पहचान की चोरी क्या है कैसे होती है?

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अपराधिक उद्देश्यों के लिए व्यक्तिगत जानकारी का अनाधिकृत संग्रह व उसका उपयोग करना ही पहचान चोरी है। जैसे आपका नाम, जन्मतिथि, पता, क्रेडिट कार्ड, सामाजिक आवास और रोजगार संबंधी सूचनाएं। आप चाहे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करते हो, नेट चेटिंग से अपने को पूरी तरह दूर रखते हो, तो इसका मतलब यह नहीं की साइबर अपराध से आप महफूज हैं। हर उस व्यक्ति का जीवन और जायदाद दोनेा ही दाव पर होता है, जो सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करता हो या न करता हो। 

पहचान की चोरी कैसे होती है?

पहचान चोरी की शुरूआत होती है व्यक्तिगत जानकारी से-जैसे आपका नाम, सामाजिक सुरक्षा संस्था, क्रेडिट कार्ड सुरक्षा, बैंक अकाउन्ट, या अन्य वित्तीय खाते की जानकारी। पहचान चोर व्यक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं।
  1. डम्प्सटर डिविंग- इसमें रद्दी की छानबीन की जाती है, जिसमें किसी भी प्रकार के बिल या अन्य पेपर्स में व्यक्तिगत जानकारी उपलब्ध हो सकती है। 
  2. स्किमिंग - जब आप अपना के्रडिट कार्ड, डेबिड कार्ड उपयोग कर रहे होते हैं तो के्रडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, का नम्बर चोरी कर लेते हैं।
  3. फिशिंग - आपकी व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने के लिए वे आपको संदेश के रूप में  Spam या  Pop-up Message भेजते हैं।  
  4. चेंज योर एड्रेस - आपके Billing Statement के  Address form में उसका पता बदल देते हैं। 
  5. ओल्ड फेशन स्टीलिंग - वे आपका जेब पर्स क्रेडिट कार्ड, बैंक स्टेटमेन्ट, पूर्व स्वीकृत ऋण, आदि रिकार्ड चुराकर उसका दुरूपयोग करते हैं। 
  6. प्रीटेक्सिटिंग - गलत या झूठे बहाने बनाकर टेलीफोन कंपनियों या अन्य स्त्रोतेां के द्वारा आपसे आपकी व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। 

चोरी की गई पहचान का उपयोग कैसे किया जाता है?

  1. क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी - वे आपके नाम से नया क्रेडिट कार्ड एकाउन्ट खोलते हैं व उसका दुरूपयोग करके बिल का भुगतान नहीं करते हैं और यह बिल आपके क्रेडिट कार्ड में आता है। वे आपके नाम के क्रेडिट कार्ड में बिलिंग पता परिवर्तित कर देते हैं जिसमें कि लम्बे समय तक बिल प्राप्त ही नही होता है, क्योंकि बिल किसी अन्य गलत पते पर भेजा जा रहा होता है, और वह उसका लगातार उपयोग करते रहते हैं। 
  2. फोन/उपयोगिताओं की धोखाधड़ी- वे आपके नाम से नया फोन कनेक्शन लेकर उसका उपयोग करते हैं और बिल आपके पहले से ही मौजूद कनेक्शन में आता है। -आपके नाम से अन्य उपयोगी चीजों जैसे बिजली, पानी, केबल टी.वी. आदि का उपयोग कर सकते हैं। 
  3. बैंक/वित्तीय धोखाधड़ी - वे आपके नाम और आपके खाता संख्या का उपयोग करके जाली चैक बना सकते हैं। -आपके ए. टी. एम. कार्ड का उपयोग करके एकाउन्ट से रूपये निकाल सकते हैं।
  4. सरकारी दस्तावेज धोखाधड़ी - आपके नाम का उपयोग करके लेकिन स्वयं की फोटो लगाकर ड्राइविंग लाईसेन्स, सरकारी आईडी कार्ड जारी करा सकते हैं।  -सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए आपका नाम व सामाजिक सुरक्षा संख्या प्रयोग कर सकते हैं। -पुलिस प्रकरण में गिरफ्तार होते समय अपनी पहचान के रूप में आपका नाम पता व अन्य जानकारियां दे सकते हैं ताकि कोर्ट केस में या वारंट जारी होते समय आपके नाम से कार्यवाही हो सकती हैं 
  5. अन्य धोखाधड़ी - आपकी सामाजिक सुरक्षा संख्या का उपयोग करके नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। - आपके नाम से चिकित्सा सुविधाएं या किराए से घर प्राप्त कर सकते हैं।

आप कैसे पता कर सकते हैं कि आपकी पहचान चोरी हो गई है ।

अपनी पहचान चोरी होने का पता तब चलता है जब:-
  1. बिलों का संग्रह करने वाली एजेंसियां आपसे आपके ओवर डयू खर्च के बारे में जानकारी देती है, जो कि कभी आपने खर्च ही नहीं किया है ।
  2. जब आप कार या गृह लोन के लिये आवेदन करें और आपके सामने समस्या आ जाए कि आपके उपर पहले से ही यह लोन है । 
  3. अत: हम कह सकतें है कि सूचना / पहचान चोरी का पता तभी चलता है जब आपके सामने ऐसे तथ्य या ऐसी परिस्थितियां आ जाएं जो आपने कभी उपयोग ही नहीं की हैं, या जिनकी जानकारी ही आपको नहीं है ।

आप क्या करें जब आपकी पहचान चोरी की गई हो ?

पुलिस रिपोर्ट फाइल करना, क्रेडिट कार्ड की जांच रिपार्ट प्रस्तुत करना, लेनदारों व देनदारों की सूचना देना, अनाधिकृत लेनदेन की सूचना देना इत्यादि कुछ महत्वपूर्ण कदम हैं जो आपको तुरन्त अपनी पहचान को बहाल करने व कायम रखने हेतु उठाने पड़ेंगे ।

पहचान चोरी का प्रभाव कब तक रहता है ?

यह अनुमान लगाना बहुत ही कठिन होगा कि पहचान चोरी से आप कितने समय तक प्रभावित रह सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी पहचान किस तरह से चोरी की गई है । क्या चोर ने सीधे आपकी पहचान चोरी की है, क्या उसने पहचान चोरी करके किसी अन्य को बेचा है, क्या चोर पकड़ा गया है, इत्यादि प्रश्नों के उत्तर मिलने पर ही उसका समाधान संभव हो सकता है ।

पहचान चोरी से बचने के उपाय

  1. सशस्त्र ज्ञान के साथ ही अपनी सुरक्षा कैसे की जाए व क्या कार्यवाही की जाए तो आप पहचान चोरों के लिए काफी कठिनाई उत्पन्न कर सकते है । 
  2. पहचान चोरी के प्रति जानकारियां एक दूसरे से साझा करके आप लोगों को इसके प्रति जागरूक कर सकते हैं । 
  3. अपने क्रेडिट कार्ड , बैंक अकांउट, इत्यादि की मासिक जांच करते रहना चाहिए । 
  4. कम्प्यूटर में जमा रिपोर्ट व डाटाबेस को सुरक्षित रखें । 
  5. जिस भी संचार चैनल का उपयोग करें, पहले यह जान लें कि वह सुरक्षित है या नहीं । 
  6. अपने पासवर्ड में कोई भी ऐसी चीज शामिल न करें जो कि सार्वजनिक हो, जैसे नाम, फोन नम्बर , पता , जन्मतिथि इत्यादि ।
  7. अपने क्रेडिट कार्ड, बैंक एकाउंट और फोन एकाउंट में पासवर्ड बनाते समय कभी भी आसानी से उपलब्ध होने वाली जानकारियां पासवर्ड में शामिल न करें जैसे जन्मतिथि, फोन नम्बर, माता का मिडिल नाम, इत्यादि। 
  8. अपनी व्यक्गित जानकारी कभी भी फोन पर, ई-मेल द्वारा या इन्टरनेट पर किसी भी तरह से जब तक न दें जब तक आप सामने वाले पर पूरी तरह से विश्वास न कर लें । 
  9. अपने कम्प्यूटर को वायरस से बचाने हेतु अच्छे एंटीवायरस का प्रयोग करें व समय पर उसको अपडेट करते रहें । 
  10. अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए ई-मेल कभी भी ओपन न करें । इस तरह की मेल या फाइल ओपन करने पर कम्प्यूटर को, डाटा को नुकसान पहुंचा सकते हैं, उनमें वायरस ,स्पाइवेयर हो सकता है जो कि आपका पासवर्ड हैक कर सकते हैं और वह सारी सूचनाएं भी जो कि आप कीबोर्ड पर टाईप करते है । 
  11. यदि आपका कम्प्यूटर नेटवर्क पर है तो हमेशा फायरवाल प्रोग्राम का उपयोग करें और उसे हमेशा इन्टरनेट से जुड़ा रहने दें यह आपके कम्प्यूटर को, अन्य व्यक्तियों द्वारा जो कि नेटवर्क के माध्यम से उपयोग कर सकते हैं सुरक्षित रखता है । 
  12. यदि किसी कारणवश किसी संस्था को अपनी व्यक्गित या वित्तीय जानकारी बेवसाइट के माध्यम से देना जरूरी है तो बेवपेज पर (यू.आर.एल) लॉक आइकान अवश्य देखें या वेबसाइट के एड्रेस में ”एच.टी.टी.एस. “ देखें “एस” सुरक्षित बेवसाईट का संकेत है । पर यह भी कुछ हद तक विश्वनीय नहीं है क्योंकि कई बेवसाईट इसका गलत उपयोग भी कर रहीं है ।
  13. वेबसाइट की प्राइवेसी पालिसी का अध्ययन अवश्य कर लें । अपनी वित्तीय जानकारियां , बैंक स्टेटमेंट , टेलीफोन, बिजली के बिल, लोन के कागज इत्यादि कभी भी रद्दी में न फेंकें। इस तरह आप इस गंभीर अपराध से खुद सुरक्षित रहकर, दूसरों को भी जागरूक बनाकर पहचान चोरी से मुकाबला कर सकते है।

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