समाचार का अर्थ, महत्व एवं स्रोत

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समाचार का सीधा सम्बन्ध मनुष्य की सतत जिज्ञासा से है। नया जानने की इच्छा ही समाचार का प्रमुख आकर्षण है और समाचार प्राय: हमें कुछ न कुछ नया ही देता है। जो कुछ नया होता है वह एक तरह से समाचार है और जो कुछ जानने की यह जिज्ञासा मनुश्य में सदा सर्वदा से रही है। नया जानने के लिए मनुश्य को अन्वेशक बनन पड़ता है। खोजी बनना पड़ता है, यात्राएं करनी पड़ती हैं, विष्लेशण करने पड़ते हैं, चीजों की गहराई में जाना पड़ता है, एक पत्रकार को भी यही सब करना पड़ता है। इस तरह जो कुछ नया है वह अगर समाचार है तो जो उस नए को प्रस्तुत कर रहा है वह पत्रकार है। भारतीय परम्परा में देवऋशि नारद को एक तरह से पहला पत्रकार इसलिए माना जाता है कि वो जहां जाते थे, दूसरी जगह का समाचार वहां पहुंचा देते थे। रामचरितमानस में हनुमान जब लंका से वापस लौटे तो उनसे सबसे पहला सवाल यही था कि वहां का समाचार क्या है ? महाभारत की कथा में संजय धृतराश्ट्र को युद्ध का जो हाल बैठे-बैठे सुनाते हैं वह एक प्रकार का समाचार ही है। हमारी चिटिठयों में भी प्राय: यह लिखा जाता है, यहां सब ठीक ही हैं, वहां के समाचार क्या हैं ?

जानने की हमारी इस जिज्ञासा को आधुनिक रूप में न्यूज या समाचार संतुश्ट करते हैं। अलग-अलग रूपों में कभी रेडियो के जरिए, कभी अखबारों के जरिए और कभी टीवी या अन्य आधुनिक माध्यमों के जरिए। समाचार प्राप्त करने के तरीके आज लगातार बदल रहे हैं और नए-नए तरीके विकसित होते जा रहे हैं लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि समाचार अथवा न्यूज का वर्तमान स्वरूप छपे हुए अक्षरों और उन अक्षरों से पैदा हुए अखबारों की ही देन है। तरह - तरह की सूचनाओं, के मुंह से सुने यात्रा अनुभवों के विवरण, किस्से कहानियों और व्यापार की जानकारियों से “ाुरू आधुनिक पत्रकारिता की यात्रा आज नेट पत्रकारिता तक जा पहुंची है। लेकिन इनफोटेनमेंट के इस युग में खबर यानी न्यूज का महत्व सबसे ऊपर है और समाचार की यही विषेशता उसे आज सूचना क्रांति के इस दौर में भी सर्वाधिक महत्वपूर्ण बनाए हुए है।

समाचार की प्रकृति व अर्थ

क्या कभी आपने समाचार की प्रकृति एवं उसके अर्थ के बारे में में विचार किया है। देश एवं सारे विश्व में घटित होने वाली विभिन्न घटनाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए हर व्यक्ति रेडियो सुनता है, टी. वीदेख् ाता है एवं अख़बार भी पढ़ता है। ऐसा आप क्यों करते हैं ? इस प्रश्न के उत्तर में आप यही कहेंगे कि ‘सूचनाऐं प्राप्त करने के लिए’। सूचनाओं के अभाव में आप शेष विश्व से अपने आपको अलग-थलग पाते हं।ै सूचनाओं की जानकारी के बिना आप अपने आप को समाज से नहीं जोड़ सकते हैं- न राजनैतिक रूप से, न सामाजिक रूप से और न आर्थिक रूप से। प्राय: कोई भी व्यक्ति सोमवार का समाचार शुक्रवार को पढ़ना पसन्द नहीं करता। क्यों ? हम किसी जानकारी या घटना को पुष्ट करने के लिए पुराने अखबार जरूर देखते हैं लेकिन सामान्य रूप से हम ऐसा प्रतिदिन नहीं करते। अत: समाचार वह है जो नवीन है और साथ ही साथ समाचार वह भी है जो हमें पूरे विश्व से जोड़ता है।

समाचार की परिभाषा

समाचार अर्थात खबर के बारे में एक निश्चित विचार नहीं मिलता। उसकी एक निश्चित परिभाषा नहीं दी जा सकती है। क्योंकि समाचार वस्तुत: एक भावजन्य अभिधारणा है जिसका अर्थ मानवीय मूल्य व अभिरूचि के अनुसार बदलता है। इसलिए यह समझ लेना चाहिए कि समाचार सापेक्ष होते हैं पूर्ण नहीं। समाचार अपने से जुड़े कारकों एवं तथ्यों के परिवर्तित होने के साथ ही परिवर्तित होते रहते हैं। अत: समाचार की परिभाषा निम्न कारकों पर आधारित होती है।
  1. पाठक वर्ग के आकार पर। 
  2. समाचार पत्र/पत्रिका की आवृत्ति (दैनिक/साप्ताहिक/पाक्षिक आदि) पर। 
  3. पाठक वर्ग के सामाजिक व आर्थिक प्रकार पर। 
  4. पाठक वर्ग की मांग के अनुसार (जैसे स्थानीयता और मुद्दों से जुड़ी वरीयता आदि)। 
जौन बोगार्ट की प्रसिद्ध परिभाषा से सभी परिचित होंगे जिसमें वे कहते हैं कि ‘‘कुत्ते ने आदमी को काटा यह समाचार नहीं है बल्कि समाचार यह है कि आदमी ने कुत्ते को काटा’’। अर्थात कुछ असामान्य या असाधारण ही समाचार का हिस्सा होता है या समाचार बन सकता है।

सन् पत्रिका के सम्पादक समाचार को परिभाषित करते हुए लिखते हैं- ‘‘समाचार हर वह घटना है जो पर्याप्त रूप से जनता का ध्यान आकर्षित करे और जनता से जुड़ी हो।’’ न्यूयार्क वल्र्ड के प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर के अनुसार- ‘‘समाचार मौलिक, स्पष्ट, नाटकीय, रोमांस से परिपूर्ण, अद्भुत, अनोखा, विलक्षण, हास्यपूर्ण, असामान्य एवं उत्तेजित करने वाला हो, जिसके बारे में चर्चा हो सके। समाचार को विभिन्न विद्वानों ने अलग - अलग तरह से परिभाषित किया है।
  1. प्रो. विलियम जी ब्लेयर के अनुसार- अनेक व्यक्तियों की अभिरूचि जिन बात में होती है वह समाचार है। सर्वश्रेष्ठ समाचार वह है, जिसमें बहुसंख्यक लोगों की अधिकतम रूचि हो। 
  2. जार्ज एच. मैरिस के अनुसार- समाचार जल्दी में लिखा गया इतिहास है। बूलस्ले और कैम्पवेल के अनुसार- समाचार किसी वर्तमान विचार, घटना या विवाद का ऐसा विवरण है, जो उपभोक्ताओं को आकर्षित करे। 
  3. ए. लाइल स्पेंसर के अनुसार- वह सत्य घटना या विचार समाचार है जिसमें बहुसंख्यक पाठकों की रूचि हो। 
  4. न्यूयार्क टाइम्स के पूर्व प्रबन्ध सम्पादक के अनुसार- समाचार, जिसे आप अभी आज जान रहे हैं और जिसे आप पहले नहीं जानते थे। 
  5. डॉ. नन्दकिशोर के अनुसार- समाचार पत्र का मौलिक कच्चा माल न कागज है, न स्याही- वह है समाचार। फिर चाहे प्रकाशित सामग्री ठोस संवाद के रूप में हो या लेख के रूप में, सबके मूल में वही तत्व रहता है जिसे हम समाचार कहते हैं। 
  6. श्री खडिलकर के अनुसार- दुनिया में कहीं भी किसी समय कोई भी छोटी-मोटी घटना या परिवर्तन हो उसका शब्दों में जो वर्णन होगा, उसे समाचार या खबर कहते हैं। 
  7. प्रवीण के अनुसार- पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित और रेडियो टेलीविजन जैसे इलैक्ट्रॉनिक जनसंचार माध्यमों में प्रसारित होने वाले समान महत्व के सार्वजनिक विचारों, घटनाओं और क्रियाकलापों के उस विवरण को ‘समाचार’ कहते हैं जिससे हमें किसी तरह की शिक्षा, सूचना अथवा मनोरंजन प्राप्त होने की अनुभूति होगी। 

समाचार के प्रमुख तत्व

  1. सामयिकता- किसी भी समाचार अथवा खबर को एकदम नवीन होने के साथ-साथ सही समय से जनसामान्य तक पहुँचना चाहिए। 
  2. स्थानीयता/निकटता- सामान्यतया पाठक वर्ग अपने आस-पास गाँव, कस्बे या देश की खबरों में रूचि रखता है, बजाय इसके कि खबर दूर की हो। साथ ही वह उन खबरों में ज्यादा रूचि लेता है जिसका उस पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है और जिन खबरों से वह अपना तारतम्य कर सकता है। उदाहरणार्थ- पाठक वर्ग वर्ग को महंगाई का मुद्दा, रुपये के अवमूल्यन अथवा बैंक के राष्ट्रीयकरण की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित करता है। 
  3. वैशिष्ट्य- विशिष्ट लोगों के साथ जब कुछ घटित होता है तो वह भी समाचार का अहम् हिस्सा बन जाता है। लोग इस तरह की घटनाओं के बारे में अधिक से अधिक जानने को आतुर हो जाते हैं। 
  4. विवाद, हिंसा अथवा संघर्ष- जब कभी गली मुहल्लों अथवा विभिन्न सम्प्रदायों में विवाद होता है तो जनसामान्य स्वत: ही इन विवादों से जुड़ जाता है। अत: सभी प्रकार के विवाद, हिंसा या संघर्ष भी खबर बन जाते हैं। 
  5. सरकारी एवं राजनैतिक गतिविधियाँ- समय-समय पर सरकारी गजट, कानून, बिल, एक्ट अध्यादेश नियमन आदि जिनसे आम जन प्रभावित होते हैं। अच्छी खबर बनते हैं। क्योंकि इन खबरों का सीधा असर लोगों के जीवन पर होता है और उनके निजी हानि-लाभ भी इससे जुड़े होते हैं। 
  6. विकासशील परियोजनाएं एवं मुद्दे- विज्ञान के क्षेत्र में किसी अन्वेषण का समाचार जिनसे किसी समुदाय या समाज के किसी हिस्से की जीवनशैली में बदलाव आता हो अथवा किसी असाध्य रोग की कारगर दवा की खोज का समाचार भी समाचार का महत्वपूर्ण तत्व है। 
  7. मानवीय अभिरूचि- ऐसी घटना जो साहस, शौर्य, हास्य, विजय, मनोरंजन, कौतूहल अथवा जिज्ञासा से भरपूर हो एवं ऐसा समाचार जो मानव-हित में हो और अनुकरणीय हो, अच्छा समाचार बन जाता है। पाठक ऐसी घटना अथवा सूचना को कौतूहल से पढ़ते हैं जो अन्य लोगों पर घटित हो रहा हो जैसे- खाप पंचायतों ने एक ही गोत्र में शादी करने पर पति-पत्नी को सजा देने का फैसला किया। 
  8. मौसम एवं खेल- चक्रवात, मानसून की पूर्व सूचना एवं खेल आदि भी समाचार के महत्वपूर्ण तत्व हैं।
  9. प्रतिक्रियात्मकता- किसी घटना का समाचार के तौर पर आना फिर सिलसिलेवार उसकी ताजगी बनाए रखते हुए समाचार को सामयिक रखना समाचार की विशेषता बनता है। 

समाचारों का वर्गीकरण

ठोस समाचार - 

इस प्रकार के समाचार सीधे एवं सरल होते हैं ये वे समाचार होते हैं जिसमें घटना का सरल स्पष्ट और सही तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया जाता है। इनमें तथ्यों को जैसे का तैसा प्रस्तुत किया जाता है, तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा नहीं जाता है। ऐसे समाचारों में दुर्घटनाएं दंगा, प्राकृतिक आपदाएं, आपराधिक घटनाएं, किसी महत्वपूर्ण खेल गतिविध की जीत-हार, लोकप्रिय व्यक्तियों के निजी जीवन की कोई आकस्मिक घटना आदि विशय प्रमुख होते हैं। अर्थात वे सभी घटना प्रधान समाचार जिनमें कोई वैचारिक उलझाव नहीं होता। इन समाचारों को लिखते समय संवाददाता के लिए यह आवश्यक होता है कि वह घटनास्थल, समय, सत्यता और स्पष्टता का ध्यान रखे। 

घटना का क्या, कब, कहाँ, कौन द्वारा प्रस्तुतिकरण अर्थात यह इतने बजे यहाँ इसके साथ घटित हुआ, हार्ड अथवा ठोस समाचार का जरूरी हिस्सा है। कब, क्या, कहाँ (घटना के सम्बन्ध में) के साथ-साथ यदि क्या (what), कहाँ (where), कब (when), कौन (who) आदि का संतोषजनक उत्तर यदि संवाददाता नहीं दे रहा है तो समाचार अपने में पूर्ण नहीं है। क्या (what) का अभिप्राय है कि जो घटना घटी है और जिसकी जानकारी पाठक को दी जा रही है वह वास्तव में क्या है? यदि घटना का वर्णन स्पष्ट नहीं किया गया है या उसमें शाब्दिक उलझाव हं,ै तो यह समाचार की सबसे बड़ी असफलता होगी। दूसरा बिन्दु है कहाँ (where)। अनजाने में ही पाठक वैज्ञानिक तौर पर यह जानने का इच्छुक होता है कि जो घटना उसके सम्मुख लाई जा रही है वह कहाँ घटित हुई है। यदि स्थान का विवरण या घटनास्थल की निशानदेही स्पष्ट रूप से नहीं हुई है, तो इससे पाठक को संतुष्टि नहीं होगी और उसके मन में जिज्ञासा बनी रहेगी। उदाहरण के तौर पर अगर कोई समाचार लेखक खबर का आरम्भ करते हुए जनपद का नाम लिखता है और यह उल्लेख करते हुए कि अमुक जनपद के एक गाँव में अमुक घटना हुई यह अच्छी पत्रकारिता का उदाहरण नहीं है। तीसरा प्रमुख बिन्दु है कब (when)। यह सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है क्योंकि अगर संवाददाता यह नहीं बताता कि जिस घटना की वह जानकारी दे रहा है वह कब घटित हुई तो यह नितांत अधूरा समाचार होगा। संवाददाता को तिथि और दिन ही नहीं, जहाँ तक सम्भव हो घटना का समय भी बताना चाहिए क्योंकि प्रत्येक पाठक सूचना या समाचार को जल्दी से जल्दी प्राप्त करना चाहता है। यदि रात के दस बजे घटित घटना उसे सुबह 6 बजे मिल जाती है तो यह उसकी संतुष्टि का करण बनता है। अत: यह जरूरी है कि कब का जवाब समाचार में मौजूद हो। इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए यह परिभाशाएं कुछ अलग हो जाती है। क्योंकि घटनास्थल के सजीव चित्र बहुत कुछ खुद ही कह देते हैं। ऐसे में वहां पत्रकार को घटना की और अधिक बारीकी से छानबीन कर नए तथ्यों के सामने लाना जरूरी हो जाता है। 

अगला प्रमुख बिन्दु है कौन (who) अर्थात घटना किसके साथ घटित हुई। जरूरी नहीं कि घटना से प्रभावित व्यक्ति या व्यक्तियों से पाठक परीचित हो लेकिन फिर भी उसकी पाठक या दर्षक की इच्छा होती है कि उसे यह पता चले कि यह घटना किसके साथ घटी है। अगर यह जानकारी उसे नहीं मिलती तो यह समझ लेना चाहिए कि समाचार अधूरा है। अत: क्या (what), कहाँ (where), कब (when), कौन (who) ये कुछ बिन्दु हैं जो समाचार का निर्माण करते हैं।

व्याख्यात्मक समाचार -

 लेकिन पाठक मात्र क्या, कहाँ, कब, कौन से ही संतुष्ट नहीं होता उसे घटना के पीछे विद्यमान कारकों क्यों (why), कैसे (how) की जानकारी या विश्लेषण भी चाहिए। प्रत्येक पाठक अप्रत्यक्ष रूप से यह जिज्ञासा बनाए रखता है कि जो घटना उसके सामने लाई जा रही है वह क्यों और कैसे घटित हुई। यही विश्लेषण विवेचना सौफ्ट न्यूज अथवा व्याख्यात्मक खबर बन जाती है। व्याख्यात्मक खबर (Soft News) वह समाचार है जिसमें घटना की गहन खोजबीन की जाती है, उस पर समग्र रूप से प्रकाश डाला जाता है।

समाचार लेखन की शैली

विलोम पिरामिड - 

पिरामिड दरअसल प्राचीन मिस्र के वे स्मारक हैं जो वहाँ के तत्कालीन राजाओं को दफनाने के लिए बनाए जाते थे। इन पिरामिडों की चोटी पतली होती है और ज्यों-ज्यों नीचे आते जाते हैं ये पिरामिड अपना आकार बढ़ाते जाते हैं। यदि हम इस पिरामिड को उल्टा कर दें अर्थात इसकी चोटी नीचे और आधार ऊपर तो यह एक विलोम पिरोमिड टाइप समाचार लिखने की शैली बन जायेगी। इस शैली के अन्तर्गत संवाददाता प्रमुख घटना का सारांश पहली पंक्तियों में देगा और शेष विस्तृत जानकारी तए पैराग्राफ से आरम्भ कर नीचे तक देता चला जाएगा। इस शैली के अन्तर्गत पाठक प्रथम दृष्टि में मुख्य घटना का सारांश पहले जान लेता है और बाद में वह पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए नीचे दिया गया ब्यौरा पढ़ता है। अधिकतर घटनाओं के समाचार इसी विलोम पिरामिड प्रणाली के अन्तर्गत दिए जाते हैं। 

विलोम पिरामिड शैली का प्रचलन उस समय शुरू हुआ जब संवाददाताओं को प्रमुख घटनाओं का समाचार टेलीग्राम द्वारा भेजने का मार्ग अपनाना पड़ा। टेलीग्राम के माध्यम से भेजे जाने वाले समाचारों के लिए यह आवश्यक था कि घटना का प्रमुख सारांश सबसे पहले दर्ज किया जाए, ताकि यदि तार की लाइन खराब भी है तब मुख्य कार्यालय तक घटना का प्रमुख सारांश पहुँच जाए। 

सीधे पिरामिड - 

समाचारों की यह शैली सीधे पिरामिड की तरह अपनाई जाती है जो विलोम पिरामिड की शैली से बिल्कुल उलट है। इसमें समाचार के सबसे महत्वपूर्ण तत्व को सबसे पहले न देकर मध्य या अन्त में दिया जाता है। समाचार के प्रारम्भ में कम महत्व के ऐसे तत्व दिए जाते हैं, जो पाठक की अभिरूचि जागृत कर सकते हैं। यह शैली अधिकता फीचर समाचारों, रिपोटोर्ं तथा मानवीय संवेदना से सम्बन्धित समाचारों में प्रयोग में लाई जाती है। 

समाचार के स्रोत 

पत्रकार/संवाददाता की सफलता के लिए आवश्यक है कि उसके सम्पर्क सूत्र विश्वसनीय और उच्चस्तरीय हो जिनके द्वारा प्राप्त सूचना उपयोगी और विष्वसनीय हो। समाचार में प्रयुक्त कुछ ऐसे स्रोत सर्वसुलभ भी होते हैं जैसे जनसभा, रेडियो, टी0वी0 कार्यक्रम, प्रेस कान्फ्रेंस, गोष्ठियाँ आदि। पर रिपोर्टर जब आम लीक से हटकर कोई खबर अपने विश्वसनीय संम्पर्क स्रोत की मदद से सामने रखता है तो उसका प्रभाव विशिष्ट हो जाता है। ऐसा सम्पर्क स्रोत कहीं भी और कोई भी हो सकता है। सरकारी तन्त्र में निजी अथवा सार्वजनिक क्षेत्र में या व्यापार में कभी-कभी मन्त्री या किसी विषिश्ट अतिथि के ड्राइवर या किसी स्थान के चौकीदार आदि से मिली सूचनाएं भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं। समाचार प्राप्त करने के मुख्य स्रोत हैं - 
  1. सरकारी स्रोत 
  2. पुलिस विभाग एवं अदालत 
  3. व्यक्तिगत स्रोत
  4. अस्पताल 
  5. भेंटवार्ता 

सरकारी स्रोत- 

संवाददाता के लिए सूचनाएँ प्राप्त करने का महत्वपूर्ण साधन सरकारी स्रोत हैं। राजधानी दिल्ली के अलावा विभिन्न राज्यों की राजधानियाँ और महत्वपूर्ण जिला मुख्यालयों पर सराकरी सूचना विभाग के कार्यालय कार्य करते हैं। इन कार्यालयों से सरकारी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सरकारी विभागों से भी समय-समय पर सूचनाएं और समाचार जारी किए जाते हैं। विभिन्न सरकारी विभागों से भी समय-समय पर सूचनाएं और समाचार जारी किए जाते हैं। इन सूचनाओं और आंकड़ों की छानबीन कर पत्रकार एक अलग और जनोपयोगी खबरें बना सकता है। 

पुलिस विभाग एवं अदालत- 

संवाददाताओं के लिए खबरों का सबसे बड़ा भण्डार होता है पुलिस विभाग। किसी भी आपराधिक घटना हत्या अथवा मारपीट के मामले, नशाबंदी और यातायात के उल्लंघन आदि के मामलों की जानकारी पुलिस विभाग के सम्पर्क में रहकर ही मिल सकती है। पुलिस के उच्चाधिकारियों से व्यक्तिगत सम्पर्क बना कर विश्वसनीय जानकारियाँ प्राप्त की जा सकती है। 

पुलिस थानों में दर्ज मामले चलते-चलते अदालतों में पहुँच जाते हैं। संवाददाता को इन मामलों में गहरी जानकारी प्राप्त करने के लिए अदालत के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सामान्य रूप से तो अदालतों में कई छोटे-छोटे दीवानी और फौजदारी मुकदमे चलते ही रहते हैं लेकिन ये सभी मुकदमे अखबार की खबर बनने की योग्यता नहीं रखते हैं। इनमें से जनसामान्य की अभिरूचि के मामले कौन से हो सकते हैं इसका निर्णय संवाददाता को अपनी चतुराई से करना चाहिए। 

व्यक्तिगत स्रोत- 

व्यक्तिगत सम्पर्क भी समाचार प्राप्त करने का प्रमुख साधन होता है। सांसद, मन्त्री, सचिव और निजी सहायकों से अच्छे सम्बन्ध बनाने वाला संवाददाता कई बार गोपनीय और महत्वपूर्ण समाचार दूसरों से पहले ही ले आता है और लोगों को चौंका देता है। 

अस्पताल व अन्य सार्वजनिक स्थान- 

संवाददाताओं को प्रतिदिन के समाचारों को एकत्रित करने के लिए कुछ खास स्थानों की कवरेज करनी पड़ती है। अस्पताल भी ऐसा ही एक क्षेत्र है। शहर में जितनी भी हत्याएं, दंगे, दुर्घटनाएं या आत्महत्या आदि होती हैं उन सब की जानकारी अस्पताल से मिल सकती है। इसी तरह नगर निगम कार्यालय, आवास विभाग, प्रमुख बाजार, घटना स्थल, स्कूल, कालेज और विष्वविद्यालय, प्रमुख क्षेत्रीय संस्थान आदि इस तरह के अन्य स्थान हैं जहां से नियमित रूप से महत्वपूर्ण समाचार खोजे जा सकते हैं। 

भेंटवार्ता- 

भेंटवार्ता समाचार संकलन का ही एक माध्यम है। कभी-कभी भेंटवार्ता से नये समाचार निकल आते हैं। उदाहरणार्थ जब किसी महत्वपूर्ण नेता का साक्षात्कार लिया जाता है और वह अपनी भविष्य की कार्य योजना को बताता है तो ऐसे साक्षात्कार महत्वपूर्ण हो जाते हैं। 

कभी-कभी सम्पर्क स्रोत स्वयं को आगे रखना चाहता है और कई बार सम्पर्क स्रोत मुसीबत में भी पड़ जाता है ऐसे में पत्रकार के लिए उसका ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है। कभी-कभी स्रोत अपनी बात से पलट भी जाता है। इसलिए समाचार की विश्वसनीयता के लिए संवाददाता के पास स्रोत द्वारा कही या बताई गई बात के सबूत जरूर होने चाहिए। जिससे आवश्यकता पड़ने पर समाचार की सत्यता को िसेद्ध किया जा सके। 

समाचार एकत्र करने में विशेषतया खोजी पत्रकारिता के दौरान सरकार/शासन से टकराव की स्थिति बनी रहती है। कोई भी राजनेता अपने जिन कायोर्ं को सही समझता है एक पत्रकार जब उसकी असलियत जनता के समक्ष रख देता है और जनता राजनेता की नीतियों व कायोर्ं की आलोचना करने लगती है और उस पर अपनी प्रतिक्रिया देती है। तो पत्रकार के लिए ऐसे राजनेता से सीधे टकराव की स्थिति आ जाती है। पत्रकार को ऐसी स्थिति में विवेक से काम करना चाहिए और खबर की सत्यता पर दृढ़ रहकर स्थिति का मुकाबला करना चाहिए। 

प्राय: पत्रकार के लिए अपने सूचना स्रोत को बचाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ते हैं। कई बार न्यायपालिका और कार्यपालिका ऐसे स्रोत का खुलासा चाहते हैं। लेकिन अपने स्रोतों की सुरक्षा पत्रकारिता के मूल्य में शमिल है इसलिए पत्रकार को स्त्रोत की सुरक्षा का खास ध्यान रखना चाहिए।

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