भारत की प्रमुख फसलें

By Bandey No comments
अनुक्रम
भारत में लगभग हर प्रकार की फसलें होती है। क्या आप सोच सकते हैं, क्यों? यदि हम कश्मीर
से कन्याकुमारी और गुजरात के पश्चिमी तट से अरुणाचल प्रदेश के चरम उत्तर-पूर्वी भागों को
ध्यान में रखें तो यहाँ सैकड़ों प्रकार की फसलें मिलती है। इन सभी प्रकार की फसलों को हम
चार वर्ग में रखते है। प्रत्येक वर्ग के अंतर्गत मुख्य फसलों की चर्चा की जाएगी –

भारत की प्रमुख फसलें

फसलों के प्रकार प्रमुख फसलें
1. खाद्य फसलें चावल, गेहूं, बाजरा,दलहन 
2. नकदी फसलें  गन्ना, कपास, तिलहन
3. वृक्षारोपण फसलें  चाय, कॉफी, नारियल
4. बागवानी फसलें फल और सब्जियां

खाद्य फसल

चावल 

चावल भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। यह मुख्य रूप से खरीफ या
गर्मी की फसल है। यह देश की कुल खेती क्षेत्रा का लगभग एक तिहाई भाग पर होता
है। भारत का यह भारत की आधी आबादी से ज्यादा लोगों को भोजन प्रदान करता है।
कुल आबादी का ज्यादातर लोग चावल खाने वाले हैं। क्या आप जानते हैं, चावल उत्पादन
के लिए किस-किस तरह की भौगोलिक परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। यदि आप
भारत में चावल उत्पादित क्षेत्रों को देखें तो आपको पता चलेगा कि चावल ही एक ऐसी
फसल है जो विविध परिस्थितियों में उगाई जाती है।

गेहूं  

गेहूं दूसरा सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान है। यह भारत में चावल के बाद रबी या सर्दियों
की फसल है। यह सर्दियों की शुरुआत में बोया जाता है और गर्मियों की शुरुआत में काटा
जाता है। आम तौर पर उत्तर भारत में गेहूं की बुवाई अक्टूबर – नवंबर के महीने में होती
है और कटाई मार्च – अप्रैल के महीने में किया जाता है। यह विशेष रूप से भारत के उत्तरी
और उत्तर – पश्चिमी क्षेत्रों में लोगों का मुख्य भोजन है। चावल के विपरीत, गेहूं ज्यादातर
रबी या सर्दियों की फसल के रूप में उगाया जाता है।

बाजरा 

बाजरा कम अवधि वाला गर्म मौसम का फसल है। ये मोटे अनाज की फसल हैं
और इन्हें भोजन और चारा दोनों के लिए उपयोग किया जाता है। ये खरीफ की फसलें
संसाधन तथा विकास हैं। ये मई – अगस्त में बोया जाता है और अक्टूबर – नवम्बर में काटा जाता है। आज
बाजरा आमतौर पर गरीब लोगों का मुख्य भोजन है। भारत में बाजरा बहुत उगाया जाता
है और विभिन्न भागों में अनेक स्थानीय नामों से जाना जाता है। उनमें से कुछ ज्वार, बाजरा,
रागी, कोरा, कोदों कुटकी, राका, बाउटी, राजगिरा आदि है। भारत में ज्वार, बाजरा और
रागी बड़े क्षेत्रा पर उगाया जाता है पर दुर्भाग्य से इन फसलों के अंतर्गत क्षेत्रों की कमी
बड़ी तेजी से हुई है।

दलहन 

दलहन में अनेक फसलों को रखा जाता है जो ज्यादातर फली हैं। ये भारत के
शाकाहारी लोगों के लिए अमूल्य प्रोटीन प्रदान करते हैं। मांस और मछली खाने वालों की
तुलना में शाकाहारियों को प्रोटीन प्राप्ति के श्रोत कम है। ये पशुओं के लिए चारा और
अनाज का प्रमुख श्रोत है। इसके अतिरिक्त ये फली फसलें वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को
मिट्टी में यौगिकृत करती है। सामान्यतया अन्य फसलों से आवर्तित करके मृदा की उर्वरता
को बनाएं रखा जाता है। भारत में विभिन्न प्रकार के दलहन पाया जाता है। ये चना, तूर
या अरहर, उड़द, मूंग, मसूर, कूल्फी, मटर आदि है। परन्तु इन सबों में चना और तूर या
अरहर ही ज्यादा महत्वपूर्ण है।

चना: चना सभी दालों में सबसे महत्वपूर्ण है। कुल दलहनों के उत्पादन का 37 प्रतिशत
भाग चने से आता है जबकि चना दालों के कुल क्षेत्राफल का 30 प्रतिशत पर चना होता
है। यह रवी की फसल है जो सितंबर से नवंबर के बीच में बोया जाता है और फरवरी
से अप्रैल के बीच काटा जाता है। यह या तो एक एकल फसल के रूप में खेती की जाती
है या गेहूं, जौ, अलसी या सरसों के साथ मिलाकर खेती की जाती है।

नकदी फसलें

नकदी फसलें उन फसलों को कहा जाता है जिसे या
तो शुद्ध या अर्द्ध प्रसंस्कृत रूप में बेचने के लिए उगाया जाता है। इस भाग में कुछ चुने हुए
नगदी फसलों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे जैसे गन्ना, कपास और जूट, दो पेय पदार्थ-चाय
और कॉफी तेल के बीज तेलहन- मूंगफली, सरसों और रेपसीड।

गन्ना

क्या आप अपने दिनचर्या में बिना चीनी के जीवन की कल्पना कर सकते हैं? चीनी
के बिना जीवन के बारे में सोचना असंभव है। क्या आप जानते हैं कि गन्ना बांस परिवार
के अंतर्गत आता है और यह भारत के लिए स्वदेशी है? यह खरीफ फसल है। यह चीनी,
गुड़, और खांडसारी का मुख्य स्रोत है। यह शराब तैयार करने के लिए कच्चे माल भी
प्रदान करता है। खोई, कुचले गन्ने का अवशेष का भी कई उपयोग है। यह कागज बनाने
के लिए प्रयोग किया जाता है। यह पेट्रोलियम उत्पादों के लिए एक कारगर विकल्प है।
इसके अतिरिक्त अन्य रसायनिक उत्पादों का भी विकल्प के रूप में है। इसे चारे के रूप
में भी प्रयोग किया जाता है।

कपास

कपास न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रेशेदार फसल है।
यह न केवल सूती वस्त्रा उद्योग के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराता है, बल्कि इसके बीज
वनस्पति तेल उद्योग में प्रयोग किया जाता है। कपास के बीज भी बेहतर दूध उत्पादन के
लिए दुधारू पशुओं को चारे के रूप में प्रयोग किया जाता है। कपास मूल रूप से खरीफ
फसल है और उष्णकटिबंधीय और उप उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होता है।

तिलहन 

भारत में वाणिज्यिक फसलों के महत्वपूर्ण समूहों में से तिलहन एक है। भारत
तिलहन के क्षेत्र और उत्पादन में विश्व में अग्रणी है। वास्तव में, भारत की तिलहन से निकाले
तेल न केवल हमारे आहार का एक महत्वपूर्ण भाग है बल्कि हाइड्रोजनीकृत तेलों, पेंट, वार्निश,
साबुन, चिकनाई आदि के निर्माण के लिए कच्चे माल के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता
है। तिलहन से तेल निकालने के बाद बचा अवशेष महत्वपूर्ण पशु आहार और खाद के रूप
में इस्तेमाल होता है।

मूंगफली 

यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण तिलहन है। मूंगफली खरीफ और रबी फसल
दोनों के रूप में में उगाया जाता है लेकिन कुल क्षेत्राफल का 90-95 प्रतिशत क्षेत्रा खरीफ
फसल के रूप में है।

वृक्षारोपण फसल

चाय 

भारत चाय बागानों के लिए प्रसिद्ध है। असम और पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग
के चाय बागानों के बारे में सुना होगा। यह कहा जाता है कि भारत में चाय बागान अंग्रेजों
द्वारा 1923 में शुरू किया गया था। उस समय उन लोगों द्वारा असम के पहाड़ी और वन
क्षेत्रों में जंगली चाय पौधों को खोजा गया। चाय पौधों के कोमल अंकुरित पत्तों को सुखाकर
तैयार की जाती है। वर्तमान में, भारत दुनिया में अग्रणी चाय उत्पादक देश है। चीन और
श्रीलंका क्रमश: दूसरे और तीसरे बड़े उत्पादक देश हैं।

कॉफी 

क्या आप जानते हैं, भारत में कॉफी कहाँ से लाया गया? यह इथियोपिया (अबिसनिया
पठार) का मूल निवासी पौधा है। इथियोपिया से यह 11 वीं सदी में अरब लाया गया था।
अरब से बीज बाबा बुदन द्वारा 17 वीं सदी में कर्नाटक के बाबा बुडान पहाड़ियों पर लगाया
गया। लेकिन ब्रिटिश बागान मालिकों ने गहरी रुचि लिया और बड़े कॉफी बगान के रूप
में उत्पादन पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर स्थापित किया।

बागवानी फसलें 

फल 

विश्व में कुल उत्पादन का 10 प्रतिशत उत्पादन भारत में होता हैं। विश्व में आम, केले, चीकू, नीबू, के उत्पादन में भारत एक अग्रणी देश हैं। फलों की बहुत सारी किस्में भारत में उगायी जाती हैं। आम, केला, नारंगिया, कटहल, नाशपाती, बेर, जामुन, खुबानी, रतालू, बादाम, अखरोट, इत्यादि फल शीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्र के हैं जो देश में प्राय: पहाड़ी भागों में उगायें जाते हैं। शुष्क भागों में आंवला, बेर, अनार, अंजीर उगाये जाते हैं।

सब्जियाँ 

विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे अधिक सब्जी उत्पादन करने वाला देश भारत हैं। विश्व में कुल उत्पादन का 15 प्रतिशत उत्पादन भारत में होता हैं। फूल गोभी, उत्पादन में प्रथम, प्याज में दूसरा, एंव पत्ता गोभी में तीसरा स्थान हैं। अन्य सब्जियों में आलू, टमाटर आदि भारत में 50 से अधिक किस्मों की सब्जियां उगायी जाती हैं।

फूलों की खेती 

फलों, सब्जियों एवं फूलों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार- विपणन बहुत लाभदायक हो गया हैं। फूलों के निर्यात से भारत बहतु सी विदेशी मुद्रायें कमा सकता हैं। फूलों में गुलाब , जूही, चमेली, गुलमोहर, गुलदाउदी, इत्यादि फूलों की खेती की जाती हैं। कर्नाटक, राजस्थान, आंध्रपद्रेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र राज्य में फूलों की खेती होती हैं।

मसालें –

भारत में अनेक प्रकार के मसालों का उत्पादन होता हैं। जिनमे काली मिर्च, इलायची, मिर्च हल्दी, अदरक, लौंग इत्यादि। भारतीय मसालों की मांग एंव गुणवत्ता के कारण पूरे विश्व में विख्यात हैं। भारत वर्ष को मसालों का घर कहा जाता हैं।

Leave a Reply