भूकंप के प्रभाव और कारण

भूकंप के प्रभाव

भू-पृष्ठ के हिलने या कांपने को भूकंप कहते है। ये हल्के से कम्पन से लेकर भवनों को तेज हिलाकर रख देने वाले होते है। सभी भूकंप समान तीव्रता वाले नहीं होते इनमें से कुछ भूकंप बहुत भयंकर होते है। कुछ हल्के होते है। तथा शेष कुछ का तो पता ही नहीं चल पाता। 

भूकंप के प्रभाव 

भयंकर भूकंप सामान्यतया अत्याधिक विनाशकारी होते है। इस प्रकार के भूकंपों से भू:स्खलन, नदियों के मार्गों का रूक जाना तथा बाढ़ के आने की घटनाये घटित हो जाती है। कभी-कभी भूमि के धसक जाने से झीलें बन जाती है। भूकंपों के आने से दरारें पड़ जाती है। इसके कारण नदियों के मार्ग बदल जाते है, भूकंपो के कारण दरार रेखा के साथ शैल संस्तर ऊपर नीचे अथवा क्षैतिज दिशा में खिसक जाते हैं। जब इनसे आग लग जाती है या ज्वारीय तरंगें पैदा हो जाती है, तब ये भूकंप अत्यधिक विनाशकारी होते है। इन ज्वारीय तरंगों को सुनामी कहते हैं। इन तरंगों से तटीय नगर बह जाते है। भूकंप के आने से मकान व पुल टूट जाते है, जिससे हजारों व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है। यातायात, संचार तथा बिजली के तार की लाइनें टूट जाती हैं। भूकंपों का अंतिम परिणाम हैंजा जैसी महामारियॉं होती है।

भूकंप के प्रभाव विनाशकारी होते हैं। भूकंप की तीव्रता का मापन भूकंप मापी यंत्र द्वारा किया जाता हैं। इसे कम्पन मापक भी कहते हैं। भूकंप की गहनता को एक से दस अंकों में विभक्त किया गया है। 5.5 से अधिक गहनता का भूकंप प्रबल, 6.2 से अधिक विनाशकारी, 7 से अधिक सर्वनाशी और 8.1 से अधिक प्रलयकारी कहलाता है।

भूकंप एक ऐसा प्राकृतिक प्रकोप है, जिसके सामने मनुष्य असहाय बन जाता है। क्षण में मानवकृत रचनाओं की क्षति (मकान, बाँध, कारखाना आदि), अग्निकांड, धरातलीय विरूपण, समुद्री लहरों से जलप्लावन, भू-स्खलन जैसी घटनाएँ जान-माल के लिए संहारक होती हैं रात को आया भूकंप भागने और जान बचाने का मौका भी नहीं देता। 

भूकंप के कारण

भूकंपीय तरंगे उत्पन्न होने का प्रमुख कारण भूगर्भ में दरारे बन जाती हे जिन्हें भ्रंश भी कहते है उनसे ऊर्जा मुक्त होती हे जिससे तरंगे निकलती हे ये तंरगे सभी दिशाओं में फैलकर भूकंप का कारण बनती है। भूकंप का जन्म पृथ्वी के गर्भ में विवर्तनिक घटनाओं के कारण होता है, जिसमें तापजनित तनाव, भू-संतुलन की अव्यवस्था, गर्म गैसों और मैग्मा का हलचल, ज्वालामुखी क्रिया, धरातल का भ्रंश, जलीय दबाव और पृथ्वी तल की प्लेटों की गतिशीलता प्रमुख कारण बताये आते हैं। इसी प्रकार जहाँ धरातलीय असंतुलन है, अर्थात् पर्वत और सपाट मैदान या समुद्र और पहाड़ पास’पास स्थित हैं वहाँ भूकंप की घटनाएँ सर्वांधिक होती हैं। 

जापान अपने इसी भौतिक स्थिति के कारण सर्वाधिक भूकंप झेलता है। पृथ्वी के अन्दर जहाँ भूकंप जन्म लेता है उस बिन्दु को भूकंप उत्पति केन्द्र और पृथ्वी के धरातल पर लम्बवत जिस बिन्दु पर सबसे पहले भूकंप अनुभव किया जाता है उसे अधिकेन्द्र कहा जाता है। अधिकेन्द्र पर सर्वाधिक भूकंपीय प्रभाव होता है और बढ़ती दूरी के साथ यह कम होते लगता है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं। मैंने अपनी पुस्तकों के साथ बहुत समय बिताता हूँ। इससे https://www.scotbuzz.org और ब्लॉग की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

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