राष्ट्रवाद क्या है?

By Bandey 1 comment
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राष्ट्रवाद (NATION) राष्ट्र का जन्म लेटिन भाषा शब्द नेशों से हुआ है, जो सामूहिक
जन्म अथवा वंश के भाव को व्यक्त करता है, परंतु आधुनिक काल में इसका अर्थ राष्ट्रीयता
(NATIONALITY) शब्द का समरूपी होने पर ‘राष्ट्र’ शब्द किसी राष्ट्रीयता की सामान्य
राजनीतिक चेतना का घोतक है जो, ए. जिम्मर्न के अनुसार ‘किसी सुनिश्चित स्वदेश के साथ
जुड़ी विचित्र तीव्रता, घनिष्ठता तथा सम्मान की भावना का संयुक्त रूप है’ राष्ट्र (NATION)
का अर्थ लोगों के समूह से है – जिनकी एक जाति, एक तिहास, एक संस्कृति, एक भाषा और
एक निश्चित भू-भाग हो, राष्ट्रवाद उस विश्वास को कहते हैं, जिसके द्वारा प्रत्येक राष्ट्र को
यह अधिकार है कि, जिस भू-भाग पर वे सदियों से रहते हैं, उस पर वे स्वतंत्र रूप से शासन
कर सकें। राष्ट्रीयता मनोवैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक घटकों के उस समूह को दिया गया नाम
है, जो राष्ट्र को एकीकृत करने वाले सुसंगत सिद्धांत प्रस्तुत करते हैं। साधारण भाषा में
राष्ट्रवाद को मातृभूमि से प्रेम या देश भक्ति का समरूपी माना गया है। यह देश के लिए मर
मिटने की भावना का नाम है। ई. बार्कर ने राष्ट्रवाद को कुछ इस तरह परिभाषित किया है
– ‘राष्ट्र किसी प्रदेश में रहने वाले लोगों का समूह है, जो विभिन्न नस्लों से संबंधित होने पर
भी सांझे इतिहास की धारा में अर्जित विचारों व भावनाओं में समान भागीदारी रखते हैं। सांझे
विचारों और भावनाओं के अतिरिक्त, सामान्य इच्छा भी रखते हैं और उसके अनुरूप उस इच्छा
की अभिव्यक्ति के लिए अपने अलग राष्ट्र का निर्माण करते हैं अथवा उसके निर्माण का प्रयास
करते हैं।’

राष्ट्रवाद के अनिवार्य तत्व 

सामान्य जाति का रक्त संबंध

सामान्य जाति, नस्ल या रक्त संबंध के घटक से लोग सरलतापूर्वक आपस में बंध
जाते हैं। 1930 के दशक में हिटलर ने जर्मन राष्ट्र को अपनी रगों में ‘आर्यो का रक्त’ रखने
वाले नोर्दिकों के राज्य के रूप में महिमामंण्डित करने हेतु इस तत्व का आव्हान किया।
यहूदियों एवं अन्य नस्लों को ‘घटिया रक्त वाले’ लोग कहकर, उन्हें तुच्छ समझकर, उनकी
निन्दा करने तथा जर्मन जाति को विशुद्ध ‘आर्य रक्त’ वाले लोग बतलाकर उनका गौरवीकरण
करने के संबंध में, जर्मन नाजीवाद द्वारा अन्य नस्लों को तबाह करने की कार्यवाहियों की,
संपूर्ण विश्व में निंदा की गयी।

सामान्य धर्म

समान धर्म ने भी लोगों को एकबद्ध करने में अहम भूमिका निभाई है। आज भी, मुख्य
रूप में, विश्व के मुस्लिम राष्ट्रों में समान धर्म एक प्रबल शक्ति है। यहूदी अपने धर्म की शक्ति
से ही एकजुट हैं। लेकिन अब अधिकांश राष्ट्र धर्मनिर्पेक्षता के सिद्धांत पर आधारित हैं, अत:
इस तत्व का महत्व पहले से कम हो गया है। भारत इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।
इतिहास साक्षी है कि, धर्म ने एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में नकारात्मक एवं विनाशकारी
भूमिका निभाई है। अत: हमें धार्मिक सहिष्णुता का आभारी होना चाहिए कि, आधुनिक युग में
धर्म राष्ट्रीयता के निर्धारण में अनिवार्य तत्व नहीं रहा है।

सामान्य भाषा

भाषा लोगों के बीच आपसी संपर्क का माध्यम है। किसी राष्ट्र के लोग अपने विचारों
व संस्कृति को सांझे साहित्य, देशभक्ति के गानों के रूप में अभिव्यक्त करते हैं। भाषा का
प्रत्येक शब्द उन संबंधों का घोतक है, जो भावनाओं का स्पर्श करते हैं तथा विचारों को प्रेरित
करते हैं। विश्व के अधिकांश राष्ट्र भाषा के आधार पर गठित है। प्रत्येक राष्ट्र अपनी भाषा पर
गर्व करता है। फ्रांस और इग्लैण्ड की भाषा उनकी राष्ट्रीय एकजुटता का सबसे अच्छा
उदाहरण है।

सामान्य इतिहास तथा संस्कृति

समान मनोवैज्ञानिक चिन्तन शैली, साथ-साथ सोचने, काम करने, राष्ट्र पर आए कष्ट
को एक साथ सहने एवं समृद्धि को एक साथ बांटने के तथ्य से भी प्रभावित होती है। राष्ट्र
के लिए बलिदान देने वालों के लिए स्मारक बनाने में गर्व का अनुभव करते हैं, अपने इतिहास
की परंपराओं को अमर बनाने के लिए वे उत्सवों और त्यौहारों का आयोजन करते हैं।
उदाहरण के लिए हिन्दु दीवाली, होली साथ मनाकर एवं ईसाई क्रिसमस मनाकर अपने एक
होने का एहसास महसूस करते हैं।

समान राजनैतिक आकांक्षाएं

जब किसी राष्ट्र के लोग विदेशी नियंत्रण में रहते हैं तो वे सब एकजुट, उसके विरूद्ध
संघर्ष कर उससे मुक्ति चाहते हैं और एक स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना करते हैं। उन्नीसवीं सदी
के शुरू में नेपोलियन ने कई राष्ट्रों को अपने अधीन कर लिया, इसने इन राष्ट्रों में तीव्र
जनविरोध को जन्म दिया। जर्मनी, आस्ट्रिया, हंगरी, इटली, पोलैण्ड, रूस और स्पेन में
राजनेताओं, कवियों तथा अन्य वक्ताओं ने राष्ट्रवाद का आव्हान किया। उन्नीसवीं सदी में हुई
यूरोप की क्रांतियों का कारण राष्ट्रीय एकता तथा स्वतंत्रता था। बाल्कन प्रदेशों ने इसी
आधार पर तुर्कों से स्वतंत्रता हासिल की । बेल्जियम, हालैण्ड से अलग हुआ, इटली तथा
जर्मनी राष्ट्र के रूप में एकीकृत हुए। वींसवीं सदी के दो विश्व युद्धों ने यूरोप के मानचित्र को
पुन: स्पष्ट राष्ट्रीय आकांक्षाओं के अनुसर रेखांकित करने का प्रयास किया। द्वितीय विश्वयुद्ध
के बाद उपनिवेशों में स्वाधीनता आंदोलन तीव्र हुए और एक के बाद एक नए राष्ट्रों का जन्म
हुआ।

भौगोलिक निकटता

राष्ट्र कहलाने के लिए भौगोलिक निकटता होना आवश्यक है। एक राष्ट्र यदि एक
दूसरे से दूर टुकड़ों में बंटा हो तो राष्ट्रीय एकता की प्रक्रिया में बाधा पड़ती है। 1971 में
पाकिस्तान के विखंण्डन का यह भी एक कारण था। दोनों भाग एक दूसरे से बहुत दूर थे तथा
इसी कारण बंगाली राष्ट्रवाद के जागृत होने के कारण, पूर्वी पाकिस्तान-बंगलादेश बन गया।
यूरोप में भी ऐसे अनेकों उदाहरण दिए जा सकते हैं।

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Poshan

Oct 10, 2019, 2:06 am Reply

I don’t understand..
Koi jyada Rashtravaad me parta hai to use Bhakt yaa Kuch aur kah dete hai koi unhe kon smjhayega.

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