जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्याएँ

By Bandey No comments
विश्व के अन्य देशो की अपेक्षा भारत में जनसंख्या वृद्धि तेजी से हो रही है। जिससे
अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही है। इन समस्याओ के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण
भी है। जनसंख्या वृद्धि का सबसे बुरा प्रभाव पर्यावरण पर पड रहा है जिससे जीवन संबंधी अनेक कठिनाईयाँ उत्पन्न हो रही है।

जनसंख्या वृद्धि से होने वाली प्रमुख समस्यायें

पर्यावरण प्रदूषण

जनसंख्या वृद्धि के साथ साथ मनुष्य की आवश्यक्ताएं भी बढती गई जिससे मनुष्य
ने प्रकृति का दोहन करना आरंभ कर दिया। जिससे पर्यावरण के घटक जैसे जल, वायु, मृदा
आदि में प्रदूषण बढा। वाहनो के आवागमन ने तथा कल कारखानो से निकलने वाले धुँओ
के कारण जल प्रदूषण होने लगा। पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न स्वरूप तथा कारण है-

वायु प्रदूषण

कल कारखानो तथा मोटर गाडियों से निकलने वाला धुँआ वातावरण में
घुलकर वायु को प्रदूषित करता है। धुँओ में कार्बन डाई ऑक्साइड , कार्बन मोनो ऑक्साइड,
सल्फर डाई ऑक्साइड, सीसा-हाइड्रोजन सल्फाइड तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी
जहरीली गैसे होती है, जो न मनुष्य के स्वास्थ्य को बल्कि पृथ्वी के अन्य जीव जन्तुओं तथा
पेड पौधो को भी प्रभावित करती है। इस प्रदूषण के कारण कई बीमारियाँ जैसे अस्थमा,
मानसिक विक्षिप्तता तथा सांस की कई बीमारियाँ बढ रही है। वहीं पेड पौधो तथा
वनस्पतियाँ की कई दुर्लभ प्रजातियाँ भी लुप्त होती जा रही है। फसलो पर भी बुरा प्रभाव
पड रहा है।

जल प्रदूषण

कल कारखानो से निकलने वाले कूडे कचरे तथा घरो से निकलने वाले कूडे
कचरो को नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता है। जिससे जल प्रदूषित हो जाता है। जल
प्रदूषण से कई तरह की बीमारियाँ जिसमें पेट संबंधी बीमारी प्रमुख है लोग ग्रसित हो जाते
है। लोगो को पीने के लिए भी स्वच्छ पानी नही मिल पाता ।

READ MORE  मौलिक कर्तव्य का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

मृदा प्रदूषण 

जनसंख्या वृद्धि के कारण लोगो द्वारा उपयोग में लाई गई वस्तुओ के
अवशेष, कूडे कचरे मानव मल आदि को गली मुहल्ले या बस्ती के किसी कोने में डाल दिया
जाता है जो सडकर बदबू फेलाते है इससे मृदा प्रदूषण होता है। इसके अलावा फसलेा बढाने
के लिए विभिन्न खादो का उपयोग किया जाता है जिससे जमीन की उर्वरता शक्ति नष्ट
होने लगती है। जिससे फसलो को भी नुकसान पहुँचता है।

ध्वनि प्रदूषण

बडी बडी औद्योगिक इकाईयों तथा सघन बसी बस्तियों में चलने वाली
मशीनो की आवाज से जो प्रदूषण होता है ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। बडे बडे शहरो में
वाहनों की तेज आवाज भी ध्वनि प्रदूषण को बढाता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण बहरापन,
चिडचिडापन तथा दिल संबंधी बीमारियाँ पैदा होती है।

ओजोनपरत को हानि

ओजोन स्वत: उत्पन्न होने वाली गसै है जो पृथ्वी के
चारो ओर सुरक्षा कवच के समान है जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणेा को धरती तक
आने से रोकता है। माना गया है । कि ओजोन परत के बिना पृथ्वी पर जीवन ही संभव नही
है। उससे जीव जंतुओ तथा वनस्पतियों पर बुरा प्रभाव नहीं पडता । क्लोरोफलोरो कार्बन
जैसी रासायनिक गैंसे ओजोन से क्रिया करके उसे नष्ट करने लगी है। जिससे ओजोन परत
में छेद हो रहा है और सूर्य की पराबैंगनी किरणे सीधे पृथ्वी पर पहँुचकर जनजीवन को
प्रभावित करने लगी है।

पारितंत्रीय समस्या

पारितंत्र समूचे वातावरण को कहते है जिसमें सभी जीवधारी आपसी सहयोग से रहते
है। पारितंत्र के अंतर्गत पेड पौधे नदी तालाब पर्वत घाटी खेत तथा जीव जंतु आते है।
जनसंख्या वृद्धि के कारण पारितंत्र संबंधी समसयाएं उत्पन्न हो गई है। पेड पौधो की कटाई
से वातावरण में कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा बढ़ गई है। पेड़ पौधो की कटाई से हरियाली
कम होने के कारण वातावरण गरम रहता है। जिससे वर्षा कम होती है। वनस्पतियाँ नष्ट
हो रही है। कहीं कहीं वर्षा अधिक होती है जिससे बाढ की स्थिति निर्मित हो जाती है इस
प्रकार पारितंत्रीय समस्या आज की सबसे बडी समस्या बनती जा रही है।

READ MORE  व्लादिमीर लेनिन के सिद्धांत

ब्रम्हांडीय तापमान का बढना

कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, मिथेन, क्लोरो फलोरो कार्बन तथा
ओजोन इन पाँचो गैसो को ग्रीन हाउस गैसे कहते है। ये गैसे पृथ्वी की सतह के तापमान
को संतुलित करती है। जिससे कृषि उत्पादन तथा पेड पौधो के विकास में सहायता मिलती
है। वाहनो के अधिक उपयोग, कल कारखानेा से निकलने वाले रासायनिक धुएँ इन गैसो
की मात्रा में वृद्धि करते है। जिससे ब्रम्हांडीय तापमान में वृद्धि हो रही है।

प्राकृतिक संसाधनो का दोहन

जनसंख्या वृद्धि के साथ ही लोगो की आवश्यक्ताओ की पूर्ति के लिए मनुष्यो ने
प्राकृतिक संसाधनेा का दोहन करना आरंभ कर दिया। जिसमें जंगलो का कटना, उर्जा के
लिए कोयले लकडी की खपत, पानी की कमी , कृषि योग्य भूमि की कमी होने लगी।
जिससे अनेक समस्याएं पैदा होने लगी।

स्वास्थ्य संबंधीं समस्याएं

जनसंख्या वृद्धि के कारण लोगो के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर होने लगा। पर्यावरण
प्रदूषण के कारण अनेक गंभीर बीमारियों से लोग ग्रसित होने लगें। पोषण की कमी के
कारण बच्चे कुपोषण, अपंग, तथा कमजोर हड्डियों वाले तथा विभिन्न बीमारियों के शिकार
हो जाते है। रासायनिक व घरेलू कूडे कचरो से उत्पन्न मच्छरो के काटने से डेंगू, मलेरिया
जैसे बीमारियाँ फैलती है। जो जानलेवा साबित होती है।

गरीबी तथा बेकारी

हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में आर्थिक विकास नही हो पा रहा है। कृषि
योग्य भूमि की कमी के कारण देश में खाद्यान्न की कमी हो रही है। जनसंख्या के अनुपात
में रोजगार के अवसर कम है। जिससे बेकारी और गरीबी की समस्या बढ रही है। हमारे देश
में आज भी 52.2 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहे है।

READ MORE  लेखा परीक्षण क्या है?

नैतिक मूल्यो का पतन तथा अपराध में वृद्धि

जनसंख्या वृद्धि से घनी आबादी होने के कारण लोगो में वैमनस्यता तथा द्वैष की
भावना बढ रही है। लोगो का नैतिक पतन हो रहा है। गरीबी तथा रोजगार के अवसर कम
होने के कारण लोगो में अपराध की प्रवृत्ति बढ रही है। चोरी डकैती की घटनाएं आए दिन
होती रहती है।

| Home |

Leave a Reply