्य पर (On right job), सही समय पर (On right time),सही स्थान पर (On right place),उपयुक्त व्यक्ति की नियुक्ति करने के लिए मानव संसाधन नियोजन आवश्यक है।
किसी व्यवसायिक उपक्रम में मानव संसाधन नियोजन की आवश्यकता मानव शक्ति के अपव्यय को रोककर उसका प्रभावशाली उपयोग करना होता है। मानवीय संसाधन का बाहुल्य मानव शक्ति नियोजन को और भी आवश्यक बना देता है क्योंकि उपलबध मानव शक्ति में से उपक्रम अपनी आवश्यकतानुसार कर्मचारियों का चयन कर सकें। मेकफार लैण्ड (Mefor land) ने ठीक ही कहा है, ‘‘आज के विशेष प्रकार के कौशल जैसे इन्जीनियरी, गणित तथा भौतिक विज्ञान का अभाव उपस्थित है, साथ ही प्रशासकीय एवं नेतृत्व योग्यता का अभाव सदैव से ही रहा है। ऐसी कमियों को पूरा करने, के लिए बड़ी मात्रा में राष्ट्रीय एवं उपक्रम आधार पर मानव संसाधन नियोजन की आवश्यकता है।’’ उपक्रम के आधार पर मानव शक्ति नियोजन की आवश्यकता कारणों से है -
  1. कर्मचारी लागत का ऊंचा होना (High Cost of Personnel) - कर्मचारी लागत के कम करने के लिए इस पर नियन्त्रण का प्रयत्न प्रबन्धकों द्वारा करना आवश्यक होता है। मानव शक्ति नियोजन कर्मचारी बाहुल्य और कमी को दूर करके उपक्रम के लिए आदर्श कर्मचारी शक्ति की व्यवस्था करता है।
  2. मानव शक्ति के प्रकार के निर्धारण द्वारा उसकी भर्ती के श्रोतों की खोज में सहायक होना - भविष्य में किस प्रकार के कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, इस बात के निर्धारण द्वारा भर्ती के सही श्रोतों का चयन किया जा सकता है। साथ ही भर्ती के लिए उपलब्ध विभिन्न श्रोतों में किसका अथवा जिनका उपयोग किया जाय यह निर्धारित करना प्रबन्धकों के लिए सरल हो जाता है।
  3. कर्मचारी विकास की प्रभावशीलता (Effectiveness of Employee Development) - कर्मचारी विकास कार्यक्रमों को प्रभावी तभी बनाया जा सकता है जबकि विकास कार्यक्रमों को मानव संसाधन नियोजन से सम्बद्ध किया जाय।
  4. मानव शक्ति के चयन, नियुक्ति तथा प्रतिस्थापन में सहायक (Helpful in selection, placement and replacement of Personnel)- HRP का लक्ष्य सही कार्य पर सही व्यक्ति का सही समय पर चयन व नियुक्ति करना होता है। संस्था के लिए मानव शक्ति की आवश्यकता का नियोजन करके सरलतापूर्वक उपयुक्त व्यक्ति का चयन तथा नियुक्ति की जा सकती है।
  5. मानव शक्ति की आवश्यकताओं में समन्वय (Co-Ordination in man power requirement) - संस्था के विभिन्न विभागों द्वारा कर्मचारियों की आवश्यकताओं में तालमेल स्थापित करना आवश्यक है। मानव संसाधन नियोजन द्वारा ही ऐसा किया जा सकता है।
  6. उत्पादन में उत्पन्न विघटन पर रोक (Check on diseruption in production) - उत्पादन विघटन पर रोक के लिए मानव शक्ति नियोजन बहुत प्रभावशाली साधन है। पूर्व नियोजन, मानव शक्ति की मात्र व पूर्ति में सन्तुलन की स्थापना द्वारा उत्पादन में बाधा नहीं उत्पन्न होने देता है।
  7. राष्ट्रीय जनशक्ति नियोजन का आधार - हर संस्था के स्तर पर किया गया मानव शक्ति नियोजन श्रृंखला में एक कड़ी के रूप में कार्य करता है।
  8. औद्योगिक अशान्ति में कमी होना - विवेकपूर्ण मानव शक्ति नियोजन के परिणामस्वरूप श्रम निष्कासन, श्रम बदली, अशान्ति, झगड़े पैदा नहीं होते हैं।

मानव संसाधन नियोजन के उद्देश्य

  1. मानवीय शक्ति की आवश्यकता का सही पूर्वानुमानलगाना (Correct Estimation of Man Power Requirements)- HRP से संस्था में आवश्यक मानवीय शक्ति का पूर्वानुमान लगाना सम्भव हो जाता है। अत: संगठन की आवश्यकता के समय उपयुक्त मात्रा में पर्याप्त योग्य कर्मचारी की प्राप्ति सरलतापूर्वक की जा सकती है।
  2. कुशल और निपुुण कर्मर्चचारियोंं की उचित पूर्ति की व्यवस्था करना (To manage the eligible man power) - संस्था में आवश्यकता के अनुसार सही समय पर सही स्थान पर योग्य व निपुण मानव शक्ति आज एक बार नियुक्त कर लेने के बाद किसी कर्मचारी को बाहर निकालना बड़ा कठिन हो गया है। अत: यह आवश्यक है कि पहले से ही ऐसी व्यवस्था की जाये ताकि प्रत्येक कार्य के लिए उपयुक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सके। यह उद्देश्य HRP द्वारा पूरा किया जाता है।
  3. उचित प्रशिक्षण द्वारा कर्मचारियो का विकास करना - HRP नियुक्त कर्मचारियों को प्रशिक्षित करके संस्था के कार्यों के लिए उन्हें और योग्य बनाता है उनका विकास करता है।
  4. कर्मचारियों का अधिकतम उपयोग करना ताकि प्रति इकाई श्रम-लागत में कमी हो सके।
  5. परिवर्तनशील अर्थव्यवस्था के आवश्यकताओं के अनुरूप HRP में आवश्यक संसोधन करना।
  6. मानव संसाधन विषयक आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाना।
  7. HRP से श्रमिकों की अनुपस्थिति दर, श्रम आवर्तन दर एवं अन्य करणों से ली जाने वाली अवकाश की दरें कम हो जाती हैं जिससे HRP के द्वारा उत्पादन स्तर को बनाये रखने में मदद मिलती है।
  8. HRP के द्वारा कर्मचारी कल्याण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
  9. औद्योगिक सम्बन्धों को सुदृढ़ बनाना इत्यादि।
  10. अधिशासी विकास कार्यक्रम आयोजित करना। इस सम्बन्ध में विचार करते हुये फिलिप्पो के अनुसार, ‘‘मानव शक्ति नियोजन का उद्देश्य योग्य व्यक्तियों की निरन्तर पूर्ति द्वारा किसी संगठन के स्थायित्व एवं प्रगति में योगदान करना है।’’ इस उद्देश्य की पूर्ति तभी की जा सकती है जब वर्तमान एवं भावी मानव शक्ति परिस्थितियों का सावधानी पूर्वक विश्लेषण किया जाय।
  11. स्ट्रास एवं साईल्स (Strauss and Sayles) के अनुसार सावधानी पूर्वक किये गये HRP के उद्देश्य निम्न हैं -
    1. रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए कर्मचारियों की निरन्तर एवं व्यवस्थित पूर्ति का आश्वासन।
    2. वाह्य श्रोतों से अथवा वर्तमान कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान कर जिन स्थानों की पूर्ति की जानी है। उनका अनुमान।
    3. पदोन्नति के लिए प्रत्येक कर्मचारी पर विचार किये जाने का आश्वासन।
    4. आन्तरिक श्रोतों के अधिकतम उपयोग की सम्भावना ।

मानव संसाधन नियोजन के प्रारूप 

मानव संसाधन नियोजन के तीन प्रारूप हैं -

अल्प कालीन मानव शक्ति आयोजन - 

इससे तात्पर्य उस आयोजन से है जो थोड़े समय (दो वर्ष से कम) के लिए किया जाता है। यह आयोजन उन दशाओं में किया जाता है जब संस्था में किसी नई विधि पर प्रयोग किया जा रहा हो या नई तकनीक के अनुसार प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध होने की अवधि तक की व्यवस्था करनी हो। यह आयोजन कर्मचारियों के पदस्थापन के लिए अथवा नव सृजित पदों को भरने के लिए किया जाता है । अल्पकालीन आयोजन का उद्देश्य है कि वर्तमान कर्मचारियों को उनके वर्तमान पदों के अनुरूप बनाना एवं वर्तमान मानव शक्ति द्वारा वर्तमान पद-रिक्तियों की सर्वोत्तम ढंग से पूर्ति करना है।

मध्यकालीन मानव शक्ति आयोजन - 

इसका आशय उस मानव शक्ति नियोजन से हैं जो मध्यकालीन अवधि के लिए किया जाता है अर्थात यह अवधि 2 से 5 वर्ष तक की होती है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मध्यकालीन अवधि के लिए जनशक्ति की व्यवस्था करना है। यह नियोजन पर्यवेक्षकीय स्तर के पदों के लिए किया जाता है क्योंकि निम्नतम वर्ग के श्रमिकों को अधिक प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती है। पर्यवेक्षकीय तथा प्रबन्धक स्तर के पदों पर कार्य करने वाले कर्मचारी या तो सीधी भर्ती द्वारा लिये जा सकते हैं या पदोन्नति द्वारा। इस तरह का नियोजन सामान्य अनुभव द्वारा भी किया जा सकता है।

दीर्घकालीन मानव शक्ति आयोजन - 

ऐसे आयोजन का आशय ऐसे आयोजन से है जो सामान्यत: पॉंच वर्ष की अधिक की अवधि के लिए किया जाये। इसका उद्देश्य है -
  1. भविष्य में संस्था के अन्दर ऐसी स्थिति पैदा करने का प्रयास करना जिसमें कि समस्त पदों और सभी पदाधिकारियों में पूर्ण एकरूपता स्थापित हो सके।
  2. भविष्य के पद रिक्तियों के लिए पहले से ही उपयुक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करना।
दीर्घकालीन मानव शक्ति नियोजन हेतु निम्न चरण उठाना आवश्यक होता है-
  1. भावी आवश्यकताओं के संदर्भ में वर्तमान कर्मचारियों की उपयुक्तता का पता लगाना।
  2. भावी मानव शक्ति का अनुमान लगाना,
  3. कर्मचारियों के व्यक्तिगत विकास हेतु योजना बनाना।
  4. निश्चित समयावधि के बाद  HRP की पुनरावलोकन करना।

मानव संसाधन नियोजन प्रक्रिया

आर्थिक दृष्टि से मानव शक्ति का आशय प्रबन्धकीय वैज्ञानिकी, इन्जीनियरिंग, तकनीकी, कुशल व योग्य और अन्य कर्मचारियों से हैं जो उत्पादकीय, आर्थिक और सेवा संगठनों के निर्माण, विकास तथा प्रबन्धकीय कार्यों में लगे हुये हैं। एक निरन्तर परिवर्तनशील व गतिशील अर्थव्यवस्था में व्यवसाय में निरन्तर परिवर्तन होते रहते हैं। अत: भावी मानव शक्ति सम्बन्धी आवश्यकताओं का सही अनुमान लगाना आवश्यक है। मानव संसाधन नियोजन एक सतत प्रक्रिया है जो विभिन्न क्रियाओं के द्वारा आगे बढ़ती रहती है। National Industrial Conference Board, USA ने निष्कर्ष निकाला है कि मानव शक्ति का नियोजन विभिन्न क्रियाओं की श्रृंखला के द्वारा निम्नलिखित मार्गदर्शक सिद्धान्तों का अनुसरण करके किया जा सकता है। अर्थात नियोजन की प्रक्रियाओं का आशय उन चरणों से है जिनके द्वारा नियोजन किया जाता है। मानव शक्ति नियोजन के लिए भी कुछ आवश्यक चरण उठाने पड़ते है  -

मानव शक्ति आवश्यकताओं का निर्धारण (Determination of Man power needs) :- 

प्रत्येक सगंठन में मानव ससांधन की आवश्यकता का निर्धारण उसके उत्पादन कार्यक्रम के द्वारा होता है जो स्वयं विक्रय आदेशों पर निर्भर करता है। विक्रय अनुमानों से उत्पादन कार्यक्रम निश्चित किया जा सकता है तथा कर्मचारियों का अनुमान लगाया जा सकता है और कर्मचारी आवर्तन को कम किया जा सकता है। इस प्रकार मानव संसाधन की आवश्यकताओं के निर्धारण हेतु संगठन द्वारा अग्रांकित कदम उठाये जा सकते हैं।
  1. विक्रय का पूर्वानुुमान लगाना (To Make Sale Forecasting) - प्रत्येक संगठन द्वारा जो विक्रय पूर्वानुमान लगाया जाता है उस पर संगठन का सम्पूर्ण क्रियाकलाप निर्भर करते हैं। यह दीर्घकालीन या अल्पकालीन पूर्वानुमान हो सकते हैं। संगठन के उत्पादन, वित्त कर्मचारी आदि नीतियों के निर्धारण व परिवर्तन को ये पूर्वानुमान विशेष रूप से प्रभावित करते हैं।
  2. उत्पादन कार्यक्रम का निर्धारण (Determination of Production Programme) :- विक्रय पूर्वानुमान पर उत्पादन का कार्यक्रम निर्भर है। उत्पादन में वृद्धि हेतु मानव संसाधन के अधिकतम उपयोग की व्यवस्था की जाती है और पूर्वानुमान के आधार पर नये भर्ती व चयन प्रक्रिया के कार्यक्रम तैयार किये जाते हैं।
  3. पदों की आवश्यकता का निर्धारण (Determination of Position Needed) :- उत्पादन कार्यक्रमों के अनुसार मानव शक्ति की आवश्यकता (निश्चित कृत्यों व पर्दो) में परिवर्तन करना आवश्यक है। उत्पादन कार्यक्रम से मानव शक्ति में स्थायी परिवर्तन का आयोजन करने में सहायता प्राप्त होती है।
  4. पदो की स्वीकृति लेना :- कृत्यों एवं पदों के निर्धारण से विभिन्न विभागों में मानव शक्ति आवश्यकता का सही अनुमान लग जाता है। इसी के आधार पर पदों की स्वकृति उच्च अधिकारियों द्वारा प्रदान की जा सकती है। इस हेतु पे-रोल बजट और मैनिंग तालिकाओं का उपयोग किया जा सकता है। पे-रोल-बजट प्रत्येक विभाग के लिए निर्धारित वेतन की अधिकतम राशि होती है। जिसके अन्तर्गत कर्मचारियों की व्यवस्था की जा सकती है। इसी प्रकार मैनिंग तालिका कर्मचारियों की संख्या एवं पदों का निर्धारण करते समय कर्मचारियों की विभिन्न कारणों से अस्थायी अनुपस्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। साथ ही दो प्रकार के विश्लेषण भी किये जाते हैं।
    1. कार्यभार विश्लेषण 
    2. कार्यशक्ति विश्लेषण

मानव शक्ति आवश्यकताओंं को प्रभावित करने वाले तत्व (Factors Affecting Manpower Needs) :- 

संगठन के लिए आवश्यक कर्मचारियों की संख्या एवं उनके प्रकार का निर्धारण अनेक तत्वों पर निर्भर करता है। पहले से ही काम कर रहे संगठन में मानव शक्ति की आवश्यकतायें अग्रांकित तत्वों द्वारा प्रभावित होती है।
  1. वर्तमान मानव शक्ति की प्रकृृति (Nature of Present work Force) :- किसी भी संगठन की बदलती हुई आवश्यकताओं के संदर्भ में मानव शक्ति की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करना आवश्यक है ताकि भावी मानव शक्ति की आवश्यकता का मूल्यांकन करना आवश्यक है। ताकि सही अनुमान लगाया जा सके। स्ट्रास एवं साइलस  के शब्दों में ‘‘भर्ती सम्बन्धी प्रबन्धकीय दृष्टिकोण में ऐतिहासिक तत्वों का भी योगदान होता है।’’
  2. कर्मचारी आवर्तन (Employee Turnover) :- कर्मचारी आवर्तन का आशय संस्था में कार्य कर रहे कर्मचारियों के कार्य छोड़कर चले जाने की प्रवृत्ति से है। यह प्रवृत्ति स्थायी रूप से कर्मचारियों की संख्या पर प्रभाव डालती है।
  3. उपक्रम के विकास की दर (Rate of Growth of The Organisation) :- विकास स्वयं प्रबन्धकीय नीतियों, प्रतिस्पर्धा, देश की अर्थव्यवस्था आदि अनेक कारणों से प्रभावित होता है। अत: संगठन के विकास के संदर्भ में मानव शक्ति की आवश्यकता का अनुमान लगाते समय तकनीकी विकास की गति का ध्यान रखना भी आवश्यक है।
  4. श्रम बाजार की प्रकृति (Nature of Labour Market) :- श्रम बाजार एक ऐसा भौगोलिक क्षेत्र है जिसमें से नियोक्ता कर्मचारियों की भर्ती करने तथा इच्छुक व्यक्ति रोजगार की खोज करके उसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं। यह संगठन के लिए यहीं से श्रम की मॉंग एवं उसकी पूर्ति होती है।

मानव शक्ति आवश्यकताओंं का पूर्वानुुमान (Forecasting Manpower Needs) :- 

भावी आवश्यकता का पूर्वानुमान संगठन नियोजन और कृत्य विशेषताओं में परिवर्तन का सावधानीपूर्वक अंकन है। भावी मानव शक्ति की आवश्यकता का पूर्वानुमान के लिए मैनिंग तालिका के साथ प्रतिस्थापन तालिका का उपयोग भी होता है । भावी आवश्यकताओं के पूर्वानुमान अल्पकाल, दीर्घकाल या मध्यकाल के लिए हो सकते हैं।


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