इंटरनेट का अर्थ एवं इतिहास

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इंटरनेट शब्द का हिंदी अनुवाद अंतरजाल किया जाता है लेकिन मूल अंग्रेज़ी शब्द ही व्यापक प्रचलन में है। इसे संक्षिप्त में ‘नेट’ भी कह दिया जाता है, जिसका अर्थ है जाल। वास्तव में इंटरनेट एक जाल ही है, जिसके असंख्य धागे एक दूसरे से मिलकर एक विशाल और अत्यंत जटिल संरचना का निर्माण करते हैं। इसकी तुलना मकड़ी के जाल से की जा सकती हैं। एक परिभाषा के अनुसार ‘अंतरजाल एक-दूसरे से जुड़े संगणकों का एक विशाल विश्वप्यापी नेटवर्क या जाल है। इसमें क संगठनों, विश्वविद्यालयों आदि के निजी और सरकारी संगणक जुडे़ हुए हैं। अंतरजाल से जुड़े हुए संगणक आपस में अंतरजालीय नियमावली (Internet Protocol) सूचना का आदान-प्रदान करते हैं।’ अंतरजाल के जरिये मिलने वाली सूचनाओं और सेवाओं में अंतरजालपृष्ठ, -मेल और आपसी बातचीत (आडियो तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग) सेवा प्रमुख हैं। इनके साथ-साथ चलचित्र, संगीत, वीडियो के इलेक्ट्रानिक या कम्प्यूटर की भाषा में कहें तो डिज़िटल रूप भी इसमें शामिल हैं।

अपने पारिभाषिक रूप में इंटरनेट दुनिया भर में मौजूद कम्प्यूटर्स को एक-दूसरे से जोड़ने वाली एक अंतर्जालीय जटिल संरचना है, जिसे कार्य करने के लिए धरती के आउटर स्पेस में अत्याधुनिक उपग्रह संचार प्रणाली और धरती पर फाइबर केबल्स की आवश्यता होती है, जिनमें आँकड़ों का संचरण लगभग प्रकाश की गति से होता है। हम तक यह संचरण टेलीफोन के तार और मोबाइल कनेक्शन के द्वारा पहुंचता है। इटंरनेट के द्वारा दुनिया भर में मौजूद करोड़ों कम्प्यूटर एक सेकेंड या उससे भी कम वक़्त में एक-दूसरे संवाद कर सकते हैं और अपनी सूचनाओं को आपस में बाँट सकते हैं। इसके जरिए एक-दूसरे की बोलती तस्वीरें आपस में बात करती हैं, भले ही दूरी हज़ारों किलोमीटर की क्यों न हो। आधुनिक उपग्रह प्रणाली और इंटरनेट तकनीक ने इसे सम्भव बनाया है। इस संचरण को और तीव्र बनाने की तकनीक पर शोध और प्रयोग लगातार जारी हैं, जिनके कारण इंटरनेट और संचार से जुड़े नए-नए उपकरण निरन्तर विकसित होते जा रहे हैं। इंटरनेट का सफर, 1970 के दशक में, विंट सर्फ (Vint Cerf) और बाबकाहन् (Bob Kanh) ने शुरू किया था। उन्होनें एक ऐसे तरीके का आविष्कार किया, जिसके द्वारा कंप्यूटर पर किसी सूचना को छोटे-छोटे पैकेट में तोड़ा जा सकता था और दूसरे कम्प्यूटर में इस प्रकार से भेजा जा सकता था कि वे पैकेट दूसरे कम्प्यूटर पर पहंचु कर पनु : उस सूचना की प्रतिलिपी बना सकें -अथार्त कंप्यूटरों के बीच संवाद करने का तरीका निकाला। इस तरीके को ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल {Transmission Control Protocol (TCP)} कहा गया। सूचना का इस तरह से आदान प्रदान तब भी हो सकता है जब किसी नेटवर्क में दो से अधिक कंप्यूटर हों। क्योंकि किसी भी नेटवर्क में हर कम्प्यूटर का खास पता होता है। इस पते को इण्टरनेट प्रोटोकॉल पता कहा जाता है। इण्टरनेट प्रोटोकॉल पता वास्तव में कुछ नम्बर होते हैं जो एक दूसरे से एक बिंदु के द्वारा अलग-अलग किए गए हैैं

सूचना को जब छोटे-छोटे पैकेटों में तोड़ कर दूसरे कम्प्यूटर में भेजा जाता है तो यह पैकेट एक तरह से एक चिट्ठी होती है जिसमें भेजने वाले कम्प्यूटर का पता और पाने वाले कम्प्यूटर का पता लिखा होता है। जब वह पैकेट किसी भी नेटवर्क कम्प्यूटर के पास पहंचु ता है तो कम्प्यूटर देखता है कि वह पैकेट उसके लिए भेजा गया है या नहीं। यदि वह पैकेट उसके लिए नहीं भेजा गया है तो वह उसे आगे उस दिशा में बढ़ा देता है जिस दिशा में वह कंप्यूटर है जिसके लिये वह पैकेट भेजा गया है। इस तरह से पैकेट को एक जगह से दूसरी जगह भेजने को ही इण्टरनेट प्रोटोकॉल (Internet Protocol (I-P) कहा जाता है।

अक्सर कार्यालयों के सारे कम्प्यूटर आपस में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं और वे एक दूसरे से संवाद कर सकते हैैं इसको Local Area Network (LAN) लेन कहते हैैं लेन में जुड़ा को कंप्यूटर या को अकेला कंप्यूटर, दूसरे कंप्यूटरों के साथ टेलीफोन लाइन या सेटेलाइट से जुड़ा रहता है। अर्थात, दुनिया भर के कम्प्यूटर एक दूसरे से जुड़े हैैं इण्टरनेट, दुि नया भर के कम्प्यूटर का ऐसा नेटवर्क है जो एक दूसरे से संवाद कर सकता है। वास्तविकता तो यह है कि इंटरनेट अब एक विशाल नेटवर्क होने से कहीं आगे ख़्ाुद क सारे नेटवक्र्स का अन्तर्राष्ट्रीय नेटवर्क है। आज 200 से भी ज़्यादा देशों के लाखों नेटवर्क इसके सम्पर्क द्वारा एक-दूसरे से जुड़े हैं। शिक्षा, विज्ञान, सरकार और व्यवसाय आदि अनेक क्षेत्रों से जुड़े करोड़ों लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। पहले जहाँ यह विशिष्टों का साध्य था, वहीं अब ये सामान्यजनों का साधन बन चुका है। अनगिनत लोगों को इसने रोज़गार दिया है। कम्प्यूटर्स के इस अनोखे त्वरित अंतर्जालीय जुड़ाव को समझने के लिए सरल रूप में इस तरह चित्रित किया जा सकता है -

इंटरनेट - अर्थ

दुनिया भर के कम्प्यूटर्स तक पहुँचने और वांछित फाइल ढूँढने की प्रमुख विधियाँ हं-ै गोफर्स, आर्ची, डब्लूएआइर्ए स और वल्र्ड वाइड वेब। डब्लूडब्लूडब्लू का ही पूर्ण रूप वल्र्ड वाइड वेब है, जिसे वेबसाइट्स के पते में इस्तेमाल कर इंटरनेट पर दस्तावेज़ों की खोज की पद्धति के रूप में प्रयोग किया जाता है। उपर्युक्त आरेख सीमित है, इस तरह के जुड़ाव वस्तुत: अनगिनत होते है और हर वक़्त अस्तित्वमान होते हैं। डब्लूडब्लूडब्लू (www)से जब को वेबपृष्ठ नहीं प्राप्त नहीं होता तो उसे हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकाल द्वारा प्राप्त किया जाता है, जिसका संक्षिप्त रूप एचटीटीपी (http://) इस्तेमाल में आता है।

इंटरनेट का संक्षिप्त इतिहास

  • 1969 इंटरनेट अमेरिकी रक्षा विभाग के द्वारा UCLA के तथा स्टैनफोर्ड अनुसंधान संस्थान कंप्यूटर्स का नेटवकिर्ंग करके इंटरनेट की संरचना की ग। शुरू में इसे अर्पानेट (ARPANET) कहा गया। अमेरिका रक्षा विभाग ने सैन्य एवं नागरिक अनुसंधानकर्ताओं को रक्षा योजनाओं के बारे में सूचनाएँ भिजवाने के लिए इसकी स्थापना की।
  • 1979 में ब्रिटिश डाकघर ने पहला अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर नेटवर्क बना कर न प्रौद्योगिकी का उपयोग करना आरम्भ किया।
  • 1980 में बिल गेट्स का आबीएम के कंप्यूटर्स पर एक माइक्रोसॉफ्ट अॉपरेटिंग सिस्टम लगाने के लिए सौदा हुआ।
  • 1983 में अर्पानेट को दो नेटवर्कों में बँट गया, जो आपस में जुड़ हुए थे - अर्पानेट और मिलनेट (MILNET)। यहीं से इंटरनेट की औपचारिक शुरूआत मानी जाती है।
  • 1984 एप्पल ने पहली बार फाइलों और फोल्डरों, ड्रॉप डाउन मेनू, माउस, ग्राफिक्स का प्रयोग आदि से युक्त आधुनिक सफल कम्प्यूटर लांच किया।
  • आरम्भिक काल में इंटरनेट का उपयोग केवल सेना से सम्बन्धित अनुसंघानों तथा क्रियाकलापों के लिए ही स्वीकृत था लेकिन 1986 में NSFNET(National Science Foundation Network) नामक एक नेटवर्क इंटरनेट से सम्बद्ध हो गया और धीरे-धीरे इसने दुनिया भर के लिए अपने द्वार खोल दिए।
  • 1989 टिम बेर्नर ली ने इंटरनेट पर संचार को सरल बनाने के लिए ब्राउजरों, पन्नों और लिंक का उपयोग कर के वल्र्ड वाइड वेब बनाया।
  • 1996 गूगल ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में एक अनुसंधान परियोजना शुरू किया जो कि दो साल बाद औपचारिक रूप से काम करने लगा। • 2009 डॉ स्टीफन वोल्फरैम ने वाल्फैरम अल्फा लांच किया।
  • भारत में अंतरजाल 80 के दशक मे आया, जब एर्नेट (educational & research network) को सरकार, इलेक्ट्रानिकस विभाग और संयुक्त राष्ट्र उन्नति कार्यक्रम (UNDP)की ओर से प्रोत्साहन मिला तथा सामान्य उपयोग के लिये जाल 15 अगस्त 1995 से उपलब्ध हुआ, जब विदेश सचांर निगम सीमित (VSNL) ने गेटवे सर्विस शुरू की।

इंटरनेट के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष

इंटरनेट के आविष्कार ने सूचना प्रौद्योगिकी को जहां बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया है वहीं इसने मानव-जीवन की शैली पर भी अपना व्यापक प्रभाव छोड़ा है। यह एक क्रान्ति है जिसने हर वर्ग को हर तरह से अपने घेरे में ले रखा है। चिकित्सक, अभियंता, वैज्ञानिक, व्यवसायी, शिक्षक, शोधकर्ता, विद्यार्थी तथा आम नागरिक सभी इंटरनेट को प्रयोग में ला सकते हैं। यह सर्व उपयोगी और सर्वव्यापी है। इंटरनेट ने जहां समाज के विकास में अपना योगदान दिया है वहीं इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी सामने आये हैं। इंटरनेट के सकारात्मक व नकारात्मक पहलू निम्नवत है

सकारात्मक पक्ष 

  1. ज्ञान-विज्ञान व सूचनाओं का प्रसार-प्रचार। 
  2. सम्पूर्ण विष्व का एक छोटे दायरे में आना, जिससे विष्व के समुदायों में नजदीकी बढ़ी है। 
  3. कहीं भी, कभी भी, किसी भी वांछित सूचना, प्रकार व क्षेत्र-विशेष की जानकारी।
  4. उद्योगों, व्यापार, बैंको समाचार-पत्रों, संस्थानों आदि के दूर-दराज के कार्यालयों व व्यक्तियों का आपस में निकट सम्पर्क।
  5. दुनिया के प्रत्येक क्षेत्र पर घर बैठे एक माऊस के क्लिक से नजर व जानकारी। 
  6. ग्लोबल वल्र्ड की अवधारणा का विकास व नौकरी, कैरियर आदि क्षेत्रों का त्वरित सम्पर्क व जुड़ाव। 
  7. टेलीफोनी व चैटिंग के माध्यम से सामाजिक सम्पर्क में बढ़ोत्तरी व व्यक्तित्व विकास के नवीन पहलुओं का योगदान।

नकारात्मक पक्ष 

  1. किशोर एवं युवा पीढ़ी में अश्लीलता व भ्रम की स्थितियों का प्रचलन। 
  2. राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्रों में नकारात्मक विचारों का प्रसार।
  3. धोखाधड़ी, व अनैतिक प्रयोग पर रोक के सटीक उपाय नहीं। 
  4. देश की सुरक्षा के प्रति खतरा। 
  5. मशीनी निर्भरता को बढ़ावा। 
  6. बड़े संस्थानों व खुफिया तंत्रों में सेंधमारी व सिस्टम हैक कर देना या वायरस के हमले से अकल्पित नुकसान। 
  7. सामान्य लोगों में मानवीयता की भावना का क्षरण व खाओ-पीओ, मौज करो की प्रवृत्ति को बढ़ावा। 
  8. सरकारी, व्यापारी, घरेलू कम्प्यूटरों में इलेक्ट्रॉनिक घुसपैठ, सूचनाओं की चोरी।

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