नियुक्ति का अर्थ, महत्व एवं प्रक्रिया

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किसी उपक्रम  में रिक्त पदों पर पद के अनुरूप योग्य व्यक्तियों को कार्य पर रखना नियुक्ति कहलाता है। इसमें कर्मचारियों का प्रशिक्षण एवं विकास भी शामिल है।

नियुक्ति का महत्व

  1. उद्द्देयों की प्राप्ति हेतु आवश्यक- सभी संस्था की अपनी कुछ न कुछ उद्देश्य होते हैं। जिसकी पूर्ति हेतु संस्था प्रमुख नीतियों का निर्धारण करते है जिसकी पूर्ति हेतु वहां के कर्मचारी ही कार्य करते हैं अत: समय पर कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है।
  2. रोजगार की प्रााप्ति एवं जीवन स्तर में सुधार - नियुक्ति के अंतर्गत व्यक्ति को नियुक्ति (कर्मचारी या अधिकारी के रूप में) प्राप्त होता है। साथ ही उसे अच्छा वातावरण व अच्छी परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर प्राप्त होता है, जिससे आय में वृद्धि होती है और जीवन-स्तर में सुधार आता है। वही दूसरी ओर प्रशिक्षण और अनुभव/ज्ञान की प्राप्ति होती है, जिससे मानसिक क्षमता भी बढ़ता है।
  3. कार्यो को समय पर पूर्ण करने हेतु - प्रत्यके व्यवसाय एवं संस्था में उद्देश्य के अनुरूप उत्पादन तथा वितरण से सम्बन्धित कार्य होते है, जिसे उच्च प्रबधं को या कछु कमर्चारियों द्वारा पूर्ण करना सम्भव नही होता है अत: इसे पण्ूर् ा करने के लिए कमर्चारियों की नियुक्ति आवश्यक है।
  4. श्रम शक्ति का अधिकतम उपयोग- समय के साथ-साथ जो भी औद्योगिक/मशीनरी प्रगति हुर्इ है फिर भी मानवीय श्रम शक्ति का महत्व कभी भी कम नहीं हो सकता है। मानव मानसिक, योग्यता, बुद्धि, कला-कौशल व ज्ञान का समूचित उपयोग हो और इसके लिए स्टाफिंग महत्वपूर्ण है।
  5. विभिन्न तकनीकी ज्ञान व कला का उपयोग- नियुक्ति के माध्यम से अन्य क्षेत्रों से, विभिन्न प्रकार के ज्ञान व कौशल वाले कर्मचारी किसी संस्था में एकत्र होते हैं। और वे अपने अनुभव योग्यता व कला से संस्था की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते है।
  6. सामाजिक महत्व- स्टाफिंग का सामाजिक दृष्टिकोण से महत्व है, क्योंकि इससे समाज में रहने वाले लोगों को रोजगार मिलता है और रोजगार मिलने से परिवार का और फिर समाज का स्तर सुधरता है। इससे सामाजिक अशांति का खतरा कम हो जाता है।
  7. राष्ट्रीय महत्व-स्टाफिंग का राष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत महत्व है। राष्ट्र या राज्य का यह कर्तव्य है कि वह सम्पूर्ण समाज में सुख, शांति, रोजगार व उपभोग योग्य वस्तुएँ उपलब्ध कराए, जो स्टॉफिंग से पूर्ण होता है।
  8. अन्य महत्व-
    1. प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना होती है।
    2. उपक्रम के आकार मे वृद्धि होती है।
    3. मानवीय विकास होता है।
    4. राष्ट्रीय स्तर में वस्तु की गुणवत्ता में सुधार व लागत में कमी आती है।

नियुक्तिकरण प्रक्रिया

नियुक्तिकरण की प्रक्रिया को मानव शक्ति नियोजन भी कहते हैं इसमें सर्वप्रथम संगठन के लिए कर्मचारियों के प्रकार और संख्या का निर्धारण किया जाता है तत्पश्चात् भर्ती प्रक्रिया जिसमें मानव संशाधनों की खोज की जाती है इसके पश्चात् परीक्षा, साक्षात्कार द्वारा उचित व्यक्ति का चयन और उसकी नियुक्ति दी जाती हेै फिर उस वातावरण से परिचय कराया जाता है जिसमें उन्हें कार्य करना है साथ ही पारिश्रमिक संबंधी नियम, पदोन्नति, स्थानान्तरण आदि की भी जानकारी दी जाती हैं। इस प्रकार नियुक्तिकरण प्रक्रिया निम्न चरण अपनाए जाते हैं:-
  1. मानव-शक्ति नियोजन
  2. कार्य-विश्लेषण
  3. भर्ती
  4. चयन
  5. कार्य पर नियुक्ति
  6. कार्य-परिचय
  7. प्रशिक्षण और विकास
  8. निष्पादन-मूल्यांकन
  9. पारिश्रमिक
  10. पदोन्नति और स्थानान्तरण

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