अतिसार के लक्षण एवं कारण

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मल का अधिक मात्रा में अधिक पतला तथा बार-बार निकलने की अवस्था को अतिसार कहते हैं। इसमें मल पदार्थ बड़ी आंत वाले भाग में इतनी शीघ्रता से आगे बढ़ते हैं कि द्रव्य पदार्थो को अवषोशित होने का मौका ही नहीं मिल पाता जिससे पूर्णत: न बने हुए ही मल उत्सर्जित हो जाता है। अतिसार में उचित देखभाग न होने पर तीव्रता से शरीर में जल की कमी हो जाती है जिसके कारण रोगी खासकर नवजात शिशुओं तथा छोटे बालकों की मृत्यु हो सकती है।

तीव्र अतिसार 

तीव्र अतिसार अचानक आरम्भ होता है इसमें दस्त बहुत तेजी से होते हैं। मल उत्सर्जन की आवृति इतनी अधिक होती है कि रोगी एक घण्टे में ही क बार मल निश्कासित कर देता है। यद्यपि यह अवस्था कम देर 24-48 घण्टे तक ही रहती परन्तु इसमें जल का अत्यधिक कमी हो जाती है जिससे रोगी का शरीर अति शिथिल व कमजोर पड़ जाता है।

अतिसार के लक्षण 

  1. बहुत तेजी से पानी की तरह पतला मल बार-बार आना।
  2. पेट में दर्द व मरोड़ होना।
  3. शारीरिक कमजोरी
  4. वमन
  5. बुखार

अतिसार के कारण

  1. अधिक मसाले युक्त आहार
  2. कीटाणुओं के संक्रमण द्वारा (गन्दगी, बासी व सड़े भोज्य पदार्थों द्वारा)
  3. भोज्य पदार्थों से एलर्जी हो जाने पर
  4. कुपोशण के द्वारा
  5. भोज्य विशाक्तता (Food poisoning) द्वारा
  6.  भोज्य संदूशण (Food contamination) द्वारा
  7. कुछ दवायों के प्रभाव द्वारा
  8. अन्य रोगों के लक्षण के रूप में
  9. मनोवैज्ञानिक कारण जैसे - चिन्ता, डर, तनाव, अस्थिरता आदि।

तीव्र अतिसार के कारण

पाचन-संस्थान में संक्रमण वैक्टीरिया अथवा पैरासाइट द्वारा संदूषित खाना व पानी खाद्य जनित कारण खाद्य एलर्जी या भोजन सम्बन्धी खराब आदतें जैसे-अत्यधिक भोजन कर लेना। बार-बार खाना आदि
कुपोशण क्वाषियोकर, मरास्मस, विटामिन ए व विटामिन बी समूह की कमी।
अन्य संक्रमण हैजा, टायफाइड आदि दवायों व अन्य रसायनों द्वारा आर्सेनिक, सीसा, मरकरी द्वारा मानसिक कारण तनाव, डर, चिन्ता, अस्थिरता आदि

जटिलताएँ 

तीव्र अतिसार की अवधि कम होती है परन्तु इसमें शारीरिक जल की कमी बहुत तेजी से उत्पन्न हो जाती है। अगर इस स्थिति में जल व लवणों की तुरन्त पूर्ति न की जाये तो रोगी की हालत और गम्भीर हो जाती है। फलस्वरूप मृत्यु की सम्भावनाऐं काफी बढ़ जाती है।

आहारीय उपचार

तीव्र अतिसार में आहारीय उपचार का प्राथमिक उद्देष्य जल व लवणों की पूर्ति करना होता है। इसमें रोगी की अन्य पोशक तत्वों की पूर्ति का उद्देष्य गौण हो जाता है। क्योंकि जल की पूर्ति समय पर न होने से प्राण घातक स्थिति पैदा हो सकती है। तीव्र अतिसार का उपचार ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी (Oral rehydration therapy) यानि मुख द्वारा जल के पुर्नस्थापन की चिकित्सा द्वारा होता है।

ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी 

यह एक सरल, सस्ती तथा प्रभावषाली चिकित्सा है इसमें उबले पानी, नमक, चीनी का घोल रोगी को देते हैं ताकि जल व खनिज लवणों की कमी जल्द से जल्द से पूरी हो। विष्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) द्वारा इसकी विधि भी दी गई है।
  1. सोडियम क्लोराइड नमक 3.5 ग्राम
  2. सोडियम बाइकार्बोनेट 2.5 ग्राम
  3. पोटेषियम क्लोराइड 1.5 ग्राम
  4. ग्लूकोज 20 ग्राम
उक्त चार लवणों को पीने के साफ 1 लीटर पानी में घोलें। इस घोल को ओरल रीहाडे्रषन सौल्यूशन (ओ0आर0टी0) कहते हैं। यह घोल रोगी को प्रत्येक दस्त के बाद एक गिलास देना चाहिए। सरकार द्वारा प्रत्येक प्राथमिक चिकित्सालय में अतिसार के उपचार के रूप में ओ0आर0एस0 के लवणों का मिश्रण ( विष्व स्वास्थ्य संगठन की विधि के अनुसार) उपलब्ध होता है।

प्रचुर मात्रा में देने योग्य आहार -

  1. पर्याप्त मात्रा में ओ0आर0एस0 को पीने के साफ पानी में घोलकर दें।
  2. नारियल पानी
  3. जौ का पानी
  4. दाल व अनाज का पानी
  5. छाछ, मट्ठा
  6. हल्की चाय
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