अनुक्रमणिका क्या है इसके उद्देश्य क्या है ?

अनुक्रमणिका अंग्रेजी भाषा के ‘इण्डेक्स’ (Index) शब्द का हिन्दी रूपान्तरण है जिसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के ‘इण्डीकेयर’ शब्द से हुई है। ‘इण्डीकेयर’ शब्द का अर्थ है निर्देश करना। इण्डेक्स से सूचना क्या है इसकी जानकारी नहीं मिलती है, बल्कि वह सूचना कहाँ है इसकी जानकारी मिलती है। इसकी सहायता से कोई भी विद्यार्थी/शोधार्थी, वैज्ञानिक अथवा जिज्ञासु वांछित सूचना को प्राप्त कर लेता है। 

अनुक्रमणिका क्या है

इण्डेक्स यह सूचना प्रदान करता है कि खोजी जा रही सूचना प्रलेख के किस पृष्ठ पर दी गयी है। इसमें प्रत्येक प्रविष्टि के सामने उसका प्राप्ति स्थल अर्थात खण्ड संख्या, पृष्ठ संख्या आदि अंकित रहती है। यह एक खोज उपकरण है जिसकी मदद से सूचना को आसानी से खोजा जा सकता है।

अनुक्रमणिका किसी नियत सूचना तक पहुँचने का एक उपकरण, स्रोत अथवा साधन है। यह स्वयं सूचना प्रदान नहीं करती है बल्कि सूचना प्राप्ति के स्रोत की तरफ इंगित करती है। यह सूचना स्रोत संग्रह तथा पाठक के मध्य आवश्यक संचार कड़ी है। आज जब पाठ्य-सामग्री के संग्रह का आकार बहुत विस्तृत और जटिल हो गया है तो इसकी उपादेयता और भी बढ़ जाती है। यह शोधकर्ता के साहित्य खोज में समय तथा श्रम की बचत करने में सहायक है। 

अनुक्रमणिका का अर्थ

अनुक्रमणिका का अर्थ - संकेत करना या इंगित करना. अत: यह आँकड़ा अथवा एकत्र किये गये अभिलेखों की ओर इंगित कराने की पद्धति हैं। अनुक्रमणिका पत्रों एवं दस्तावेजों की फाइल बनाने का एक महत्वपूर्ण सहायक है। अनुक्रमणिका नाम, विषय तथा अन्य शीर्षक, जिनके अंतर्गत दस्तावेज फाइल किए जाते हैं, उनके निर्धारण की प्रक्रिया है। यह अभिलेखों के लिए मार्गदर्शिका होती है। कोई विशिष्ट फाइल अस्तित्व में है या नहीं। यदि है तो कहाँ रखी है, यह संदर्भों की जाँच पड़ताल की सुविधा भी प्रदान करती है।

अनुक्रमणिका की परिभाषा

अनुक्रमणिका की कुछ परिभाषाएँ इस प्रकार हैं -

इनसाइक्लोपीडिया आफ लाइब्रेरी एण्ड इन्फार्मेशन साइंस ने अनुक्रमणिका को इस तरह परिभाषित किया है ‘‘अनुक्रमणिका किसी संग्रह में निहित पद अथवा इससे व्युत्पन्न विचारों की वर्गीकृत निर्देशिका है। ये पद अथवा विचार किसी विदित अथवा वर्णित खोजने योग्य क्रम (जैसे वर्णानुक्रम, कालक्रम अथवा संख्या क्रम) में व्यवस्थित प्रविष्टियों द्वारा निरुपित किये जाते हैं।’’

मैक्ग्राहिल एनसाइक्लोपीडिया आफ साइंस एण्ड टेक्नोलाॅजी के अनुसार ‘‘अनुक्रमणिका किसी सम्पूर्ण कृति (जैसे पुस्तक, सेट अथवा जिल्दबद्ध पत्रिका) में उल्लिखित या प्रासंगिक नामों, शब्दों, विषयों, स्थानों, फार्मूलों या अन्य महत्वपूर्ण शब्दों की सही पृष्ठ संख्या के साथ एक विस्तृत आनुवर्णिक सूची होती है।’’

अनुक्रमणिका के उद्देश्य

 अनुक्रमणिका का मुख्य उद्देश्य अपेक्षित फाइलों और कागजों के पता लगाने की सुविधा प्रदान करना है। 
  1. फाइल तथा दस्तावेजों को ढूंढने में आसानी 
  2. संदर्भो की शीघ्र जांच पड़ताल 
  3. अभिलेखों को ढूंढने में समय और श्रम की बचत 
  4. अभिलेख रखने में कुशलता 
  5. अभिलेखों के प्रबंधन और उपयोग की लागत में कमी

अनुक्रमणिका के प्रकार

अनुक्रमणिका के प्रकार - अनुक्रमणिका कितने प्रकार की होती हैं -
  1. स्थायी अनुक्रमणिका-
  2. सजिल्द पुस्तक अनुक्रमणिका-
  3. खुले पृष्ठ की अनुक्रमणिका-
  4. खड़े कार्ड अनुक्रमणिका-
  5. स्ट्रिप अथवा पिट्ट्टयों वाली अनुक्रमणिका-
  6. पहिएनुमा या चक्रीय अनुक्रमणिका-
1. स्थायी अनुक्रमणिका- अलग से अनुक्रमणिका बनाने के स्थान पर इसे संबंधित पुस्तक के साथ ही जिल्द कर दिया जाता है। ऐसी अनुक्रमणिका साधारणत: किसी भी पुस्तक के अन्त में होती है जिसमें विषयवस्तु को वर्णानुसार व्यवस्थित किया जाता है और फिर शीर्षक अथवा उपशीर्षक के लिए उपयुक्त पृष्ठ संख्या दी जाती है।

2. सजिल्द पुस्तक अनुक्रमणिका- इसके अंतर्गत अनुक्रमणिका को ऐसी सजिल्द पुस्तक या रजिस्टर में तैयार किया जाता है जिसका विभाजन वर्णात्मक क्रमानुसार किया जाता है और जिसमें नामों और दस्तावेजों को दर्ज किया जाता है।

3. खुले पृष्ठ की अनुक्रमणिका- यह सजिल्द पुस्तक अनुक्रमणिका का दूसरा रूप है। इस में कागजों का अलग-अलग छेद करके धातु के पेंचों में कस दिया जाता है। पृष्ठ को जोड़ा या निकाला जा सकता है। पृष्ठों को जोड़ने या निकालने के लिए धातु के पेचों को ढीला किया जाता है। विलग पृष्ठ अनुक्रमणिका को जिल्दबद्ध करके ताला लगाने की भी व्यवस्था की जा सकती है जिससे कि बिना उचित अधिकार के कोई उसमें से कोई कागज बाहर न निकाल सके।

4. खड़े कार्ड अनुक्रमणिका- इसके अंतर्गत प्रत्येक विषय, ग्राहक उपभोक्ता अथवा दस्तावेजों को एकपृथक कार्ड प्रदान किया जाता है। जिस पर आवश्यक सूचना लिखी रहती है। कार्ड छोटे आकार का 12.5 से.मी. 7.5 से.मी हो सकता है अथवा आवश्यकतानुसार हो सकता है। उनका वर्गीकरण और व्यवस्था वर्णानुसार, संख्यानुसार, भौगोलिक आधार पर अथवा विषयानुसार हो सकती है।

5. स्ट्रिप अथवा पिट्ट्टयों वाली अनुक्रमणिका- इसमे मोटे गत्तो से बनी तंग पट्ठियों को एक फ्रेम में इस तरह लगाया जाता है कि इन्हें सरलता से निकाला जा सकता है और बदला जा सकता है फ्रेमो को दीवारों पर टॉंगा जा सकता है अथवा मेज पर पुस्तक के रूप में रखा जा सकता है अथवा एक घूमने वाले स्टैन्ड पर फिट किया जा सकता है जिससे उसे चारों ओर घुमाने पर अनुक्रमणिका के किसी भी भाग को देखा जा सके।

6. पहिएनुमा या चक्रीय अनुक्रमणिका- इसमें कार्डों को पहिए की धुरी के चारों ओर फिट कर दिया जाता है एक पहिए में लगभग 5000 कार्ड फिट किए जा सकते हैं किसी भी कार्ड को स्पर्श किए बिना अन्य कार्डों को डाला जा सकता है और निकाला जा सकता है पहिए से बिना कार्ड निकाले नई सूचनाओं को डाला जा सकता हैं।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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