कोयला क्या है ? कोयले के प्रकार

अनुक्रम

इसमें के बारे में अध्ययन करेंगे।


कोयला क्या है ?

कोयला पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध जीवाश्म ईंधन है जो हमारे द्वारा प्रयोग किया जाता है। जब पौधे और जानवर मरते हैं तो उन्हें मिट्टी में दफन किया जाता है। कईं सैकड़ों सालों के बाद वे “पीट” नामक कार्बन युक्त पदार्थ की मोटी परतें बनाते हैं दबाव और उच्च तापमान में ये कोयले में परिवर्तित हो जाते हैं। जीवाश्म ईंधन, जैसे - कोयला, ग्रेनाइट, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस गै़र-नवीनीकरणीय प्राकृतिक संसाधन हैं।

अब कोयले का प्रयोग कृत्रिम पेट्रोल बनाने में तथा कच्चे मालों की तरह भी किया जा रहा है। यद्यपि पिछली चौथा शताब्दी में शक्ति के अन्य संसाधनों (पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल-विद्युत और अणु शक्ति) के प्रयोग में वृद्धि होने के कारण कोयले की खपत कम होती जा रही है, फिर भी लोहा इस्पात निर्माण तथा ताप विद्युत उत्पादन में कोयले का को विकल्प नहीं है ।

दुनिया की कम से कम 40 प्रतिशत बिजली कोयले से बनती है। कोयले का उपयोग लिपिस्टिक तथा सुंगधित तेलों जैसे- प्रसाधन की वस्तुयें नायलोन, डेकोन, जैसे सूक्ष्म धागे वाले वस्त्र, प्लास्टिक टूथ ब्रष, बटन, वाटर प्रूफ कागज अमोनिया जैसे वस्तुयें नेफ्थेलिन कोक, कोलतार (डामर, फिनायल, बे्रन्जील) कृ़ित्रम रबर, कृत्रिम पेट्रोलियम, रंग पेंट, सेक्रीन, दूध, दवायों, फोटो कलर, कोयले की हाइड्रोजनीकरण क्रिया से पेट्रोल प्राप्त किया जाता हैं। धातुओ को गलाने ताप, शक्ति का निर्माण किया जाता हैं। भाप शक्ति आदि के कार्य में इसकी उपयोग किया जाता हैं।बेहतर तकनीक, औद्योगिकीकरण, जनसंख्या, आदि में बढ़ोतरी ने कोयले की माँग में वृद्धि की है। 

कोयला
कोयले की खान


कोयले के प्रकार

कार्बन की मात्रा के अनुसार कोयला चार प्रकार का होता है -
  1. एन्थ्रेसेसाइट :- यह सबसे अच्छा कोयला है । इसमें 90 से 96 प्रतिशत कार्बन होती है। इसके जलने से बहुत अधिक ताप उत्पन्न होता है। 
  2. बिटुमिनस कोयला :- इसमें कार्बन की मात्रा 70 से 90 प्रतिशत होती । 
  3. लिग्नाइट कोयला :- इसमें 45 से 70 प्रतिशत कार्बन होता है । 
  4. पीट कोयला :- इसमें 55 प्रतिशत कार्बन पाया जाता है । 

कोयले का संरक्षण

  1. कोयला खनन की अनुपयुक्त विधियों के द्वारा बहुत सी मात्रा का क्षय होता है, उसे यथासम्भव कम करना चाहिए। 
  2. जिन कारखानों, फैक्ट्रियों, निर्माणशालाओं और इंजन आदि की भट्टियों में कोयला जलाया जाता है, उनमें कोयला जलाने की दक्षता को अधिकाधिक बढ़ाया जाना चाहिए। 
  3. कोयले से कोक का निर्माण करने में भी कोयले की कुछ मात्रा क्षयित हो जाती है। इसको यथासम्भव दूर किया जाना चाहिए। 
  4. जिन भाप के इंजनों में और स्टीम टर्बाइनों में अभी तक भाप बनाने की पुरानी प्रणालियों का प्रयोग किया जाता है, उनकी दक्षता में सुधार होना आवश्यक है ।

भारत के कोयला क्षेत्र

एशिया में कोयला भण्डार और उत्पादन में चीन के बाद दूसरा स्थान भारत का ही है। भारत विश्व का चौथा बड़ा कोयला उत्पादक देश है। भारत का कोयला अधिकतर बिटुमिनस किस्म का है, कुछ एन्थ्रेसाइट हैं और थोड़ी मात्रा में लिग्नाइट के भण्डार भी हैं। भारत में लगभग 12,000 करोड़ मीटरी टन, बिटुमिनस कोयला है, और लगभग 250 करोड़ टन लिग्नाइट (भूरा कोयला) है। भू-वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 600 मीटर की गहरा तक भारत के कोयला भण्डार की राशि लगभग 11,950 करोड़ मीटरी टन है। भारत में कोयला पेटियां 2 युगों की हैं-
  1. गोंडवाना कोयला क्षेत्र (जो परमो- काबोनीफरैस युग के हैं) - बिहार, बंगाल, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश में नदियों के बेसिनों में स्थित हैं। इनमें भारत का लगभग 98 प्रतिशत कोयला भण्डार है। यह बिटुमिनस प्रकार का है।
  2. टर्शियरी कोयला क्षेत्र- असम, बीकानेर (राजस्थान), जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु में है। 

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