प्राकृतिक आपदा किसे कहते हैं?

मानव पर दुष्प्रभाव डालने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों को प्राकृतिक आपदाएं है। 

प्राकृतिक आपदा तथा संकट में अन्तर 

प्राकृतिक आपदाओं तथा संकटों में बहुत कम अन्तर है। इनका एक-दूसरे के साथ गहरा सम्बन्ध है । फिर भी इनमें अन्तर स्पष्ट करना अनिवार्य है। प्राकृतिक संकट, पर्यावरण में हालात के वे तत्व है जिनसे जन-धन को नुकसान पहुँचाने की सम्भावना होती है। जबकि आपदाएं बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि तथा सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था ठप्प हो जाती है।

प्राकृतिक आपदाओं का वर्गीकरण

  1. भूकम्प
  2. भूस्खलन
  3. सूखा
  4. बाढ़
  5. चक्रवात

1. भूकम्प -

भूकम्प साधारण शब्दों में भूकम्प का अर्थ धरती का कंपन हैं। भूगर्भिक शक्तियों के कारण पृथ्वी के भूपटल में अचानक कम्पन पैदा हो जाती हैं तो उसे भूकम्प कहते हैं। भूकम्प स्थल एवं जल दोनो भागों में आते हैं। अब भूकम्प लेखन यंत्र (सिस्मोग्राफ) के द्वारा भूकम्प की गति का पता चलता हैं।

2. भूस्खलन -

पर्वतीय ढ़ालों या नदी तट पर शिलाओं, मिट्टी या मलबे का अचानक खिसककर नीचे आ जाना भू-स्खलन हैं। इसी प्रकार पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े बड़े बर्फ के टूकड़े सरककर नीचे गिरने लगते है। पर्वतीय क्षेत्रों में  भू-स्खलन लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे पर्वतो के जीवन पर बूरे प्रभाव दिखाई देने लगे है।

3. सूखा -

भारत में प्रति वर्ष किसी न किसी क्षेत्र में सूखा या अनावृष्टि पड़ता रहता हैं। जिस प्रकार जुलाई 2009 मानसून की अल्पदृष्टि के कारण बहुत बड़े भाग में सूखा पड़ गया हैं। धान की फसलें सूख गई जिन्हें मवेशियों को चरा दिये गया। अब हमारे पशु को क्या खिलायें और लोग भोजन की तलाष में रोजगार पाने दूर दूर जा रहे हैं। 

4. बाढ़ -

मानसून की वर्षा के अति हो जाने से नदी बेसिन में जल का स्तर ऊपर फैल जाना बाढ़ हैं। दुर्ग जिले में शिवनाथ नदी की सहायक नदी तांदुला नदी में बाढ़ आ जाने से बगमरा ग्राम गुण्डरदेही में आकर बस गया। है तब भारत की बड़ी नदियों का आलम अपने विकराल रूप धारण कर “ाोक एंव विनाश के कारण बनती हैं। भारत में 2.42 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ की संभावना वाला क्षेत्र बतलाया गया हैं। इसमें से आधे से चौथाई क्षेत्र में प्रति वर्ष बाढ़ आया करती हैं। गंगा तथा ब्रम्हपुत्र नदी तंत्र मिलकर भारत की लगभग 60 प्रतिशत बाढ़ के लिये उत्तरदायी माने जाते हैं। 

5. चक्रवात -

चक्रवात अत्यंत निम्नवायुदाब का लगभग वृत्ताकार केंद्र हैं। जिसमें चक्कर दार पवन प्रचंड वेग से चलती हैं तथा मूसलाधार वर्षा करती हैं। एक अनुमान के अनुसार एक पूर्ण विकसित चक्रवात मात्र एक घंटे में 3 अरब 50 करोड़ टन कोष्ण आर्द्र वायु को निम्न अक्षांशों में स्थानान्तरित कर देता हैं। 

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