बैंकों के प्रकार

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अनुक्रम

आर्थिक विकास की विभिन्न अवस्थाओं एवं मुद्रा तथा साख की बढ़ती हुई आवश्यकता के कारण बैंकों के विभिन्न स्वरुप विकसित हुए है। कुछ विशिष्ट कार्य करने के उद्देश्य से विशेष प्रकार के बैंकों की स्थापना भी की गई है। कार्य-क्षेत्र एवं प्रकृति के आधार पर बैंकों के विभिन्न प्रकार हैं :-

केन्द्रीय बैंक

प्रत्येक देश में बैंकिंग ढाँचे की सर्वोच्च संस्था के रुप में केन्द्रीय बैंक होता है। भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया केन्द्रीय बैंक के रुप में कार्य कर रहा है। नोट निर्गमन, साख का नियमन एवं नियंत्रण, व्यापारिक बैंकों के कार्यों का नियमन एवं मार्गदर्शन, अर्थव्यवस्था संबंधी विभिन्न आँकड़ों का संकलन एवं प्रकाशन आदि कार्य केन्द्रीय बैंक द्वारा ही किये जाते है।

व्यापारिक बैंक

जो बैंक सामान्य बैंकिंग का कार्य करते है, उन्हें व्यापारिक बैंक कहा जाता है। व्यापारिक बैंक संयुक्त स्कंध बैंक के रुप में होते है। व्यापारिक बैंक धन जमा करने, ऋण देने, चैकों का संग्रह एवं भुगतान करने, विदेशी मुद्रा की व्यवस्था करने, लॉकर्स उपलब्ध करवाने, साख पत्र जारी करने एवं ग्राहक के लिए एजेण्ट का कार्य करने संबंधी अनेक कार्य करते है।

सहकारी बैंक 

सहकारी बैंकों का विकास विशेष रुप से कृषि क्षेत्र की साख की आवश्यकता को पूरा करने के लिए हुआ है। ये बैंक व्यापारिक बैंकों के समान बचतों को जमा करने तथा ऋण सुविधायें प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य करते है। सहकारी बैंक सहकारिता के सिद्धांतों के आधार पर चलते हैं।

विनिमय बैंक

विदेशी मुद्रा का लेन-देन करने वाले बैंको को विनिमय बैंक कहा जाता है। हमारे देश में विदेशी बैंकों को, जो मुख्यत: विदेशी विनिमय का लेन-देन करते है और विदेशी व्यापार के लिए वित्त व्यवस्था करते है, उन्हें विनिमय बैंक कहा जाता है।

बचत बैंक 

पश्चिमी राष्ट्रों में साधारण वर्ग के लोगों की छोटी-छोटी बचतों को प्रोत्साहन देने के लिए अलग से बचत बैंक स्थापित किये गये है। इन बैंकों में छोटी-छोटी रकमें जमा होती है तथा उनको निकालने की सुविधा दी जाती है। बचत बैंक व्यापारिक बैंकों के सहायक के रुप में कार्य करते है। भारत में अलग से बचत बैंक नहीं है। व्यापारिक बैंक ही बचत बैंक का कार्य करते हैं।

विनियोग बैंक 

छोटी-छोटी बचतों को एकत्र करके उन्हें लाभप्रद ढंग से विनियोजित करने के लिए कुछ संस्थायें कार्य करती हैं, उन्हें विनियोग बैंक कहा जाता है। भारत में जीवन बीमा निगम, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इण्डिया, म्यूचुअल फण्ड्स आदि विनियोग बैंक के रुप में कार्य करते हैं। इस प्रकार ये संस्थायें पूँजी चाहने वाली संस्थाओं एवं विनियोग करने की इच्छा रखने वाले लोगों के मध्य मध्यस्थ का कार्य करती हैं।

आयात-निर्यात बैंक

आयात-निर्यात बैंक का प्रमुख उद्देश्य विदेशी व्यापार को प्रोत्साहन प्रदान करना है। निर्यातकों एवं आयातकों को साख-सुविधायें उपलब्ध करवाने के लिए कई देशों में आयात-निर्यात बैंकों की स्थापना की गई है। अमेरिका एवं जापान में इस प्रकार के बैंक कई वर्षों से कार्य कर रहे है। भारत में भी जनवरी 1982 से आयात-निर्यात बैंक कार्य कर रहा है।

विकास बैंक 

विकास बैंक ऐसी विशिष्ट संस्थायें होती है, जो उद्योग, कृषि एवं आधारभूत ढाँचे के विकास के लिए न केवल दीर्घकालीन एवं आसान शतोर्ं पर ऋण उपलब्ध करवाती है, बल्कि प्रबंधकीय, तकनीकी, विपणन आदि कार्यों के लिए सुविधा एवं सलाह भी प्रदान करती है। भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (1948), भारतीय औद्योगिक साख एवं विनियोग निगम (1955), भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (1964), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (1982) आदि विकास बैंकों के उदाहरण है।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 

भारत में ग्रामीण क्षेत्र की साख की पूर्ति के लिए प्रथम क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना 2 अक्टूबर 1975 को की गयी। ये बैंक सामान्य बैंकिंग कारोबार करते हैं। इनकी निर्गमित पूँजी का 50 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा, 15 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा तथा 35 प्रतिशत प्रायोजक बैंक द्वारा अभिदत्त होती है। इन बैंकों का प्रबंध एक निदेशक मण्डल द्वारा किया जाता है। इन बैंकों की जमा राशियों का बीमा ‘जमा राशि बीमा’ तथा ऋण ‘गारन्टी निगम’ द्वारा किया जाता है।

अन्तर्राष्ट्रीय बैंक 

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से क्षेत्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कई बैंक कार्य कर रहे है। 1944 में अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक, जिसे विश्व बैंक भी कहा जाता है, की स्थापना की गई। यह बैंक अपने सदस्य देशों को विदेशी मुद्राओं में दीर्घकालीन ऋण देने, ऋण के समय पर भुगतान देने की गारण्टी देने तथा प्राविधिक सहायता एवं प्रशिक्षण की सुविधाये प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। विश्व बैंक की दो सहायक संस्थायें भी हैं – अन्तर्राष्ट्रीय विकास परिषद तथा अन्तर्राष्ट्रीय वित्त निगम।

स्वीकृति एवं कटौती गृह 

इंग्लैण्ड में विनियोग बिल बाजार को विकसित करने तथा साख में वृद्धि करने के लिए कुछ व्यापारिक बैंकों ने मिलकर स्वीकृति गृहों तथा कटौती गृहों की स्थापना की है, जो बिलों की स्वीकृति एवं कटौती का व्यवसाय करते है। भारत में इस प्रकार की संस्थायें पहले कार्यरत नहीं थी। अप्रैल 1988 में रिजर्व बैंक द्वारा विभिन्न व्यापारिक बैंकों के सहयोग से ‘भारतीय कटौती एवं वित्त गृह लिमिटेड’ की स्थापना की गई है।

डाकघर बचत बैंक 

भारत में तथा इंग्लैंड में डाकघरों में भी छोटी-छोटी बचतें जमा की जाती है। इन खातों में से चैक द्वारा रुपया निकालने की सुविधा प्रदान की जाती हैं। भारत में डाकघर बचतों को एकत्र करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। डाकघर बचत खातें में व्यापारिक बैंकों की तुलना में अधिक ब्याज दिया जाता हैं। इन खातों में से रकम निकालने पर भी कुछ प्रतिबंध नहीं लगाये जाते हैं।

मर्चेन्ट बैंकिंग 

वर्तमान में मर्चेन्ट बैंकिंग भारतीय बैंकों के लिए नया काम नहीं है। इसके अंतर्गत औद्योगिक तथा व्यापारिक सस्थाआ ें को गैर-बैंकिंग सेवाये उपलब्ध कराई जाती है। भारत में स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया पहला बैंक है जिसने इस दिशा में पहल की हैं। इस बैंक का मर्चेन्ट बैंकिंग प्रभार 1972 में शुरु हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना एवं उनका विकास करना था।
वर्तमान में केनरा बैंक, बैंक ऑफ इण्डिया, पंजाब नेशनल बैंक आदि बैंक मर्चेन्ट बैंकिंग का कार्य कर रहे हैं।’

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